24 विषय · P1 + P2 · CTET नोट्स

बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र

बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र (CDP) CTET का सबसे महत्वपूर्ण खंड है — पेपर 1 में 30 प्रश्न और पेपर 2 में 30 प्रश्न, एक ही साझा पाठ्यक्रम से। ये प्रश्न इस पर केंद्रित हैं कि बच्चे कैसे विकसित होते हैं, सोचते हैं, सीखते हैं और महसूस करते हैं — और शिक्षक को इसके अनुरूप क्या करना चाहिए। पियाजे की अवस्थाओं से लेकर समावेशी कक्षाओं तक, रचनात्मक आकलन से लेकर बुद्धि एवं सृजनात्मकता के अंतर तक — सब इसी खंड में आता है। ये 24 विषय-नोट्स NCTE पाठ्यक्रम के क्रम में हैं। प्रत्येक नोट मूल अवधारणा से आरंभ होता है, NCERT एवं IGNOU स्रोतों पर आधारित है, और अंत में पाँच विगत-वर्षीय CTET प्रश्न देता है ताकि आप देख सकें कि विषय वास्तव में कैसे पूछा जाता है।

24विषय-नोट्स
P1 + P2साझा पाठ्यक्रम
30 + 30प्रत्येक पेपर में CDP प्रश्न
5 PYQsप्रत्येक नोट के अंत में

खंड क — बाल विकास

बच्चे शारीरिक, संज्ञानात्मक, सामाजिक एवं नैतिक रूप से कैसे विकसित होते हैं — और इसे समझाने वाले प्रमुख सिद्धांतकार। CDP के अधिकांश अंक इसी खंड से आते हैं।

CDP-01

विकास की अवधारणा एवं अधिगम से उसका संबंध

वृद्धि मात्रात्मक है; विकास गुणात्मक एवं जीवनपर्यंत। पियाजे: विकास अधिगम से पहले; वायगोत्स्की: अधिगम विकास का नेतृत्व करता है (IGNOU BES-121)।

CDP-02

बाल विकास के सिद्धांत

विकास के सात सिद्धांत — सततता, क्रमबद्ध अनुक्रम, सिर-से-पाँव दिशा, समग्रता, वैयक्तिक भिन्नताएँ, संवेदी काल, संचयन (NIOS)।

CDP-03

वंशानुक्रम एवं वातावरण का प्रभाव

वंशानुक्रम सीमा तय करता है; वातावरण स्थान। ब्रॉनफेनब्रेनर की पाँच पारिस्थितिक प्रणालियाँ (माइक्रो से क्रोनो तक) यह समझाती हैं (IGNOU BES-121)।

CDP-04

समाजीकरण — बच्चों का सामाजिक संसार

प्राथमिक समाजीकरण परिवार में (0–6) होता है; बाद में विद्यालय, साथी और मीडिया जुड़ते हैं। किशोरावस्था में साथियों का प्रभाव तेज़ी से बढ़ता है (NIOS, IGNOU)।

CDP-05

पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत

चार अवस्थाएँ — संवेदी-गामक, पूर्व-संक्रियात्मक, मूर्त संक्रियात्मक, औपचारिक संक्रियात्मक। आत्मसातीकरण, समायोजन एवं साम्यीकरण से स्कीमा विकसित होती हैं (IGNOU BES-121 ब्लॉक 2)।

CDP-06

कोह्लबर्ग का नैतिक विकास सिद्धांत

हाइंज़ की दुविधा से तीन स्तर — पूर्व-पारंपरिक, पारंपरिक, उत्तर-पारंपरिक — और छह अवस्थाओं में नैतिक तर्क का वर्गीकरण (IGNOU BES-121 ब्लॉक 2)।

CDP-07

वायगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत

समीपस्थ विकास का क्षेत्र (ZPD), अधिक ज्ञानी (MKO) से पाड़-निर्माण, और भाषा एक चिंतन-उपकरण के रूप में (IGNOU BES-121 ब्लॉक 2, BES-123 ब्लॉक 1)।

CDP-08

बाल-केंद्रित एवं प्रगतिशील शिक्षा

रूसो, फ्रोबेल (किंडरगार्टन), डीवी ('करके सीखना'), मॉन्टेसरी — तथा भारत में टैगोर और गांधी। NCF 2005 बाल-केन्द्रित शिक्षाशास्त्र को नीति बनाता है।

CDP-09

बुद्धि — आलोचनात्मक दृष्टिकोण एवं बहु-बुद्धि

बिने का मानसिक आयु, स्पीयरमैन का g — और गार्डनर की आठ बुद्धियाँ, स्टर्नबर्ग का त्रि-मूल सिद्धांत, गोलमैन का EQ। एकल-संख्या IQ की समीक्षा।

CDP-10

भाषा एवं चिंतन

विचार पहले (पियाजे) या भाषा (वायगोत्स्की, व्होर्फ-सैपिर)? चॉम्स्की का LAD। NCF 2005 का मातृभाषा-माध्यम का सबल पक्ष।

CDP-11

लिंग एक सामाजिक रचना के रूप में

लिंग जैविक है; जेंडर सामाजिक रचना। परिवार, विद्यालय और मीडिया रूढ़ियाँ संप्रेषित करते हैं — शिक्षक की अपेक्षाएँ स्वतः-पूर्ण भविष्यवाणी बन जाती हैं (NCF 2005)।

CDP-12

वैयक्तिक भिन्नताएँ एवं विविधता

वंशानुक्रम, भाषा, जाति, धर्म, क्षेत्र, क्षमता — हर भारतीय कक्षा में भिन्नता के स्रोत। विभेदीकृत शिक्षण इसका उत्तर है (NCF 2005)।

CDP-13

आकलन — CCE, SBA एवं रचनात्मक बनाम योगात्मक

रचनात्मक आकलन अधिगम 'के लिए' है, योगात्मक 'का' (ब्लैक एवं विलियम)। CCE — सतत एवं समग्र, शैक्षिक तथा सह-शैक्षिक (NCF 2005, CBSE 2009)।

CDP-14

आकलन एवं समीक्षात्मक चिंतन हेतु प्रश्न-निर्माण

ब्लूम के छह स्तर — स्मरण से सृजन तक। निम्न-क्रम बनाम उच्च-क्रम चिंतन। अभिसारी बनाम अपसारी प्रश्न। तीन सेकंड की प्रतीक्षा अवधि।

खंड ख — समावेशी शिक्षा

हर बच्चे को एक ही कक्षा में पढ़ाना — विशेष आवश्यकता वाले, वंचित पृष्ठभूमि से आए, और असाधारण क्षमता वाले शिक्षार्थी।

खंड ग — अधिगम एवं शिक्षाशास्त्र

बच्चे वास्तव में कक्षा में कैसे सीखते हैं — और शिक्षक इस ज्ञान का क्या उपयोग करता है। प्रेरणा, त्रुटियाँ, समस्या-समाधान, अधिगम का सामाजिक संदर्भ।

CDP-18

बच्चे कैसे सोचते और सीखते हैं; बच्चे क्यों असफल होते हैं

ध्यान, प्रत्यक्षण, स्मृति (एटकिंसन-शिफरिन) और अधिसंज्ञान। NCF 2005: बच्चे असफल हों तो पहले व्यवस्था की जाँच कीजिए, बच्चे को दोष न दीजिए।

CDP-19

शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया एवं सामाजिक संदर्भ

सहकारी अधिगम (स्लाविन, जॉनसन एवं जॉनसन) सकारात्मक अन्तर्निर्भरता एवं वैयक्तिक उत्तरदायित्व पर टिका है। ब्राउन की 'अधिगम समुदाय' अवधारणा।

CDP-20

बच्चा एक समस्या-समाधानकर्ता एवं वैज्ञानिक अन्वेषक के रूप में

ब्रूनर का क्रम — सक्रिय → प्रतीकात्मक चित्र → प्रतीक — और सर्पिल पाठ्यक्रम। संरचनावाद। NCF 2005: हर बच्चा स्वाभाविक अन्वेषक है।

CDP-21

वैकल्पिक अवधारणाएँ एवं त्रुटियाँ अधिगम के सोपान

NCF 2005 'भ्रांत धारणा' की जगह 'वैकल्पिक धारणा' शब्द को वरीयता देता है — गलत उत्तर बच्चे की वर्तमान स्कीमा दिखाता है और अगला पाठ तय करता है।

CDP-22

संज्ञान एवं संवेग

भय प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स को बंद कर देता है — डरा हुआ बच्चा सीख नहीं सकता। गोलमैन के EI के पाँच आयाम। इसी आधार पर RTE 2009 शारीरिक दंड पर रोक लगाता है।

CDP-23

अभिप्रेरणा एवं अधिगम

आंतरिक बनाम बाह्य अभिप्रेरणा; मास्लो की आवश्यकता-श्रेणी; बंडुरा का स्व-प्रभावकारिता; ड्वेक की वृद्धि बनाम स्थिर मानसिकता; वाइनर का गुण-निरूपण सिद्धांत।

CDP-24

अधिगम में योगदान देने वाले कारक — वैयक्तिक एवं पर्यावरणीय

वैयक्तिक कारक (बुद्धि, अभिप्रेरणा, स्वास्थ्य, पूर्व-ज्ञान) पर्यावरणीय कारकों (परिवार, SES, विद्यालय, शिक्षक) के साथ मिलकर कार्य करते हैं। पिग्मेलियन प्रभाव अपेक्षाओं को बढ़ाता है।

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