पर्यावरण अध्ययन · CTET नोट्स

परिवार एवं मित्र — रिश्ते, कार्य एवं समुदाय | CTET EVS P1

परिवार एवं मित्र का विषय NCERT के EVS पाठ्यक्रम का प्रवेश-द्वार है क्योंकि प्रत्येक बच्चा रिश्तों, कार्य एवं समुदाय का जीवंत अनुभव लेकर ही कक्षा में आता है। CTET पेपर 1 के लिए यह विषय विषय-ज्ञान (परिवार के प्रकार, समुदाय के सहायक, त्यौहार, व्यवसाय) तथा NCF 2005 के 'स्व-पर' सिद्धांत पर आधारित शिक्षण-विधि दोनों को एक साथ परखता है — यह देखा जाता है कि क्या शिक्षक विविध घरेलू संस्कृतियों को बिना किसी पूर्वाग्रह के स्वीकार कर पाते हैं।

FAMILY

परिवार के प्रकार — एकल, संयुक्त एवं विस्तारित

NCERT की कक्षा 3 की पुस्तक आस-पास बच्चों को यह समझाती है कि परिवार उन लोगों का समूह है जो साथ रहते हैं, एक-दूसरे की देखभाल करते हैं तथा कार्य एवं संसाधन साझा करते हैं। पाठ्यक्रम जान-बूझकर किसी एक 'सही' संरचना को नहीं थोपता; बल्कि बच्चों को अपने स्वयं के घर का वर्णन करने के लिए प्रेरित करता है।

प्राथमिक स्तर पर तीन कामचलाऊ श्रेणियाँ प्रयोग होती हैं:

  • एकल परिवार: माता-पिता एवं उनके अविवाहित बच्चे — शहरी प्रवासी परिवेश में सर्वाधिक प्रचलित।
  • संयुक्त परिवार: एक ही पीढ़ी के दो या अधिक भाई-भाभी, उनके माता-पिता तथा बच्चे, सब एक ही रसोई, एक ही आय-समूह तथा एक ही मुखिया के नीचे रहते हैं।
  • विस्तारित परिवार: दादा-दादी, चाचा-ताऊ, बुआ, मामा-मौसी और चचेरे-ममेरे भाई-बहनों का व्यापक नेटवर्क, जो एक ही छत के नीचे हों या न हों, परन्तु जिम्मेदारियाँ, त्यौहार एवं भावनात्मक बंधन साझा करते हैं।

पुस्तक यह जोड़ने में सावधानी बरतती है कि आज के परिवारों में एकल-अभिभावक परिवार, बाल-मुखिया परिवार, दादा-दादी द्वारा पाले गए परिवार, पालक-परिवार तथा गोद लिए गए बच्चों वाले परिवार भी शामिल हैं। शैक्षणिक संदेश यह है कि संरचना से प्रेम नहीं नापा जाता। यदि शिक्षक बच्चों को एक ही ढाँचा ('पिता + माता + दो बच्चे') देकर उसमें अपना परिवार रंगने को कहता है, तो विभिन्न प्रकार के घरों से आए बच्चे स्वयं को अदृश्य महसूस करते हैं।

NCF का निर्देश है कि शिक्षक बच्चे की वास्तविकता से शुरुआत करें: बच्चों से पूछें — आपके साथ कौन रहता है, कौन खाना बनाता है, कौन कहानियाँ सुनाता है। उत्तरों की तुलना से विविधता की सच्ची समझ बनती है। मूल्यांकनकारी भाषा ('आपका परिवार अधूरा है') से बचें; इसके बदले वर्णनात्मक भाषा ('हमारी कक्षा में अनेक प्रकार के परिवार हैं') का प्रयोग करें।

रिश्ते एवं वंश-वृक्ष

जब बच्चे यह बताने लगते हैं कि घर में कौन-कौन रहता है, तब EVS आगे बढ़कर रिश्तों के नाम सीखने तथा सरल वंश-वृक्ष बनाने की ओर ले जाता है। कक्षा 3 का पाठ 'हमारा पहला स्कूल' तथा कक्षा 5 का 'सुनीता अंतरिक्ष में' दोनों ही वंश-वृक्ष गतिविधियों के माध्यम से शब्दावली, क्रम तथा बड़ों के प्रति सम्मान विकसित करते हैं।

NCERT प्राथमिक EVS में परिचित रिश्ते:

  • सीधी रेखा: दादा-दादी / नाना-नानी, माता-पिता, बच्चे, पोते-पोतियाँ।
  • पैतृक पक्ष: चाचा-चाची, बुआ-फूफा तथा उनके बच्चे।
  • मातृक पक्ष: मामा-मामी, मौसी-मौसा तथा उनके बच्चे।
  • ससुराली रिश्ते: सास-ससुर, जेठ-जेठानी, देवर-देवरानी — आमतौर पर कहानियों के माध्यम से प्रस्तुत किए जाते हैं।

हिन्दी-माध्यम के शिक्षक देखते हैं कि बच्चे ये शब्द घर में पहले से ही प्रवाह से प्रयोग करते हैं; अतः EVS पाठ का उद्देश्य रिश्तों को रटाना नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी सामाजिक भूमिकाओं को समझाना है। उदाहरण के लिए — अनेक क्षेत्रों में बच्चे बड़ों के पैर क्यों छूते हैं? सबसे बड़ी मौसी को 'बड़ी मौसी' क्यों कहा जाता है? ऐसे खुले प्रश्न रटे बिना सम्मान विकसित करते हैं।

वंश-वृक्ष की गतिविधि रचनावादी क्रम में होती है: बच्चा सबसे नीचे स्वयं को रखता है, फिर भाई-बहनों को, ऊपर माता-पिता को, सबसे ऊपर दादा-दादी एवं नाना-नानी को। रक्त-संबंध सीधी रेखाओं से तथा ससुराली संबंध बिन्दीदार रेखाओं से जोड़े जाते हैं। शिक्षक अपूर्ण वृक्षों को सहजता से स्वीकार करें — कुछ बच्चों को नाना-नानी या दादा-दादी का पता न हो, या सौतेले रिश्ते हों। शिक्षक को कभी भी पूरी कक्षा के सामने यह नहीं पूछना चाहिए — 'तुम्हारे वंश-वृक्ष में पिता / माता क्यों नहीं हैं?'

यह गतिविधि प्रारंभिक जैविक समझ भी विकसित करती है — पीढ़ी-दर-पीढ़ी गुणों के संचरण का विचार, जो कक्षा 5 के विरासत-संबंधी पाठों के लिए आधार तैयार करता है।

समुदाय के सहायक एवं व्यवसाय

परिवार के बाहर समुदाय है — पड़ोस के वे लोग जिनके दैनिक कार्य से जीवन संभव होता है। NCERT कक्षा 2 तथा 3 के पाठ — जैसे 'सहायक हाथ', 'जंगल किसके?', 'नंदू के साथ एक दिन' — यह दर्शाते हैं कि समुदाय किसी एक मालिक से नहीं, बल्कि परस्पर सेवा से बँधा होता है।

सामान्यतः अध्ययन किए जाने वाले समुदाय के सहायक:

  • स्वास्थ्य: डॉक्टर, नर्स, आशा कार्यकर्ता, दवा-विक्रेता।
  • शिक्षा: शिक्षक, पुस्तकालय-अध्यक्ष, आँगनवाड़ी कार्यकर्ता।
  • सुरक्षा: पुलिस, अग्निशामक, चौकीदार।
  • दैनिक सेवाएँ: डाकिया, दूधवाला, सब्ज़ी-विक्रेता, धोबी, नाई, मोची, सफ़ाई-कर्मी, बिजली-मिस्त्री, प्लम्बर, ऑटो-चालक।
  • उत्पादक: किसान, बुनकर, कुम्हार, लोहार, मछुआरा, राज-मिस्त्री।

CTET का एक मुख्य संदेश यह है कि कोई भी काम 'छोटा' या 'बड़ा' नहीं होता। पुस्तक स्पष्ट रूप से ऊँच-नीच को चुनौती देती है — 'यदि सफ़ाई-कर्मी एक सप्ताह तक स्कूल न आए तो क्या होगा?' यह प्रश्न उस अनकही ऊँच-नीच को तोड़ता है जो डॉक्टर को सफ़ाई-कर्मी से ऊपर रखती है।

शिक्षक से अपेक्षा है कि वे:

  • किसी समुदाय-सहायक (जैसे स्थानीय डाकिया या सब्ज़ी-विक्रेता) को कक्षा में बातचीत के लिए बुलाएँ, न कि केवल भाषण के लिए।
  • पड़ोस में व्यवसाय-भ्रमण करवाएँ, जिसमें बच्चे सहायकों को देखें और उनकी सूची बनाएँ।
  • व्यवसाय को औज़ारों एवं सामग्री से जोड़ें (दर्जी कैंची-गज़ का प्रयोग करता है; राजमिस्त्री करनी-साहुल का प्रयोग करता है) ताकि बच्चे कुशल श्रम का सम्मान करें।
  • लिंग-भेद की रूढ़ियों पर खुलकर बात करें — क्या केवल महिलाएँ नर्स बनती हैं? क्या केवल पुरुष डॉक्टर होते हैं? बच्चे स्वयं अपने अनुभवों से इन रूढ़ियों को तोड़ते हैं।

यह खंड CTET में अधिक पूछा जाता है क्योंकि श्रम की गरिमा का सिद्धांत संविधान का मूल कर्तव्य (अनुच्छेद 51-क) तथा NCF का केंद्रीय लक्ष्य है।

त्यौहार एवं सांस्कृतिक विविधता

भारत का पंचांग त्यौहारों से सघन है — धार्मिक, फसली, क्षेत्रीय तथा जनजातीय। NCERT EVS की पुस्तकें प्रत्येक प्राथमिक कक्षा में त्यौहारों को धार्मिक शिक्षा के रूप में नहीं, बल्कि साझा आनंद के उत्सव के रूप में प्रस्तुत करती हैं। पाठ — 'मौसम' (कक्षा 5), 'चखने का समय', 'सपेरे की कहानी' — सभी त्यौहारों को बुनते हैं।

NCERT EVS में अक्सर उल्लिखित त्यौहार:

  • फसली त्यौहार: पोंगल (तमिलनाडु), बीहू (असम), लोहड़ी (पंजाब), मकर संक्रांति (पूरे भारत में), बैसाखी (पंजाब), ओणम (केरल), नुआखाई (ओडिशा)।
  • धार्मिक त्यौहार: दीवाली, होली, ईद-उल-फितर, ईद-उल-ज़ुहा, क्रिसमस, बुद्ध पूर्णिमा, महावीर जयन्ती, गुरु नानक जयन्ती, नवरोज़।
  • जनजातीय एवं क्षेत्रीय नृत्य-उत्सव: चपचार कुट (मिज़ोरम, जिसमें प्रसिद्ध चेराओ बांस-नृत्य होता है), हॉर्नबिल (नागालैंड), वांगला (मेघालय), सरहुल (झारखंड)।
  • राष्ट्रीय दिवस: गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, गांधी जयंती — ये नागरिक उत्सव सभी समुदायों को जोड़ते हैं।

शिक्षाशास्त्र की दृष्टि से त्यौहार सांस्कृतिक विविधता सिखाने के माध्यम हैं। शिक्षक एक कक्षा-पंचांग बनाते हैं जिसमें बच्चे अपने घर में मनाए जाने वाले त्यौहार चिह्नित करते हैं। बच्चे शीघ्र ही देखते हैं कि सहपाठी अलग-अलग समय पर अलग-अलग चीज़ें मनाते हैं। यह दृश्य प्रस्तुति आम पंचांगों में निहित प्रमुख-धर्म पक्षपात से बचाती है।

शिक्षक को तीन सामान्य गलतियों से बचना चाहिए: (1) किसी एक त्यौहार को 'मानक' तथा अन्य को 'विशेष' न मानें; (2) त्यौहारों को केवल भोजन एवं वस्त्र तक सीमित न करें, उनके अर्थ को छोड़कर; (3) कक्षा-सजावट किसी एक परंपरा की ओर अधिक झुक जाए तो गैर-हिन्दू बच्चे बाहर महसूस न करें। संतुलित दृष्टिकोण समानताओं (मिठाई बाँटना, दीप जलाना, नए कपड़े पहनना, बड़ों से मिलना) को सामने रखता है तथा प्रत्येक उत्सव की भिन्न कथा का भी सम्मान करता है।

खेल एवं मनोरंजन

NCERT EVS में खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सीखने का प्राथमिक माध्यम है। कक्षा 4 का पाठ 'व्यस्त महीना' तथा कक्षा 5 का 'खेल-खेल में' दर्जनों पारंपरिक खेलों की सूची देते हैं — खो-खो, कबड्डी, गिल्ली-डंडा, लागोरी (सात पत्थर), पिट्ठू, लंगड़ी, चौपड़, साँप-सीढ़ी (मूलतः मोक्ष-पटम), तथा क्षेत्रीय रूप — कंचे (मार्बल), चुक्का-चौकी

EVS पाठ्यक्रम खेलों पर इतना समय क्यों देता है?

  • संज्ञानात्मक विकास: नियमों का पालन, गिनती, रणनीति एवं स्मृति — सब खेल से विकसित होते हैं।
  • शारीरिक विकास: स्थूल कौशल (दौड़ना, कूदना, फेंकना) तथा सूक्ष्म कौशल (कंचे, गिट्टी)।
  • सामाजिक विकास: बारी-बारी खेलना, सहयोग, हार स्वीकारना, टीम का नेतृत्व।
  • सांस्कृतिक संचरण: पारंपरिक खेलों में गीत, तुकबन्दियाँ एवं मुहावरे होते हैं जो बच्चों को दादा-दादी की पीढ़ी से जोड़ते हैं।

इनडोर एवं आउटडोर — दोनों खेलों का अपना स्थान है। आउटडोर खेल बड़ी मांसपेशियों के विकास में सहायक हैं; इनडोर खेल (पहेलियाँ, लूडो, बोर्ड गेम) एकाग्रता एवं बारी-बारी आचरण विकसित करते हैं। दिव्यांग बच्चों को नियमों में परिवर्तन करके शामिल किया जाता है, न कि अलग किया जाता है — उदाहरण के लिए, दौड़ में व्हीलचेयर का प्रयोग करने वाला बच्चा रिले की एक कड़ी बन सकता है।

पाठ बच्चों को प्रसिद्ध भारतीय खिलाड़ियों से भी परिचित कराता है — पी.टी. ऊषा, सचिन तेंदुलकर, मैरीकॉम, साइना नेहवाल, ध्यानचंद, करनम मल्लेश्वरी — जिन्हें लिंग एवं क्षेत्रीय विविधता दिखाने के लिए चुना गया है। उद्देश्य जीवनी रटाना नहीं, बल्कि यह बताना है कि अनुशासन, अभ्यास एवं लगन से ही उपलब्धि मिलती है।

शिक्षक को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे बच्चों के अपने पड़ोस से खेल इकट्ठा करें, उनके नियम लिखें तथा EVS की अवधि में उन्हीं को खेलें। यह लोक-ज्ञान को मान्यता देता है तथा प्रत्येक बच्चे को ज्ञान का धारक मानता है।

मित्रता एवं सहयोग

परिवार के दायरे से आगे EVS मित्रता तक पहुँचता है — यह पहला ऐसा रिश्ता है जिसे बच्चा स्वयं चुनता है। कक्षा 2 का 'मेरा मित्र', कक्षा 3 का 'हमारा पहला स्कूल' तथा कक्षा 5 का 'क्या हमारे लिए जगह नहीं?' — सभी इस विषय पर केन्द्रित हैं।

मित्रता के बारे में EVS के मुख्य विचार:

  • मित्र कोई भी हो सकता है: सहपाठी, पड़ोसी, चचेरे-ममेरे, पालतू पशु, यहाँ तक कि छोटे बच्चों के लिए काल्पनिक साथी भी।
  • मित्रता के लिए परिश्रम चाहिए: सुनना, साझा करना, क्षमा करना, बीमारी या अनुपस्थिति में सहायता करना।
  • सहयोग, स्पर्धा नहीं: प्राथमिक EVS हार-जीत की भाषा को कम तथा सामूहिक सफलता को अधिक महत्व देता है।
  • विवाद-समाधान: असहमति सामान्य है; बच्चे शब्दों का प्रयोग करना सीखें, मारपीट नहीं; ज़रूरत हो तो किसी विश्वसनीय बड़े को बुलाएँ।

पुस्तक अन्तर-सामुदायिक मित्रताओं की कहानियाँ सुनाती है — हिन्दू और मुस्लिम बच्चे की मित्रता, दिव्यांग और सक्षम बच्चे की मित्रता, ग्रामीण और शहरी चचेरे भाइयों की मित्रता — यह दर्शाने के लिए कि मित्रता सामाजिक दीवारें पिघलाती है। यही NCF का सामाजिक-न्याय वाला तार है, और CTET बार-बार यह परखता है कि शिक्षक इसे पहचानते हैं या नहीं।

एक क्लासिक CTET प्रश्न पूछता है कि यदि कोई बच्चा जाति या धर्म के आधार पर दूसरे बच्चे के पास बैठने से इनकार करे, तो शिक्षक क्या करे। अपेक्षित उत्तर है — भाषण नहीं दें, बल्कि सहयोगात्मक-अधिगम गतिविधियाँ रचें जहाँ मिश्रित जोड़ों को सफलता के लिए एक-दूसरे पर निर्भर रहना पड़े — शोध बताते हैं कि साझा-कार्य पर संपर्क पूर्वाग्रह को निर्देश से अधिक तेज़ी से पिघलाता है।

शिक्षक स्वयं भी अपने सहकर्मियों के बारे में सम्मानपूर्वक बोलकर, मध्याह्न-भोजन में बच्चों के साथ बैठकर तथा स्टाफ-रूम को सबके लिए खुला रखकर मित्रता का आदर्श बनते हैं। शिक्षक के व्यवहार का अप्रकट पाठ्यक्रम मित्रता के बारे में किसी भी पाठ से अधिक सिखाता है।

EVS में "परिवार" विषय की रचनावादी शिक्षण विधि

'परिवार' विषय उपदेशात्मक ('एक परिवार में पिता, माता तथा दो बच्चे होते हैं') ढंग से पढ़ाना सबसे आसान है तथा रचनावादी ढंग से पढ़ाना सबसे कठिन। NCF 2005 तथा EVS पाठ्यक्रम दस्तावेज़ रचनावादी विधि पर ज़ोर देते हैं क्योंकि प्रत्येक कक्षा में पारिवारिक रूपों की ऐसी समृद्ध विविधता होती है जिसकी कल्पना पुस्तक नहीं कर सकती।

रचनावादी सिद्धांत व्यवहार में:

  • बच्चे के अनुभव से शुरुआत करें। इकाई की शुरुआत 'अपने घर में रहने वाले लोगों के बारे में बताओ' से करें, न कि एकल एवं संयुक्त परिवार की परिभाषाओं से।
  • अनेक प्रतिनिधित्वों का प्रयोग करें। चित्र, अभिनय, वंश-वृक्ष, फोटो-कोलाज, मौखिक कथा-वाचन — भिन्न-भिन्न अधिगम-शैली के बच्चे सभी योगदान दे सकें।
  • बच्चे को ज्ञान-धारक मानें। शिक्षक बच्चों से उनके त्यौहारों, भोजन, बोलियों तथा रिश्तेदारों के बारे में सीखें।
  • श्रेणियों को थोपें नहीं, उन पर प्रश्न करें। बच्चों के साझा करने के बाद ही शिक्षक धीरे से एकल, संयुक्त, विस्तारित शब्दों को उन प्रतिमानों के नाम के रूप में परिचित कराए जिन्हें बच्चों ने स्वयं वर्णित किया है।
  • बड़े विचारों से जोड़ें। परिवार से कार्य (व्यवसाय), उत्सव (त्यौहार), पड़ोस (समुदाय), राष्ट्र (नागरिक) तक — यही EVS का सर्पिल विस्तार है।

रचनावादी शिक्षक यह नहीं करते:

  • मानकीकृत चित्र जो किसी एक आदर्श परिवार का संकेत दें।
  • ऐसी वर्क-शीट जो 'अपने पिता, माता, भाई, बहन के नाम भरो' पूछती हो और विविधता के लिए स्थान न दे।
  • केवल पितृ-सत्तात्मक परिवार का गुणगान करने वाले भावुक गीत ('पापा घर के मुखिया, माँ घर का दिल…')।
  • ऐसा गृहकार्य जिसके लिए महँगी तस्वीरें या स्मार्टफ़ोन चाहिए।

CTET अक्सर इस प्रक्रिया-केंद्रित दृष्टिकोण को केस-स्टडी प्रश्नों से परखता है — शिक्षक की योजना का वर्णन दिया जाता है तथा अभ्यर्थी को NCF-संगत विकल्प पहचानना होता है। सही उत्तर लगभग हमेशा वही होता है जो बच्चों की आवाज़ को आमंत्रित करता है तथा किसी एक ढाँचे को थोपने से इनकार करता है।

विविधता एवं समावेशन के प्रति संवेदनशीलता

इस विषय का अंतिम तथा सर्वाधिक महत्वपूर्ण आयाम है विविधता एवं समावेशन। NCF 2005 का EVS अध्याय इस वाक्य से शुरू होता है — 'कक्षा भारत का लघु-रूप है।' इसी वाक्य से दर्जनों CTET प्रश्न निकलते हैं।

प्राथमिक शिक्षक को जिन विविधताओं को ध्यान में रखना चाहिए:

  • परिवार-संरचना: एकल, संयुक्त, विस्तारित, एकल-अभिभावक, बाल-मुखिया, पालक, गोद लिए गए।
  • धर्म: हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन, पारसी, जनजातीय, अधार्मिक।
  • जाति एवं समुदाय: कक्षा में जाति-नामों का सार्वजनिक उल्लेख न करें; जाति के आधार पर बच्चों को कभी न बिठाएँ।
  • भाषा: घर की भाषा एवं विद्यालय की भाषा अलग हो सकती है; शिक्षक बच्चों की मातृभाषा के शब्दों का स्वागत करें।
  • आर्थिक स्थिति: कपड़े, टिफ़िन, सामग्री से दिखाई देती है — शिक्षक न तो ग़रीब बच्चों को लज्जित करें, न ही धनी बच्चों को प्राथमिकता दें।
  • क्षमता: दृश्य एवं अदृश्य दिव्यांगता; अधिगम-भेद, श्रवण या दृष्टि बाधा, गतिक कठिनाई, स्वलीनता, ADHD।
  • लिंग: 'लड़के फुटबॉल खेलते हैं, लड़कियाँ गुड़िया से' — ऐसी द्विभाजनों को चुनौती दें।
  • भौगोलिक मूल: प्रवासी बच्चे, शरणार्थी, ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता दूसरे राज्य में कार्य करते हैं।

एक समावेशी EVS कक्षा इस विविधता को छुपाती नहीं, दिखाती है: दीवारों पर भिन्न परिवारों की तस्वीरें; पुस्तकालय में ईद, क्रिसमस, पोंगल, दीवाली की पुस्तकें; बैठने का क्रम घूमता रहे; मूल्यांकन में मौखिक एवं चित्रात्मक विकल्प भी हों; मध्याह्न-भोजन शिक्षक के साथ हो।

शिक्षक की भाषा सर्वाधिक मायने रखती है। 'तुम्हारी माँ का हाथ इतना खुरदुरा क्यों है?', 'तुम्हारे पिता बस ऑटो चलाते हैं?', 'तुम दीवाली नहीं मनाते?' — ऐसे वाक्य बच्चों को गहराई से आहत करते हैं। इनके स्थान पर निर्णय-रहित कौतूहल रखें — 'अपने परिवार के काम के बारे में बताओ'। CTET इस मनोवृत्तिगत परत को निरंतर परखता है — सही शिक्षण-विकल्प लगभग हमेशा सम्मान, सुनना तथा निर्णय-रहितता को प्रमुखता देता है।

अभ्यास प्रश्न

Q1. कक्षा III के छात्रों को रमा ने सिखाया कि पिता, माँ और उनके बच्चे एकल परिवार का गठन करते हैं और यदि दादा-दादी एवं अन्य रिश्तेदार साथ रहते हैं, तो यह एक विस्तारित परिवार है। आप इस बारे में क्या सोचते हैं?

  • परिवार की परिभाषा गलत है।
  • रमा अपने छात्रों के प्रति असंवेदनशील है।
  • शिक्षण-अधिगम दृष्टिकोण समावेशी नहीं है।
  • परिवार की अवधारणा को इसी तरह सिखाया जाना चाहिए।

व्याख्या: NCERT प्राथमिक EVS सरल कामचलाऊ श्रेणियों का प्रयोग करता है — एकल (माता-पिता एवं बच्चे) तथा विस्तारित/संयुक्त (दादा-दादी या अन्य रिश्तेदार साथ रहें)। रमा की परिभाषा कक्षा 3 के पाठ्यपुस्तक की प्रारंभिक प्रस्तुति से मेल खाती है, जहाँ बच्चे नए शब्दों को अपने अनुभव से जोड़ते हैं।

स्रोत: CTET Dec 2018 P1, Q81

Q2. 'चेराओ' नाच कहाँ के लोग करते हैं?

  • झारखण्ड
  • मिज़ोरम
  • मणिपुर
  • मेघालय

व्याख्या: 'चेराओ' मिज़ोरम के लोगों का प्रसिद्ध बांस-नृत्य है, जो चपचार कुट उत्सव में किया जाता है। NCERT कक्षा 5 EVS में पूर्वोत्तर के नृत्यों एवं त्यौहारों पर पाठ में इसे अन्य जनजातीय नृत्यों के साथ बच्चों को भारत की सांस्कृतिक विविधता दिखाने हेतु प्रस्तुत किया गया है।

स्रोत: CTET Dec 2019 P1, Q69

Q3. हमारे देश का संविधान निम्नलिखित में से किसके नेतृत्व में बनाया गया था?

  • मोहनदास करमचंद गांधी
  • सरदार वल्लभ भाई पटेल
  • डॉ. भीम राव बाबा साहेब अम्बेडकर
  • सर्वपल्ली डॉ. राधा कृष्णन

व्याख्या: भारतीय संविधान का निर्माण डॉ. भीमराव अंबेडकर की अध्यक्षता वाली प्रारूप समिति के नेतृत्व में हुआ। NCERT कक्षा 5 EVS में अधिकार, समानता तथा प्रस्तावना से संबंधित पाठ अंबेडकर की भूमिका को रेखांकित करते हैं ताकि प्राथमिक स्तर पर नागरिक चेतना का आधार तैयार हो।

स्रोत: CTET Jan 2021 P1, Q63

Q4. एक शिक्षक कक्षा 3 के लिए "हमारा परिवार" विषय पर गतिविधि की योजना बना रहा है। NCF परिप्रेक्ष्य से निम्न में से कौन-सा दृष्टिकोण सबसे उपयुक्त है?

  • बच्चों से केवल एकल-परिवार की संरचना बनाने और समझाने को कहना।
  • केवल पाठ्यपुस्तकों से परिवारों की मानकीकृत छवियाँ दिखाना।
  • बच्चों को संयुक्त एवं विस्तृत परिवारों सहित अपने अनुभव साझा करने का अवसर देना।
  • बच्चों को बताना कि केवल एक ही आदर्श परिवार होता है।

व्याख्या: NCF 2005 EVS शिक्षण का प्रारंभ बच्चे के जीवित अनुभव से करने पर बल देता है। बच्चों को अपने परिवार के अनुभव साझा करने देना — जिनमें संयुक्त, एकल एवं विस्तारित परिवार सभी शामिल हों — विविधता को मान्यता देता है तथा रचनावादी सिद्धांत के अनुरूप है।

स्रोत: Practice Question

Q5. EVS पाठ्यक्रम में "समुदाय के सहायक" (community helpers) से तात्पर्य है:

  • केवल समुदाय के सरकारी अधिकारी।
  • हमारे पड़ोस में रहने वाले वे लोग जिनका कार्य दूसरों की सहायता करता है — डॉक्टर, शिक्षक, डाकिया, सफाईकर्मी आदि।
  • केवल वे पारिवारिक सदस्य जो घर के कार्यों में सहायता करते हैं।
  • वे बच्चे जो अपने सहपाठियों की पढ़ाई में सहायता करते हैं।

व्याख्या: NCERT EVS में 'समुदाय के सहायक' का अर्थ है पड़ोस के वे सभी लोग जिनका काम दूसरों की सहायता करता है — डॉक्टर, शिक्षक, डाकिया, सफ़ाईकर्मी, दूधवाला, सब्ज़ी-विक्रेता आदि। पाठ्यक्रम स्पष्ट करता है कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं है; श्रम की गरिमा इस विषय का मूल मूल्य है।

स्रोत: Practice Question