बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र · CTET नोट्स

अभिप्रेरणा और अधिगम

एक बच्चा विज्ञान प्रयोग में घंटों घुला रहता है; दूसरा उसी पाठ में निष्क्रिय बैठा है — दोनों में अंतर है अभिप्रेरणा का। यह वह शक्ति है जो व्यवहार को आरंभ करती है, दिशा देती है और बनाए रखती है। CTET बार-बार परखता है: आंतरिक अभिप्रेरणा (वास्तविक जिज्ञासा और सीखने का प्रेम) बनाम बाह्य अभिप्रेरणा (पुरस्कार, दंड, बाह्य मूल्यांकन)। शोध का निष्कर्ष जो NCF 2005 की हर सिफारिश को आकार देता है: अत्यधिक बाह्य पुरस्कार वह आंतरिक प्रेरणा ही नष्ट कर देते हैं जिसे वे बढ़ावा देना चाहते हैं। विकास मानसिकता, आत्म-प्रभावकारिता, और महारत-लक्ष्य मिलकर वह आधार बनाते हैं जिस पर दीर्घकालिक शैक्षणिक उपलब्धि टिकती है।

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अभिप्रेरणा क्या है? परिभाषा और घटक

अभिप्रेरणा एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है जो व्यवहार को सक्रिय करती है, दिशा देती है और बनाए रखती है। IGNOU BES-123 (खंड 2, इकाई 7, अनुभाग 7.4) इसे परिभाषित करती है: शैक्षणिक गतिविधियों को अर्थपूर्ण और सार्थक पाने की प्रवृत्ति, तथा उनसे अभिप्रेत शैक्षणिक लाभ प्राप्त करने का प्रयास।

तीन घटक

  • उत्तेजना (Arousal): व्यवहार को प्रारंभ करने वाली ऊर्जा — 'क्यों करें?' का उत्तर
  • दिशा (Direction): व्यवहार किस लक्ष्य की ओर है — महारत, शिक्षक की स्वीकृति, या दंड से बचाव
  • दृढ़ता (Persistence): कठिनाई के सामने भी प्रयास कितने समय तक जारी रहे

महत्त्वपूर्ण: अभिप्रेरणा सीधे देखी नहीं जाती — व्यवहार से अनुमानित की जाती है। CTET 2018 दिसंबर P1 Q28: प्रेरित बच्चे वे हैं जो स्पष्टीकरण के लिए प्रश्न पूछते हैं — न केवल उपस्थित रहते हैं, वर्दी पहनते हैं, या अनुशासन बनाए रखते हैं। ये अनुपालन व्यवहार हैं — भय का परिणाम, प्रेरणा का नहीं।

आंतरिक अभिप्रेरणा: रुचि, जिज्ञासा और सीखने की सहज संतुष्टि से प्रेरित — गतिविधि स्वयं पुरस्कार है। बाह्य अभिप्रेरणा: बाह्य परिणामों से प्रेरित — अंक, सितारे, प्रशंसा, पुरस्कार, या दंड से बचाव।

वास्तविक प्रश्न पूछना यह दर्शाता है कि बच्चा नई जानकारी को पूर्व-ज्ञान से मिला रहा है, अंतराल पहचान रहा है, और समाधान खोज रहा है। यह वही संज्ञानात्मक व्यवहार है जो दीर्घकालिक अधिगम उत्पन्न करता है। चुप, अनुपालनशील विद्यार्थियों से भरी कक्षा 'अनुशासित' दिख सकती है पर प्रेरणात्मक विफलता दर्शाती है — बौद्धिक जिज्ञासा का अभाव। वास्तविक अभिप्रेरणा हमेशा संलग्नता की गुणवत्ता में दिखती है — बाह्य अनुपालन में नहीं।

IGNOU BES-123 Block 2 Section 7.4: अभिप्रेरणा तीन मुख्य स्रोतों से आती है — आवश्यकताएँ (needs: जो बच्चे को चाहिए), अंतर्नोद (drives: आंतरिक तनाव जो व्यवहार को प्रेरित करता है), और प्रोत्साहन (incentives: बाह्य लक्ष्य जो व्यवहार को आकर्षित करते हैं)।

आंतरिक बनाम बाह्य अभिप्रेरणा: अति-औचित्य प्रभाव

शिक्षकों के लिए अभिप्रेरणा शोध का सबसे महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष है अति-औचित्य प्रभाव (Lepper, Greene & Nisbett, 1973): जब लोगों को पहले से आनंददायक गतिविधियों के लिए बाह्य पुरस्कार दिए जाते हैं, तो आंतरिक प्रेरणा घट जाती है। वे अपनी संलग्नता का कारण पुरस्कार को मानने लगते हैं।

पुरस्कार अधिगम को कमज़ोर क्यों करते हैं

  • बच्चे संलग्नता का कारण बदल देते हैं: 'मैं पढ़ता हूँ क्योंकि कहानियाँ अच्छी लगती हैं' → 'मैं सितारा पाने के लिए पढ़ता हूँ'
  • पुरस्कार हटने पर संलग्नता गिरती है — आंतरिक प्रेरणा नहीं बची
  • पुरस्कार-चालित संलग्नता उथली होती है — न्यूनतम प्रयास से पुरस्कार पाना
  • सितारे और बैज अधिगम के प्रति भौतिकवादी दृष्टिकोण बनाते हैं (CTET 2019 दिसंबर P2 Q27)

बाह्य प्रेरणा कब उचित है: सूचनात्मक प्रतिपुष्टि ('तुमने प्रकाश-संश्लेषण की व्याख्या बहुत स्पष्ट की') नियंत्रण-आधारित पुरस्कार से भिन्न है। सक्षमता और स्वायत्तता बढ़ाने वाली प्रतिपुष्टि आंतरिक प्रेरणा का समर्थन कर सकती है।

शोध यह भी दर्शाता है कि बाह्य पुरस्कार रचनात्मकता घटाते हैं: पुरस्कार-खोजी बच्चे सुरक्षित, पारंपरिक उत्तरों पर अभिसरण करते हैं — जो पुरस्कार दिलाने की सबसे अधिक संभावना रखते हैं। रचनात्मक अन्वेषण के लिए गलत होने की स्वतंत्रता चाहिए — जिसे नियंत्रण-पुरस्कार प्रणाली समाप्त कर देती है। IGNOU BES-123 Block 2: आंतरिक और बाह्य अभिप्रेरणा का अंतर 'कार्य-कारण के केंद्र' (Locus of Causality) पर आधारित है — आंतरिक (बच्चा स्वयं से प्रेरित) बनाम बाह्य (बाहरी कारक से प्रेरित)।

CTET 2019 दिसंबर P1 Q23: बार-बार दंड से बचने या पुरस्कार पाने के लिए सीखने में लगाना बच्चों की स्वाभाविक रुचि और जिज्ञासा घटाता है

मास्लो की आवश्यकता-श्रेणी

अब्राहम मास्लो की आवश्यकता-श्रेणी यह समझाने का ढाँचा देती है कि बच्चे हमेशा शैक्षणिक सामग्री से जुड़ क्यों नहीं पाते। मास्लो ने कहा: निम्न-स्तरीय कमी-आवश्यकताएँ पूरी होने पर ही उच्च-स्तरीय विकास-आवश्यकताएँ प्रकट होती हैं

श्रेणी (नीचे से ऊपर)

  • मनोदैहिक आवश्यकताएँ: भोजन, पानी, नींद, गर्मी — भूखा या नींद से वंचित बच्चा नहीं सीख सकता
  • सुरक्षा आवश्यकताएँ: शारीरिक और भावनात्मक सुरक्षा — हिंसा या बदमाशी से प्रभावित बच्चा 'जीवन-रक्षा मोड' में है
  • प्रेम और अपनापन: साथी-स्वीकृति, शिक्षक की उष्मा, कक्षा-समुदाय की भावना
  • सम्मान आवश्यकताएँ: शैक्षणिक सक्षमता, मान्यता, प्रतिष्ठा — लज्जा इसे नष्ट करती है
  • आत्म-साक्षात्कार: पूर्ण क्षमता का विकास; स्वयं के लिए अधिगम की खोज — शिक्षा का लक्ष्य

IGNOU BES-123 Block 2 (Section 7.4.3) इसे अभिप्रेरणा का मानवतावादी उपागम कहती है, जो व्यवहारवादी उपागम (पुरस्कार-दंड) से भिन्न है। शिक्षक के लिए: शैक्षणिक अभिप्रेरणा की चर्चा से पहले देखें — क्या बच्चे की बुनियादी आवश्यकताएँ पूरी हो रही हैं? भारत के विविध सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि वाले बच्चों के लिए: मध्याह्न भोजन, सुरक्षित विद्यालय भवन, शिक्षक की उष्मा, और समावेशी वातावरण — ये 'अतिरिक्त सुविधाएँ' नहीं हैं। ये वे आधार हैं जिन पर शैक्षणिक अभिप्रेरणा का निर्माण होता है।

मास्लो का व्यावहारिक सन्देश: जो बच्चा भूखा है, डरा हुआ है, या साथियों से अस्वीकृत है — वह श्रेणी के निचले स्तर पर है। तब तक गणित समझाना व्यर्थ है जब तक ये आवश्यकताएँ पूरी न हों। CTET इस सिद्धांत को प्रत्यक्ष परीक्षणों में शामिल करता है।

महारत लक्ष्य बनाम प्रदर्शन लक्ष्य

कैरोल ड्वेक और उनके सहयोगियों ने बच्चों के दो मूलभूत अभिमुखीकरणों की पहचान की:

महारत लक्ष्य (Mastery Goals)प्रदर्शन लक्ष्य (Performance Goals)
उद्देश्य: सक्षमता और समझ बढ़ानाउद्देश्य: दूसरों की तुलना में क्षमता दिखाना
सफलता = 'मैंने कुछ नया सीखा'सफलता = 'मैं होशियार दिखा'
कठिनाई → अधिक प्रयासकठिनाई → हटना (आत्म-छवि का खतरा)
गलतियाँ = सुधार की प्रतिपुष्टिगलतियाँ = कम क्षमता का प्रमाण

CTET 2021 Jan P1 Q19: अधिगम की प्रेरणा महारत-उन्मुख लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने से बनी रहती है। रटन याद, बहुत आसान कार्य, और दंड सभी इसे कमज़ोर करते हैं। NCF 2005 की 'समझ-केंद्रित शिक्षा' इसी महारत-अभिमुखीकरण की अभिव्यक्ति है।

शिक्षक महारत-लक्ष्य कैसे बढ़ाएँ: कार्यों को सीखने के अवसर के रूप में प्रस्तुत करें; प्रक्रिया-उन्मुख प्रतिपुष्टि दें ('तुमने इसे कैसे सोचा?'); सार्वजनिक तुलना और रैंकिंग से बचें; प्रयास, रणनीति और सुधार की प्रशंसा करें — क्षमता या स्थान की नहीं।

महारत-उन्मुख विद्यार्थी: अधिक देर तक दृढ़ रहते हैं, असफलता से तेज़ी से उबरते हैं, और दीर्घकाल में जटिल कार्यों में उच्च उपलब्धि दर्शाते हैं — क्योंकि वे समझ के आंतरिक पुरस्कारों से प्रेरित हैं, न 'अच्छे दिखने' के क्षणिक पुरस्कारों से। CTET परिदृश्य: 'शिक्षक अभिप्रेरणा बनाए रखने के लिए क्या करे?' — सही: महारत-लक्ष्य, गलत: अंक-आधारित प्रतिस्पर्धा।

आरोपण सिद्धांत: बच्चे सफलता-असफलता की व्याख्या कैसे करते हैं

बर्नार्ड वीनर का आरोपण सिद्धांत जाँचता है कि बच्चे अपनी सफलता-असफलता की जो व्याख्या करते हैं, वह भविष्य की अभिप्रेरणा को कैसे प्रभावित करती है। आरोपण तीन आयामों पर विश्लेषित होते हैं:

  • स्थान (Locus — आंतरिक/बाह्य): सफलता मुझसे आई (प्रयास, क्षमता) या बाहर से (भाग्य, आसान कार्य)?
  • स्थिरता (Stable/Unstable): क्या यह कारक स्थिर है (क्षमता) या परिवर्तनीय (प्रयास, मनोदशा)?
  • नियंत्रणीयता: क्या बच्चा इस कारक को अपने कार्य से बदल सकता है?

अनुकूल बनाम प्रतिकूल आरोपण

सबसे प्रेरणा-बनाए-रखने वाला आरोपण: 'मैं असफल हुआ क्योंकि पर्याप्त प्रयास नहीं किया (आंतरिक, अस्थिर, नियंत्रणीय)।' यह आत्म-प्रभावकारिता बचाए रखता है। सबसे हानिकारक: 'मैं असफल हुआ क्योंकि मैं मूर्ख हूँ (आंतरिक, स्थिर, अनियंत्रणीय)।' यह सीखी हुई असहायता पैदा करता है।

IGNOU BES-123 नोट करती है कि भारतीय कक्षाओं में शिक्षक अनजाने में क्षमता-आरोपण को बढ़ावा देते हैं — 'तुम बहुत होशियार हो' कहकर। शोध दर्शाता है: प्रयास की प्रशंसा, क्षमता की नहीं, अधिक लचीली और टिकाऊ प्रेरणा बनाती है।

व्यावहारिक अंतर: 'तुम बहुत होशियार हो' → सफलता में ठीक, कठिनाई में विनाशकारी ('अगर मैं होशियार हूँ और फिर भी असफल हो रहा हूँ, तो शायद मैं वास्तव में होशियार नहीं हूँ' → लज्जा और हटना)। 'तुमने बहुत कड़ी मेहनत की' → कठिनाई में भी: 'और मेहनत करो।'

विकास मानसिकता और आत्म-प्रभावकारिता

दो सबसे शक्तिशाली व्यक्तिगत-स्तर के भविष्यवक्ता:

ड्वेक की विकास मानसिकता

कैरोल ड्वेक: स्थिर मानसिकता ('बुद्धि एक निश्चित मात्रा है — मुझमें है या नहीं') बनाम विकास मानसिकता ('क्षमता प्रयास और अधिगम से सुधारी जा सकती है')। CTET 2021 Jan P1 Q26: 'क्षमता सुधारी जा सकती है' यह विश्वास अधिगम के लिए अच्छा है।

विकास मानसिकता वाले बच्चे: चुनौतियाँ स्वीकार करते हैं, असफलता में दृढ़ रहते हैं, प्रयास को महारत का मार्ग मानते हैं। स्थिर मानसिकता वाले: चुनौतियों से बचते हैं, जल्दी हार मान लेते हैं।

बंदुरा की आत्म-प्रभावकारिता

आत्म-प्रभावकारिता (Self-Efficacy): विशिष्ट परिणाम उत्पन्न करने की अपनी क्षमता में विश्वास। यह आत्म-सम्मान से भिन्न है। यह चार स्रोतों से बनती है: महारत अनुभव (चुनौतीपूर्ण कार्यों में सफलता), अप्रत्यक्ष अनुभव (समान साथियों को सफल देखना), सामाजिक प्रेरणा (प्रोत्साहन), और सकारात्मक शारीरिक अवस्था (चिंता नहीं बल्कि शांति)।

विकास मानसिकता + उच्च आत्म-प्रभावकारिता → दृढ़ अभिप्रेरणा। स्थिर मानसिकता + निम्न आत्म-प्रभावकारिता → सीखी हुई असहायता।

आत्म-प्रभावकारिता क्षेत्र-विशिष्ट (domain-specific) है: गणित में उच्च और भाषा में निम्न हो सकती है। शिक्षक ZPD में क्रमिक रूप से चुनौतीपूर्ण कार्यों में सफलता दिलाकर आत्म-प्रभावकारिता बनाते हैं। अप्रत्यक्ष अनुभव भी शक्तिशाली है: 'यदि वह कर सकती है, तो शायद मैं भी कर सकता हूँ' — समान साथी को सफल होते देखना।

भारतीय कक्षाओं में विशेष सुझाव: 'विज्ञान सबके लिए नहीं है' जैसे सांस्कृतिक वाक्यांश क्षमता-आरोपण को मज़बूत करते हैं। पुनः-आरोपण प्रशिक्षण (Reattribution Training) से बच्चों को असफलता को प्रयास-की-कमी या रणनीति-की-कमज़ोरी से जोड़ना सिखाया जा सकता है — स्थिर क्षमता से नहीं।

NCF 2005: भय के विरुद्ध, जिज्ञासा के पक्ष में

NCF 2005 अभिप्रेरणा पर स्पष्ट रुख अपनाती है: भय और पुरस्कार-आधारित अभिप्रेरणा उथली, कमज़ोर संलग्नता उत्पन्न करती है जबकि वास्तविक जिज्ञासा और आंतरिक अभिप्रेरणा गहरा, स्थायी अधिगम उत्पन्न करती है। आंतरिक प्रेरणा के प्रणालीगत शत्रु:

  • अत्यधिक परीक्षा-दबाव जो प्रदर्शन लक्ष्यों को अनिवार्य बनाता है
  • रटन-अधिगम व्यवस्था जो वास्तविक समझ की संतुष्टि से वंचित करती है
  • सार्वजनिक रैंकिंग और तुलना जो लक्ष्यों को अधिगम से साथियों को मात देने में बदल देती है
  • दंडात्मक कक्षाएँ जहाँ गलत उत्तर का भय प्रश्न पूछने को दबाता है

NCF 2005 की सिफारिश: बच्चों के जीवन से जुड़ा पाठ्यक्रम; रैंकिंग की जगह रचनात्मक मूल्यांकन; प्रश्न स्वागत योग्य कक्षा; खोज का आनंद साझा करने वाला शिक्षक। ड्यूई के प्रगतिशील दर्शन की तरह: बच्चे स्वाभाविक रूप से जिज्ञासु हैं — समस्या यह है कि विद्यालय भय, ऊब और अप्रासंगिकता से इसे नष्ट कर देता है।

NCF 2005 का समाधान: पाठ्यक्रम सुधार — जब सामग्री बच्चों की रुचि, प्रश्नों और जीवन से वास्तव में जुड़ती है, तो प्रेरणा स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होती है। बाह्य पुरस्कार प्रणालियाँ पाठ्यक्रम की समस्या का अस्थायी समाधान हैं — जड़ को नहीं छूतीं।

NCF 2005 चाहती है ऐसे शिक्षक जो स्वयं उत्साही शिक्षार्थी हों — जिनका विषय के प्रति उत्साह संक्रामक हो। जो शिक्षक गणितीय पैटर्न में वास्तविक सौंदर्य देखता है, या साहित्य प्रेमी है — वह स्वयं वह आंतरिक प्रेरणा का प्रतिरूप है जो वह बच्चों में विकसित करना चाहता है। अभिप्रेरणा तकनीक से नहीं सिखाई जाती — यह संबंध और विश्वास से आती है।

CTET परीक्षा फोकस: प्रमुख पैटर्न और जाल

CDP-23 से पाँच विश्वसनीय CTET प्रश्न-प्रकार:

  • प्रेरित बच्चे प्रश्न पूछते हैं — केवल उपस्थित नहीं रहते, अनुपालन नहीं करते
  • बाह्य पुरस्कार स्वाभाविक रुचि घटाते हैं — आंतरिक प्रेरणा नहीं बढ़ाते
  • महारत लक्ष्य अभिप्रेरणा बनाए रखते हैं — रटन याद या आसान कार्य नहीं
  • 'क्षमता सुधारी जा सकती है' (विकास मानसिकता) — स्थिर मानसिकता या 'असफलता अनियंत्रणीय' नहीं
  • सितारे-बैज → भौतिकवादी दृष्टिकोण — महारत लक्ष्य या दृढ़ता नहीं

परिदृश्य प्रश्न: 'कक्षा में भागीदारी कम है — शिक्षक क्या करे?' गलत: 'सितारे दें', 'अनुपस्थिति दंडित करें', 'कार्य आसान बनाएँ'। सही: 'बच्चों के प्रश्नों और अनुभवों से जोड़ें', 'अंक नहीं, समझ पर ध्यान दें', 'रचनात्मक प्रतिपुष्टि दें।' याद रखें: CTET 'दीर्घकालिक अभिप्रेरणा' के बारे में पूछता है — जहाँ आंतरिक, महारत-उन्मुख दृष्टिकोण हमेशा जीतता है।

आरोपण CTET परिदृश्य: 'राहुल कहता है वह असफल हुआ क्योंकि परीक्षा बहुत कठिन थी (बाह्य, अस्थिर)' — 'मैं गणित में कमज़ोर हूँ (आंतरिक, स्थिर)' से कम हानिकारक। अनुकूल आरोपण = आंतरिक, अस्थिर, नियंत्रणीय। प्रतिकूल = आंतरिक, स्थिर, अनियंत्रणीय।

मास्लो परिदृश्य: 'एक बच्चा लगातार कक्षा में अनमना रहता है — कारण क्या हो सकता है?' — सही: बुनियादी आवश्यकताएँ (भोजन, सुरक्षा, अपनेपन) पूरी नहीं हो रही। गलत: 'वह आलसी है' या 'उसमें रुचि नहीं।' शिक्षक का कार्य: श्रेणी-निचले स्तर की आवश्यकताओं की पहचान और समाधान।

संक्षेप: आंतरिक + महारत + विकास-मानसिकता = दीर्घकालिक अभिप्रेरणा। बाह्य + प्रदर्शन + स्थिर-मानसिकता = क्षणिक या विनाशकारी।

अभ्यास प्रश्न

Q1. अधिगम की अभिप्रेरणा को किस प्रकार क़ायम रखा जा सकता है ?

  • बच्चे को दंड देकर ।
  • प्रवीणता-अभिमुखी लक्ष्यों पर ज़ोर देकर ।
  • बच्चों को बहुत आसान क्रियाकलाप देकर ।
  • यंत्रवत याद करने पर ज़ोर देकर ।

व्याख्या: महारत-उन्मुख लक्ष्य (सक्षमता और समझ सुधारने पर ध्यान) दीर्घकालिक आंतरिक प्रेरणा बनाए रखते हैं। दंड और रटन इसे दबाते हैं; बहुत आसान कार्य ऊब और अल्प-उत्तेजना उत्पन्न करते हैं।

स्रोत: CTET जनवरी 2021 पेपर-I प्रश्न 19

Q2. कक्षा में बच्चों को प्रेरित समझा जा सकता है यदि—

  • वे अच्छी तरह से वर्दी पहने स्कूल में आते हैं
  • वे कक्षा में अनुशासन बनाए रखते हैं
  • वे सभी उपस्थिति में नियमित हैं
  • वे शिक्षक से स्पष्टीकरण प्राप्त करने के लिए प्रश्न पूछते हैं

व्याख्या: स्पष्टीकरण के लिए प्रश्न पूछना वास्तविक बौद्धिक संलग्नता का व्यवहार-संकेत है। उपस्थिति, अनुशासन और वर्दी अनुपालन व्यवहार हैं — भय का परिणाम, प्रेरणा का नहीं।

स्रोत: CTET दिसंबर 2018 पेपर-I प्रश्न 28

Q3. बच्चों को अधिगम गतिविधियों में भागीदारी करने के लिए लगातार पुरस्कार देने व दंड का प्रयोग करने से क्या प्रभाव पड़ता है ?

  • बाहरी अभिप्रेरणा कम होती है ।
  • आंतरिक अभिप्रेरणा बढ़ती है ।
  • यह बच्चों को प्रदर्शन आधारित लक्ष्यों के बजाय निपुणता लक्ष्यों पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित करेगा ।
  • अधिगम में बच्चों की स्वाभाविक अभिरुचि तथा जिज्ञासा कम होती है ।

व्याख्या: अति-औचित्य प्रभाव: स्वाभाविक रूप से रोचक गतिविधियों के लिए बाह्य पुरस्कार संलग्नता का कारण 'मुझे रुचि है' से 'पुरस्कार मिलेगा' में बदल देते हैं। पुरस्कार हटने पर रुचि गिर जाती है।

स्रोत: CTET दिसंबर 2019 पेपर-I प्रश्न 23

Q4. निम्न में से कौन-सी धारणा अधिगम के लिए उपयुक्त है ?

  • योग्यता सुधार्य है ।
  • योग्यता अटल है ।
  • प्रयासों से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता ।
  • असफलताएँ अनियंत्रित हैं ।

व्याख्या: विकास मानसिकता (ड्वेक): 'क्षमता प्रयास से सुधारी जा सकती है' — यह विश्वास चुनौतियों को स्वीकारने, असफलता में दृढ़ रहने और प्रयास को महारत का मार्ग मानने को प्रेरित करता है।

स्रोत: CTET जनवरी 2021 पेपर-I प्रश्न 26

Q5. जब विद्यार्थी बार-बार पुरस्कार पाने की इच्छा से किसी गतिविधि में बार-बार संलग्न होते हैं (जैसे प्रयोग की संरचना एवं संचालन करना) जो कि इस गतिविधि से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित नहीं है (जैसे कि 'स्टार' या 'बेज़' प्राप्त करना), ऐसी स्थिति में विद्यार्थियों की प्रतिक्रिया को क्या होने की संभावना है?

  • अधिगम के प्रति भौतिकवादी अभिवृत्ति का विकास।
  • समझने के लिए अधिगम का आनंद लेना।
  • पुरस्कार के बिना भी उस गतिविधि में लगे रहना।
  • अन्य लोगों को खुश करने के बजाय स्वयं के लिए निपुणता लक्ष्य निर्धारित करना।

व्याख्या: असंबंधित पुरस्कार (सितारे, बैज) का उपयोग बच्चों को पुरस्कार को महत्त्व देना सिखाता है, गतिविधि को नहीं — भौतिकवादी अभिमुखीकरण। पुरस्कार रुकने पर गतिविधि भी रुक जाती है।

स्रोत: CTET दिसंबर 2019 पेपर-II प्रश्न 27