पेपर 2 · सामाजिक अध्ययन · कक्षा 7

वस्तु विनिमय से मुद्रा तक

75 प्रश्न · 4 अध्याय टेस्ट

इस अध्याय के बारे में

वस्तु विनिमय से मुद्रा तक कक्षा 7 की समाज का अध्ययन भाग 1 का अध्याय 11 है, जो 'हमारे आस-पास का आर्थिक जीवन' विषय के अंतर्गत आता है। अध्याय का आरंभ अर्थशास्त्री जॉन मेनार्ड कीन्स के इस कथन से होता है कि मुद्रा वर्तमान और भविष्य को जोड़ने वाली कड़ी है, फिर तीन महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए जाते हैं — मुद्रा प्रचलन से पहले विनिमय कैसे होता था, मुद्रा प्रचलन में क्यों आई, और समय के साथ मुद्रा विभिन्न रूपों में कैसे परिवर्तित हुई। अध्याय किसान-बैल की कहानी से वस्तु विनिमय प्रणाली (barter system) की व्याख्या करता है, इसकी चार प्रमुख सीमाएँ बताता है — आवश्यकताओं का द्विसंयोग (double coincidence of wants), मूल्य का सामान्य मानक माप (common standard measure of value) न होना, विभाज्यता (divisibility), सुवाह्यता (portability) और टिकाऊपन (durability) — और फिर मुद्रा के पाँच कार्य समझाता है — विनिमय का माध्यम, मूल्य का संग्रहण (store of value), सामान्य अंकित मूल्य (common denomination), स्थगित भुगतान का मानक। 'मुद्रा की यात्रा' खंड भारत की सिक्का-प्रणाली की कहानी देता है — कार्षापण और पण जिन पर 'रुपा' चिह्न अंकित होते थे, चालुक्यों के वराह सिक्के, चोलों का बाघ-चिह्न (850–1279 सामान्य संवत्), पुदुक्कोट्टई (तमिलनाडु) में मिले रोमन सोने के सिक्के, 18वीं शताब्दी के अंत में भारत में आई कागजी मुद्रा, RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) का एकाधिकार, और आज के क्यू.आर. कोड, यू.पी.आई. व डिजिटल मुद्रा। CTET पेपर 2 सामाजिक अध्ययन इस अध्याय की परीक्षा तथ्य-प्रश्नों (वर्ष, शब्द, परिभाषाएँ), कारण-प्रभाव (वस्तु विनिमय क्यों विफल, मुद्रा क्यों उभरी), भारतीय संदर्भ (जोन बोल मेला, पुदुक्कोट्टई सिक्के, रुपये का चिह्न) और उच्च प्राथमिक स्तर पर अर्थशास्त्र शिक्षाशास्त्र के माध्यम से लेता है। चार टेस्ट — अभ्यास 15, क्विज़ 15, कठिन 15, निपुणता 30 — इन सभी पहलुओं को CTET स्तर की गहराई पर जाँचते हैं।

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