बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र · CTET नोट्स

प्रतिभाशाली, सृजनशील एवं विशेष रूप से सक्षम बच्चे

प्रत्येक कक्षा में कुछ बच्चे असाधारण रूप से तेज़ गति से और गहराई से सीखते हैं, अत्यंत मौलिक विचार प्रस्तुत करते हैं, या संगीत, कला, खेल में विशेष प्रतिभा दिखाते हैं। इन्हें प्रतिभाशाली (Gifted), सृजनशील (Creative), या विशेष योग्यता संपन्न कहते हैं। अधिगम कठिनाइयों वाले बच्चों की तरह इनकी जरूरतें भी उतनी ही वास्तविक हैं — फिर भी इन्हें प्रायः नजरअंदाज किया जाता है।

NIOS 506 खंड-2, इकाई 6 सृजनात्मकता को सभी बच्चों में उपस्थित मूलभूत मानवीय क्षमता के रूप में प्रस्तुत करती है। टॉरेंस और गिलफोर्ड ने इसे चार मापनयोग्य आयामों में वर्गीकृत किया: प्रवाहता, नम्यता, मौलिकता और विस्तार। NEP 2020 विकलांग बच्चों के लिए विशेष रूप से सक्षम पद का उपयोग करती है। सृजनात्मकता सभी बच्चों में है — परंतु परंपरागत शिक्षण प्रणाली प्रायः इसे दबाती है। पाँच वर्ष के 90% बच्चे उच्च सृजनशील होते हैं, परंतु 25 वर्ष की आयु तक यह घटकर 2% रह जाती है। तीनों समूहों में शिक्षक की भूमिका है — शक्तियाँ पहचानना, चुनौती प्रदान करना, और न तो उपेक्षा करना न हानिकारक लेबल।

प्रवाहतामौलिकताविस्तारनम्यताCDP-17 · Creative & Talented Learners

प्रतिभाशाली एवं विशेष योग्यता वाले बच्चे — परिचय

प्रतिभाशीलता (Giftedness) का अर्थ है एक या अधिक क्षेत्रों में असाधारण योग्यता। क्षेत्र हो सकते हैं: बौद्धिक, सृजनात्मक, कलात्मक, नेतृत्व, अकादमिक, या शारीरिक/खेल।

CTET में परीक्षित प्रतिभाशाली बच्चों की विशेषताएँ:

  • तीव्र अधिगम — कम दोहराव में नई सामग्री में महारत हासिल करना।
  • उन्नत शब्दावली एवं पठन — अक्सर ग्रेड स्तर से कहीं आगे स्वतंत्र रूप से पढ़ते हैं।
  • चुनी हुई रुचियों में लंबा ध्यान-काल — घंटों गहरी तल्लीनता, परंतु नियमित कार्यों में असावधान।
  • उच्च अमूर्त तर्कशक्ति — प्रतिरूप देखना, क्षेत्रों के पार संबंध जोड़ना।
  • तीव्र जिज्ञासा और प्रश्नशीलता — 'क्यों' और 'क्या होगा अगर' का निरंतर अन्वेषण।
  • पूर्णतावाद — उच्च मानक स्वयं पर थोपना; कभी-कभी निराशा या टालना।
  • सामाजिक अलगाव — साथी बच्चों से रुचियाँ न मिलने पर अकेलापन।
  • असंकालिक विकास — बौद्धिक आयु भावनात्मक परिपक्वता से वर्षों आगे हो सकती है।

भारतीय संदर्भ में यह ध्यान रखना जरूरी है कि प्रतिभाशाली बच्चे केवल अमीर या उच्च-जाति परिवारों में ही नहीं जन्मते। वंचित पृष्ठभूमि के बच्चों में असाधारण प्रतिभा हो सकती है जिसे परंपरागत IQ परीक्षण छोड़ देते हैं। इसीलिए बहु-मापदंड पहचान आवश्यक है।

CTET का स्पष्ट उत्तर (2018 Dec, Q16): प्रतिभाशीलता आनुवंशिकता और पर्यावरण की अंतःक्रिया का परिणाम है — न केवल जीन, न केवल अवसर।

प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान

प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान केवल IQ परीक्षण से नहीं होनी चाहिए — यह अपर्याप्त और पक्षपातपूर्ण भी हो सकता है। बहु-मापदंड दृष्टिकोण सबसे विश्वसनीय और न्यायसंगत है।

पहचान के तरीके

  • IQ या उपलब्धि परीक्षण — एक डेटा बिंदु; उपयोगी परंतु एकमात्र नहीं।
  • शिक्षक का नामांकन — दैनिक व्यवहार का प्रत्यक्ष अवलोकन; परंतु वंचित पृष्ठभूमि के प्रतिभाशाली बच्चों को छूट सकते हैं।
  • माता-पिता का नामांकन — घर में स्वाभाविक परिस्थितियों में प्रतिभा का अवलोकन।
  • प्रदर्शन और पोर्टफोलियो — मानकीकृत परीक्षण से परे सृजनात्मक कार्य।
  • सहपाठी नामांकन — साथी अक्सर विशेष क्षमता को पहचानते हैं।

कम प्रदर्शन करने वाले प्रतिभाशाली बच्चे

कुछ प्रतिभाशाली बच्चे जानबूझकर अपनी क्षमता छुपाते हैं — साथियों में घुलने-मिलने के लिए। अन्य ऊब, चुनौती की कमी, या भावनात्मक तनाव के कारण कम प्रदर्शन करते हैं। जब कोई अत्यंत सक्षम बच्चा अचानक खराब प्रदर्शन करे, तो कारण खोजें — दंड नहीं।

भारत में एक विशेष चुनौती है: प्रतिभाशाली लड़कियाँ प्रायः कम पहचानी जाती हैं — क्योंकि लिंग-रूढ़िवादी अपेक्षाएँ उनकी बौद्धिक क्षमता को कम आँकती हैं। वंचित वर्ग, आदिवासी समुदाय, और प्रथम पीढ़ी के शिक्षार्थियों में प्रतिभाशीलता की दर कम नहीं है — परंतु उन्हें दिखाने के अवसर कम मिलते हैं। एक न्यायसंगत शिक्षक इन बाधाओं को पहचानता है और सक्रिय रूप से इन बच्चों की तलाश करता है।

CTET परिदृश्य: 'एक बहुत बुद्धिमान बच्चा लगातार अपनी क्षमता से कम प्रदर्शन करता है' → यह अधिगम-अक्षमता नहीं, कम प्रदर्शन करने वाला प्रतिभाशाली बच्चा है। सही प्रतिक्रिया है: संवर्धन और कारण की जाँच।

सृजनात्मकता — अवधारणा और प्रकृति

NIOS 506 इकाई 6 के अनुसार सृजनात्मकता (Creativity) का अर्थ है — नवीन होने, असामान्य होने, दूसरों से भिन्न होने की क्षमता; नए उत्तर देना, नए संबंध स्थापित करना। सृजनशील बच्चा असंबंधित विचारों को जोड़ता है, वस्तुओं का अप्रत्याशित उपयोग सोचता है, और हास्य और विरोधाभास को सामान्य में देखता है।

शोध के अनुसार 5 वर्ष की आयु के 90% बच्चे उच्च सृजनशील होते हैं, जबकि 25 वर्ष की आयु तक केवल 2% ही रहते हैं — यह दर्शाता है कि विद्यालय और समाज में एकरूपता का दबाव क्रमशः सृजनात्मकता को दबा देता है।

सृजनात्मकता के प्रकार

  • शाब्दिक सृजनात्मकता — भाषा में मौलिक अभिव्यक्ति: कविता, कहानी, चुटकुला, संगीत।
  • गैर-शाब्दिक सृजनात्मकता — रूप और आयाम में अभिव्यक्ति: चित्रकारी, मूर्तिकला, नृत्य, वास्तुकला, इंजीनियरिंग।

सृजनात्मकता हास्य को भी शामिल करती है। यदि आप पहली बार कोई चुटकुला कहते हैं या किसी विचार का बिल्कुल नए संदर्भ में उपयोग करते हैं — यह आपकी सृजनात्मकता है। नकल करना सृजनात्मकता का विपरीत है। एक कक्षा हमेशा सृजनशील होती है क्योंकि अनेक मस्तिष्क एक ही समस्या से जूझ रहे होते हैं और कोई न कोई बच्चा अलग रास्ता खोजने की हिम्मत करता है।

अपसारी बनाम अभिसारी चिंतन

गिलफोर्ड ने दो प्रकार के चिंतन में अंतर किया:

  • अभिसारी चिंतन (Convergent Thinking) — एक सही उत्तर पर पहुँचना। सामान्य परीक्षाएँ यही परखती हैं।
  • अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) — कई विविध और मौलिक उत्तर उत्पन्न करना। यह सृजनात्मकता की पहचान है। CTET: अपसारी चिंतन सृजनशील बच्चों को पहचानता है (2018 Dec Q20)।

टॉरेंस के सृजनात्मकता के चार आयाम

गिलफोर्ड और टॉरेंस ने सृजनात्मकता के मापनयोग्य आयाम पहचाने। CTET में सर्वाधिक परीक्षित चार आयाम:

आयामअर्थउदाहरण
प्रवाहता (Fluency)बहुत सारे विचार शीघ्र उत्पन्न करने की क्षमता'ईंट के सभी उपयोग बताएँ' — जितने अधिक उत्तर, उतनी अधिक प्रवाहता
नम्यता (Flexibility)विभिन्न श्रेणियों में विचार उत्पन्न करने की क्षमता — मानसिक स्थिरता तोड़नाईंट के उपयोग जो भवन-निर्माण, कला, खेल, रसोई में फैले हों
मौलिकता (Originality)असामान्य, चतुर, और सांख्यिकीय रूप से दुर्लभ विचार देने की क्षमताईंट को शून्य-गुरुत्वाकर्षण में पुस्तक संग्रह के लिए रोक के रूप में उपयोग करने का प्रस्ताव
विस्तार (Elaboration)किसी विचार में विवरण जोड़कर उसे समृद्ध करने की क्षमताएक कच्चे विचार को चरणों और आकस्मिकताओं के साथ पूर्ण योजना में विकसित करना

NIOS 506 दो अतिरिक्त आयाम भी बताता है: जिज्ञासा (Inquisitiveness) — अनेक प्रश्न उठाने की क्षमता; और दृढ़ता (Persistency) — असफल होने पर भी समस्या पर काम जारी रखना। सभी मिलकर सृजनात्मकता बनाते हैं।

टॉरेंस और गिलफोर्ड ने सृजनात्मकता को बुद्धि से अलग इकाई माना — एक बच्चा उच्च IQ के बिना भी अत्यधिक सृजनशील हो सकता है, और उच्च IQ का बच्चा सृजनशीलता में औसत हो सकता है। यह परंपरागत 'बुद्धि = प्रतिभा' धारणा को चुनौती देता है।

भारत में बाकर मेहदी और बी.के. पासी ने भारतीय संदर्भ के लिए सृजनात्मकता परीक्षण विकसित किए।

चार आयाम याद रखें: प्रवाहता = कितने; नम्यता = कितने विविध; मौलिकता = कितने असामान्य; विस्तार = कितने विस्तृत।

CTET में इन आयामों पर परिदृश्य-आधारित प्रश्न भी आते हैं। उदाहरण: 'एक बच्चे ने ईंट के 15 उपयोग सुझाए — यह किस आयाम को दर्शाता है?' → प्रवाहता (Fluency)। 'उसने ईंट को भवन-निर्माण, खेल, और खाना पकाने सभी में उपयोग सुझाया' → नम्यता (Flexibility)।

प्रतिभाशाली एवं सृजनशील बच्चों की आवश्यकताएँ पूरी करना

CTET का मुख्य सिद्धांत: सृजनशील और प्रतिभाशाली बच्चों के लिए अनुकूलित और उत्तेजक शिक्षण विधियाँ आवश्यक हैं (2018 Dec Q18)। केवल अधिक काम देना या उन्हें अन्य बच्चों को पढ़ाने पर लगाना उचित नहीं है।

संवर्धन (Enrichment)

संवर्धन का अर्थ है — उसी विषय पर गहरा, जटिल और खुला-अंत कार्य प्रदान करना, अगली कक्षा की सामग्री पर नहीं जाना। उदाहरण: स्वतंत्र शोध परियोजनाएँ, सॉक्रेटिक संवाद, अवधारणाओं के सृजनात्मक अनुप्रयोग।

त्वरण (Acceleration)

त्वरण का अर्थ है — पाठ्यक्रम में तेज़ गति से आगे बढ़ना। इसे सावधानी से प्रयोग करना चाहिए: बौद्धिक रूप से लाभकारी होते हुए भी यह सामाजिक-भावनात्मक कठिनाइयाँ उत्पन्न कर सकता है। बौद्धिक, भावनात्मक और सामाजिक — तीनों स्तरों पर तत्परता का आकलन आवश्यक है।

सृजनशील बच्चों को प्रोत्साहन

  • अपसारी प्रतिक्रियाओं को स्वीकार करें और सराहें।
  • मूल्यांकन से पहले विचार-मंथन (Brainstorming) को प्रोत्साहित करें।
  • खुले-अंत वाले प्रश्न पूछें जिनका एक ही सही उत्तर न हो।
  • असामान्य होने पर भी मौलिक विचारों की प्रशंसा करें।

विभेदित पाठ्यक्रम

नियमित कक्षा में प्रतिभाशाली बच्चों के लिए शिक्षक कर सकते हैं:

  • खुले-अंत वाले कार्य जिनके कई वैध हल हों।
  • विषय और प्रदर्शन-विधि में चुनाव का अधिकार।
  • मेंटरशिप — प्रतिभाशाली बच्चे को उसके रुचि-क्षेत्र के विशेषज्ञ से जोड़ना।
  • उच्च-स्तरीय चिंतन कार्य (HOTS) — ब्लूम के वर्गीकरण के विश्लेषण, मूल्यांकन, सृजन स्तर।

CTET 2019 Dec Q12: जो बच्चा किसी समस्या के लिए कई मौलिक हल सोचता है, वह सृजनशील चिंतक है — अभिसारी या कठोर चिंतक नहीं।

विशेष रूप से सक्षम — NEP 2020 की दृष्टि

NEP 2020 विशेष रूप से सक्षम (Specially Abled) पद को अपनाती है — 'विकलांग' या 'अपंग' के स्थान पर — जो शक्ति-केंद्रित दृष्टि को दर्शाता है। यह मानता है कि विकलांगता वाले बच्चों में प्रायः विशेष क्षेत्रों में असाधारण क्षमताएँ होती हैं।

ये बच्चे RPWD 2016 की 21 श्रेणियों में आते हैं — दृष्टि, श्रवण, गति, बौद्धिक, विशिष्ट अधिगम अक्षमता (डिस्लेक्सिया आदि), स्वलीनता, मानसिक बीमारी, बहु-विकलांगता आदि।

दोहरी असाधारणता (Twice-Exceptional)

कुछ बच्चे एक साथ प्रतिभाशाली भी हैं और किसी अक्षमता से भी ग्रस्त हैं — जैसे डिस्लेक्सिया के साथ असाधारण सृजनात्मकता, या ASD के साथ गणित में विलक्षण प्रतिभा। ये बच्चे दोहरे जोखिम में हैं — उनकी अक्षमता उनकी प्रतिभा को छुपा सकती है, और उनकी प्रतिभा उनकी अक्षमता को।

समावेशी कक्षा में उचित सहायता

  • उचित सहायक साधन: ब्रेल, सांकेतिक भाषा दुभाषिया, स्क्रीन रीडर, रैंप, अनुकूलित शारीरिक शिक्षा।
  • IEP — बच्चे, माता-पिता, और विशेषज्ञ के साथ सहयोगात्मक रूप से।
  • प्रत्येक बच्चे की शक्तियों और आवश्यकताओं के विश्लेषण पर आधारित विशिष्ट अधिगम उद्देश्य।
  • लचीला मूल्यांकन — मौखिक उत्तर, पोर्टफोलियो, प्रदर्शन।

NEP 2020 के अनुसार समावेशी शिक्षा केवल भौतिक उपस्थिति नहीं है — बच्चे को कक्षा की गतिविधियों में अर्थपूर्ण रूप से भाग लेने का अवसर मिलना चाहिए। UDL (Universal Design for Learning) के तीन सिद्धांत: बहुविध प्रतिनिधित्व, बहुविध अभिव्यक्ति, और बहुविध संलग्नता।

सृजनात्मकता में बाधाएँ और शिक्षक की भूमिका

NIOS 506 इकाई 6 सृजनात्मकता को दबाने वाले कारकों को पहचानती है — और इनमें शिक्षक की भूमिका भी महत्त्वपूर्ण है:

  • अत्यधिक मूल्यांकन — जब हर प्रतिक्रिया तुरंत 'सही' या 'गलत' में वर्गीकृत की जाती है, बच्चे सृजनात्मक जोखिम लेना बंद कर देते हैं।
  • कठोर दिनचर्या — संरचना उपयोगी है, परंतु खुली अन्वेषण की कोई जगह न हो तो सृजनशीलता सूखती है।
  • असफलता का भय — जिस कक्षा में गलतियाँ उपहास या दंड लाती हैं, वहाँ सृजनात्मकता का सबसे शक्तिशाली विनाशक काम करता है।
  • केवल अभिसारी उत्तरों पर जोर — यदि केवल एक सही उत्तर ही मूल्यवान हो, तो अपसारी सोच वाले बच्चे अपनी मौलिकता छुपाना सीखते हैं।
  • एकरूपता का सामाजिक दबाव — विद्यालय का सामाजिक माहौल अक्सर 'अलग सोचने' को दंडित करता है।

सृजनात्मकता को बढ़ावा देने वाला शिक्षक इसके विपरीत करता है: मनोवैज्ञानिक रूप से सुरक्षित वातावरण बनाता है; खुले प्रश्न पूछता है; सोचने की प्रक्रिया की प्रशंसा करता है — केवल परिणाम की नहीं; अनसंरचित अन्वेषण के लिए समय देता है; असामान्य उत्तरों को सराहता है।

टॉरेंस और मायर्स के सिद्धांत: असामान्य प्रश्नों का सम्मान करें; बच्चों के विचारों को मूल्यवान दिखाएँ; गैर-मूल्यांकन अभ्यास के अवसर दें। NIOS 506 यह भी कहती है कि सृजनात्मकता वाले बच्चे प्रायः गैर-परंपरागत, नियमों का पालन न करने वाले और असाधारण विचार व्यक्त करने से न डरने वाले होते हैं — इन्हें पहचानें, दंडित न करें।

CTET परीक्षा फोकस

CDP-17 से प्रत्येक Paper 1 में लगभग 2–3 प्रश्न आते हैं।

  • प्रतिभाशीलता का कारण: आनुवंशिकता और पर्यावरण की अंतःक्रिया (2018 Dec Q16)।
  • सृजनशील बच्चे की पहचान: अपसारी चिंतन (2018 Dec Q20); कई मौलिक हल = सृजनशील चिंतक (2019 Dec Q12)।
  • सृजनात्मकता की प्राथमिक विशेषता: अपसारी चिंतन (2021 Jan Q16) — अतिसक्रियता या कम समझ नहीं।
  • प्रतिभाशाली/सृजनशील के लिए हस्तक्षेप: अनुकूलित, उत्तेजक विधियाँ (2018 Dec Q18) — उन्हें अन्य बच्चों को पढ़ाना नहीं।
  • टॉरेंस के चार: प्रवाहता (कितने), नम्यता (कितने विविध), मौलिकता (कितने असामान्य), विस्तार (कितने विस्तृत)।
  • संवर्धन बनाम त्वरण: संवर्धन = उसी विषय पर गहरा कार्य; त्वरण = तेज़ गति से आगे बढ़ना।
  • विशेष रूप से सक्षम: NEP 2020 का शक्ति-आधारित पद; RPWD 2016 की 21 श्रेणियाँ।

एक और परीक्षण-बिंदु: सृजनशील बच्चे को 'प्रतिभाशाली' मानना अनिवार्य नहीं है — सृजनात्मकता और बुद्धि अलग-अलग गुण हैं। उच्च IQ बिना असाधारण सृजनशीलता के, और उच्च सृजनशीलता बिना उच्च IQ के, दोनों संभव हैं। इसीलिए प्रतिभाशाली और सृजनशील बच्चों की पहचान के लिए बहु-मापदंड दृष्टिकोण आवश्यक है।

विकर्षक विकल्प: केवल अतिरिक्त गृहकार्य देना (संवर्धन नहीं), IQ को एकमात्र आधार बनाना, या सृजनात्मकता को स्मृति या अतिसक्रियता से परिभाषित करना। हमेशा वह उत्तर चुनें जो अपसारी, खुले-अंत, चुनौतीपूर्ण और मनोवैज्ञानिक रूप से सुरक्षित अभ्यास को दर्शाए।

अभ्यास प्रश्न

Q1. बच्चों में प्रतिभाशालिता _____ के कारण हो सकती है।

  • आनुवंशिकता और वातावरण के बीच एक अंतःक्रिया
  • एक संसाधन-समृद्ध वातावरण
  • सफल माता-पिता
  • एक अनुशासित दिनचर्या

व्याख्या: प्रतिभाशीलता न केवल आनुवंशिक है और न केवल पर्यावरणीय — यह दोनों की अंतःक्रिया से उभरती है। यह वायगॉट्स्की के प्रकृति-पोषण संश्लेषण के अनुरूप है।

स्रोत: 2018_Dec_P1_Q16

Q2. कक्षा में सृजनात्मक और प्रतिभाशाली बच्चों के लिए आवश्यक हस्तक्षेप निर्भर करता है—

  • शिक्षक द्वारा अनुकूलित और प्रेरक निर्देशन तरीकों के उपयोग पर
  • उन्हें अतिरिक्त समय दिए जाने पर
  • उनके प्रति स्नेही होने के नाते पर
  • उन्हें अन्य बच्चों को पढ़ाने की ज़िम्मेदारी देने पर

व्याख्या: सृजनशील और प्रतिभाशाली बच्चों को चुनौती, नवीनता और गहराई की आवश्यकता है — इसलिए अनुकूलित और उत्तेजक शिक्षण विधियाँ आवश्यक हैं। उन्हें शिक्षक बनाना उनकी जरूरत नहीं पूरी करता।

स्रोत: 2018_Dec_P1_Q18

Q3. अलग-अलग सोच वाले पैटर्न उन बच्चों की पहचान करते हैं, जो—

  • विकलांग हैं
  • डिस्लेक्सिक हैं
  • सृजनात्मक हैं
  • प्रत्यास्थी हैं

व्याख्या: अपसारी चिंतन — खुली समस्याओं के लिए विविध, मौलिक प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न करना — सृजनशील बच्चों की परिभाषित विशेषता है। यह अक्षमता या डिस्लेक्सिया से भिन्न है।

स्रोत: 2018_Dec_P1_Q20

Q4. रूही हमेशा समस्या के एकाधिक समाधानों के बारे में सोचती है । इनमें से काफी समाधान मौलिक होते हैं । रूही किन गुणों का प्रदर्शन कर रही है ?

  • सृजनात्मक विचारक
  • अभिसारिक विचारक
  • अनम्य विचारक
  • आत्म-केन्द्रित विचारक

व्याख्या: किसी समस्या के कई मौलिक हल उत्पन्न करना — प्रवाहता और मौलिकता दोनों — सृजनशील चिंतक की पहचान है, अभिसारी या कठोर चिंतक की नहीं।

स्रोत: 2019_Dec_P1_Q12

Q5. सृजनात्मकता की पहचान का प्रमुख लक्षण क्या है ?

  • कम परिज्ञान / बोधगम्यता
  • अपसारी चिंतन
  • अतिसक्रियता
  • असतर्कता

व्याख्या: अपसारी चिंतन — अनेक विविध, मौलिक प्रतिक्रियाएँ — सृजनात्मकता की प्राथमिक पहचान है। न ध्यान की कमी, न अतिसक्रियता।

स्रोत: 2021_Jan_P1_Q16