पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति
इस अध्याय के बारे में
कक्षा 6 भूगोल का यह अध्याय सिखाता है कि हम पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति कैसे ज्ञात और वर्णित करते हैं। यह मानचित्र (map) से आरंभ होता है — इसके तीन घटक दूरी, दिशा और प्रतीक चिह्न — तथा स्केल, एटलस और भारतीय सर्वेक्षण विभाग के चिह्नों की भूमिका। विद्यार्थी चार चतुर्दिश (cardinal directions) और मध्यवर्ती दिशाएँ सीखते हैं, फिर गोलाकार पृथ्वी के बेहतर प्रतिरूप ग्लोब (globe) की ओर बढ़ते हैं। बाजार की दुकान या शतरंज के पटल जैसे निर्देशांक (coordinates) उदाहरणों से अध्याय अक्षांश (latitude) — भूमध्य रेखा से मापे गए समानांतर, 0° से 90° उ./द. — और देशांतर (longitude) — प्रमुख या ग्रिनिच याम्योत्तर से मापे गए, 0° से 180° पू./प. — का परिचय देता है। ये मिलकर एक ग्रिड बनाते हैं जो किसी भी स्थान को निर्धारित करता है। अध्याय देशांतर को समय से जोड़ता है: पृथ्वी प्रति घंटा 15° घूमती है, जिससे स्थानीय समय, मानक समय (IST = GMT+5.5), समय क्षेत्र तथा 180° के निकट अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा बनती है। भारत की प्राचीन उज्जयिनी याम्योत्तर का भी उल्लेख है। चार टेस्ट इस प्रकार हैं — अभ्यास (तथ्य पुनःस्मरण), क्विज़ (अनुप्रयोग), कठिन (पीवाईक्यू-शैली कथन व दो-चरणीय), तथा निपुणता (पूर्ण-अध्याय मिश्रित, बिना दोहराव)।
इस अध्याय के टेस्ट
बुनियाद बनाएँ। एकल अवधारणा का स्मरण और सीधा अनुप्रयोग।
टेस्ट शुरू करें → क्विज़ 15 प्रश्न 15 मिनटसमझ की जाँच। अध्याय भर में मिश्रित अनुप्रयोग।
टेस्ट शुरू करें → कठिन 15 प्रश्न 18 मिनटPYQ-स्तर। कथन-आधारित, अभिकथन–तर्क, दो-चरणीय समस्याएँ।
टेस्ट शुरू करें → निपुणता 30 प्रश्न 30 मिनटपूरे अध्याय का मॉक। मिश्रित कठिनाई, अन्य तीनों से बिना दोहराव।
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