बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र · CTET नोट्स

भाषा और विचार

मनोविज्ञान का एक बहुत पुराना प्रश्न है — पहले विचार आता है या भाषा? क्या बच्चा पहले अवधारणा बनाता है और फिर उसे शब्दों में व्यक्त करता है (पियाजे), या भाषा सीखने से विचार करने की क्षमता स्वयं आकार लेती है (वाइगोत्स्की)? यह विवाद केवल दार्शनिक नहीं है — इसके सीधे व्यावहारिक परिणाम हैं। यदि भाषा विचार को गढ़ती है, तो एक बच्चे को अपरिचित भाषा में पढ़ने के लिए बाध्य करना उसकी सोचने की क्षमता को ही बाधित करना है। CTET पेपर-1 में यह विषय बार-बार आता है — वाइगोत्स्की का आत्म-संवाद, चॉम्स्की की भाषा अर्जन युक्ति, भाषा विकास की अवस्थाएँ, व्होर्फ-सैपिर परिकल्पना और NCF 2005 की मातृभाषा नीति — ये सभी बिंदु CTET में प्रत्यक्ष रूप से पूछे जाते हैं।

भाषाविचारLanguage & Thought

भाषा क्या है?

भाषा केवल शब्दों की सूची नहीं है। NIOS 503 के अनुसार भाषा एक संरचित, प्रतीकात्मक व्यवस्था है जिसके द्वारा मनुष्य अर्थ का संप्रेषण करते हैं। यह व्यवस्था चार स्तरों पर काम करती है: ध्वनि-संरचना (phonology), शब्द-संरचना (morphology), वाक्य-संरचना (syntax) और संवाद-संरचना (pragmatics)।

मानव भाषा की सबसे विशिष्ट विशेषता उसकी उत्पादकता है — सीमित नियमों और शब्दों से असीमित नए वाक्य बनाए जा सकते हैं। एक बच्चा जिसने कभी "नीला हाथी चाय पी रहा है" वाक्य नहीं सुना, फिर भी उसे तुरंत समझ सकता है — क्योंकि उसने व्याकरण के नियम आत्मसात कर लिए हैं, केवल शब्दों को याद नहीं किया।

भाषा का एक गहरा सामाजिक पक्ष भी है। बच्चा भाषा अकेले नहीं सीखता — वह देखभालकर्ताओं, भाई-बहनों और समुदाय के साथ संवाद के दौरान सीखता है। NIOS 503 बताता है कि भाषा संस्कृति की वाहक है — मूल्य, परम्पराएँ और पहचान भाषा के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होते हैं। यही कारण है कि विद्यालय की भाषा यदि बच्चे की घर की भाषा से बहुत भिन्न हो, तो वह बच्चे को सशक्त बनाने के बजाय अलग-थलग महसूस करा सकती है।

अंततः, भाषा एक संज्ञानात्मक उपकरण है — संप्रेषण के अलावा इसका उपयोग सोचने, योजना बनाने, याद करने और तर्क करने के लिए होता है। वाइगोत्स्की ने यही तर्क दिया कि यह संज्ञानात्मक कार्य भाषा की सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका है।

भाषा की उत्पादकता: सीमित नियमों और शब्दों के समुच्चय से असीमित नए, सार्थक वाक्य बनाने की क्षमता — मानव भाषा की सबसे विशिष्ट पहचान।

पियाजे: विचार पहले, भाषा बाद में

जीन पियाजे (Jean Piaget) के लिए संज्ञानात्मक विकास (cognitive development) ही भाषा विकास का इंजन है। बच्चा किसी अनुभव को नाम या वर्णन तभी दे सकता है, जब वह उसे पहले संवेदी-क्रियात्मक या अवधारणात्मक स्तर पर समझ चुका हो। भाषा इसलिए विचार की उपज है, उसका स्रोत नहीं।

पियाजे ने 2–7 वर्ष के बच्चों में अहंकेंद्रित वाणी (egocentric speech) देखी — वे ज़ोर से बोलते हैं लेकिन किसी श्रोता की प्रतिक्रिया की परवाह नहीं करते। दो बच्चे साथ बैठकर अपनी-अपनी गतिविधि का वर्णन कर सकते हैं बिना एक-दूसरे को सुने। पियाजे ने इसे पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था की संज्ञानात्मक सीमा — आत्म-केंद्रितता (egocentrism) — का प्रतिबिंब माना।

जब बच्चा मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (लगभग 7 वर्ष) में प्रवेश करता है और दूसरे के दृष्टिकोण को समझने में सक्षम होता है, तो अहंकेंद्रित वाणी क्रमशः सामाजिक, संचारी भाषा में बदल जाती है।

शिक्षण के लिए निहितार्थ: शिक्षक को शब्दावली सिखाने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चे ने अंतर्निहित अवधारणा को वास्तव में समझ लिया है। बिना समझ के रटाई गई भाषा — पियाजे इसे खोखली वाचिकता कहते हैं।

पक्षपियाजे का दृष्टिकोण
दिशाविचार → भाषा
अहंकेंद्रित वाणीसंज्ञानात्मक अपरिपक्वता का प्रतिबिंब; आयु के साथ लुप्त
भाषा की भूमिकापहले से निर्मित अवधारणाओं को व्यक्त करना
शैक्षिक निहितार्थभाषा सिखाने से पहले अवधारणात्मक तत्परता सुनिश्चित करें

वाइगोत्स्की: भाषा विचार को आकार देती है

लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) पियाजे से मूलभूत रूप से असहमत थे। उनके अनुसार विचार और भाषा के अलग-अलग प्रारंभिक मूल हैं — प्रारंभिक विचार क्रिया-आधारित और गैर-भाषाई होता है, जबकि प्रारंभिक भाषा शुद्ध सामाजिक और पूर्व-बौद्धिक होती है। किंतु लगभग 2 वर्ष की आयु में ये दोनों रेखाएँ मिल जाती हैं और उसके बाद भाषा विचार का प्राथमिक उपकरण बन जाती है

वाइगोत्स्की ने पियाजे की अहंकेंद्रित वाणी की पुनर्व्याख्या की। उनके अनुसार यह संज्ञानात्मक अपरिपक्वता का लक्षण नहीं है — यह बच्चा ज़ोर से सोच रहा है, अपने व्यवहार को नियंत्रित करने और समस्या सुलझाने के लिए भाषा का उपयोग एक उपकरण के रूप में कर रहा है। वाइगोत्स्की ने इसे आत्म-संवाद (private speech) कहा। यह आत्म-संवाद परिपक्वता के साथ लुप्त नहीं होता — यह आंतरिक भाषण (inner speech) बन जाता है — वह मौन आंतरिक एकालाप जिसका उपयोग वयस्क योजना बनाने और तर्क करने के लिए करते हैं।

इस दृष्टिकोण का शिक्षा पर गहरा प्रभाव है। यदि भाषा एक संज्ञानात्मक उपकरण है, तो बच्चे को अपरिचित भाषा में सीखने के लिए बाध्य करना उससे उसका विचार-उपकरण छीनना है। अधिक ज्ञानी व्यक्ति (More Knowledgeable Other / MKO) के साथ समृद्ध भाषाई संवाद ही निकटतम विकास का क्षेत्र (ZPD) में सहारा-निर्माण (scaffolding) की प्रक्रिया है।

पक्षवाइगोत्स्की का दृष्टिकोण
दिशाभाषा → विचार (लगभग 2 वर्ष के बाद)
आत्म-संवादसंज्ञानात्मक उपकरण; आंतरिक भाषण बन जाता है
भाषा की भूमिकाउच्च मानसिक कार्यों का वाहन और निर्माता
शैक्षिक निहितार्थसमृद्ध भाषाई संवाद संज्ञानात्मक विकास में तेजी लाता है

भाषा अर्जन के सिद्धांत: तीन प्रमुख दृष्टिकोण

बच्चे अपनी मातृभाषा कैसे अर्जित करते हैं, इसकी व्याख्या तीन प्रमुख सिद्धांत करते हैं।

व्यवहारवादी सिद्धांत — बी.एफ. स्किनर

स्किनर (B.F. Skinner) के अनुसार भाषा भी किसी अन्य व्यवहार की तरह अनुकूलन (conditioning) द्वारा सीखी जाती है। जब बच्चा किसी शब्द का उच्चारण करता है और माता-पिता उस पर मुस्कुराते या प्रतिक्रिया करते हैं, यह सकारात्मक पुनर्बलन (reinforcement) उस व्यवहार को दोहराने की संभावना बढ़ाता है। अनुकरण (imitation) और आकार देने (shaping) के माध्यम से बच्चा धीरे-धीरे सही शब्द और वाक्य सीखता है। किंतु यह सिद्धांत भाषा की उत्पादकता को नहीं समझा पाता — बच्चे ऐसे वाक्य भी सही ढंग से बोलते हैं जो उन्होंने कभी सुने नहीं।

नेटिविस्ट सिद्धांत — नोम चॉम्स्की

नोम चॉम्स्की (Noam Chomsky) ने प्रस्ताव किया कि बच्चे जन्म से एक जन्मजात तंत्रिका-तंत्रीय तंत्र लेकर आते हैं — भाषा अर्जन युक्ति (Language Acquisition Device / LAD)। LAD में सभी मानव भाषाओं में साझा सार्वभौमिक व्याकरणिक सिद्धांत निहित हैं। यही कारण है कि विश्व के सभी बच्चे लगभग एक ही अवस्थाओं में और एक ही गति से भाषा अर्जित करते हैं, चाहे उन्हें कितनी भी औपचारिक शिक्षा मिली हो। एक संवेदनशील अवधि (sensitive period) होती है — जन्म से लेकर यौवनारम्भ तक — जब LAD सर्वाधिक सक्रिय रहती है। जो बच्चे इस अवधि में मानव भाषा से वंचित रहते हैं (जैसे वन्य बच्चे/feral children), वे बाद में पुनर्वास के बावजूद पूर्ण भाषा कभी अर्जित नहीं कर पाते।

अंतःक्रियावादी सिद्धांत — वाइगोत्स्की और क्रेशन

अंतःक्रियावादी दृष्टिकोण मानता है कि भाषा अर्जन के लिए जन्मजात प्रवृत्ति और सामाजिक अंतःक्रिया — दोनों आवश्यक हैं। क्रेशन (Krashen) की बोधगम्य आगत परिकल्पना (comprehensible input hypothesis) कहती है कि अर्जन तब होता है जब शिक्षार्थी को ऐसी भाषा से परिचित कराया जाए जो उनके वर्तमान स्तर से थोड़ी ऊपर (i+1) हो — चुनौतीपूर्ण लेकिन संदर्भ में समझने योग्य।

परीक्षा-संकेत: CTET में सबसे अधिक पूछा जाता है — "LAD का प्रस्ताव किसने दिया?" → चॉम्स्की। "निजी वाणी को संज्ञानात्मक उपकरण किसने माना?" → वाइगोत्स्की। क्रेशन की परिकल्पना L2 अर्जन के लिए है, चॉम्स्की का LAD L1 अर्जन के लिए।

मातृभाषा विकास की अवस्थाएँ

विश्व के सभी बच्चे मातृभाषा अर्जन में एक आश्चर्यजनक रूप से पूर्वानुमानित क्रम से गुज़रते हैं। NIOS 503 निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण पड़ाव बताता है:

अवस्थालगभग आयुविशेषताएँ
गुर्राना/कूकना2–4 माहस्वर-ध्वनियाँ; मानव आवाज़ पर प्रतिक्रिया
बोलना (बैबलिंग)4–10 माहव्यंजन-स्वर अक्षर ("बा-बा", "मा-मा"); सभी भाषाओं में आरंभ में एक जैसा
एक शब्द की अवस्था10–18 माहएकल शब्द पूरा अर्थ वहन करता है; "दूध" = "मुझे दूध चाहिए" या "दूध गिर गया"
दो शब्द की अवस्था18–24 माहसरल जोड़ियाँ: "माँ जाओ", "दूध चाहिए"
तार-भाषा (Telegraphic)2–3 वर्षकेवल सार्थक शब्द, कोई सहायक शब्द नहीं: "माँ गुड़िया दो" — तार जैसा संक्षिप्त
जटिल वाक्य3+ वर्षव्याकरणिक नियम उभरते हैं; बच्चे अति-सामान्यीकरण करते हैं ("वो गया" की जगह "वो गयी") — नियम सीखने का संकेत
विद्यालयी आयु6+ वर्षप्रतिदिन ~10 नए शब्द; भाषाई जागरूकता (metalinguistic awareness): श्लेष, पहेलियाँ समझना

NIOS 503 इस बात पर ज़ोर देता है कि भाषा विकास की गति बच्चों में भिन्न होती है, लेकिन क्रम सार्वभौमिक है। अति-सामान्यीकरण त्रुटियाँ (जैसे "मैं कलकल गया" के बजाय "मैं जाया") विफलता नहीं — ये इस बात का प्रमाण हैं कि बच्चे ने व्याकरणिक नियम को आत्मसात कर लिया है और उसे व्यवस्थित रूप से लागू कर रहा है।

भाषाई जागरूकता — भाषा को एक वस्तु के रूप में देखने और उससे खेलने की क्षमता — लगभग 7 वर्ष की आयु में उभरती है और श्लेष, पहेलियों व लयबद्ध कविताओं का आनंद लेने में सहायक होती है।

व्होर्फ-सैपिर परिकल्पना: क्या भाषा विचार को निर्धारित करती है?

भाषाविद् एडवर्ड सैपिर (Edward Sapir) और उनके शिष्य बेंजामिन ली व्होर्फ (Benjamin Lee Whorf) ने यह प्रस्ताव रखा कि व्यक्ति जो भाषा बोलता है, वह उसके सोचने और दुनिया को देखने के तरीके को प्रभावित — या यहाँ तक कि निर्धारित — करती है। इसे व्होर्फ-सैपिर परिकल्पना (Whorf-Sapir hypothesis) या भाषाई सापेक्षता (linguistic relativity) कहते हैं।

यह परिकल्पना दो रूपों में आती है:

  • प्रबल रूप (भाषाई नियतत्ववाद): भाषा विचार को निर्धारित करती है। विभिन्न भाषाएँ बोलने वाले लोग शाब्दिक रूप से भिन्न तरीके से सोचते हैं। यह प्रबल रूप अब बड़े पैमाने पर अस्वीकार किया जा चुका है — क्योंकि यह भविष्यवाणी करता है कि जिस भाषा में भविष्य-काल नहीं है उसके बोलने वाले भविष्य की योजना नहीं बना सकते, जो स्पष्टतः असत्य है।
  • दुर्बल रूप (भाषाई सापेक्षता): भाषा विचार और धारणा को प्रभावित करती है, बिना पूरी तरह नियंत्रित किए। यह दुर्बल रूप व्यापक समर्थन पाता है। उदाहरण: जिन भाषाओं में रंगों के लिए अधिक शब्द हैं, उनके बोलने वाले उन रंगों के बीच अंतर करने में तेज़ और सटीक होते हैं — हालाँकि सभी भाषाओं के लोग समान रंग देख सकते हैं।

CTET के लिए भाषाई सापेक्षता का महत्त्वपूर्ण निहितार्थ यह है कि शिक्षण की भाषा मायने रखती है। जो बच्चे विज्ञान अपनी मातृभाषा में सीखते हैं, वे अवधारणाएँ अधिक सहजता से विकसित कर सकते हैं — क्योंकि उनकी घर की भाषा में पहले से संबंधित वर्गीकरण उपलब्ध हैं। विदेशी भाषा में सीखने की बाध्यता संज्ञानात्मक भार बढ़ाती है।

भाषाई सापेक्षता (linguistic relativity): भाषा उन श्रेणियों और भेदों को प्रभावित करती है जिन्हें हम धारणा और विचार में सामान्यतः देखते हैं — लेकिन पूरी तरह निर्धारित नहीं करती।

मातृभाषा, बहुभाषिता और NCF 2005 / NEP 2020

भारत विश्व के सबसे भाषाई विविध देशों में से एक है। अधिकांश भारतीय बच्चे बहुभाषी परिवेश में बड़े होते हैं — वे घर पर एक भाषा, मोहल्ले में दूसरी और विद्यालय में तीसरी भाषा का सामना कर सकते हैं। NIOS 503 इस बहुभाषिता को एक समस्या नहीं, बल्कि एक संसाधन मानता है।

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2005 (NCF 2005) बच्चे की मातृभाषा को प्रारंभिक वर्षों में शिक्षण के माध्यम के रूप में इस्तेमाल करने की दृढ़ता से अनुशंसा करती है। तर्क संज्ञानात्मक और भावनात्मक दोनों हैं: जब बच्चे अपनी पहली भाषा में सोचते और सीखते हैं, तो संज्ञानात्मक भार कम होता है, और जब विद्यालय उनकी घर की भाषा को मान देता है, तो भावनात्मक सुरक्षा अधिक होती है। L1 में सीखी गई अवधारणाएँ बाद में L2 में स्थानांतरित की जा सकती हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) इस प्रतिबद्धता को और आगे ले जाती है — यह कम से कम कक्षा 5 तक, और जहाँ संभव हो कक्षा 8 तक, मातृभाषा (या गृह-भाषा) को शिक्षण के माध्यम के रूप में उपयोग की सिफारिश करती है।

कक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण शैक्षिक निहितार्थ:

  • भाषा-मिश्रण (code-switching) — वाक्य के बीच में भाषाएँ बदलना — एक स्वाभाविक, संज्ञानात्मक रूप से परिष्कृत व्यवहार है। शिक्षकों को इसे आलस्य या भाषाई अशुद्धता नहीं मानना चाहिए।
  • जो बच्चा द्वितीय भाषा में धीमा लगता है, वह अपनी पहली भाषा में पूरी तरह सक्षम हो सकता है। समस्या माध्यम में है, दिमाग में नहीं।
  • शिक्षक पुल बना सकते हैं: अवधारणा बच्चे की मज़बूत भाषा में प्रस्तुत करें, फिर धीरे-धीरे L2 शब्दावली साथ में जोड़ें।
परीक्षा-संकेत: NCF 2005 की बहुभाषी नीति पर प्रश्न बार-बार आते हैं। याद रखें: मातृभाषा माध्यम → कम संज्ञानात्मक भार → बेहतर अवधारणात्मक विकास। NEP 2020 कम से कम कक्षा 5 (आदर्शतः कक्षा 8) तक मातृभाषा माध्यम की अनुशंसा करती है।

CTET परीक्षा फोकस

भाषा और विचार CDP के सबसे अधिक पूछे जाने वाले विषयों में से एक है। प्रश्न सिद्धांत, अवस्थाओं और नीति — तीनों पर आते हैं।

  • पियाजे बनाम वाइगोत्स्की: पियाजे — विचार → भाषा; अहंकेंद्रित वाणी संज्ञानात्मक सीमा है। वाइगोत्स्की — भाषा → विचार (2 वर्ष के बाद); आत्म-संवाद संज्ञानात्मक उपकरण है जो आंतरिक भाषण बन जाता है।
  • चॉम्स्की का LAD: जन्मजात भाषा अर्जन युक्ति; सार्वभौमिक व्याकरण; यही कारण है कि सभी बच्चे एक ही अवस्थाओं में भाषा अर्जित करते हैं। संवेदनशील अवधि — यदि चूक जाए (वन्य बच्चे), पूर्ण अर्जन संभव नहीं।
  • स्किनर: पुनर्बलन और अनुकरण द्वारा भाषा अर्जन (व्यवहारवादी)।
  • व्होर्फ-सैपिर: दुर्बल रूप व्यापक रूप से स्वीकृत — भाषा विचार को प्रभावित करती है। प्रबल रूप (भाषाई नियतत्ववाद) अस्वीकृत।
  • अवस्थाएँ: बैबलिंग → एक-शब्द → दो-शब्द → तार-भाषा → जटिल वाक्य। तार-भाषा = केवल सार्थक शब्द, कोई सहायक शब्द नहीं। भाषाई जागरूकता ≈ 7 वर्ष।
  • मातृभाषा नीति: NCF 2005 और NEP 2020 दोनों प्रारंभिक शिक्षा में L1 माध्यम की अनुशंसा करते हैं। भाषा-मिश्रण स्वाभाविक और संज्ञानात्मक रूप से स्वस्थ है।
सबसे अधिक पूछे जाने वाले प्रश्न: "LAD का प्रस्ताव किसने दिया?" (चॉम्स्की) — "निजी वाणी वयस्कों में क्या बन जाती है?" (आंतरिक भाषण) — "तार-भाषा का अर्थ है" (केवल सार्थक शब्द) — "मातृभाषा शिक्षण की अनुशंसा किस नीति में?" (NCF 2005, NEP 2020)।

अभ्यास प्रश्न

Q1. भाषा के अर्जन एवं विकास के लिए सर्वाधिक संवेदनशील अवधि कौन सी है ?

  • जन्म पूर्व अवधि
  • प्रारम्भिक बाल्यावस्था
  • मध्य बाल्यावस्था
  • किशोरावस्था

व्याख्या: भाषा अर्जन के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण काल शैशवावस्था/प्रारंभिक बचपन है — यह वह संवेदनशील अवधि है जब मस्तिष्क के भाषाई क्षेत्र सर्वाधिक लचीले होते हैं। इस अवधि में भाषाई इनपुट से वंचित बच्चे बाद में पुनर्वास के बावजूद पूर्ण भाषा अर्जित नहीं कर पाते। स्रोत: NIOS 503, ब्लॉक 1, इकाई 3, §3.2.1।

स्रोत: CTET Dec 2019 Paper 1 Q1

Q2. लेव वायगोत्स्की के अनुसार :

  • सामाजिक कारक भाषा विकास को प्रभावित करते हैं, परंतु संज्ञानात्मक विकास को नहीं ।
  • संज्ञानात्मक विकास, भाषा विकास को सुगम बनाता है ।
  • भाषा विकास और संज्ञानात्मक विकास एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से विकसित होते हैं ।
  • भाषा विकास, संज्ञानात्मक विकास को सुगम बनाता है ।

व्याख्या: वाइगोत्स्की के अनुसार भाषा और विचार के अलग-अलग मूल हैं, किंतु लगभग 2 वर्ष की आयु में वे मिलते हैं। उस संगम से पहले, संज्ञानात्मक विकास (क्रिया-आधारित, गैर-भाषाई विचार) भाषा विकास की नींव तैयार करता है। स्रोत: NIOS 502, BES-123 ब्लॉक 1।

स्रोत: CTET Aug 2023 Paper 1 Q5

Q3. किस आयु में बच्चे शब्दों के खेल में शामिल हो सकते हैं और ऐसे चुटकुले और पहेलियों को पसंद कर सकते हैं जिनमें शब्दों का खेल शामिल हो ?

  • बारह वर्ष
  • एक वर्ष
  • तीन वर्ष
  • सात वर्ष

व्याख्या: भाषाई जागरूकता (metalinguistic awareness) — भाषा को विचार की वस्तु के रूप में देखने और उससे खेलने की क्षमता, जो श्लेष और पहेलियाँ समझने में सहायक है — सामान्यतः लगभग 7 वर्ष की आयु में विकसित होती है (पियाजे की मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था)। स्रोत: NIOS 503, ब्लॉक 1, इकाई 1।

स्रोत: CTET Aug 2023 Paper 1 Q9

Q4. जंगली बच्चे जिन्होंने बहुत कम उम्र से ही गंभीर / मानवीय सामाजिक अभाव का अनुभव किया है, आमतौर पर उनके विकास में देरी या बाधा उत्पन्न होती है और पुनर्वास के बावजूद विकास के कुछ क्षेत्रों में सुधार अधीनस्थ रहने की संभावना है । यह अवधि जिसमें विकास पर्यावरणीय समर्थन से महत्त्वपूर्ण रूप से प्रभावित होता है, _____ कहलाती है ।

  • निगमनात्मक अवधि
  • सहज काल
  • मूल काल
  • संवेदनशील अवधि

व्याख्या: "संवेदनशील अवधि" (sensitive period) वह खिड़की है जब मस्तिष्क भाषाई आगत के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील होता है। वन्य बच्चों (feral children) के अध्ययन — जो बचपन में मानव भाषा के संपर्क से वंचित रहे — यह दर्शाते हैं कि इस अवधि के चूकने पर पुनर्वास के बाद भी भाषा विकास गंभीर रूप से सीमित रहता है। स्रोत: NIOS 503, ब्लॉक 1, इकाई 3, §3.2.1।

स्रोत: CTET Jul 2024 Paper 1 Q21

Q5. प्राथमिक कक्षाओं में भाषा का विकास किस प्रकार सरल बनाया जाता है ?

  • जब शिक्षक अमूर्त अवधारणाओं को संदर्भित करने के लिए ठोस उदाहरणों का उपयोग करते हैं ।
  • जब शिक्षक औपचारिक भाषा के प्रयोग पर ज़ोर देते हैं और उसे लागू करते हैं ।
  • जब शिक्षक बच्चों की मातृभाषा की अवहेलना और उपेक्षा करते हैं ।
  • जब शिक्षक मूर्त वस्तुओं के बजाय संकेतों और प्रतीकों से शुरू करते हैं ।

व्याख्या: भाषा विकास अर्थ-निर्माण पर आधारित है, रटने पर नहीं। ठोस उदाहरण अमूर्त शब्दावली को अनुभव से जोड़ते हैं — यह क्रेशन की बोधगम्य आगत परिकल्पना और NCF 2005 की अवधारणात्मक समझ को प्राथमिकता देने की सोच के अनुरूप है। स्रोत: NIOS 503, ब्लॉक 1, इकाई 3, §3.2.2।

स्रोत: CTET Jan 2024 Paper 1 Q24