पेपर 2 · विज्ञान · कक्षा 7

पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूर्य

75 प्रश्न · 4 अध्याय टेस्ट

इस अध्याय के बारे में

पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूर्य कक्षा 7 जिज्ञासा का बारहवाँ अध्याय है। तमिल नाडु के कन्याकुमारी में रहने वाली 12 वर्षीय रश्मिका — जो प्रात:काल लंबी और अपराह्न में छोटी नारियल-छाया देखकर सोच में पड़ जाती है कि क्या सूर्य गतिमान है या पृथ्वी — के माध्यम से अध्याय आकाश की दृष्ट गति का उत्तर देता है। यह इन मूल विचारों को क्रमशः बनाता है — पृथ्वी का घूर्णन (rotation), जो अपने अक्ष पर एक चक्र है, अक्ष भौगोलिक उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव से गुजरता है तथा उत्तरी ध्रुव के ऊपर से देखने पर पश्चिम से पूर्व की ओर वामावर्त दिशा में लगभग 24 घंटे में पूरा होता है; क्रियाकलाप 12.1 का चक्रीय हिंडोला तथा क्रियाकलाप 12.2 का ग्लोब-टॉर्च जिनसे यह समझ बनती है कि सूर्य पूर्व में उदित और पश्चिम में अस्त क्यों प्रतीत होता है तथा भारत के पूर्वी भाग में सूर्योदय सबसे पहले क्यों होता है; पाँचवीं शताब्दी में आर्यभट का आर्यभटीय श्लोक तथा एक पूर्ण घूर्णन के लिए 23 घंटे 56 मिनट 4.1 सेकंड का मान; लीआँ फोको का 1851 का पेंडुलम तथा भारत के नई संसद-भवन के संविधान सदन में लटका 22 मीटर का फोको पेंडुलम; पृथ्वी का सूर्य के परित: परिक्रमण (revolution) जो लगभग एक वर्ष (365 दिन 6 घंटे) में लगभग वृत्ताकार कक्षा (orbit) पर पूरा होता है; अलग-अलग महीनों में सूर्यास्त के समय भिन्न-भिन्न तारे क्यों उदित होते हैं (चित्र 12.8) तथा तापी घाटी के भील व पवारा समुदायों द्वारा मानसून-संकेत के रूप में तारा-पैटर्न का उपयोग; पृथ्वी के घूर्णन-अक्ष का झुकाव तथा गोलाकार आकृति मिलकर ऋतुओं का कारण बनते हैं — ग्रीष्म तब जब गोलार्ध सूर्य की ओर झुका हो, शीत तब जब वह सूर्य से दूर झुका हो — और कक्षा की अंडाकार दूरी इसका कारण नहीं है (पृथ्वी जनवरी में सूर्य के सबसे निकट होती है); उत्तर-अयनांत (~21 जून, उत्तरी गोलार्ध का सबसे लंबा दिन), दक्षिण-अयनांत (~22 दिसंबर, सबसे छोटा दिन), वसंत एवं हेमंत विषुव (~21 मार्च तथा 23 सितंबर, 12-12 घंटे दिन-रात), तथा उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुव पर छह माह का सतत प्रकाश व छह माह का अंधकार; विषुवत रेखा पर 12 घंटे का स्थिर दिन-रात तथा भारत के दक्षिणी राज्यों में ऋतु-प्रभाव का कम होना; सूर्य-ग्रहण — पृथ्वी से देखने पर सूर्य तथा चंद्रमा का आभासी आमाप समान होना, चंद्रमा की छाया छोटे क्षेत्र पर पड़ने से पूर्ण सूर्य-ग्रहण तथा आस-पास के क्षेत्रों में आंशिक सूर्य-ग्रहण, सूर्य को सीधे या धूप-चश्मा/द्विनेत्री दूरबीन/दूरदर्शक से देखने पर पूर्ण प्रतिबंध, नभोमंडल में सुरक्षित सार्वजनिक दर्शन; चंद्र-ग्रहण — पृथ्वी का सूर्य व चंद्रमा के बीच आ जाना, पूर्ण चंद्र-ग्रहण में चंद्रमा का गहरे लाल रंग में दिखना, आंशिक चंद्र-ग्रहण तब जब चंद्रमा का केवल कुछ भाग पृथ्वी की छाया में हो, तथा चंद्र-ग्रहण को नंगी आँख से सुरक्षित देखा जा सकना; संस्कृत शब्द 'ग्रहण', सूर्य सिद्धांत ग्रंथ, 1899 में स्थापित दक्षिण भारत के पालनी पर्वत-शृंखला का कोडाईकनाल सौर वेधशाला तथा बेंगलुरु का भारतीय खगोलिकी संस्थान (IIA); और आधुनिक भारतीय खगोलिकी के जनक एम. के. वेणु बप्पू। CTET पेपर 2 विज्ञान इस अध्याय की परीक्षा झुकाव-बनाम-दूरी अभिकथन-तर्क, अयनांत-विषुव क्रम, ग्रहण-सुरक्षा, पूर्ण-बनाम-आंशिक ज्यामिति, गुजरात-झारखंड सूर्योदय तर्क तथा भारतीय-संदर्भ (आर्यभट, फोको पेंडुलम, कोडाईकनाल, वेणु बप्पू) प्रश्नों पर लेता है। नीचे दिए चार टेस्ट — अभ्यास 15, क्विज़ 15, कठिन 15, निपुणता 30 — इन विचारों को परीक्षा-स्तर पर जाँचते हैं।

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