पुनर्गठन का काल
इस अध्याय के बारे में
पुनर्गठन का काल कक्षा 7 की 'समाज का अध्ययन भाग 1' का छठा अध्याय है। यह अध्याय लगभग 185 सामान्य संवत् पूर्व (सा.सं.पू.) में सेनापति पुष्यमित्र शुंग द्वारा अंतिम मौर्य सम्राट की हत्या से लेकर दूसरी शताब्दी सामान्य संवत् (सा.सं.) में कुषाणों के उदय तक — लगभग पाँच शताब्दियों — की यात्रा कराता है जिसमें भारत का मानचित्र पुनः गढ़ा गया। अध्याय आठ प्रमुख राजवंशों का परिचय देता है जो दो वर्गों में बँटे हैं — उपमहाद्वीप में स्थित राजवंश (शुंग, चेदि, सातवाहन, चोल, चेर, पांड्य) तथा उपमहाद्वीप के बाहर स्थित राजवंश (इंडो-ग्रीक, शक, कुषाण)। इसमें पुष्यमित्र शुंग का अश्वमेध यज्ञ और भरहुत स्तूप; चेदि नरेश खारवेल तथा उदयगिरि-खंडगिरि का हाथीगुंफा अभिलेख; सातवाहनों की कृष्णा-गोदावरी कृषि, नानेघाट गुफाएँ, समुद्री व्यापार तथा रानी गौतमी बलश्री; तीन ताज-धारी राजाओं — चेर, चोल, पांड्य — का संगम युग, महाकाव्य सिलप्पदिकारम्, करिकाल का कल्लनई (ग्रैंड एनीकट); विदिशा का हेलियोडोरस स्तंभ; शक संवत् (भारतीय राष्ट्रीय पंचांग, 1957 में स्वीकृत); तथा कनिष्क के कुषाण साम्राज्य और रेशम मार्ग (Silk Route) से जुड़ी गांधार व मथुरा कला-शैलियों का विवरण है। CTET पेपर 2 सामाजिक अध्ययन इस अध्याय की परीक्षा राजवंश-कालखंड मिलान, राजधानी-स्थान युग्म, अभिलेख-शासक सम्बन्ध, संगम साहित्य, सांस्कृतिक-संगम कारण-परिणाम तथा कालक्रम पर लेता है। चार टेस्ट — अभ्यास 15, क्विज़ 15, कठिन 15, निपुणता 30 — इन छहों विषयों को CTET स्तर पर परखते हैं।
इस अध्याय के टेस्ट
बुनियाद बनाएँ। एकल अवधारणा का स्मरण और सीधा अनुप्रयोग।
टेस्ट शुरू करें → क्विज़ 15 प्रश्न 15 मिनटसमझ की जाँच। अध्याय भर में मिश्रित अनुप्रयोग।
टेस्ट शुरू करें → कठिन 15 प्रश्न 18 मिनटPYQ-स्तर। कथन-आधारित, अभिकथन–तर्क, दो-चरणीय समस्याएँ।
टेस्ट शुरू करें → निपुणता 30 प्रश्न 30 मिनटपूरे अध्याय का मॉक। मिश्रित कठिनाई, अन्य तीनों से बिना दोहराव।
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