पेपर 1 · बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र

मीडिया के साथ बढ़ना

75 प्रश्न · 4 अध्याय टेस्ट

इस अध्याय के बारे में

'मीडिया के साथ बढ़ना' यह अध्याय जाँचता है कि आज के बच्चे — जिन्हें 'कुँजीनुमा निवासी (digital natives)' कहा गया है — रोज़ाना औसतन सात घंटे टेलीविजन, कंप्यूटर, सेलफोन तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक युक्तियों पर बिताते हैं, और इस लगातार संचार-माध्यम प्रभाव का बच्चों के मानसिक, भावनात्मक एवं सामाजिक कल्याण पर क्या असर पड़ता है। यह अध्याय बच्चों द्वारा मीडिया के वास्तविक उपयोग (खेल, यू-ट्यूब, सामाजिक पोस्ट) से शुरू होकर छोटे बच्चों के लाभ (पढ़ाई-लिखाई कौशल, संख्या कौशल, सामाजिक कौशल), बड़े बच्चों के लाभ (समालोचनात्मक सोच, पारिवारिक मूल्य, सृजनात्मकता) तथा किशोरों के लाभ (व्यवसाय की जानकारी, ऑनलाइन शिष्टाचार) तक पहुँचता है, फिर समालोचनात्मक हो जाता है। यह टेलीविजन कार्यक्रमों, विज्ञापन तथा बच्चों-किशोरों के चित्रण में लिंग रूढ़िवादिता का विश्लेषण करता है। यह बताता है कि मीडिया कैसे सेक्स, हिंसा, मोटापा, विद्यालय में कमज़ोर प्रदर्शन, साइबर बुलिंग, डिजीफ्रेनिया तथा शरीर-छवि विकारों के माध्यम से सामाजिक संसार को आकार देती है — आशी, आदित्य, सोनिया, रोशन, स्वाति, संजीव, अनित्ता और शामा के नौ भारतीय केसों से। अन्त में अध्यापकों व अभिभावकों की भूमिका, सह-अवलोकन, मीडिया साक्षरता, सेवारत प्रशिक्षण और व्यवहार-परिवर्तन की 'तीसरी आँख' पर चर्चा होती है। CTET पेपर I में इस अध्याय से सामाजीकरण के अभिकरण, व्योगोत्स्की का समाज-सांस्कृति सिद्धान्त व ZPD, लिंग रूढ़िवादिता, साइबर बुलिंग जैसे बाल-संरक्षण मुद्दे तथा अध्यापक की शिक्षाशास्त्रीय भूमिका पर प्रश्न पूछे जाते हैं। नीचे दिए चार टेस्ट — अभ्यास 15, क्विज़ 15, कठिन 15, निपुणता 30 — इन छहों विषय-समूहों को CTET स्तर की गहराई से जाँचते हैं।

इस अध्याय के टेस्ट