बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र · CTET नोट्स

संज्ञान और भावनाएँ

एक बच्ची गणित की परीक्षा में भय से जकड़ी है — वह कार्यशील स्मृति खो देती है और कल तक याद किए फॉर्मूले भूल जाती है। दूसरा बच्चा जिज्ञासा से विज्ञान की पहेली सुलझाता है — उसके लिए संबंध स्वतः बनते हैं। भावनाएँ और संज्ञान दो अलग प्रणालियाँ नहीं हैं — ये गहराई से अंतर्गुंफित (inter-woven) प्रक्रियाएँ हैं जो अधिगम के हर पल को आकार देती हैं। CTET CDP प्रश्नपत्र इस सम्बंध को बार-बार परखता है। भय, लज्जा, जिज्ञासा और आनंद किस प्रकार सोच, स्मृति और ध्यान को प्रभावित करते हैं — यह समझना हर शिक्षक के लिए अनिवार्य है। NCF 2005 का भयमुक्त, आनंदपूर्ण विद्यालय का दृष्टिकोण इसी वैज्ञानिक समझ पर आधारित है। CTET इसे बार-बार परखता है।

EMOTION🧠COGNITIONInter-woven

भावनाएँ क्या हैं? परिभाषा और प्रकार

भावनाएँ (संवेग) जटिल मनो-शारीरिक अनुक्रियाएँ हैं जिनमें तीन घटक होते हैं: आत्मनिष्ठ अनुभव (feeling), शारीरिक उत्तेजना (हृदय-गति, हार्मोन), और व्यवहार-अभिव्यक्ति (चेहरे के भाव, शारीरिक मुद्रा)। IGNOU BES-121 (खंड 2, अनुभाग 6.3.2) संवेग को परिभाषित करती है: एक तीव्र, विघटनकारी आंतरिक अवस्था जो व्यक्ति के समग्र अनुभव और व्यवहार को रंग देती है।

मूलभूत भावनाएँ

पॉल एकमैन ने छह सार्वभौमिक भावनाओं की पहचान की जो सभी संस्कृतियों में मिलती हैं: भय, क्रोध, आनंद, दुःख, घृणा, और आश्चर्य। ये मनोदशाओं (mood) से भिन्न हैं — जो दीर्घकालिक और कम तीव्र होती हैं। ध्यान, स्मृति, अनुभूति — ये संज्ञानात्मक प्रक्रियाएँ हैं; भय — एक भावना है। CTET यह अंतर सीधे परखता है।

संवेग बनाम संज्ञान: संज्ञान का अर्थ है मानसिक प्रक्रियाएँ — सोचना, याद करना, तर्क करना। भावनाएँ वे अनुभव-अवस्थाएँ हैं जो इन प्रक्रियाओं के साथ-साथ उठती हैं और उन्हें प्रभावित करती हैं।

यह समझना महत्त्वपूर्ण है कि भावनाएँ अधिगम में बाधा नहीं — प्रेरणा के इंजन हैं। जिज्ञासा अन्वेषण को प्रेरित करती है; संतोष सही रणनीतियों को पुष्ट करता है; बौद्धिक चुनौती की हल्की निराशा (भय नहीं) प्रयास को बनाए रखती है। समस्या तब होती है जब भय और लज्जा संज्ञानात्मक संसाधनों को अधिगम से दूर कर लेती हैं।

बाल-विकास के दृष्टिकोण से: शैशवकाल में भावनाएँ अविभाजित होती हैं (सामान्य संकट या संतोष)। मध्य-बाल्यावस्था तक बच्चे गर्व, लज्जा, अपराध-बोध और शर्मिंदगी — आत्म-चेतन भावनाएँ — अनुभव करने लगते हैं जिनके लिए स्व का संज्ञानात्मक मूल्यांकन आवश्यक है।

सम्बंध: भावनाएँ और संज्ञान अंतर्गुंफित हैं

CTET में इस विषय पर मूल निष्कर्ष: भावनाएँ और संज्ञान अंतर्गुंफित (inter-woven) हैं — न अलग, न स्वतंत्र, न असंबंधित। तंत्रिका विज्ञान इसे पुष्ट करता है: एमिग्डाला और प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं। कक्षा-अनुभव भी यही बताता है — चिंतित विद्यार्थी संचित ज्ञान तक नहीं पहुँच पाते; जिज्ञासु विद्यार्थी गहराई से खोजते हैं।

द्विदिशीय प्रभाव

  • भावना → संज्ञान: भय ध्यान को खतरे पर केंद्रित कर देता है, सोच की व्यापकता घटाता है। आनंद ध्यान को व्यापक बनाता है और रचनात्मक संबंध-निर्माण को प्रोत्साहित करता है।
  • संज्ञान → भावना: हम किसी परिस्थिति की व्याख्या (appraisal) कैसे करते हैं, यह हमारी भावना निर्धारित करता है। 'मैं मूर्ख हूँ' सोचने वाला बच्चा लज्जा अनुभव करता है; 'मुझे अभी यह नहीं आया' सोचने वाला प्रबंधनीय निराशा।

एंटोनियो डमासिओ के मस्तिष्क-चोट शोध ने दिखाया कि जो मरीज़ भावनाएँ अनुभव करने में असमर्थ हो जाते हैं, वे अच्छे निर्णय भी नहीं ले पाते। डमासिओ की 'दैहिक-मार्कर परिकल्पना': भावनाएँ विकल्पों को अच्छे/बुरे के रूप में चिह्नित करती हैं — सचेत तर्क से पहले। यह सिद्ध करता है कि भावना तर्क की शत्रु नहीं, बल्कि उसकी आवश्यक साझेदार है।

यह द्विदिशीय सम्बंध शिक्षक को बताता है: 'भावनात्मक प्रबंधन' और 'शैक्षणिक शिक्षण' अलग कार्य नहीं हैं। भावनात्मक रूप से सुरक्षित कक्षा बनाना स्वयं एक संज्ञानात्मक हस्तक्षेप है।

CTET 2019 दिसंबर P1 Q20: भावनाएँ और संज्ञान _____ हैं। सही: एक-दूसरे के साथ अंतर्गुंफित। 'पूर्णतः अलग', 'स्वतंत्र', 'असंबंधित' — तीनों गलत।

ज़ैजोन्क बनाम लाज़ारस: क्या भावना संज्ञान से स्वतंत्र हो सकती है?

CTET में सैद्धांतिक दृष्टि से सर्वाधिक परखा जाने वाला प्रश्न है ज़ैजोन्क–लाज़ारस विवाद: क्या भावना के लिए पूर्व-संज्ञानात्मक प्रक्रिया आवश्यक है?

ज़ैजोन्क का मत: स्वतंत्रता

रॉबर्ट ज़ैजोन्क (1980, 1984) ने तर्क दिया कि भावनात्मक प्रतिक्रियाएँ पूर्व-संज्ञान के बिना हो सकती हैं। उन्होंने दिखाया कि लोग उन उद्दीपनों के प्रति प्राथमिकता दर्शाते हैं जो वे पहले देख चुके हैं, भले ही उन्हें सचेत रूप से पहचान न पाएँ (mere exposure effect)। निष्कर्ष: भाव और संज्ञान स्वतंत्र प्रणालियाँ हैं।

लाज़ारस का मत: संज्ञानात्मक मूल्यांकन पहले

रिचर्ड लाज़ारस ने कहा कि संज्ञानात्मक मूल्यांकन (cognitive appraisal) हमेशा भावना से पहले होता है। भय अनुभव करने से पहले हम परिस्थिति को खतरनाक मानते हैं; गर्व से पहले अपने प्रदर्शन को उचित मानते हैं।

CTET उत्तर (2018 दिसंबर P2 Q25): 'ज़ैजोन्क का मत है कि संज्ञान और भावना _____ हैं।' उत्तर: स्वतंत्र (independent) — यह ज़ैजोन्क की विशिष्ट स्थिति है। सामान्य प्रश्नों में भावना-संज्ञान सम्बंध: अंतर्गुंफित।

लाज़ारस का तर्क शिक्षाशास्त्र के लिए अत्यंत प्रासंगिक है: यदि भावना संज्ञानात्मक मूल्यांकन का परिणाम है, तो शिक्षक बच्चे की व्याख्या को बदलकर उसकी भावनात्मक प्रतिक्रिया बदल सकता है। 'परीक्षा खतरा है' → भय। 'परीक्षा अपनी समझ दिखाने का अवसर है' → सतर्क उत्साह। यह reappraisal तकनीक भावनात्मक नियमन का आधार है।

CTET परिदृश्य: यदि कोई प्रश्न पूछे 'ज़ैजोन्क के अनुसार संज्ञान और भावना ______ हैं' — उत्तर: स्वतंत्र। यदि पूछे 'भावनाएँ और संज्ञान ______ हैं' — उत्तर: अंतर्गुंफित

आधुनिक समन्वित दृष्टिकोण: सामान्य अधिगम में भावनाएँ और संज्ञान व्यापक रूप से अंतःक्रिया करते हैं; दोनों एक-दूसरे को पूर्ण संज्ञानात्मक प्रसंस्करण के बिना भी प्रभावित कर सकते हैं।

इष्टतम उत्तेजना और यर्किस-डॉडसन नियम

शिक्षकों के लिए सबसे व्यावहारिक भावना-संज्ञान सिद्धांत है यर्किस-डॉडसन नियम: संज्ञानात्मक कार्यों पर प्रदर्शन और उत्तेजना-स्तर के बीच उल्टे-U का सम्बंध है। इष्टतम उत्तेजना क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन होता है; बहुत कम या बहुत अधिक उत्तेजना दोनों अधिगम को बाधित करती हैं।

इष्टतम अधिगम-अवस्था

उत्तेजना-स्तरभय-स्तरअधिगम-परिणाम
कमनहींखराब — उदासीनता, अलग-थलग
मध्यमनहींसर्वश्रेष्ठ — सतर्क, जिज्ञासु, कार्यशील स्मृति सक्रिय
अधिकअधिकसबसे खराब — fight-or-flight, स्मृति दब जाती है

यह सिद्धांत समझाता है कि 'आलसी' लगने वाले बच्चे (अल्प-उत्तेजना) और 'जमे हुए' (अधिक भय-उत्तेजना) दोनों वास्तव में अनुचित उत्तेजना की तर्कसंगत प्रतिक्रिया दे रहे हैं। समाधान: चुनौती हटाना नहीं, दबाव बढ़ाना नहीं — बल्कि अर्थपूर्ण रूप से चुनौतीपूर्ण पर प्राप्य कार्य देना — वायगोत्स्की का ZPD।

सरल, सु-अभ्यस्त कार्यों के लिए थोड़ी अधिक उत्तेजना लाभकारी हो सकती है। लेकिन जटिल संज्ञानात्मक कार्यों — विश्लेषण, रचनात्मक सोच, समस्या-समाधान — के लिए इष्टतम उत्तेजना मध्यम होती है। CTET प्रश्न जटिल कक्षा अधिगम पर केंद्रित हैं, इसलिए उत्तर हमेशा: मध्यम उत्तेजना + कोई भय नहीं।

CTET PYQ 2021 Jan P1 Q24 में पहचानी गई इष्टतम अवस्था: मध्यम उत्तेजना, कोई भय नहीं। यह व्यस्त जिज्ञासा की अवस्था है — बच्चा सतर्क और प्रेरित है पर चिंतित नहीं। अधिक उत्तेजना + भय का संयोजन सबसे हानिकारक है: तनाव हार्मोन (कॉर्टिसोल) हिप्पोकैंपस (स्मृति-निर्माण) और प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (तर्क) को दबाते हैं।

लज्जा और भय: नकारात्मक भावनाएँ अधिगम को कैसे अवरुद्ध करती हैं

CTET 2021 Jan P1 Q20 एक महत्त्वपूर्ण अंतर्दृष्टि परखता है: लज्जा का संज्ञान पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। लज्जा केवल अप्रिय अनुभव नहीं — यह एक संज्ञानात्मक-भावनात्मक अवस्था है जो सोचने की क्षमता को सक्रिय रूप से बाधित करती है।

लज्जा संज्ञान को कैसे बाधित करती है

  • लज्जा खतरा-पहचान परिपथों को सक्रिय करती है, प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स की तर्क-क्षमता घटाती है
  • लज्जा सामाजिक पृथक्करण को जन्म देती है — बच्चा अधिगम-कार्य से हट जाता है
  • दीर्घकालिक लज्जा 'सीखी हुई असहायता' (learned helplessness) पैदा करती है
  • गलतियों पर लज्जा जोखिम-उठाने और प्रयोग करने से रोकती है

अपराध-बोध (guilt) लज्जा से भिन्न है: अपराध-बोध कहता है 'मैंने गलत किया' (व्यवहार-केंद्रित); लज्जा कहती है 'मैं बुरा हूँ' (स्व-केंद्रित)। अपराध-बोध उत्पादक हो सकता है — यह सुधार को प्रेरित करता है। लज्जा नहीं, क्योंकि यह पहचान पर आघात करती है। 'तुमने गलती की' → अपराध-बोध → सुधार। 'तुम लापरवाह हो' → लज्जा → संज्ञान बंद।

कक्षा में भय

शिक्षक का भय, गलत उत्तर का भय, साथियों की उपहास का भय — ये अतिसजगता (hypervigilance) की अवस्था बनाते हैं जो अधिगम के विपरीत है। बच्चे का ध्यान अधिगम-कार्य से हटकर खतरे की निगरानी पर चला जाता है।

भारतीय कक्षाओं में पारंपरिक रूप से शर्म और भय को अनुशासन-उपकरण के रूप में उपयोग किया जाता रहा है। तंत्रिका विज्ञान इसे गलत सिद्ध करता है: पुरानी शर्म की अवस्था में बच्चे का मस्तिष्क 'खतरा-मोड' में होता है — संज्ञानात्मक लचीलापन, रचनात्मकता और जिज्ञासा सब दब जाती हैं।

CTET विकर्षक: 'बच्चों को सीखने के लिए प्रेरित करने हेतु लज्जा बहुत प्रभावी है' — गलत। NCF 2005 स्पष्ट रूप से भयमुक्त, आनंदपूर्ण वातावरण की माँग करती है।

कक्षा का भावनात्मक वातावरण और शिक्षक की भूमिका

कक्षा का भावनात्मक वातावरण — वह व्यापक भावनात्मक स्वर जो बच्चे हर दिन अनुभव करते हैं — संज्ञानात्मक संलग्नता का सबसे शक्तिशाली भविष्यवक्ता है। सकारात्मक भावनात्मक वातावरण केवल 'अच्छा है' नहीं — यह प्रभावी अधिगम की संरचनात्मक आवश्यकता है।

NCF 2005 का मत

NCF 2005 स्पष्ट रूप से कहती है कि बच्चों को विद्यालय आनंददायक स्थान लगना चाहिए — भय और चिंता से मुक्त। अत्यधिक परीक्षा-दबाव, रटन-आधारित वातावरण, और दंडात्मक शिक्षण को दस्तावेज़ भय-भरे वातावरण के कारक मानता है। जब बच्चे असफलता या शिक्षक-अस्वीकृति से डरते हैं, तो वे गहन अधिगम-रणनीतियों (विस्तारण, प्रश्न, अन्वेषण) को छोड़कर उथली रणनीतियों (रटना, अनुपालन) पर आ जाते हैं।

शिक्षक का भावनात्मक स्वर

शिक्षक कक्षा के भावनात्मक वातावरण का प्रमुख निर्माता है। जो शिक्षक उष्मा, उत्साह और बच्चे की सोच में वास्तविक रुचि दर्शाता है, वह ऐसी कक्षा बनाता है जहाँ बच्चे बौद्धिक जोखिम उठाते हैं। व्यंग्य, सार्वजनिक अपमान और अप्रत्याशित क्रोध उच्च-चिंता वातावरण बनाते हैं। शोध लगातार दर्शाता है कि जो शिक्षक उष्मा, उत्साह और बच्चे की सोच में वास्तविक रुचि दर्शाते हैं, वे ऐसी कक्षा बनाते हैं जहाँ बच्चे बौद्धिक जोखिम उठाते हैं। व्यंग्य, सार्वजनिक अपमान और अप्रत्याशित क्रोध उच्च-चिंता वातावरण बनाते हैं। IGNOU BES-121 Block 2 कहती है: जो बच्चा प्रयास करने और असफल होने में सुरक्षित महसूस करता है, वह सही-पर-डरे हुए बच्चे से अधिक सीखता है। यही रचनावादी शिक्षाशास्त्र का भावनात्मक आधार है — त्रुटि अन्वेषण की शुरुआत है, दंड का अवसर नहीं।

भावनात्मक बुद्धि: अवधारणा और कक्षा प्रासंगिकता

भावनात्मक बुद्धि (Emotional Intelligence — EI), डैनियल गोलमैन (1995) द्वारा लोकप्रिय, स्वयं में और दूसरों के साथ भावनाओं को पहचानने, समझने, प्रबंधित करने और उपयोग करने की क्षमता है। गोलमैन ने पाँच घटक बताए:

  • स्व-जागरूकता: अपनी भावनात्मक अवस्थाओं को पहचानना
  • स्व-नियमन: विघटनकारी आवेगों को नियंत्रित करना
  • प्रेरणा: लक्ष्यों की सेवा में भावनाओं का उपयोग करना
  • सहानुभूति: दूसरों की भावनाओं को पहचानना और समझना
  • सामाजिक कौशल: संबंध बनाना और भावनात्मक संपर्क बनाए रखना

सैलोवे और मेयर (1990) ने EI का मूल वैज्ञानिक ढाँचा प्रस्तुत किया — उन्होंने तर्क दिया कि भावनात्मक योग्यताएँ एक वास्तविक बुद्धि हैं, न केवल व्यक्तित्व-गुण। उच्च EI वाले बच्चे परीक्षा-चिंता को बेहतर नियंत्रित करते हैं, साथियों के विवादों को अधिक रचनात्मक ढंग से सुलझाते हैं, और कठिनाइयों में अधिक शैक्षणिक लचीलापन दर्शाते हैं।

EI बनाम IQ

शोध बताता है कि EI जीवन-सफलता, संबंध-गुणवत्ता और मानसिक स्वास्थ्य की भविष्यवाणी करती है — IQ से परे। उच्च EI वाले बच्चे परीक्षा-चिंता को बेहतर नियंत्रित करते हैं, साथियों के विवादों को रचनात्मक ढंग से सुलझाते हैं, और कठिनाइयों में अधिक शैक्षणिक लचीलापन दर्शाते हैं।

शिक्षण के लिए प्रासंगिकता

भावनात्मक रूप से बुद्धिमान शिक्षक विद्यार्थियों के लिए भावनात्मक स्व-नियमन का प्रतिरूप (role model) प्रस्तुत करता है। NCF 2005 अंतर्निहित रूप से EI सिद्धांतों को शामिल करती है: शिक्षक एक देखभाल करने वाला, चिंतनशील पेशेवर है — न केवल सामग्री-प्रदाता।

CTET परीक्षा फोकस: प्रमुख पैटर्न और जाल

CDP-22 से विश्वसनीय CTET प्रश्न आते हैं। सर्वाधिक परखे जाने वाले विचार:

  • भावनाएँ और संज्ञान अंतर्गुंफित हैं (न अलग, न स्वतंत्र, न असंबंधित)
  • ज़ैजोन्क विशेष रूप से स्वतंत्रता के लिए तर्क करता है — अन्य प्रश्न सामान्य सम्बंध के बारे में
  • सर्वश्रेष्ठ अधिगम अवस्था: मध्यम उत्तेजना, कोई भय नहीं
  • लज्जा संज्ञान को बाधित करती है — लज्जा से प्रेरणा देना गलत
  • भयमुक्त, आनंदपूर्ण कक्षा NCF 2005 की संरचनात्मक माँग है

NCF 2005 स्थिति: 'दबाव डालो', 'सार्वजनिक रूप से लज्जित करो', 'प्रतिस्पर्धा बढ़ाओ' — ये सभी विकर्षक हैं। NCF का उत्तर हमेशा 'आनंदपूर्ण, कम-भय, जाँच-अनुकूल वातावरण बनाओ' की दिशा में होगा।

एक CTET परिदृश्य: 'प्रिया विज्ञान का अध्याय अच्छी तरह जानती है पर परीक्षा में खराब प्रदर्शन करती है।' स्पष्टीकरण: उच्च उत्तेजना + भय अवस्था दीर्घकालिक स्मृति से पुनःप्राप्ति को दबा देती है। सही हस्तक्षेप: कम-दांव अभ्यास, रचनात्मक प्रतिपुष्टि — अधिक अभ्यास नहीं। जाल प्रश्न: 'निम्न में से कौन भावना है — स्मृति/भय/ध्यान/उद्दीपन?' संज्ञानात्मक प्रक्रियाएँ (स्मृति, ध्यान) और बाह्य घटनाएँ (उद्दीपन) हटाएँ — भय भावना है।

CTET में ज़ैजोन्क–लाज़ारस विभाजन: 'ज़ैजोन्क का मत है' → उत्तर: स्वतंत्र। सामान्य प्रश्न 'भावना और संज्ञान का सम्बंध' → उत्तर: अंतर्गुंफित। इन दोनों को अलग-अलग याद रखना CTET में सीधे अंक दिलाता है।

याद रखें: भावना और संज्ञान अंतर्गुंफित — यही CTET का मूल उत्तर है।

अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित में से कौन-सा एक संवेग है?

  • स्मृति
  • डर
  • ध्यान
  • उत्तेजना

व्याख्या: भय एक भावना (संवेग) है — एक तीव्र आत्मनिष्ठ-शारीरिक-व्यवहार प्रतिक्रिया। स्मृति और ध्यान संज्ञानात्मक प्रक्रियाएँ हैं; उद्दीपन एक बाह्य घटना है।

स्रोत: CTET दिसंबर 2018 पेपर-I प्रश्न 22

Q2. संवेग एवं संज्ञान एक दूसरे से _____ हैं ।

  • पूर्णतया अलग
  • स्वतंत्र
  • सम्मिलित
  • संबंधित नहीं

व्याख्या: भावनाएँ और संज्ञान अंतर्गुंफित हैं। एमिग्डाला और प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स के बीच घनिष्ठ संबंध इसे पुष्ट करता है। भावनात्मक अवस्थाएँ संज्ञानात्मक प्रसंस्करण को और संज्ञान भावनाओं को प्रभावित करता है।

स्रोत: CTET दिसंबर 2019 पेपर-I प्रश्न 20

Q3. शर्मिंदगी _____.

  • का संज्ञान से कोई संबंध नहीं है ।
  • का संज्ञान पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है ।
  • बच्चों को अधिगम हेतु अभिप्रेरित करने के लिए बहुत प्रभावशाली है ।
  • के भाव को अध्यापन-अधिगम प्रक्रिया में बारंबार पैदा करना चाहिए ।

व्याख्या: लज्जा खतरा-पहचान सक्रिय करती है, प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स दबाती है, पृथक्करण उत्पन्न करती है, और सीखी हुई असहायता पैदा करती है — संज्ञान पर नकारात्मक प्रभाव। शिक्षण में कभी उपयोग नहीं होना चाहिए।

स्रोत: CTET जनवरी 2021 पेपर-I प्रश्न 20

Q4. अधिगम की सर्वोत्तम अवस्था कौन सी है ?

  • उच्च उत्तेजना, उच्च भय
  • निम्न उत्तेजना, उच्च भय
  • संतुलित उत्तेजना, कोई भय नहीं
  • कोई उत्तेजना नहीं, कोई भय नहीं

व्याख्या: यर्किस-डॉडसन नियम: मध्यम उत्तेजना + कोई भय नहीं = इष्टतम संज्ञानात्मक संलग्नता। अधिक उत्तेजना + अधिक भय तनाव हार्मोन उत्पन्न करता है जो कार्यशील स्मृति और हिप्पोकैंपल एन्कोडिंग को दबाता है।

स्रोत: CTET जनवरी 2021 पेपर-I प्रश्न 24

Q5. ज़जोंक का यह मानना है कि संज्ञान और भाव ____ होते हैं।

  • अन्योन्याश्रित
  • स्वतंत्र
  • अंतर्संबंधित
  • एकीकृत

व्याख्या: ज़ैजोन्क का विशिष्ट तर्क: भावना और संज्ञान स्वतंत्र प्रणालियाँ हैं — भावनात्मक प्रतिक्रियाएँ पूर्व-संज्ञानात्मक मूल्यांकन के बिना हो सकती हैं। लाज़ारस इसके विपरीत: मूल्यांकन पहले।

स्रोत: CTET दिसंबर 2018 पेपर-II प्रश्न 25