पेपर 2 · सामाजिक अध्ययन · कक्षा 7

साम्राज्यों का उदय

75 प्रश्न · 4 अध्याय टेस्ट

इस अध्याय के बारे में

साम्राज्यों का उदय कक्षा 7 की समाज का अध्ययन भाग 1 का पाँचवाँ अध्याय है, जो इतिहास (तापित्र्य) विषयक्रम का प्रारंभ करता है और कौटिल्य के अर्थशास्त्र की पंक्ति से खुलता है — 'जनविहीन देश नहीं हो सकता और देशविहीन राज्य नहीं होता।' यह अध्याय बताता है कि साम्राज्य (empire) क्या होता है — अनेक छोटे-छोटे राज्यों या क्षेत्रों का संघ, जिस पर एक शक्तिशाली सम्राट (samraj, अधिराज, राजाधिराज) अपनी राजधानी से शासन करता है तथा जिनके अधीन राजा अथवा सामंत सम्राट के आधिपत्य को स्वीकार कर भेंट (tribute) देते हैं। यह साम्राज्य की छह विशेषताओं — सेना, प्रशासन, विधि-मुद्रा-माप, संसाधनों पर नियंत्रण, कला व ज्ञान का संरक्षण, संचार तंत्र — तथा राज्य से साम्राज्य बनने के तत्वों (युद्ध, व्यापारिक मार्गों का नियंत्रण, अधिशेष संसाधन, आर्थिक शक्ति) का वर्णन करता है। तत्पश्चात अध्याय छठी से दूसरी शताब्दी सा.सं.पू. के प्राचीन भारत की कथा कहता है — व्यापारिक मार्ग (उत्तरापथ, दक्षिणापथ) व श्रेणियाँ (shrenis); अजातशत्रु एवं महापद्म नंद के अधीन मगध का उदय; सिकंदर (अलेक्ज़ेंडर) का आगमन (334–323 सा.सं.पू.) तथा पोरस से हाइडैस्पीज़ युद्ध; लगभग 321 सा.सं.पू. में चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा कौटिल्य के मार्गदर्शन में स्थापित मौर्य साम्राज्य; कौटिल्य का सप्तांग (स्वामी, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोश, दंड, मित्र); तथा अशोक (268–232 सा.सं.पू.), कलिंग युद्ध, प्राकृत-ब्राह्मी में उत्कीर्ण शिलालेख (edicts), धम्म और मौर्य कला — विशेषतः सारनाथ का सिंह-स्तंभ। CTET पेपर 2 सामाजिक अध्ययन इस अध्याय की परीक्षा तथ्य-स्मरण (तिथि, वंश, राजधानी, शब्दावली), कारण-प्रभाव (मगध की भौगोलिक सुविधाएँ, अशोक का परिवर्तन), अवधारणा (सप्तांग, अधीन) तथा शिक्षाशास्त्र-प्रश्नों से लेता है। नीचे दिए चार टेस्ट — अभ्यास 15, क्विज़ 15, कठिन 15, निपुणता 30 — इन छह विषय-गुच्छों को CTET स्तर की गहराई पर जाँचते हैं।

इस अध्याय के टेस्ट