बाल अधिकार और विधान
इस अध्याय के बारे में
बाल अधिकार और विधान — यह अध्याय पेपर 2 के उस अभ्यर्थी के लिए अनिवार्य है जो 11-14 वर्ष के बच्चों (कक्षा 6-8) को पढ़ाएगा, क्योंकि उच्च-प्राथमिक का प्रत्येक अध्यापक RTE अधिनियम, POCSO अधिनियम और JJ अधिनियम के अन्तर्गत प्रथम पंक्ति का कर्तव्यधारी (duty-bearer) है। यह अध्याय पहले यह प्रश्न उठाता है कि 'बच्चा कौन है?' और दिखाता है कि भारत के विभिन्न कानून भिन्न-भिन्न आयु-सीमाएँ देते हैं — भारतीय दण्ड संहिता (आई.पी.सी.) 1860 (7 वर्ष), संविधान की धारा 21क (6-14 वर्ष), बालश्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम 1986 (14 वर्ष) और जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2000 (18 वर्ष)। फिर बच्चे के मूल अधिकारों को चार शीर्षकों में बाँटा गया है — जीने का अधिकार (Right to Survival), विकास का अधिकार (Right to Development), सहभागिता का अधिकार (Right to Participation) और संरक्षण का अधिकार (Right to Protection)। भारतीय सांस्कृतिक सन्दर्भ में अधिकारों की जाँच में अभिभावक द्वारा देखभाल, आर्थिक शोषण (बालश्रम), यौन दुर्व्यवहार (POCSO अधिनियम 2012) और बच्चों का निःशुल्क व अनिवार्य शिक्षा (RTE) अधिनियम 2009 के उप-अनुभाग हैं। अन्त में प्रमुख संगठनों — UNCRC 1989, यूनीसेफ, डबल्यू.एच.ओ., NCPCR (2007) और NHRC (1993) — तथा बाल अधिकार संरक्षण में अध्यापक की भूमिका दी गई है। CTET पेपर 2 में RTE की आयु-सीमा, RTE का 25% आरक्षण, POCSO में बच्चे की परिभाषा, JJ अधिनियम की आयु, UNCRC की धारा 19/28/32 तथा चार-अधिकार वर्गीकरण नियमित रूप से पूछे जाते हैं। नीचे दिए चार टेस्ट — अभ्यास 15, क्विज़ 15, कठिन 15, निपुणता 30 — सभी छहों अनुभागों को CTET स्तर की गहराई पर जाँचते हैं।
इस अध्याय के टेस्ट
बुनियाद बनाएँ। एकल अवधारणा का स्मरण और सीधा अनुप्रयोग।
टेस्ट शुरू करें → क्विज़ 15 प्रश्न 15 मिनटसमझ की जाँच। अध्याय भर में मिश्रित अनुप्रयोग।
टेस्ट शुरू करें → कठिन 15 प्रश्न 18 मिनटPYQ-स्तर। कथन-आधारित, अभिकथन–तर्क, दो-चरणीय समस्याएँ।
टेस्ट शुरू करें → निपुणता 30 प्रश्न 30 मिनटपूरे अध्याय का मॉक। मिश्रित कठिनाई, अन्य तीनों से बिना दोहराव।
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