पर्यावरण अध्ययन · CTET नोट्स

जीव-जंतु एवं पौधे — हमारे आसपास का सजीव संसार | CTET EVS P1

जन्तु एवं पौधे विषय बच्चों को अपने आसपास के सजीव संसार से जोड़ता है — उसकी विविधता, आवास, खाद्य-शृंखला तथा संकट के साथ। CTET पेपर 1 में इस विषय की पूछ बहुत है क्योंकि NCERT की अवलोकन-आधारित शिक्षण-विधि स्थानीय पेड़, कीड़े, पक्षी एवं पालतू पशुओं से जीव-विज्ञान, भूगोल एवं पर्यावरण-नैतिकता का प्रवेश-द्वार बनाती है। अच्छे उत्तर तथ्यात्मक विषय-वस्तु (जैसे जैव-विविधता, ग्रीनहाउस गैसें, झूम खेती) तथा NCF की इस अपेक्षा को साथ रखते हैं कि बच्चे रटें नहीं, बल्कि देखें, चित्र बनाएँ एवं प्रश्न करें।

LIVING WORLD

जीवों की विविधता

NCERT EVS जीवों की विविधता को सीधे, संवेदी अनुभव से परिचित कराता है: विद्यालय की बगिया में टहलना, खेल के मैदान पर कीड़ों का अवलोकन, पक्षियों की आवाज़ें सुनना, अलग-अलग पेड़ों के पत्तों का चित्रण। कक्षा 3 का पाठ 'नंदू के साथ एक दिन', कक्षा 4 का 'अनीता और मधुमक्खियाँ' तथा कक्षा 5 का 'मेरे साल भर के आम' मिलकर यह विचार बनाते हैं कि जीवन अनेक रूप लेता है।

बच्चों को सजीव एवं निर्जीव में भेद करने के लिए ऐसे अवलोकन-योग्य लक्षण सिखाए जाते हैं जिन्हें वे स्वयं परख सकें:

  • गति — जन्तु गति करते हैं; पौधे धीरे-धीरे गति करते हैं (पत्ते सूर्य की ओर, जड़ें जल की ओर)।
  • वृद्धि — सभी सजीव बढ़ते हैं।
  • प्रजनन — अपने जैसे और जीव उत्पन्न करते हैं।
  • भोजन एवं जल की आवश्यकता — पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, जन्तु पौधों या अन्य जन्तुओं को खाते हैं।
  • उद्दीपन के प्रति प्रतिक्रिया — छुई-मुई की पत्ती छूते ही मुड़ जाती है; छिपकली डरकर भागती है।
  • श्वसन एवं उत्सर्जन — सभी सजीव साँस लेते हैं तथा अपशिष्ट निकालते हैं।

प्राथमिक स्तर पर NCERT औपचारिक पाँच-जगत वर्गीकरण का प्रयोग नहीं करता। इसके बजाय वह जीवों को इस प्रकार बाँटता है:

  • पौधे: पेड़, झाड़ियाँ, शाक, लता, बेल; पुष्पीय एवं अपुष्पीय।
  • जन्तु: स्तनधारी (बाल, दूध पिलाने वाले), पक्षी (पंख, अंडे), सरीसृप (शल्क), मछली (गलफड़े), उभयचर (ज़मीन एवं जल), कीट (छह टांगें, अक्सर पंख), मकड़ी-वर्ग (आठ टांगें), कीड़े, घोंघे आदि।
  • सूक्ष्म जीव: कक्षा 5 में किण्वन की कहानियों के माध्यम से — दही जमाने वाले जीवाणु, आटे का खमीर — बिना लैटिन नाम।

शैक्षणिक संदेश यह है कि विविधता ही सम्पदा है: प्रत्येक जीव-रूप का बड़े जाल में अपना स्थान है। शिक्षक विद्यालय की खिड़की से दिखाई देने वाले पौधों एवं जन्तुओं की सूची बनवाते हैं, फिर किसी अन्य ज़िले के विद्यालय की सूची से तुलना करवाते हैं। बच्चे प्रत्यक्ष देखते हैं कि जैव-विविधता स्थान के साथ बदलती है।

आवास — स्थल, जल एवं वायु

आवास वह प्राकृतिक स्थान है जहाँ कोई पौधा या जन्तु रहता है। NCERT EVS कक्षा 3 में आवासों का परिचय देता है तथा कक्षा 4 एवं 5 में जंगल ('जंगल किसके?'), रेगिस्तान ('नदी की कहानी', 'दीवारें कहानी सुनाती हैं'), आर्द्रभूमि ('सुनीता अंतरिक्ष में') तथा पर्वत ('सपेरे की कहानी') पर पाठों में इसे विस्तार देता है।

प्रमुख आवास-प्रकार:

  • स्थलीय: जंगल (उष्णकटिबंधीय, पतझड़ी, शंकुधारी), घास के मैदान, रेगिस्तान (गर्म एवं ठंडे), पर्वत तथा मैदान।
  • जलीय: मीठा जल (नदी, झील, तालाब) तथा खारा जल (समुद्र, महासागर, मुहाने)।
  • वायवीय: पक्षी, चमगादड़ तथा अनेक कीट अधिकांश जीवन उड़ते हुए बिताते हैं।
  • विशेष सूक्ष्म-आवास: पत्थरों के नीचे, पेड़ की छाल की दरारों में, खाद के ढेर में, छत की टंकी में — बच्चों को ये अत्यंत प्रिय हैं क्योंकि वे स्वयं इनकी जाँच कर सकते हैं।

भारत की भौगोलिक विविधता पर ज़ोर है: लद्दाख एवं स्पीति के ठंडे रेगिस्तान हिमालय की वृष्टि-छाया में हैं तथा यहाँ मानसूनी वर्षा लगभग नहीं होती; राजस्थान का थार रेगिस्तान खेजड़ी, बेर एवं नागफनी का घर है। सुंदरबन की मैंग्रोव दलदली खारी भूमि है, जहाँ रॉयल बंगाल टाइगर रहता है। पश्चिमी घाट जैव-विविधता का हॉट-स्पॉट है, जहाँ नीलगिरि तहर एवं शेर-पूँछ बंदर जैसी स्थानीय प्रजातियाँ हैं।

बच्चे सीखते हैं कि हर आवास अपने निवासियों के शरीर को आकार देता है — मछली को गलफड़े चाहिए, ऊँट को कूबड़, आर्कटिक लोमड़ी को मोटा फर। दूसरी ओर, जीव भी अपने आवास को आकार देते हैं: केंचुए मिट्टी को हवादार बनाते हैं, मधुमक्खियाँ परागण करती हैं।

शिक्षक का कार्य है कि बच्चों के अपने तत्काल आवास को पहले अध्ययन-वस्तु बनाएँ। गाँव के बच्चे से पूछा जा सकता है: तालाब पर कौन-से जन्तु आते हैं? विद्यालय की दीवार पर क्या उगता है? आवास का अध्ययन दूर के बर्फीले तेंदुओं से नहीं, बल्कि छज्जे पर बने गौरैया के घोंसले से शुरू होता है।

हमारे आसपास के पौधे — संरचना एवं कार्य

NCERT EVS पौधों का परिचय उनके दृश्य भागों — जड़, तना, पत्ती, फूल, फल, बीज — तथा उनके दैनिक उपयोग से कराता है। कक्षा 4 का पाठ 'ओमना की यात्रा' एक बच्ची की रेल यात्रा में धान के खेत, केले के बागान तथा नारियल के पेड़ों के विस्मय को दर्शाता है; कक्षा 5 का पाठ 'बीज, बीज, बीज' रसोई को वनस्पति-कक्षा बना देता है।

पौधे के भागों के कार्य (सरल शब्दों में):

  • जड़ें पौधे को थामती हैं तथा जल एवं खनिज सोखती हैं। बच्चे रूई में चना या मूँग अंकुरित करके जड़ें निकलती देख सकते हैं।
  • तना जल को ऊपर तथा भोजन को नीचे ले जाता है; पत्तियों एवं फूलों को सहारा देता है। खोखला बाँस, गूदेदार केला, काष्ठीय आम — तना अनेक रूप लेता है।
  • पत्तियाँ सूर्य के प्रकाश, जल एवं वायु से भोजन बनाती हैं ('पौधे अपना भोजन स्वयं पकाते हैं'); वे साँस भी लेती हैं तथा जल वाष्पित करती हैं।
  • फूल परागण-कर्ताओं (मधुमक्खी, तितली, सूरजमुखी-चिड़िया) को आकर्षित करते हैं तथा फलों में बदलते हैं।
  • फल एवं बीज अगली पीढ़ी की रक्षा करते हैं; हवा, जल, जन्तुओं या फटकर फैलते हैं।

पुस्तक लोकप्रिय भ्रांतियों पर प्रश्न उठाने में सावधान है। बच्चे अक्सर सोचते हैं 'गाजर जड़ है' पर 'आलू भी जड़ है' मान लेते हैं। पाठ्यक्रम उनसे आलू के पौधे को खोदकर देखने को कहता है — पता चलता है कि आलू भूमिगत तना है (कन्द)। उसी तरह अदरक एवं हल्दी प्रकंद हैं (रूपांतरित तने), जड़ नहीं। NCERT EVS की सूची में सच्ची जड़-सब्जियाँ हैं — गाजर, चुकन्दर, मूली, शकरकंद, टैपिओका, शलजम, चुकन्दर

पौधों का वर्गीकरण आकार से भी होता है — शाक (कोमल तना, छोटा जीवन: तुलसी, धनिया), झाड़ी (काष्ठीय, मध्यम ऊँचाई: गुलाब, गुड़हल), पेड़ (ऊँचे, काष्ठीय: नीम, आम), लता एवं बेल (कमज़ोर तना, सहारे की ज़रूरत: मनी-प्लांट, कद्दू)। बच्चे अपनी विद्यालय-बगिया के पौधों का इस तरह वर्गीकरण करना पसंद करते हैं।

हमारे आसपास के जन्तु — पालतू एवं जंगली

NCERT EVS पालतू जन्तुओं (मनुष्य द्वारा दूध, परिवहन, अंडे, सुरक्षा एवं साथ के लिए पालतू बनाए गए) तथा जंगली जन्तुओं (प्रकृति में स्वतंत्र रहने वाले) में भेद करता है। कक्षा 3 का 'हमारे मित्र — जन्तु' तथा कक्षा 5 का 'क्या हमारे लिए जगह नहीं?' इस विषय पर हैं।

सामान्य पालतू जन्तु:

  • दुग्ध-दायी: गाय, भैंस, बकरी — दूध एवं दुग्ध उत्पाद।
  • भार-वाहक: बैल, घोड़ा, गधा, ऊँट, याक — परिवहन एवं जुताई।
  • पोल्ट्री: मुर्गी, बत्तख, टर्की — अंडे एवं मांस।
  • साथी: कुत्ता, बिल्ली, ख़रगोश, तोता।
  • ऊन एवं रेशा: भेड़, अल्पाका, अंगोरा ख़रगोश।

जंगली जन्तु भारतीय आवासों के माध्यम से प्रस्तुत होते हैं — रॉयल बंगाल टाइगर (सुंदरबन), एशियाई शेर (गिर, गुजरात), एक-सींग वाला गैंडा (काज़ीरंगा, असम), हिम तेंदुआ (हिमालय), भारतीय हाथी (पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर), ओलिव रिडले कछुआ (ओडिशा तट), ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (राजस्थान)।

EVS का एक महत्वपूर्ण विचार है कि 'जंगली' का अर्थ 'बुरा' नहीं। पाठ्यपुस्तक उन बच्चों को धीरे से सुधारती है जो कहते हैं 'जंगली जन्तु लोगों पर हमला करते हैं'। जन्तु तभी हमला करते हैं जब वे डरें, बीमार हों या भूखे हों। मनुष्यों ने जंगलों में अतिक्रमण करके अधिकांश मानव-जन्तु संघर्ष पैदा किया है, उल्टा नहीं। बच्चे सीखते हैं कि सम्मान, दूरी एवं आवास-संरक्षण ही दोनों पक्षों को सुरक्षित रखते हैं।

जन्तुओं की देखभाल आदतों के माध्यम से सिखाई जाती है:

  • सड़क के जन्तुओं पर कभी पत्थर न फेंकें।
  • गर्मी में पक्षियों एवं कुत्तों के लिए पानी के कटोरे रखें।
  • मनोरंजन के लिए कीड़ों या पक्षियों को न पकड़ें।
  • यदि आप पालतू पशु रखते हैं, तो खान-पान, सफ़ाई एवं स्वास्थ्य-देखभाल का दायित्व स्वीकार करें।

जो शिक्षक 'कक्षा-पालतू' कार्यक्रम चलाते हैं — मछली का टंकी या पक्षी-दाना — वे बच्चों को प्रतिदिन अवलोकन एवं दायित्व का अभ्यास देते हैं। CTET अक्सर परखता है कि शिक्षक EVS के इस भावनात्मक आयाम को पहचानते हैं या नहीं।

खाद्य-शृंखला एवं अन्तःनिर्भरता

खाद्य-शृंखला दिखाती है कि कौन किसे खाता है। NCERT कक्षा 4 एवं 5 में खाद्य-शृंखला का परिचय सरल क्रमों से कराता है, जिन्हें बच्चे स्वयं कार्ड से बना सकते हैं: घास → टिड्डा → मेंढक → साँप → बाज।

मुख्य अवधारणाएँ:

  • उत्पादक: हरे पौधे सूर्य के प्रकाश, जल एवं वायु से अपना भोजन बनाते हैं। समस्त जीवन अंततः उत्पादकों पर निर्भर है।
  • उपभोक्ता: पौधे खाने वाले जन्तु (शाकाहारी), अन्य जन्तु खाने वाले जन्तु (मांसाहारी), दोनों खाने वाले जन्तु (सर्वाहारी)।
  • अपघटक: जीवाणु, कवक एवं केंचुए मृत पदार्थ को तोड़कर मिट्टी में पोषक तत्व लौटाते हैं ताकि उत्पादक पुनः उग सकें।
  • खाद्य-जाल: वास्तविक पारिस्थितिकी में अनेक शृंखलाएँ आपस में कटती हैं — मेंढक को साँप, उल्लू या बगुला खा सकता है। जाल किसी एक शृंखला से अधिक सुदृढ़ होता है।

पाठ्यपुस्तक अन्तःनिर्भरता पर बल देती है। मधुमक्खियाँ फलदार पेड़ों में परागण करती हैं; यदि कीटनाशकों से मधुमक्खियाँ समाप्त हो जाएँ, तो फल एवं मेवे ग़ायब हो जाएँगे और मनुष्य भूखे रहेंगे। गिद्ध मृत पशुओं को खाकर बीमारी फैलने से रोकते हैं; भारत में डाइक्लोफेनाक के कारण गिद्धों की संख्या में भारी कमी आई, जिससे सड़ते शव तथा रेबीज़ बढ़ा। गौरैया खेतों के कीड़े खाती हैं; गौरैया घटने से किसान अधिक कीटनाशक डालने लगे। ये कारण-प्रभाव की कहानियाँ प्राथमिक EVS का हृदय हैं।

कक्षा 5 में ग्रीनहाउस प्रभाव प्रस्तुत होता है: कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन तथा जल-वाष्प जैसी गैसें वायुमंडल में सूर्य की ऊष्मा रोक लेती हैं, जैसे ग्रीनहाउस की छत। यह प्राकृतिक प्रक्रिया पृथ्वी को जीवन के लायक गर्म रखती है। परन्तु मनुष्य की गतिविधियों — कोयला-तेल-जंगलों का जलना, बड़ी संख्या में पशुपालन — से अत्यधिक CO₂ एवं मीथेन बढ़ी है, जिससे वैश्विक तापन हो रहा है। बच्चे इसे स्थानीय अवलोकनों से जोड़ते हैं: ग्लेशियर सिकुड़ना, मानसून का समय बदलना, गर्मी बढ़ना।

एक और परीक्षण-योग्य विषय है ताजमहल का पीला पड़ना — डीज़ल-पेट्रोल एवं समीप के कारख़ानों से निकली सल्फर डाइऑक्साइड के संगमरमर पर प्रतिक्रिया से। EVS ऐसे ठोस उदाहरणों से दिखाता है कि प्रदूषण केवल जीवों को नहीं, हमारी विरासत को भी हानि पहुँचाता है।

जन्तुओं एवं पौधों में अनुकूलन

अनुकूलन वह विशेषता है जो किसी जीव को अपने आवास में जीवित रहने में सहायता करती है। NCERT EVS कक्षा 4 एवं 5 अनुकूलन पर पाठ देता है — सघन शब्दावली के बजाय भावपूर्ण कहानियों से।

पौधों के अनुकूलन:

  • गर्म रेगिस्तानी पौधे (नागफनी, खेजड़ी, बेर) — जल भंडार करने वाले गूदेदार तने, पत्तियाँ काँटों में बदली, गहरी जड़ें, मोमी परत।
  • ठंडे रेगिस्तानी पौधे (लद्दाख में सेब, खुबानी, विलो) — हवा से बचने को नीचे एवं घने, पथरीली मिट्टी में गहरी जड़ें।
  • पर्वतीय पेड़ (देवदार, चीड़, ओक) — शंक्वाकार आकार बर्फ गिराने में सहायक; सूई जैसी पत्तियाँ पाला सहती हैं।
  • मैंग्रोव पेड़ (सुंदरबन में) — जल-संतृप्त खारी मिट्टी के लिए श्वसन-जड़ें (न्यूमेटोफोर)।
  • जलीय पौधे (कमल, जलकुम्भी) — तरने के लिए तने में हवा के थैले; बड़े सतह क्षेत्र वाली पत्तियाँ।

CTET में परखा गया प्रसिद्ध डेज़र्ट ओक उदाहरण ऑस्ट्रेलिया के रेगिस्तानों के पेड़ का है; इसकी जड़ें 30 मीटर नीचे भूजल तक पहुँचती हैं। पाठ्यपुस्तक इसका प्रयोग यह दिखाने को करती है कि महाद्वीपों के बीच रेगिस्तानी जीवन समान रणनीतियाँ साझा करता है।

जन्तुओं के अनुकूलन:

  • ऊँट — कूबड़ में वसा संग्रह, गद्दीदार पैर, लंबी पलकें, एक बार में अधिक जल पीने की क्षमता।
  • ध्रुवीय भालू — गर्मी एवं छलावरण के लिए मोटा सफेद फर; नीचे चर्बी की परत।
  • मेंढक — तैरने के लिए जालदार पैर, स्थल पर साँस के लिए नम त्वचा।
  • मछली — सुडौल शरीर, गलफड़े, शल्क, पंख।
  • पक्षी — खोखली हड्डियाँ, परदार पंख, हल्का कंकाल; चोंच के अनेक रूप — गौरैया की छोटी चोंच बीजों के लिए, सूरजमुखी-चिड़िया की लंबी चोंच रस के लिए, कलकलिया की भालेदार चोंच मछली के लिए।
  • प्रवास: साइबेरियाई सारस हर सर्दी में भरतपुर (केवलादेव) आते हैं; व्हेल समुद्रों में लंबी यात्राएँ करती हैं।
  • शीतनिद्रा एवं ग्रीष्मनिद्रा — मेंढक सर्दियों में सोते हैं; कुछ छिपकलियाँ शुष्क गर्म महीनों में सोती हैं।

शैक्षणिक संदेश है — रूप कार्य के अनुरूप होता है; प्रत्येक विचित्र विशेषता का जीवन-कारण होता है। शिक्षक 'विशेषता-को-आवास से जोड़ो' कार्ड-खेलों का प्रयोग करते हैं ताकि बच्चे केवल नाम नहीं, तर्क सीखें।

संकटग्रस्त प्रजातियाँ एवं संरक्षण

संकटग्रस्त प्रजाति वह है जिसकी जनसंख्या इतनी कम हो गई है कि विलुप्ति का जोखिम है। NCERT EVS इस विषय को सहज पर दृढ़ ढंग से उठाता है, प्रजातियों एवं उन पर आए संकटों के नाम लेकर।

पाठ्यपुस्तकों में नामित भारतीय संकटग्रस्त प्रजातियाँ:

  • रॉयल बंगाल टाइगर — आवास-हानि, चमड़े के लिए शिकार।
  • एशियाई शेर — केवल गिर में सीमित; रोग एवं अंतःप्रजनन की संवेदनशीलता।
  • एक-सींग वाला गैंडा — सींग के लिए अवैध शिकार।
  • हिम तेंदुआ — भारत में 500 से कम।
  • ग्रेट इंडियन बस्टर्ड — घास के मैदानों का विनाश; 150 से कम बचे।
  • ओलिव रिडले कछुआ — समुद्र-तट की रोशनी एवं मछली-जाल।
  • घड़ियाल — रेत-खनन से नदी-तट नष्ट।
  • भारतीय गिद्ध, सफेद-कमर गिद्ध — डाइक्लोफेनाक विषाक्तता।

प्राथमिक स्तर पर सिखाए जाने वाले संरक्षण प्रयास:

  • प्रोजेक्ट टाइगर (1973) — बाघ अभयारण्य बनाए गए; बाघों की संख्या 1972 के ~1,800 से बढ़कर 2022 की गणना में 3,000 से अधिक हुई।
  • राष्ट्रीय उद्यान एवं अभयारण्य — काज़ीरंगा, जिम कॉर्बेट, गिर, पेरियार, बांदीपुर, सुंदरबन, रणथम्भौर।
  • जीवमंडल रिज़र्व — नीलगिरि, नंदा देवी, सुंदरबन।
  • स्थानांतरित खेती (झूम) भारत के पूर्वोत्तर में — पारंपरिक प्रथा; अति-संक्षिप्त चक्र वनों के लिए हानिकारक हैं, पर सतत झूम-चक्र संरक्षण-चर्चा का अंग है।
  • देव वन (पवित्र उपवन) — समुदाय-संरक्षित जंगल; जैसे कोडगु के देवरकाडु एवं राजस्थान के ओरण — स्वदेशी संरक्षण के जीवित उदाहरण।
  • चिपको आंदोलन (1973, उत्तराखंड) — ग्रामीणों ने पेड़ों से लिपटकर कटाई रोकी; कक्षा 5 में नागरिक-शक्ति की कहानी।

शैक्षणिक उद्देश्य है बच्चों को तथ्य-जानने ('बाघ संकट में है') से कार्य-सोचने ('मैं क्या कर सकता हूँ?') तक ले जाना। वृक्षारोपण, विद्यालय में 'नो प्लास्टिक' दिवस, पक्षी-दर्शन क्लब, अभयारण्य भ्रमण — ये अमूर्त संरक्षण को आदत में बदलते हैं।

अवलोकन के माध्यम से सजीव संसार पढ़ाना

NCERT EVS पाठ्यक्रम अवलोकन को प्राथमिक विज्ञान का मूल कौशल मानता है। कक्षा 4 की शिक्षक-पुस्तिका सात मूल प्रक्रियाएँ बताती है — अवलोकन, वर्गीकरण, अनुमान, प्रयोग, संप्रेषण, निष्कर्ष एवं चिंतन — और अवलोकन सबकी जड़ है।

EVS कक्षा में अवलोकन कैसा दिखता है?

  • प्रकृति-यात्रा: कॉपी लेकर विद्यालय परिसर की छोटी यात्रा; बच्चे हर पौधे एवं जन्तु की सूची बनाएँ।
  • स्थिर-स्थान: प्रत्येक बच्चे का एक पेड़ या बेंच; वह सप्ताह-दर-सप्ताह उसी स्थान पर बैठकर ऋतु-परिवर्तन देखे।
  • चित्र-कॉपी: पत्ती या कीट का चित्रण बच्चे को निरंतर ध्यान देने को बाध्य करता है; तस्वीरों में छूटे हुए विवरण ध्यान में आते हैं।
  • ध्वनि-मानचित्र: दो मिनट आँखें बंद करके सुनाई देने वाली हर ध्वनि — पक्षी, वाहन, हवा, आवाज़ें — काग़ज़ पर अंकित करें।
  • स्पर्श-डिब्बे: बीज, छाल के टुकड़े, पंख, सूखी पत्तियाँ; बच्चे बिना देखे स्पर्श से पहचानें।
  • अंकुरण-प्रयोग: रूई में राजमा, मूँग, मेथी उगाएँ; दस दिन तक जड़, अंकुर एवं पत्ती देखें।

शिक्षक की भूमिका है उत्तर देना नहीं, प्रश्न पूछना। 'आप क्या देख रहे हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? यदि ऐसा हो तो क्या होगा?' खुले प्रश्न बच्चों को अर्थ-निर्माण की ओर ले जाते हैं। तुलना के प्रश्न ('नीम का पत्ता आम के पत्ते से कैसे भिन्न है?') अवलोकन को और तेज़ करते हैं।

CTET में परखे जाने वाले दो शैक्षणिक जाल:

  • केवल वर्क-शीट पढ़ाई: बाहर जाए बिना 'तीन मांसाहारी नाम लिखो' भरवाना। NCF इसका दृढ़ विरोध करता है।
  • केवल पाठ्यपुस्तक के जन्तु दिखाना: मिज़ोरम के बच्चों को ध्रुवीय भालू पढ़ाना पर पास के हूलॉक गिबन्स नहीं। EVS स्थानीय से शुरू होकर ही विदेशी तक जाए।

रचनावादी EVS हर बच्चे को छोटा प्रकृति-शास्त्री मानता है। जो शिक्षक बारिश की सुबह 'चुप—देखो, घोंघा!' कहकर रुकते हैं, वे सच्चा विज्ञान कर रहे होते हैं।

अभ्यास प्रश्न

Q1. भारत में किस क्षेत्र में स्थानांतरित खेती करने का रिवाज है?

  • उत्तर-पूर्वी क्षेत्र
  • दक्षिणी क्षेत्र
  • उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र
  • दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र

व्याख्या: स्थानांतरित खेती (झूम) भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों — नागालैंड, मिज़ोरम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश — की जनजातीय समुदायों की पारंपरिक चक्रीय कृषि है। NCERT कक्षा 5 EVS के पाठ 'जंगल किसके?' में झूम के माध्यम से स्वदेशी ज्ञान एवं वन-आधारित आजीविका पर चर्चा होती है।

स्रोत: CTET Dec 2018 P1, Q65

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी ग्रीनहाउस गैस/गैसें है/हैं?

  • कार्बन डाइऑक्साइड
  • मीथेन
  • जल-वाष्प
  • उपर्युक्त सभी

व्याख्या: कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन तथा जल-वाष्प तीनों ही पृथ्वी के वायुमंडल में सूर्य की ऊष्मा को रोकते हैं और ग्रीनहाउस गैसें कहलाती हैं। NCERT कक्षा 5 EVS में इन गैसों का परिचय वैश्विक तापन के संदर्भ में दिया गया है — ईंधन-दहन एवं वनों की कटाई के परिणामस्वरूप अधिक उत्सर्जन से मानसून एवं ग्लेशियरों पर पड़ रहे प्रभाव की चर्चा।

स्रोत: CTET Dec 2018 P1, Q67

Q3. भारत में ठंडे रेगिस्तान मानसून से प्रभावित क्यों नहीं होते?

  • ठंडे रेगिस्तानों में गर्म गर्मियाँ और बेहद ठंडी सर्दियाँ होती हैं।
  • ठंडे रेगिस्तान हिमालय की वृष्टि-छाया में होते हैं।
  • ठंडे रेगिस्तानों में हवा बहुत पतली (कम) होती है।
  • ठंडे रेगिस्तान बहुत ऊँचाई पर हैं।

व्याख्या: लद्दाख एवं स्पीति जैसे ठंडे रेगिस्तान हिमालय की वृष्टि-छाया में स्थित हैं। मानसूनी हवाएँ ऊँची चोटियों को पार करने से पहले ही अपनी सारी नमी छोड़ देती हैं, जिससे ये क्षेत्र अत्यंत शुष्क रहते हैं। NCERT EVS लद्दाख के परिदृश्य से बच्चों को सिखाता है कि पर्वत वर्षा एवं आवास को कैसे आकार देते हैं।

स्रोत: CTET Dec 2018 P1, Q68

Q4. ताजमहल के पीले होने के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा जिम्मेदार है?

  • नाइट्रोजन डाइऑक्साइड
  • सल्फर डाइऑक्साइड
  • सल्फर
  • क्लोरीन

व्याख्या: सल्फर-आधारित उत्सर्जन — मुख्यतः समीप के कारख़ानों, रिफ़ाइनरियों एवं डीज़ल वाहनों से निकली सल्फर डाइऑक्साइड — नमी के साथ अभिक्रिया कर ताजमहल के संगमरमर पर जम जाती है तथा उसे पीला कर देती है। NCERT कक्षा 5 EVS इसे प्रदूषण द्वारा सांस्कृतिक धरोहर को होने वाली हानि के ठोस उदाहरण के रूप में प्रयोग करता है।

स्रोत: CTET Dec 2018 P1, Q69

Q5. 'रेगिस्तानी ओक' नाम का एक पेड़ है, जो पाया जाता है—

  • आबू-धाबी में
  • ऑस्ट्रेलिया में
  • राजस्थान के रेगिस्तानों में
  • संयुक्त अरब अमीरात के रेगिस्तानों में

व्याख्या: रेगिस्तानी ओक मध्य ऑस्ट्रेलिया के रेगिस्तान का एक ऊँचा पेड़ है, जिसकी जड़ें 30 मीटर नीचे तक भूजल तक पहुँचती हैं। NCERT कक्षा 5 EVS में रेगिस्तानी अनुकूलन से जुड़े पाठ इस पेड़ का उल्लेख करते हैं कि दुनिया-भर के शुष्क क्षेत्रों के पौधे समान जीवित-रहने की रणनीतियाँ अपनाते हैं।

स्रोत: CTET Dec 2019 P1, Q64