आकाशीय परिघटनाएँ और काल-निर्धारण
इस अध्याय के बारे में
आकाशीय परिघटनाएँ और काल-निर्धारण कक्षा 8 जिज्ञासा का ग्यारहवाँ अध्याय है। अहमदाबाद में मकर सक्रांति पर मीरा दिन के समय चंद्रमा देखती है तथा सोचती है कि वह पूर्ण वृत्त क्यों नहीं है। अध्याय बताता है कि चंद्रमा सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करके चमकता है; पृथ्वी की परिक्रमा से पृथ्वी से दिखने वाला उसका दीप्त भाग बदलता है, जिससे कलाएँ बनती हैं — नवचंद्र (अमावस्या), वर्धमान (शुक्ल पक्ष), पूर्णचंद्र (पूर्णिमा), क्षीयमाण (कृष्ण पक्ष), अर्धाधिक व बालचंद्र। कलाओं का कारण पृथ्वी की छाया नहीं है; वह छाया चंद्र-ग्रहण देती है — केवल पूर्णिमा को (सूर्य-ग्रहण केवल अमावस्या को), परंतु हर माह नहीं क्योंकि चंद्रमा की कक्षा थोड़ी झुकी है। चक्रों से मात्रक — घूर्णन = 24 घंटे का माध्य सौर दिन, चंद्र-चक्र = 29.5 दिन का मास, परिक्रमा = 365 दिन 6 घंटे का वर्ष। तीन कालदर्शक — चंद्र (354 दिन), सौर (ग्रेगोरी; 4 वर्ष पर अधिवर्ष, 100/400-वर्षीय संशोधन; सायन व नक्षत्र वर्ष), तथा चंद्र-सौर (अधिक मास; चैत्र-फाल्गुन 12 मास; अमांत व पूर्णिमांत)। भारतीय खगोलिकी — उत्तरायण, दक्षिणायन, तैत्तिरीय संहिता 6.5.3, सूर्य सिद्धांत, भारतीय राष्ट्रीय कालदर्शक (शक संवत्, वर्ष-आरंभ 22 मार्च), 1952 की कैलेंडर रिफॉर्म कमेटी (अध्यक्ष मेघनाद साहा), तथा इसरो उपग्रह (कार्टोसैट, एस्ट्रोसैट, चंद्रयान, आदित्य L1, मंगलयान) — विक्रम साराभाई भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक। नीचे दिए चार टेस्ट इन विचारों को परीक्षा-स्तर पर जाँचते हैं।
इस अध्याय के टेस्ट
बुनियाद बनाएँ। एकल अवधारणा का स्मरण और सीधा अनुप्रयोग।
टेस्ट शुरू करें → क्विज़ 15 प्रश्न 15 मिनटसमझ की जाँच। अध्याय भर में मिश्रित अनुप्रयोग।
टेस्ट शुरू करें → कठिन 15 प्रश्न 18 मिनटPYQ-स्तर। कथन-आधारित, अभिकथन–तर्क, दो-चरणीय समस्याएँ।
टेस्ट शुरू करें → निपुणता 30 प्रश्न 30 मिनटपूरे अध्याय का मॉक। मिश्रित कठिनाई, अन्य तीनों से बिना दोहराव।
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