बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र · CTET नोट्स

अधिगम कठिनाई एवं अक्षमता वाले बच्चे

प्रत्येक कक्षा में कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जिन्हें सीखने में कठिनाई होती है — परंतु उसके कारण बहुत भिन्न होते हैं। कुछ बच्चों को अधिगम कठिनाई (Learning Difficulty) होती है — जो बाहरी कारणों जैसे गरीबी, अनुपस्थिति, भाषा असंगति, या भावनात्मक तनाव से उत्पन्न होती है। दूसरी ओर, अधिगम अक्षमता (Learning Disability) एक तंत्रिका-संज्ञानात्मक स्थिति है जिसमें बच्चे की बुद्धि सामान्य या उससे अधिक होती है, फिर भी वह किसी विशेष क्षेत्र में गंभीर कठिनाई अनुभव करता है।

NIOS 506 खंड-3, इकाई 8 इन्हें विशेष जरूरत वाले बच्चे (CWSN) की व्यापक छतरी के अंतर्गत रखता है — जिसमें दृष्टि, श्रवण, गति, संज्ञान, विशिष्ट अधिगम अक्षमता, संवेगात्मक विकार और बहु-विकलांगता शामिल हैं। RPWD अधिनियम 2016 इन्हें 21 श्रेणियों में कानूनी मान्यता देता है। शिक्षक का कार्य निदान करना नहीं, बल्कि सावधानीपूर्वक अवलोकन करना, अनुकूलित शिक्षण देना और उचित विशेषज्ञ के पास भेजना है। साथ ही, बच्चे की गरिमा की रक्षा करना और उसे कक्षा में कलंक से बचाना भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है।

CDP-16 · Learning Difficulties

अधिगम कठिनाई और अधिगम अक्षमता — अंतर

CTET परीक्षाएँ इन दोनों पदों के बीच स्पष्ट अंतर करती हैं।

अधिगम कठिनाई (Learning Difficulty) — कोई भी बाधा जो बच्चे के सीखने को कठिन बनाए। कारण बाहरी हो सकते हैं: गरीबी, अनियमित उपस्थिति, शिक्षण माध्यम की समस्या, भावनात्मक तनाव, कुपोषण। यह प्रायः परिस्थितिजन्य और परिवर्तनीय होती है।

अधिगम अक्षमता (Learning Disability) — एक तंत्रिका-संज्ञानात्मक विकार जो श्रवण, दृश्य या स्थानिक सूचना के प्रसंस्करण में महत्त्वपूर्ण कठिनाई उत्पन्न करता है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ:

  • सामान्य या उससे अधिक बुद्धिलब्धि (IQ की समस्या नहीं)।
  • पर्याप्त शिक्षण के बावजूद किसी एक विशेष क्षेत्र में गंभीर कठिनाई।
  • बौद्धिक क्षमता और शैक्षणिक उपलब्धि के बीच स्पष्ट अंतराल।
  • संवेदी अक्षमता, बौद्धिक अक्षमता, या पर्यावरणीय कारकों से प्राथमिक रूप से उत्पन्न नहीं।

भारत के संदर्भ में यह अंतर और भी महत्त्वपूर्ण है। जब कोई बच्चा पहली पीढ़ी का शिक्षार्थी है, घर में हिंदी बोलता है लेकिन विद्यालय में अंग्रेजी माध्यम है, या कुपोषण से ग्रस्त है — ये सभी अधिगम कठिनाइयाँ हैं जिनका समाधान पर्यावरण और शिक्षण में बदलाव से हो सकता है। इन्हें अधिगम अक्षमता मानकर बच्चे को लेबल करना अन्यायपूर्ण और अशैक्षणिक है।

WHO की वर्तमान परिभाषा 'कठिनाई' की भाषा अपनाती है — देखने में कठिनाई, सुनने में कठिनाई, सीखने में कठिनाई — ताकि कलंक से बचा जा सके। RPWD 2016 में 'विशिष्ट अधिगम अक्षमता' (SLD) को 21 श्रेणियों में से एक के रूप में कानूनी मान्यता दी गई है।

विशिष्ट अधिगम अक्षमताएँ (SLD)

SLD उन स्थितियों का समूह है जो विशेष शैक्षणिक कौशलों को प्रभावित करती हैं। CTET में सर्वाधिक परीक्षित तीन प्रकार:

अक्षमताप्रभावित क्षेत्रप्रमुख लक्षण
डिस्लेक्सियापठन (Reading)धीमा और अशुद्ध पठन; अक्षर उलटना (ब/द, प/क); ध्वन्यात्मक जागरूकता की कमी; वर्तनी त्रुटियाँ
डिस्कैल्कुलियागणित (Mathematics)संख्या-बोध की कमी; अंकगणितीय तथ्य याद न रखना; क्रम भटकाना
डिस्ग्राफियालेखन (Writing)अस्पष्ट हस्तलेख; बहुत धीमा लेखन; अक्षर छोड़ना या पलटना; कागज पर व्यवस्था की समस्या

डिस्प्रेक्सिया गति-समन्वय को प्रभावित करता है — लिखावट और ठीन मोटर कौशल पर भी इसका असर पड़ता है।

इन अक्षमताओं वाले बच्चों की बुद्धि सामान्य या उससे अधिक होती है। ये बच्चे 'आलसी' या 'बुद्धू' नहीं हैं — उनका मस्तिष्क एक विशेष तरीके से कार्य करता है।

शिक्षण रणनीतियाँ

  • डिस्लेक्सिया: ध्वनि-आधारित शिक्षण (Phonics), बहु-संवेदी विधि (बालू में अक्षर बनाना, श्रव्य पुनर्भरण), ऑडियोबुक, अतिरिक्त समय।
  • डिस्कैल्कुलिया: मूर्त सामग्री → चित्र → अमूर्त (CPA क्रम), संख्या-रेखा, ग्राफ पेपर।
  • डिस्ग्राफिया: कीबोर्ड/टाइपिंग का विकल्प, वाक्-से-पाठ (Speech-to-text), नकल लिखने का भार कम करें।

महत्त्वपूर्ण: CTET परिदृश्य-आधारित प्रश्नों में परिभाषा नहीं, लक्षण पहचान परखी जाती है। जैसे: 'राहुल कक्षा 3 में है, अच्छा बोलता है, लेकिन पढ़ने में 'ब' और 'द' को बार-बार उलटाता है, शब्दों को अक्षर-दर-अक्षर पढ़ता है, और वर्तनी में लगातार गलतियाँ करता है' — यह डिस्लेक्सिया है, बौद्धिक अक्षमता नहीं। डिस्कैल्कुलिया में बच्चा संख्याओं से, डिस्ग्राफिया में लिखावट से संघर्ष करता है।

ADHD और स्वलीनता वर्णक्रम विकार (ASD)

CTET में बार-बार परीक्षित दो अन्य स्थितियाँ — ADHD और ASD — जिन्हें अक्सर एक-दूसरे से और जानबूझकर दुर्व्यवहार से भ्रमित किया जाता है।

ADHD (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर)

ADHD में असावधानी, अतिसक्रियता, और/या आवेगशीलता के स्थायी प्रतिरूप होते हैं। तीन उपप्रकार:

  • मुख्यतः असावधान — आसानी से विचलित, निर्देश भूलता है।
  • मुख्यतः अतिसक्रिय-आवेगशील — बेचैनी, सीट छोड़ना, बिना सोचे कार्य करना।
  • मिश्रित प्रकार — दोनों विशेषताएँ।

ADHD वाला बच्चा 'शरारती' नहीं है — उसके मस्तिष्क की कार्यकारी प्रणाली (नियोजन, अवरोध, कार्यकारी स्मृति) तंत्रिका-विज्ञान के स्तर पर प्रभावित है। CTET Q19 (2018): अतिसक्रिय बच्चों को बेचैनी के लिए डाँटना उचित नहीं है।

ADHD के लिए रणनीतियाँ: गतिविधि-विराम, छोटे खंडित कार्य, शिक्षक के पास बैठना, नियमित दिनचर्या, सकारात्मक प्रतिपुष्टि।

स्वलीनता वर्णक्रम विकार (ASD)

ASD की विशेषताएँ:

  • सामाजिक संचार में कठिनाई (चेहरे के भाव, व्यंग्य, सामाजिक संकेत पढ़ने में कठिनाई)।
  • प्रतिबंधित, पुनरावर्ती व्यवहार — एकरसता पर जोर, इकोलालिया (सुनी बातें दोहराना), संकीर्ण रुचियाँ। यह CTET में सर्वाधिक परीक्षित लक्षण है।
  • संवेदी संवेदनशीलता — ध्वनि, प्रकाश, बनावट के प्रति अति या न्यून संवेदनशीलता।

ASD एक वर्णक्रम है — कुछ बच्चों को गहन सहायता की आवश्यकता है, कुछ उच्च बुद्धि के साथ सामाजिक-संचार में कठिनाई अनुभव करते हैं।

ASD के लिए रणनीतियाँ: दृश्य दिनचर्या-चार्ट, पूर्वानुमेय क्रम, स्पष्ट शाब्दिक भाषा, शांत कोना, संक्रमण से पहले पूर्व सूचना।

यह भी ध्यान रखें: ASD वाले कुछ बच्चों में असाधारण स्मरण शक्ति, संगीत, गणित या तकनीक में विशेष प्रतिभा होती है। समावेशी शिक्षक इन शक्तियों को पहचानकर बच्चे का आत्म-विश्वास बनाता है।

CTET प्रश्न: 'एक बच्चा वाक्यांश दोहराता है, सामाजिक संपर्क में कठिनाई है, और पुनरावर्ती व्यवहार दिखाता है' → उत्तर: ASD।

बौद्धिक, संवेदी एवं शारीरिक अक्षमताएँ

NIOS 506 इकाई 8 में विशेष जरूरत वाले बच्चों की व्यापक श्रेणियाँ शामिल हैं।

बौद्धिक/संज्ञानात्मक अक्षमता

18 वर्ष की आयु से पहले, बुद्धिलब्धि लगभग 70 या उससे कम (औसत से दो मानक विचलन कम) और अनुकूली व्यवहार में महत्त्वपूर्ण सीमाएँ। चार स्तर: मृदु (IQ 50–70), मध्यम (35–49), गंभीर (20–34), गहन (20 से कम)। मृदु बौद्धिक अक्षमता वाले बच्चे नियमित कक्षा में विभेदित शिक्षण से सीख सकते हैं। 'मानसिक मंदता' की जगह अब व्यक्ति-प्रथम भाषा का उपयोग होता है।

श्रवण वाधिता

आंशिक से लेकर पूर्ण बधिरता तक। बच्चे भाषा सीखने में अधिक समय लगाते हैं — शिक्षक को दृश्य सहायता, सांकेतिक भाषा सहयोग, और बोलते समय बच्चे के सामने होना आवश्यक है।

दृष्टि वाधिता

कानूनी रूप से अंध: सुधार के बाद भी दृश्य तीक्ष्णता 20/200 या उससे कम। रणनीतियाँ: ब्रेल, बड़े अक्षरों वाली सामग्री, श्रव्य विवरण, स्पर्शनीय मॉडल। विटामिन A की कमी एक निवारणीय कारण है।

गति/लोकोमोटर अक्षमता एवं सेरेब्रल पाल्सी

गति और मुद्रा का विकार। सेरेब्रल पाल्सी (जन्म से पहले/दौरान/बाद में मस्तिष्क की क्षति से) अक्सर दृश्य, श्रवण, संज्ञानात्मक और भाषायी कठिनाइयों के साथ आती है। कक्षा में: सुलभ बैठक, सहायक उपकरण, हस्तलेखन के विकल्प।

बहु-विकलांगता

जब दो या अधिक अक्षमताएँ एक साथ हों (जैसे बधिर-अंध), तो एकल-अक्षमता की रणनीतियाँ पर्याप्त नहीं होतीं। IEP सहयोगात्मक रूप से बनाना अनिवार्य है।

RPWD अधिनियम 2016 — कानूनी ढाँचा

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 (RPWD 2016) ने 1995 के पुराने PWD अधिनियम को प्रतिस्थापित किया। CTET CDP प्रश्नों में यह सर्वाधिक उद्धृत कानून है।

मुख्य परिवर्तन: 7 से 21 श्रेणियाँ

1995 का अधिनियम केवल 7 श्रेणियाँ मानता था। RPWD 2016 ने इन्हें 21 श्रेणियों तक विस्तारित किया, जिनमें शामिल हैं:

  • अंधापन, अल्प दृष्टि
  • बधिरता, श्रवण-बाधिता
  • गति अक्षमता, सेरेब्रल पाल्सी
  • बौद्धिक अक्षमता, विशिष्ट अधिगम अक्षमता (डिस्लेक्सिया, डिस्कैल्कुलिया, डिस्ग्राफिया)
  • मानसिक बीमारी, स्वलीनता वर्णक्रम विकार
  • बहुविकलांगता, पार्किंसन रोग, थैलेसीमिया आदि

CTET में हमेशा 21 श्रेणियाँ उत्तर दें — 7 नहीं (वह 1995 का आँकड़ा है)।

RPWD 2016 के तहत शैक्षणिक अधिकार

  • 18 वर्ष तक पड़ोसी विद्यालय में निःशुल्क समावेशी शिक्षा।
  • उचित समायोजन और बाधारहित पहुँच का अधिकार।
  • मानक अक्षमता वाले बच्चों के लिए IEP अनिवार्य।
  • विद्यालय विकलांगता के आधार पर प्रवेश अस्वीकार नहीं कर सकता।

RTE अधिनियम 2009 और विकलांगता: RTE 2009 सभी बच्चों के लिए 6–14 वर्ष तक निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित करता है — विकलांग बच्चे भी इसमें शामिल हैं। पड़ोसी विद्यालय प्रवेश से इनकार नहीं कर सकता। NEP 2020 विकलांग बच्चों के लिए 'सुदृढ़ समावेशी प्रणाली' और शिक्षक-प्रशिक्षण में समावेशी शिक्षाशास्त्र अनिवार्य करने की सिफारिश करती है।

मानक अक्षमता: RPWD 2016 के अंतर्गत कम से कम 40% निर्दिष्ट अक्षमता — आरक्षण और अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता के पात्र।

शीघ्र पहचान — शिक्षक की भूमिका

NIOS 506 इकाई 8 स्पष्ट करती है: शिक्षक अवलोकन करता है और रेफर करता है — निदान नहीं करता। निदान योग्य विशेषज्ञों — मनोवैज्ञानिक, विशेष शिक्षक, चिकित्सक — का कार्य है।

शिक्षक को क्या करना चाहिए

  1. समय के साथ अवलोकन करें — एक खराब परीक्षा अक्षमता नहीं है। यदि कोई बच्चा हफ्तों तक विभिन्न कार्यों में लगातार पढ़ने में संघर्ष करता है, तभी जाँच की आवश्यकता है।
  2. विशिष्ट रूप से दस्तावेजीकरण करें — 'कक्षा में संघर्ष' नहीं, बल्कि 'ब/द/प/क अक्षरों में भ्रम; अक्षरांश-दर-अक्षरांश पढ़ता है; मौखिक समझ सही है।'
  3. परामर्श करें और रेफर करें — माता-पिता से घर का इतिहास, विकास-संबंधी जानकारी लें। विशेष शिक्षक या परामर्शदाता के पास भेजें।

ध्यान देने योग्य संकेत

क्षेत्रअवलोकनीय संकेत
पठनधीमी गति, अक्षर उलटना, ज़ोर से पढ़ने से बचना
लेखनअस्पष्ट अक्षर, दर्पण लेखन, जल्दी थकना
गणितकक्षा 2 के बाद भी उँगलियों पर गिनती, क्रम भटकाना
ध्यानबेचैनी, बार-बार विचलित, आवेगशील प्रतिक्रियाएँ
सामाजिक-संचारनजर न मिलाना, सामाजिक संकेत न पढ़ पाना, इकोलालिया

शिक्षक को क्या नहीं करना चाहिए: बच्चे को सार्वजनिक रूप से लेबल न करें ('यह बच्चा पढ़ नहीं सकता'); माता-पिता के सामने अन्य बच्चों से तुलना न करें; बच्चे की कठिनाई को आलस्य या अनुशासनहीनता न मानें। कलंक और भय अधिगम के सबसे बड़े शत्रु हैं।

लक्ष्य है प्रारंभिक हस्तक्षेप — प्रारंभिक बचपन में तंत्रिका लचीलापन (Neural Plasticity) सर्वाधिक होता है। जितना जल्दी सहायता मिले, उतना बेहतर परिणाम।

विविध शिक्षार्थियों के लिए शिक्षण रणनीतियाँ

अधिगम कठिनाई वाले बच्चों को अलग कक्षा की नहीं, बल्कि समावेशी कक्षा में विभेदित और बहु-साधन शिक्षण की आवश्यकता है।

सार्वभौम रणनीतियाँ

  • बहु-संवेदी शिक्षण — दृश्य, श्रव्य और गतिज चैनलों को एक साथ सक्रिय करें। डिस्लेक्सिया वाले बच्चों के लिए अक्षर बनाते समय उनकी ध्वनि बोलना विशेष रूप से लाभकारी है।
  • छोटे, संरचित कार्य — स्पष्ट निर्देशों के साथ छोटे खंडों में पाठ विभाजित करें।
  • दृश्य सहायता — ग्राफिक आयोजक, चित्र-अनुसूची, अवधारणा मानचित्र।
  • लचीला मूल्यांकन — मौखिक उत्तर, प्रस्तुति, चित्रांकन या पोर्टफोलियो।
  • अतिरिक्त समय और नकल में कमी — डिस्ग्राफिया और धीमी प्रसंस्करण गति वाले बच्चों के लिए महत्त्वपूर्ण।

सहायक प्रौद्योगिकी (Assistive Technology)

RPWD 2016 और NEP 2020 दोनों सहायक प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रोत्साहित करते हैं। इसमें शामिल हैं: ब्रेल उपकरण, स्क्रीन रीडर, श्रवण यंत्र, स्पीच-टू-टेक्स्ट सॉफ्टवेयर, बड़े अक्षरों वाली सामग्री। ये उपकरण बच्चों को स्वायत्त रूप से सीखने में सहायता देते हैं।

व्यक्तिगत शिक्षा योजना (IEP)

IEP एक लिखित योजना है जो कक्षा शिक्षक, विशेष शिक्षक, माता-पिता और (जहाँ संभव हो) बच्चे के साथ सहयोगात्मक रूप से बनाई जाती है। इसमें शामिल होते हैं:

  • वर्तमान प्रदर्शन स्तर।
  • वार्षिक लक्ष्य और अल्पकालिक उद्देश्य।
  • विशिष्ट समायोजन और संशोधन।
  • सेवाएँ और सहायता।
  • समीक्षा की समय-सीमा।

CTET परीक्षण: IEP सक्रिय रूप से तैयार करना शिक्षक की जिम्मेदारी है — इसे पूरी तरह विशेषज्ञों पर नहीं छोड़ा जा सकता।

क्या नहीं करना चाहिए

  • ADHD में बेचैनी के लिए दंड न दें — यह तंत्रिकीय है, जानबूझकर नहीं।
  • बच्चे को ज़बरदस्ती कक्षा में ज़ोर से पढ़वाने पर मजबूर न करें।
  • केवल बाहरी पुरस्कार न दें — आंतरिक अभिप्रेरणा विकसित करें।

CTET परीक्षा फोकस

CDP-16 से प्रत्येक CTET Paper 1 में लगभग 2–3 प्रश्न आते हैं। मुख्य प्रतिरूप:

  • परिदृश्य से अक्षमता पहचानें: 'एक बच्चा जो धाराप्रवाह पढ़ने में कठिनाई महसूस करता है, अक्षर उलटाता है, और मौखिक समझ अच्छी है' → डिस्लेक्सिया।
  • डिस्ग्राफिया की परिभाषा: अक्षर और आकृतियाँ बनाने में कठिनाई वाला तंत्रिकीय विकार (2023 Aug, Q1)। यह वाक् विकार नहीं है।
  • ASD की पहचान: बार-बार पुनरावर्ती व्यवहार (2023 Aug, Q26)। ASD वाले बच्चे में उन्नत सामाजिक-संवेगात्मक पारस्परिकता नहीं होती — यह इसके विपरीत है।
  • ADHD — क्या न करें: अतिसक्रिय बच्चों को बेचैनी के लिए बार-बार डाँटना (2018 Dec, Q19)। सही रणनीतियाँ हैं — गतिविधि-विराम, खंडित कार्य, वैकल्पिक अधिगम विधियाँ।
  • RPWD 2016: 21 श्रेणियाँ (1995 का अधिनियम: 7 श्रेणियाँ)।
  • शिक्षक की भूमिका: अवलोकन करें, दस्तावेजीकरण करें, रेफर करें — कभी निदान या स्थायी लेबल न दें।
  • IEP: शिक्षक, विशेष शिक्षक और माता-पिता मिलकर बनाते हैं।

एक और महत्त्वपूर्ण बिंदु: CTET प्रायः पूछता है कि 'अधिगम कठिनाई वाले बच्चों की मदद के लिए शिक्षक को क्या नहीं करना चाहिए?' (2021 Jan, Q15) — उत्तर है: शिक्षाशास्त्र और मूल्यांकन के लिए कठोर संरचनाएँ अपनाना। सही उत्तर हमेशा वह होता है जो लचीलापन, व्यक्तिगत योजना, और बहु-साधन पद्धति को दर्शाए।

विकर्षक विकल्प प्रायः अच्छे समावेशी अभ्यास के विपरीत होते हैं — कठोर ढाँचा, बच्चे को दोष देना, एक अक्षमता को दूसरे से भ्रमित करना। वह उत्तर चुनें जो मनोवैज्ञानिक रूप से सुरक्षित, अवलोकन-आधारित, रणनीति-समृद्ध कक्षा को दर्शाए।

अभ्यास प्रश्न

Q1. 'पठनवैकल्य' बच्चों के प्राथमिक लक्षण क्या हैं ?

  • न्यून-अवधान विकार ।
  • अपसारी चिंतन; पढ़ने में धाराप्रवाहिता ।
  • धाराप्रवाह पढ़ने की अक्षमता ।
  • एक ही गतिविषयक कार्य को बार-बार दोहराना ।

व्याख्या: डिस्लेक्सिया की प्राथमिक विशेषता है — पठन में प्रवाह और शुद्धता की कमी। मौखिक समझ ठीक हो सकती है, लेकिन लिखित पाठ को डीकोड करने में गंभीर कठिनाई होती है।

स्रोत: 2019_Dec_P1_Q15

Q2. अधिगम कठिनाइयों से जूझते छात्रों की ज़रूरतों को संबोधित करने के लिए, एक अध्यापक को क्या नहीं करना चाहिए ?

  • दृश्य-श्रव्य सामग्रियों का इस्तेमाल ।
  • संरचनात्मक शिक्षाशास्त्रीय उपागमों का इस्तेमाल ।
  • व्यक्तिगत शैक्षिक योजना बनाना ।
  • शिक्षाशास्त्र और आकलन की जटिल संरचनाओं का प्रयोग ।

व्याख्या: अधिगम कठिनाई वाले छात्रों के लिए कठोर संरचनाएँ अनुपयुक्त हैं। प्रभावी रणनीतियाँ हैं — बहु-संवेदी विधियाँ, IEP, और लचीला मूल्यांकन।

स्रोत: 2021_Jan_P1_Q15

Q3. डिसग्राफिया :

  • एक भाषण विकार है जिसकी विशेषता हकलाना और उच्चारण में त्रुटियाँ करना है ।
  • एक गतिपूर्ण विकार है जिसकी विशेषता स्थूल पेशीय बाधिता है ।
  • एक तंत्रिकीय विकार है जिसकी विशेषता अक्षरों और आकारों को बनाने में कठिनाई है ।
  • एक मनोवैज्ञानिक विकार है जिसकी विशेषता ध्यान का अभाव और आवेगपूर्ण व्यवहार है ।

व्याख्या: डिस्ग्राफिया एक तंत्रिकीय विकार है जो अक्षर और आकृतियाँ बनाने में कठिनाई से परिभाषित होता है। यह वाक् विकार नहीं है।

स्रोत: 2023_Aug_P1_Q1

Q4. निम्नलिखित में से स्वलीनता वाले विद्यार्थियों की विशिष्ट विशेषता कौन-सी है ?

  • कल्पना को तथ्य से अलग करने की श्रेष्ठ क्षमता
  • उन्नत सामाजिक-भावनात्मक पारस्परिकता
  • बार-बार दोहराव और आवर्ती व्यवहार
  • संवाद कौशलों का उच्च स्तर

व्याख्या: पुनरावर्ती और दोहराव वाला व्यवहार ASD की परिभाषित विशेषता है। सामाजिक-संवेगात्मक पारस्परिकता ASD में उन्नत नहीं, बल्कि बाधित होती है।

स्रोत: 2023_Aug_P1_Q26

Q5. अतिसंवेदनशील बच्चों को सीखने में मदद करने के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा तरीका उपयुक्त तरीका नहीं है?

  • एक कार्य को छोटे, प्रबंधनीय खंडों में तोड़ना
  • अधिगम के वैकल्पिक तरीकों की पेशकश
  • उनके दैनिक कार्यक्रम में शारीरिक गतिविधि का समावेश
  • बेचैन होने के अक्सर उन्हें फटकार लगाना

व्याख्या: अतिसक्रिय बच्चों को बेचैनी के लिए बार-बार डाँटना उचित नहीं — उनकी अतिसक्रियता तंत्रिका-जैविक है, स्वैच्छिक नहीं। कार्य विभाजन, गति-विराम और वैकल्पिक विधियाँ उचित हैं।

स्रोत: 2018_Dec_P1_Q19