-
Q1. अध्यापक बोर्ड पर 232 को CCXXXII और 413 को CCCCXIII लिखता है (घटाव रूप का प्रयोग नहीं)। एक छात्र समान सांकेतिक संख्याओं को मिलाकर और फिर समूहन (5 C = D, 4 X = XL) करके जोड़ता है। योग का रोमन संख्यांक है
-
Q2. सामग्री की निर्मित आधार-5 पद्धति में, जिसकी सांकेतिक संख्याएँ 1, 5, 25, 125, ... हैं, संख्या 143 कैसे लिखी जाएगी?
-
Q3. कथन A: किसी भी आधार-n पद्धति में, k-वीं सांकेतिक संख्या n की (k − 1) घात के बराबर होती है। कथन B: इसी कारण आधार-10 की सांकेतिक संख्याएँ 1, 10, 100, 1000 दस की घातें हैं। सही क्या है?
-
Q4. सामग्री बताती है कि मिस्र शैली की तुलना में आधार-n पद्धति का एक बड़ा लाभ है — किन्हीं दो सांकेतिक संख्याओं का गुणनफल भी सांकेतिक संख्या ही होता है। इसका गहरा कारण है
-
Q5. सामग्री में मायन सांकेतिक संख्याएँ देता है — 1, 20, 360, 7200, 144000। एक छात्र दावा करता है कि मायन पद्धति इसलिए पूर्ण आधार-20 (pure base-20) है। सही उत्तर है
-
Q6. कथन (A): बाद के मेसोपोटामियाई लोगों ने सेक्साजेसिमल संख्या के बीच के खाली स्थान को चिह्नित करने हेतु एक विशेष कील-प्रतीक लाया। कारण (R): इस प्रतीक के बिना केवल लेख से '2' (दो इकाई) और '120' (दो 60 व शून्य इकाई) में भेद नहीं किया जा सकता था।
-
Q7. सामग्री में चीनी रॉड संख्यांक (तीसरी शताब्दी सामान्य संवत्) को आधार-10 पद्धति बताता है, जो दो रॉड-दिशाओं — ज़ोंग (Zong, ऊर्ध्वाधर) व हेंग (Heng, क्षैतिज) — का स्थान-दर-स्थान बारी-बारी से प्रयोग करती है। ज़ोंग व हेंग बदलने का मुख्य उद्देश्य था
-
Q8. हिंदू संख्या पद्धति एक अस्पष्टता-रहित (unambiguous) स्थानीय पद्धति है। कौन-सी जोड़ी विशेषताएँ मिलकर इसका कारण हैं?
-
Q9. संख्या पद्धति में भारतीय योगदान के बारे में कथन देखिए — I. बख्शाली पांडुलिपि (लगभग तीसरी शताब्दी सामान्य संवत्) में सबसे प्राचीन लिखित 0 (बिंदु के रूप में) है। II. आर्यभट का आर्यभटीय (499 सामान्य संवत्) दशमलव स्थानीय-मान पद्धति से विस्तृत गणनाएँ करता है। III. ब्रह्मगुप्त का ब्रह्मस्फुट-सिद्धांत (628 सामान्य संवत्) 0 को संख्या के रूप में संहिताबद्ध करता है, जिस पर अंकगणितीय संक्रियाएँ की जा सकती हैं। सही कथन हैं
-
Q10. भारतीय अंकों के प्रसार में विद्वानों की भूमिकाओं का मिलान कीजिए — (1) अल-ख्वारिज्मी, लगभग 825 सामान्य संवत्; (2) अल-किंदी, लगभग 830 सामान्य संवत्; (3) फिबोनाची, लगभग 1200 सामान्य संवत्। भूमिकाएँ — (क) अरब जगत् में 'हिंदू अंकों से गणना पर' लिखा; (ख) यूरोप में हिंदू अंक लाए; (ग) अरब जगत् में 'हिंदू अंकों के प्रयोग पर' लिखा।
-
Q11. एक कक्षा 8 का छात्र लिखता है — '0 कुछ नहीं है, अतः 205 व 25 का मतलब एक ही है — दोनों में 2 सैकड़े व 5 हैं।' अध्याय के आधार पर अध्यापक की सर्वोत्तम प्रतिक्रिया है
-
Q12. एक कक्षा-परीक्षा में चार छात्र 40 के लिए रोमन संख्यांक लिखते हैं — राहुल — XL, सीता — LX, इमरान — XXXX, मीरा — XC। कौन सही है?
-
Q13. प्रिया चाहती है कि उसके कक्षा 5 के बच्चे यह समझें कि हमें 0 अंक की क्यों ज़रूरत है। अध्याय के अनुसार सबसे प्रभावी पहली गतिविधि है
-
Q14. एक अध्यापक कक्षा 8 के छात्रों से कहता है कि वे नए प्रतीकों — @ = 1, # = 4, $ = 16 — से अपनी आधार-4 पद्धति बनाएँ। सामग्री के आधार-n नियम से 27 इस पद्धति में कैसे लिखी जाएगी?
-
Q15. सामग्री के 1 से 39 तक के रोमन योग-नियम (पहले 10 के समूह, फिर 5, फिर 1 — बड़ी सांकेतिक संख्या पहले) से 38 का सही रोमन संख्यांक है