पेपर 2 · सामाजिक अध्ययन · कक्षा 7

भारत की जलवायु

75 प्रश्न · 4 अध्याय टेस्ट

इस अध्याय के बारे में

भारत की जलवायु कक्षा 7 की समाज का अध्ययन भाग 1 का तीसरा अध्याय है, जो भूगोल विषयवस्तु से संबंधित है। यह अध्याय रोज़मर्रा की बातचीत में प्रायः उलझाए जाने वाले तीन विचारों को अलग करता है — मौसम (दिन-प्रतिदिन की दशा, जैसे एक गर्म दोपहर), ऋतुएँ (वसंत-ग्रीष्म-वर्षा-शरद-हेमंत-शिशिर — छह ऋतुओं का चक्र) और जलवायु (किसी क्षेत्र का कई दशकों तक चलने वाला दीर्घकालिक प्रतिरूप)। फिर यह भारत में पाई जाने वाली सात जलवायुओं का सर्वेक्षण करता है — उच्च हिमालय में अल्पाइन, निचले पर्वतीय पर्यटक स्थलों में समशीतोष्ण (टेंपरेट), उत्तरी मैदानों में उपोष्णकटिबंधीय (सब-ट्रॉपिकल), थार में शुष्क, पश्चिमी तटीय पट्टी पर उष्णकटिबंधीय आर्द्र, मध्य दक्कन पठार पर अर्ध-शुष्क और पूर्वी भारत व दक्षिणी प्रायद्वीप में मानसून-नियंत्रित उष्णकटिबंधीय। जलवायु निर्धारित करने वाले पाँच कारक — अक्षांश, ऊँचाई, समुद्र से निकटता, पवनें व स्थलाकृति — फिर दक्षिण-पश्चिम व उत्तर-पूर्व मानसून, मौसिनराम की 11000 मि.मी. वर्षा, जलवायु-समाज सम्बन्ध (त्योहार, मानसून फेलियर, एन.डी.आर.एफ.), चार जलवायुजन्य आपदाएँ (चक्रवात, बाढ़, भूस्खलन, दावानल) और अंत में जलवायु परिवर्तन, हरितगृह प्रभाव व न्यूनीकरण के उपाय आते हैं। CTET पेपर 2 सामाजिक अध्ययन इस अध्याय की परीक्षा कारक-प्रभाव मिलान, मुंबई-नागपुर व ऊटी-कोयंबटूर तुलना-प्रश्नों, मानसून दिशा-प्रश्नों तथा आपदा-राज्य मानचित्रण से लेता है। नीचे दिए चार टेस्ट — अभ्यास 15, क्विज़ 15, कठिन 15, निपुणता 30 — इन छह विषय-समूहों को CTET स्तर की गहराई पर जाँचते हैं।

इस अध्याय के टेस्ट