कठिन

आकाशीय परिघटनाएँ और काल-निर्धारण — कठिन

15 प्रश्न 18 मिनट PYQ-स्तरीय तर्क

  1. Q1. अभिकथन (A): चंद्रमा की कलाएँ चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ने के कारण उत्पन्न होती हैं। कारण (R): चंद्रमा पर पड़ी पृथ्वी की छाया चंद्र-ग्रहण उत्पन्न करती है। सही विकल्प चुनिए

  2. Q2. अभिकथन (A): चंद्र- एवं सूर्य-ग्रहण प्रत्येक माह नहीं होते। कारण (R): पृथ्वी के परित: चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की सूर्य-कक्षा के सापेक्ष थोड़ी झुकी हुई है। सही विकल्प चुनिए

  3. Q3. रवि कहता है: 'मैंने एक बालचंद्र देखा और जब सूर्य अस्त हो रहा था तो यह पूर्व में उदित हो रहा था।' कौशल्या कहती है: 'एक बार मैंने दोपहर के समय पूर्व दिशा में अर्धाधिक चंद्र देखा।' किसकी बात सत्य है?

  4. Q4. किसी सौर कालदर्शक में 3 वर्ष की अवधि में कुल 37 पूर्णिमाएँ आती हैं। तीन वर्षों में कुल 3 × 12 = 36 माह होते हैं। इससे क्या निष्कर्ष निकलता है?

  5. Q5. किसी विशेष रात्रि में वैशाली ने चंद्रमा को सूर्यास्त से सूर्योदय तक आकाश में देखा। उसने चंद्रमा की कौन-सी कला अवलोकित की होगी?

  6. Q6. यदि हम अधिवर्ष (लीप वर्ष) को गणना में लेना बंद कर दें, तो लगभग कितने वर्षों के पश्चात भारत का स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त, वर्तमान में मानसून / ग्रीष्म) शीत ऋतु में पड़ने लगेगा?

  7. Q7. अभिकथन (A): यदि पृथ्वी के परित: चंद्रमा की परिक्रमण-गति समय के साथ धीरे-धीरे कम होती जाए, तो चंद्र-सौर कालदर्शकों में अंतर्वेशी (अधिक) मास अधिक नहीं, बल्कि कम बार जोड़ना पड़ेगा। कारण (R): धीमे चंद्रमा का अर्थ है अधिक लंबा चंद्र मास, अतः 12 चंद्र मासों की लंबाई सौर वर्ष के निकट हो जाएगी तथा वह अंतर घटेगा जिसे अधिक मास से ठीक किया जाता है। सही विकल्प चुनिए

  8. Q8. चंद्रमा से संबंधित निम्न तीन कथन पढ़कर सही पहचानें: I. चंद्रमा का सदैव केवल आधा भाग ही पृथ्वी के सम्मुख रहता है। II. चंद्रमा का दीप्त आधा भाग सदैव वही होता है जो सूर्य के सम्मुख होता है। III. नवचंद्र के दिन चंद्रमा का दीप्त आधा भाग पृथ्वी की ओर होता है, परंतु हम उसे देख नहीं पाते। कौन-से कथन सही हैं?

  9. Q9. अभिकथन (A): सायन वर्ष पर आधारित कालदर्शक तथा नक्षत्र वर्ष पर आधारित कालदर्शक के बीच का अंतर ध्यान देने योग्य होने में लंबा समय लगता है। कारण (R): नक्षत्र वर्ष सायन वर्ष से केवल लगभग 20 मिनट अधिक होता है। सही विकल्प चुनिए

  10. Q10. सूर्य सिद्धांत तथा भारतीय अयनांत-विषुव अवलोकन के विषय में नीचे दिए तीन कथनों पर विचार कीजिए: I. सूर्य सिद्धांत में उल्लिखित था कि उन प्राचीन कालों में शीतकालीन अयनांत के आस-पास मकर (Capricorn) तारामंडल सूर्य की पृष्ठभूमि में रहता था। II. भारतीय खगोलिकों ने सूर्यास्त के समय उदित होने वाले तारों से अयनांत व विषुव का ज्ञान रखा। III. तैत्तिरीय संहिता का श्लोक 6.5.3 भी सूर्य के छह माह दक्षिण तथा छह माह उत्तर की ओर गति का उल्लेख करता है। कौन-से कथन सही हैं?

  11. Q11. भारतीय राष्ट्रीय कालदर्शक से संबंधित निम्न कथनों पर विचार कीजिए: I. भारत सरकार ने 1952 में कैलेंडर रिफॉर्म कमेटी का गठन किया। II. यूनिफाइड नेशनल कैलेंडर को 21 मार्च 1956 सामान्य संवत् अर्थात् 1 चैत्र 1878 शक संवत् से अपनाया गया। III. भारतीय राष्ट्रीय कालदर्शक सूर्य सिद्धांत के सामान्य नियमों का पालन करता है। कौन-से कथन सही हैं?

  12. Q12. मकर सक्रांति एक नक्षत्र कालदर्शक पर आधारित है तथा सायन (ग्रेगोरी) कालदर्शक में प्रत्येक 71 वर्ष में एक दिन आगे खिसक जाती है। 710 वर्षों में यह लगभग कितने दिन आगे खिसक जाएगी?

  13. Q13. क्रियाकलाप 11.1 में विद्यार्थी पूर्णिमा के अगले दिन के सूर्योदय से अवलोकन प्रारंभ करता है तथा 15 दिनों तक करता है। दिन 2 से आगे चंद्रमा का चमकीला भाग पिछले दिन की तुलना में किस प्रकार बदलना चाहिए, तथा सूर्य के सापेक्ष चंद्रमा की स्थिति कैसी दिखनी चाहिए?

  14. Q14. अभिकथन (A): एक ऊर्ध्वाधर छड़ी की छाया तब सबसे छोटी होती है जब सूर्य आकाश में अपनी उच्चतम स्थिति पर हो। कारण (R): प्रति दिन सूर्य के आकाश में अपनी उच्चतम स्थिति पर पहुँचने का प्राकृतिक चक्र ही 'दिन' को परिभाषित करता है। सही विकल्प चुनिए

  15. Q15. भारत में प्रयुक्त चंद्र-सौर कालदर्शकों के विषय में निम्न तीन कथन पढ़ें: I. ये दिनों एवं मासों की गणना के लिए मुख्यतः चंद्रमा की कलाओं का उपयोग करते हैं। II. ये ऋतुओं के चक्र के साथ ताल-मेल बनाए रखने के लिए समायोजन करते हैं। III. ये कभी भी अतिरिक्त मास नहीं जोड़ते, क्योंकि इससे वर्ष बहुत लंबा हो जाएगा। कौन-से कथन सही हैं?

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