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Q1. भारत के द्वितीय नगरीकरण के संबंध में निम्न कथनों पर विचार करें —
I. यह प्रथम सहस्राब्दी सा.सं.पू. में गंगा के मैदान तथा सिंधु बेसिन के भागों में आरंभ हुआ।
II. यह हड़प्पा सभ्यता के तुरंत बाद, बिना किसी अंतराल के, आरंभ हुआ।
III. यह आज तक अनवरत चलता आ रहा है।
कौन-से कथन सही हैं?
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Q2. निम्न घटनाओं को सही कालक्रम में रखें —
I. हड़प्पा / सिंधु-सरस्वती सभ्यता का विघटन।
II. कुलों का जनपद नामक भूभागों पर बसना, प्रत्येक का एक राजा।
III. आपस में मिलकर बने 16 महाजनपदों का उद्भव।
IV. लगभग 300 सा.सं.पू. के आस-पास महाजनपदों का अंत।
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Q3. अध्याय की जानकारी के आधार पर महाजनपद को उसकी राजधानी से मिलाएँ —
महाजनपद — राजधानी
A. वत्स — 1. चंपा
B. अंग — 2. मथुरा
C. शूरसेन — 3. इंद्रप्रस्थ
D. कुरु — 4. कौशांबी
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Q4. अभिकथन (A): 16 महाजनपदों के मानचित्र में अंग पूर्व-छोर पर दर्शाया गया है।
कारण (R): अध्याय बताता है कि प्रचलित सूची उत्तर-पश्चिम में गांधार से लेकर पूर्व में अंग तक तथा मध्य भारत में अश्मक तक विस्तृत है।
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Q5. अश्मक के संबंध में निम्न में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
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Q6. जनपदों की सभा-समिति के संबंध में निम्न कथनों पर विचार करें —
I. कुछ ग्रंथों के अनुसार अयोग्य शासक को सभा हटा सकती थी।
II. अध्याय कहता है कि इससे सिद्ध है कि राजा को हटाना प्रत्येक जनपद में स्थापित विधि थी।
III. 'सभा' तथा 'समिति' शब्द सर्वप्रथम वेदों में आते हैं।
कौन-से सही हैं?
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Q7. अभिकथन (A): विद्वान वज्जि व मल्ल के गण-संघ महाजनपदों को प्राय: 'प्रारंभिक गणराज्य' कहते हैं।
कारण (R): इन राज्यों में सभा के सदस्य ही विचार-विमर्श व मतदान द्वारा शासक का चयन करते थे तथा प्रमुख निर्णय लेते थे।
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Q8. कथन A: यह माना जा सकता है कि सभा या समिति के अधिकांश सदस्य कुल के वरिष्ठजन थे।
कथन B: राजा को मंत्रियों तथा वरिष्ठजनों की सभा का सहयोग प्राप्त था।
कौन-सा सही है?
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Q9. अध्याय कहता है — 'उन प्राचीन राजधानियों में से अधिकांश आज भी जीवंत नगर हैं — 'आधुनिक' नगर जो प्राय: 2,500 वर्ष पुराने हैं!' एक शिक्षक के लिए कक्षा में सबसे उपयुक्त निष्कर्ष क्या होगा?
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Q10. रवि अध्याय के आरंभ में कौटिल्य का उद्धरण पढ़ता है — 'राज्य की रक्षा राजधानी एवं सीमांत नगरों की दुर्गबंदी द्वारा होनी चाहिए।' महाजनपदों की राजधानियों की कौन-सी विशेषता इस विचार से सबसे अधिक मेल खाती है?
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Q11. द्वितीय नगरीकरण में लौह धातुकर्म के संबंध में निम्न कथनों पर विचार करें —
I. लोहे को निकालने व आकार देने की विधियाँ द्वितीय सहस्राब्दी सा.सं.पू. के प्रारंभ से ही विकसित हो चुकी थीं।
II. हड़प्पा सभ्यता ने लौह धातुकर्म में महारत प्राप्त कर ली थी।
III. लोहे ने काँसे की तुलना में बेहतर हथियार बनाए — हल्के एवं तीक्ष्ण।
कौन-से सही हैं?
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Q12. प्रिया को बताया जाता है कि भारत के प्रारंभिक सिक्के — 'आहत सिक्के' — प्राय: चाँदी के थे। अध्याय से कौन-सा अतिरिक्त तथ्य सही है?
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Q13. व्यापार के विकास को उसके अध्याय-सम्मत विवरण से मिलाएँ —
A. उत्तरापथ — 1. कौशांबी से प्रारंभ होकर विंध्य पर्वतमाला पार कर दक्षिण की ओर
B. दक्षिणापथ — 2. शंख व रत्न उद्योग का स्थल
C. कोडुमणल (तमिलनाडु) — 3. उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों को गंगा के मैदान से होकर पूर्वी भारत तक जोड़ता था
D. चोल, चेर, पांड्य — 4. लगभग 400 सा.सं.पू. से उभरे दक्षिण भारत के तीन राज्य
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Q14. वर्णित जाति के संबंध में निम्न कथनों पर विचार करें —
I. यह एक विशिष्ट व्यावसायिक कार्य से जुड़े समुदाय या समूह को कहते थे, जो उसकी आजीविका से जुड़ा होता था।
II. जाति को परिभाषित करने वाले कौशल प्रायः पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होते थे।
III. अध्याय के अनुसार प्रारंभिक काल में व्यक्ति व समुदाय कभी अपना व्यवसाय नहीं बदल सकते थे।
कौन-से सही हैं?
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Q15. प्रत्येक वर्ण को अध्याय में दी गई उसकी भूमिका से मिलाएँ —
A. ब्राह्मण — 1. समाज की समृद्धि बढ़ाने हेतु व्यापार, व्यवसाय व कृषि
B. क्षत्रिय — 2. शिल्पकार, कारीगर, श्रमिक अथवा सेवक
C. वैश्य — 3. ज्ञान को सुरक्षित रखना व प्रसारित करना, यज्ञ-कर्म
D. शूद्र — 4. समाज एवं भूमि की रक्षा, आवश्यकता पड़ने पर युद्ध
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