भोजन के स्रोत — पादप एवं जन्तु
NCERT EVS भोजन को पादप स्रोतों एवं जन्तु स्रोतों में बाँटता है, और पादप स्रोतों को आगे पौधे के उस भाग के अनुसार वर्गीकृत करता है जिसे हम खाते हैं। कक्षा 4 का पाठ 'हड्डी से पत्थर तक' तथा कक्षा 5 के 'बीज, बीज, बीज' एवं 'मेरे साल भर के आम' इस विषय को विकसित करते हैं।
पादप स्रोत खाद्य भाग के अनुसार:
- जड़ें: गाजर, चुकन्दर, मूली, शकरकंद, टैपिओका, शलगम।
- तना: आलू (भूमिगत तना-कन्द), अदरक (प्रकंद), हल्दी (प्रकंद), गन्ना।
- पत्तियाँ: पालक, मेथी, धनिया, पुदीना, बंदगोभी, सरसों।
- फूल: फूलगोभी, ब्रोकोली, केले का फूल, सहजन का फूल।
- फल: आम, केला, सेब, टमाटर, बैंगन, कद्दू, भिंडी, खीरा।
- बीज: चावल, गेहूँ, मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी (अनाज); चना, मूँग, मसूर, उड़द, राजमा (दालें); मूँगफली, बादाम, अखरोट (मेवे); सरसों, सूरजमुखी, तिल (तेल-बीज)।
यह CTET का हॉट-स्पॉट है — बच्चे अक्सर जड़ों एवं भूमिगत तनों में भ्रमित होते हैं। क्लासिक प्रश्न पूछता है कि कौन-सा समूह सच्चा 'जड़ों का समूह' है; सही उत्तर हमेशा गाजर, चुकन्दर, मूली (या समान) देता है। आलू, अदरक, हल्दी ज़मीन से निकाले जाते हैं पर तने हैं।
जन्तु स्रोत:
- दूध एवं दुग्ध उत्पाद — गाय, भैंस, बकरी, याक।
- मांस — मछली, चिकन, बकरे का मांस आदि (क्षेत्र एवं समुदाय के अनुसार)।
- अंडे — मुर्गी, बत्तख।
- शहद — जंगली एवं पाली गई मधुमक्खियों से।
NCERT भोजन-विकल्प को सांस्कृतिक, धार्मिक एवं व्यक्तिगत मानता है। पुस्तक किसी समुदाय के भोजन को 'अच्छा' या 'बुरा' नहीं कहती। बच्चे बिना निर्णय के साझा करते हैं कि उनके परिवार में क्या खाया जाता है। कक्षा 5 का 'चखने का समय' पाठ स्पष्ट रूप से दिखाता है कि आलू, टमाटर, मिर्च एवं चाय जैसे खाद्य पदार्थ अन्य महाद्वीपों से भारत आए — भोजन का इतिहास एक वैश्विक कथा बन जाता है।
मुख्य पोषक तत्व एवं उनके कार्य
प्राथमिक EVS पाँच मुख्य पोषक-समूहों का परिचय सरल, आयु-उपयुक्त भाषा में देता है। कक्षा 5 का 'क्या हमारे लिए जगह नहीं?' तथा कक्षा 4 के स्वास्थ्य-पाठ इस आधार को रचते हैं।
- कार्बोहाइड्रेट — ऊर्जा-दाता। स्रोत: चावल, गेहूँ, बाजरा, ज्वार, रागी, मक्का, आलू, चीनी, गुड़, केला। बच्चों को बताया जाता है कि रोटी, चावल, चपाती ही दौड़ने, खेलने एवं सोचने के लिए 'ईंधन' देते हैं।
- वसा — ऊर्जा-संग्रह एवं ताप। स्रोत: घी, मक्खन, तेल (सरसों, मूँगफली, नारियल, तिल, सूरजमुखी), मेवे, बीज, मलाई। NCERT वसा को 'खराब' नहीं बताता; बढ़ते बच्चों के लिए ये आवश्यक हैं।
- प्रोटीन — शरीर-निर्माता। स्रोत: दालें, सेम, सोया, पनीर, दूध, अंडे, मछली, मांस, मेवे। शाकाहारी प्रोटीन संयोजन (दाल-चावल, इडली-सांभर, खिचड़ी) पोषण-दृष्टि से पूर्ण माने जाते हैं।
- विटामिन एवं खनिज — रक्षक। स्रोत: हर रंग के फल एवं सब्ज़ी। बच्चे सीखते हैं कि लौह (पालक, गुड़, आँवला, सहजन) रक्ताल्पता रोकता है; कैल्शियम (दूध, दही, रागी, तिल) हड्डियाँ मजबूत करता है; विटामिन C (आँवला, नींबू, अमरूद, संतरा) मसूड़ों की सुरक्षा करता है; विटामिन A (गाजर, पपीता, आम, गहरी हरी सब्ज़ी) आँखों की रक्षा करता है; विटामिन D (धूप एवं फोर्टिफाइड दूध) कैल्शियम अवशोषण में सहायक है।
- जल — जीवन-आवश्यक। हमारे शरीर का दो-तिहाई भाग जल है; मूत्र, पसीने एवं श्वास से निरंतर निकलता है।
एक CTET-परीक्षण-योग्य अवधारणा है लौह-समृद्ध भोजन समूह — आँवला, पालक तथा गुड़ की क्लासिक तिकड़ी। लौह-न्यूनता वाले बच्चे पीले, थके एवं पढ़ाई में पिछड़े दिखते हैं; मध्याह्न-भोजन मेन्यू इसी को ध्यान में रखकर बनाया जाता है।
शिक्षक पोषण-ज्ञान को स्थानीय वहन-क्षमता से जोड़ते हैं। बच्चों के पास सेब-बादाम न हों, पर रागी, आँवला, सहजन की पत्तियाँ, तिल, गुड़ एवं मौसमी साग सस्ते तथा उत्तम हैं। शैक्षणिक उद्देश्य उपभोक्तावाद नहीं, बल्कि पारिवारिक बजट में सूचित विकल्प है।
बच्चों के लिए संतुलित आहार
संतुलित आहार वह है जो बच्चे की आयु, क्रिया एवं वृद्धि के अनुरूप सही अनुपात में सभी पोषक तत्व देता है। NCERT EVS विदेशी 'फूड पिरामिड' के बजाय ICMR (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) के भारतीय भोजन-समूह ढाँचे का प्रयोग करता है — भारतीय भोजन, भारतीय मात्रा।
प्राथमिक स्कूल के बच्चे (6-10 वर्ष) के लिए संतुलित दिन की थाली:
- सबसे बड़ा भाग — अनाज एवं मोटे अनाज: चावल, गेहूँ, बाजरा, ज्वार, रागी, मक्का। ये दैनिक ऊर्जा का बड़ा भाग देते हैं।
- उदार भाग — दालें, सेम, पशु-प्रोटीन: प्रत्येक भोजन में कम-से-कम एक बार दाल/चना/राजमा/अंडा/मछली/पनीर।
- भरपूर — फल एवं सब्ज़ियाँ: दिन में दो-तीन सर्विंग; हरे, पीले, संतरी, लाल रंग मिले-जुले।
- मध्यम — दूध एवं दुग्ध उत्पाद: 300–500 मि.ली. प्रतिदिन या समकक्ष।
- छोटा — वसा, तेल, मिठाई: पकाने तथा अवसर-विशेष के लिए, मुख्य भाग नहीं।
यह CTET में अक्सर पूछा जाने वाला बिंदु है। जब पूछा जाता है कि कौन-सा खाद्य समूह सबसे बड़ा भाग बने, तो उत्तर अनाज एवं मोटे अनाज है, वसा या मिठाई नहीं।
पाठ्यपुस्तक विविधता, मौसम एवं स्थानीयता पर बल देती है:
- विविधता — भिन्न भोजन भिन्न पोषक-कमियाँ पूरी करते हैं। कोई एक भोजन पूर्ण नहीं।
- मौसम — गर्मी में पानी से भरपूर भोजन (खीरा, तरबूज़, छाछ); सर्दी में गर्म रखने वाले (गुड़, तिल, सूखे मेवे)।
- स्थानीयता — केरल का चावल-मछली-नारियल, पंजाब का गेहूँ-दुग्ध, राजस्थान का बाजरा-छाछ आहार — सभी अपनी पारिस्थितिकी में संतुलित।
पाठ जंक फूड पर भी आयु-उपयुक्त भाषा में बात करता है। पैकेज्ड चिप्स, बिस्किट, कोला, मिठाई 'कभी-कभी का भोजन' हैं — नमक, चीनी, वसा एवं रसायन अधिक, पर शरीर-निर्माण के पोषक तत्व कम। शिक्षक बच्चों को लज्जित नहीं करते, बल्कि लेबल-पठन गतिविधियों एवं 'इंद्रधनुषी थाली' खेलों से जागरूकता बनाते हैं।
विशेष ध्यान किशोरियों (अधिक लौह एवं कैल्शियम चाहिए) तथा जनजातीय एवं दूर-दराज़ के बच्चों पर है जिनका आहार ऋतु एवं वन पर निर्भर है।
पाक-कला — विधियाँ एवं महत्व
NCERT EVS में पाक-कला लड़कियों का काम नहीं, बल्कि विज्ञान, कला एवं पारिवारिक गतिविधि है जिसे प्रत्येक बच्चा देखे एवं सीखे। कक्षा 5 का पाठ 'खाना अपना-अपना' रसोई को प्रयोगशाला बना देता है।
सामान्यतः पढ़ाई जाने वाली पाक-विधियाँ:
- उबालना — 100°C पर जल; चावल, दाल, सब्ज़ी, अंडे।
- भाप देना — इडली, मोमो, ढोकला; पोषक तत्व बनाए रखता है।
- भूनना — आग पर; चपाती, भुट्टा, पापड़।
- तलना — कम तेल (पराठा, डोसा) या अधिक तेल (पूरी, समोसा)।
- सेंकना — तंदूर या ओवन में सूखी आँच पर; ब्रेड, नान, केक।
- पीसना एवं कूटना — मसाले, चटनी के लिए; सिल-बट्टा, चक्की।
- किण्वन — बैक्टीरिया एवं खमीर का काम; दही, इडली का घोल, ढोकला, डोसा, भटूरा।
पाक-कला क्यों महत्वपूर्ण है?
- सुरक्षा: आँच हानिकारक रोगाणु मारती है; कच्चा मांस, मछली एवं कई सब्ज़ियाँ असुरक्षित हैं।
- पाचनीयता: पकाने से स्टार्च एवं रेशे टूटते हैं ताकि शरीर पोषक तत्व सोख सके।
- स्वाद एवं संस्कृति: मसालों एवं तकनीकों का संयोजन क्षेत्र की पहचान ले जाता है — बंगाल की सरसों-मछली, गोवा की नारियल-झींगा, कश्मीर का वाज़वान, महाराष्ट्र की पुरण-पोली।
- पारिवारिक बंधन: साथ बनाया एवं खाया गया भोजन रिश्तों को मजबूत करता है।
एक महत्वपूर्ण CTET-परीक्षण अवधारणा क्षेत्रीय पाक-तेलों को राज्यों से जोड़ती है: केरल नारियल का तेल एवं समुद्री भोजन; बंगाल सरसों का तेल; कश्मीर सूखे मेवे, केसर, मटन; पंजाब घी एवं डेयरी; गोवा नारियल, ताड़ी सिरका, समुद्री भोजन; हाँगकाँग पकाए हुए साँप के लिए प्रसिद्ध। CTET 2019 का मिलान-प्रश्न इसी भौगोलिक-व्यंजन जोड़ी को परखता है।
शिक्षाशास्त्र की दृष्टि से शिक्षक माता-पिता एवं दादा-दादी को कक्षा में बुलाकर पारिवारिक व्यंजन का प्रदर्शन करवाते हैं। लड़कों को सक्रिय रूप से शामिल किया जाता है; पाठ्यपुस्तक 'खाना बनाना केवल औरतों का काम है' इस रूढ़ि को जान-बूझकर चुनौती देती है।
विभिन्न संस्कृतियों में भोजन की आदतें
भारत का भोजन-मानचित्र आश्चर्यजनक रूप से विविध है, और NCERT EVS इसका प्रयोग सांस्कृतिक भूगोल सिखाने के लिए करता है। कक्षा 5 का 'चखने का समय' महाद्वीपों एवं शताब्दियों में भोजन की यात्राओं को दर्शाता है।
विदेश से भारत आए भोजन:
- दक्षिणी अमरीका से (16वीं सदी से पुर्तगाली व्यापारियों के माध्यम से): मिर्च, आलू, टमाटर, मक्का, अनानास, शकरकंद, काजू, पपीता, अमरूद, टैपिओका, मूँगफली। पाठ्यपुस्तक स्पष्ट कहती है कि भारतीय भोजन मिर्च के बिना सोचा भी नहीं जा सकता, पर मिर्च हाल का आगन्तुक है।
- चीन एवं पूर्वी एशिया से: चाय, नूडल।
- मध्य पूर्व एवं मध्य एशिया से (मुग़ल एवं उससे पहले के व्यापार से): बिरयानी, समोसा, कबाब, नान, पुलाव।
- अफ्रीका से: कॉफ़ी, तरबूज़, भिंडी।
- यूरोप से (अंग्रेज़ों के बाद): बंदगोभी, फूलगोभी, आधुनिक चुकन्दर, ब्रेड लोफ़।
यह CTET में पूछा गया प्रश्न है: 'मिर्च हमारे देश में किस क्षेत्र से लाई गई?' उत्तर: दक्षिणी अमरीका।
भारत के भीतर भी भोजन क्षेत्र के अनुसार भिन्न है:
- दक्षिण: चावल, सांभर, रसम, इडली, डोसा, नारियल, करी पत्ता, इमली।
- पूर्व: चावल, मछली (सरसों या पंच-फोरन में), पीठा, मिष्टी दोई।
- पूर्वोत्तर: बाँस कोंपल, चावल की बीयर, धुएँ में पकाया सुअर का मांस, किण्वित सोयाबीन (नागालैंड का अक्सोने/अखुनी)।
- उत्तर: गेहूँ (चपाती, पराठा, नान), डेयरी (लस्सी, मक्खन), दाल मखनी, छोले-भटूरे।
- पश्चिम: गुजरात (ढोकला, थेपला, कढ़ी); राजस्थान (दाल-बाटी, चूरमा, केर-सांगरी); महाराष्ट्र (वड़ा-पाव, पुरण-पोली); गोवा (मछली करी, विंदालू)।
कुछ भोजन स्पष्ट रूप से लोगों से जुड़े हैं: केरल को उबली टैपिओका करी के साथ पसंद है; कश्मीर सरसों के तेल में मछली पकाता है; गोवा नारियल के तेल में समुद्री मछली। जनजातीय भोजन परंपराओं को भी सम्मान दिया जाता है — वन के भोजन एवं स्वदेशी अनाज सहित।
शिक्षक का लक्ष्य है इस विविधता को बिना रैंकिंग के मनाना। 'भोजन-मानचित्र' सूचना-पट जिसमें प्रत्येक बच्चा अपने घर का व्यंजन लगाता है, EVS की प्रबल गतिविधि है।
भोजन का संग्रहण एवं संरक्षण
संरक्षण क्यों ज़रूरी है? ऋतु एवं फसल असमान हैं; संरक्षण से हम सर्दियों में आम खा पाते हैं, ख़राब मानसून में अनाज का भंडार रख पाते हैं, और अपव्यय कम होता है। NCERT EVS पारंपरिक एवं आधुनिक — दोनों विधियाँ साथ-साथ पढ़ाता है।
पारंपरिक संरक्षण-विधियाँ:
- सुखाना: हल्दी, मिर्च, पापड़, बड़ियाँ, सूखी मछली, किशमिश, खजूर, सूखे आम (आमचूर)।
- नमक: अचार, नमकीन मछली, नमकीन नींबू।
- चीनी: मुरब्बा, जैम, गुलकंद।
- सिरका: सिरके वाले अचार; इमली।
- धुआँ: पूर्वोत्तर की रसोइयों में मछली एवं मांस।
- किण्वन: दही, अचार, इडली घोल — नियंत्रित सूक्ष्मजीव हानिकारक जीवों को रोकते हैं।
- अनाज भंडार: मिट्टी की कोठी, नीम पत्तियों से लिपटी; पूर्वोत्तर में लकड़ी के ऊँचे भंडार।
आधुनिक संरक्षण-विधियाँ:
- रेफ्रिजरेशन — ठंडक रोगाणु-वृद्धि धीमी करती है।
- फ्रीज़िंग — मांस, मछली, मटर; महीनों तक टिकता है।
- कैनिंग एवं बॉटलिंग — शीशे या टिन में वायु-रहित बंद।
- वैक्यूम पैकेजिंग — ऑक्सीजन हटाना।
- पाश्चुरीकरण — ताप-उपचारित दूध; रोगाणु मारता है पर स्वाद नहीं बिगाड़ता।
- रासायनिक परिरक्षक — सोडियम बेंज़ोएट, साइट्रिक अम्ल; जैम एवं सॉस में।
पाठ्यपुस्तक संरक्षण को दादी-नानी के ज्ञान के रूप में दिखाती है — कई पारंपरिक विधियाँ वैज्ञानिक रूप से उत्तम तथा रसायन-मुक्त हैं। बच्चे बड़ों से पूछते हैं कि वे अपने बचपन में अनाज कैसे रखते थे, नींबू का अचार कैसे डालते थे, पापड़ कैसे बनाते थे — विधियाँ एवं व्यंजन कक्षा-संग्रह के लिए लिखे जाते हैं।
पाठ भोजन ख़राब होने की भी चर्चा करता है: गर्म-गीली स्थिति बैक्टीरिया, फफूँदी एवं कीड़ों को बढ़ावा देती है। ख़राब होने के लक्षण — गंध, चिपचिपाहट, फफूँदी, खट्टा स्वाद — सिखाए जाते हैं ताकि बच्चे भोजन-सुरक्षा का विवेक विकसित करें। ख़राब भोजन से उल्टी, दस्त, निर्जलीकरण — छोटे बच्चों के लिए विशेष ख़तरा।
EVS कक्षा गतिविधि: तीन शीशियों में चपाती रखें — खुली, बंद सूखी, बंद गीली — सप्ताह भर देखें। बच्चे स्वयं देखते हैं कि नमी एवं हवा कैसे ख़राबी लाती है।
भूख, कुपोषण एवं मध्याह्न भोजन
NCERT EVS भारत में भोजन-पहुँच की असमानता का सामना ईमानदारी से करता है। बच्चे भूख की कहानियाँ पढ़ते हैं तथा उसे रोकने वाले सरकारी कार्यक्रमों के बारे में सीखते हैं।
मुख्य अवधारणाएँ:
- भूख — आधार-ऊर्जा-आवश्यकता पूरी करने के लिए पर्याप्त भोजन का अभाव। बौनापन, कम वज़न, थकान के रूप में दिखती है।
- कुपोषण — मात्रा पर्याप्त हो पर भोजन सही न हो। इसमें अल्प-पोषण (लौह-कमी से रक्ताल्पता, आयोडीन-कमी से घेंघा, विटामिन D की कमी से रिकेट्स) तथा अति-पोषण (मोटापा, मधुमेह, हृदय रोग — प्रसंस्कृत भोजन खाने वाले शहरी बच्चों में बढ़ रहा) दोनों शामिल हैं।
- खाद्य सुरक्षा — हर परिवार को साल भर पर्याप्त पौष्टिक भोजन तक विश्वसनीय पहुँच। भारत का खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 इसी पर है।
EVS पुस्तक में परिचित सरकारी योजनाएँ:
- मध्याह्न भोजन योजना (अब PM POSHAN, 2021 से) — हर सरकारी विद्यालय के बच्चे को विद्यालय में गर्म पका भोजन। तमिलनाडु में 1962 में शुरू, उच्चतम न्यायालय के 2001 के आदेश के बाद राष्ट्रीयकृत। उद्देश्य: पोषण, विद्यालय में नामांकन एवं ठहराव, और साथ बैठकर खाने से सामाजिक मेल।
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) — राशन की दुकानों से सब्सिडी पर चावल, गेहूँ, दाल, तेल, नमक, चीनी।
- एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) — आँगनवाड़ी केंद्र छह वर्ष से छोटे बच्चों, गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माताओं को पोषण, टीका एवं पूर्व-विद्यालय शिक्षा देते हैं।
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम — भारत की दो-तिहाई जनसंख्या को रियायती अनाज का कानूनी अधिकार।
मध्याह्न भोजन का एक शैक्षणिक उद्देश्य भी है। साथ खाना जाति, वर्ग एवं धर्म की दीवारें तोड़ता है। पहले रिपोर्टें थीं कि कुछ शिक्षक दलित रसोइयों से बने भोजन से दूर रहते थे, जिससे यह नियम बनाना पड़ा कि शिक्षक बच्चों के साथ भोजन करेंगे। CTET इस बिंदु को परखता है — सही उत्तर में शिक्षक हमेशा बच्चों के साथ बैठकर खाता है।
शिक्षक से अपेक्षा है कि वे अल्प-पोषण के संकेतों को पहचानें — लगातार अनुपस्थिति, कक्षा में नींद, पीली त्वचा, ढीले कपड़े — तथा संवेदनशीलता से कार्य करें। भोजन का पाठ इसलिए केवल जीव-विज्ञान नहीं, नागरिकता एवं देखभाल का पाठ है।
EVS में भोजन की अवधारणाएँ पढ़ाना
EVS में भोजन सबसे पढ़ाने-योग्य विषय है क्योंकि हर बच्चा घर से समृद्ध ज्ञान लेकर आता है। चुनौती यह है कि भोजन को परिचित कराना नहीं, बल्कि बच्चे की ज्ञात बातों से आगे बढ़ाना है — अवलोकन, बातचीत, वर्गीकरण तथा छोटे प्रयोगों से।
रचनावादी भोजन-गतिविधियाँ:
- टिफ़िन शो-एंड-टेल: प्रत्येक बच्चा बताए कि आज क्या खाया तथा पादप/जन्तु स्रोत और एक-दो पोषक तत्व पहचाने। पाठ्यपुस्तक के बिना शब्दावली बनती है।
- भोजन-स्रोत वर्गीकरण: बच्चे कार्ड या चित्र जड़/तना/पत्ती/फूल/फल/बीज में बाँटें; भ्रांतियाँ (आलू = जड़) स्वाभाविक रूप से सामने आती हैं।
- अंकुरण-प्रयोग: राजमा, मूँग, चना रूई में; बच्चे प्रतिदिन मापें एवं चित्र बनाएँ।
- मसाला-यात्रा: हल्दी, जीरा, धनिया, हींग, कालीमिर्च, लौंग की थाली — सूँघें, पहचानें, घर का प्रयोग बताएँ।
- भारत का भोजन-मानचित्र: दीवार पर मानचित्र; बच्चे (परिवार की सहायता से) क्षेत्रीय व्यंजन पिन करें।
- लेबल-पठन: पैकेज्ड भोजन के लेबल; चीनी, नमक, वसा की मात्रा पहचानें।
- बिना-आग का प्रदर्शन: साधारण कच्चे व्यंजन — फल चाट, भेल-पूरी, अंकुरित सलाद, नींबू पानी — विद्यालय में।
- व्यंजन-संग्रह: दादा-दादी से बचपन के व्यंजन की कहानी; लिखकर कक्षा-पुस्तक बनाई जाए।
सम्मान-योग्य शैक्षणिक सिद्धांत:
- कभी भी भोजन को रैंक न करें। कोई भी भोजन 'घटिया' या 'गंदा' नहीं। टिफ़िन पर शर्म दिलाना आत्म-सम्मान को आघात पहुँचाता है तथा वर्ग/जाति की ऊँच-नीच को मज़बूत करता है।
- विविध आहारों का सम्मान। शाकाहारी, मांसाहारी, धार्मिक प्रतिबंध, एलर्जी — बिना निर्णय के स्वीकार।
- शरीर, परिवार एवं संस्कृति से जोड़ें। भोजन = जीव-विज्ञान + अर्थशास्त्र + इतिहास + धर्म + पहचान — एक ही विषय में।
- बहु-इंद्रिय साधन प्रयोग करें। गंध, स्वाद, स्पर्श एवं दृष्टि अकेले पाठ से अधिक सिखाते हैं।
- वास्तविक अनाज, मसाले, फल कक्षा में लाएँ — केवल चित्र पढ़ाना CTET की चिन्हित कमज़ोरी है।
जो शिक्षक मध्याह्न-भोजन को EVS पाठ का अंग मानते हैं — बच्चों के साथ बैठते, 'आज तुम्हारे टिफ़िन में क्या है?' पूछते, थालियों के बीच कुछ साझा करते — वे पाठ्यपुस्तक से अधिक भोजन का पाठ पढ़ाते हैं।
अभ्यास प्रश्न
Q1. नीचे दिया गया कौन सा समूह जड़ों का है?
व्याख्या: सच्ची खाद्य जड़ों में गाजर, चुकन्दर, मूली, शकरकंद एवं शलगम शामिल हैं। NCERT EVS में आलू को भूमिगत तना (कन्द) तथा अदरक एवं हल्दी को प्रकंद (रूपांतरित तना) माना जाता है, जड़ नहीं। यह वैचारिक स्पष्टता कक्षा 4-5 के पाठों का केंद्रीय बिंदु है।
स्रोत: CTET Dec 2019 P1, Q63
Q2. कॉलम- 1 (शहर/राज्य) (अधिकांश पसन्द का भोजन): A. हाँगकाँग I. किसी भी करी के साथ उबला टैपिओका; B. केरल II. सरसों के तेल में बनी मछली; C. कश्मीर III. नारियल के तेल में बनी समुन्द्र की मछली; D. गोवा IV. छोले-भटूरे; V. पकाया हुआ साँप। कॉलम-I की मदों का कॉलम-II की मदों से सही मिलान है—
व्याख्या: क्षेत्रीय भोजन जोड़ी: हाँगकाँग — पकाया हुआ साँप; केरल — किसी करी के साथ उबला टैपिओका; कश्मीर — सरसों के तेल में बनी मछली; गोवा — नारियल के तेल में बनी समुद्री मछली। NCERT कक्षा 5 EVS का 'चखने का समय' पाठ्य भूगोल को व्यंजन से जोड़कर भोजन-विविधता का सम्मान करता है।
स्रोत: CTET Dec 2019 P1, Q87
Q3. निम्नलिखित में से खाद्य पदार्थों के उस समूह को चुनिए जिसके प्रत्येक सदस्य में लौह तत्व प्रचुर मात्रा में होता है—
व्याख्या: आँवला, पालक एवं गुड़ — तीनों लौह तत्व से भरपूर हैं। यह NCERT की लौह-समृद्ध क्लासिक तिकड़ी है। टमाटर एवं बंदगोभी विटामिन C के लिए अच्छे हैं पर लौह नहीं। लौह की कमी से रक्ताल्पता होती है, इसलिए मध्याह्न भोजन में हरी सब्ज़ी एवं गुड़ शामिल किया जाता है।
स्रोत: CTET Jan 2021 P1, Q66
Q4. आज हम मिर्चों के बिना भोजन की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। इन्हें व्यापारी हमारे देश में लाए थे—
व्याख्या: मिर्च (और आलू, टमाटर, मक्का, काजू भी) 16वीं सदी से पुर्तगाली व्यापारियों के माध्यम से दक्षिणी अमरीका से भारत लाए गए। NCERT कक्षा 5 EVS का 'चखने का समय' इस तथ्य से दर्शाता है कि भारतीय भोजन ने महाद्वीपों से सामग्री ग्रहण की — और फिर भी आज पूरी तरह भारतीय लगता है।
स्रोत: CTET Jan 2021 P1, Q90
Q5. ICMR के अनुसार प्राथमिक स्कूल के बच्चों के संतुलित आहार में सबसे बड़ा भाग किस खाद्य समूह का होना चाहिए?
व्याख्या: ICMR के भारतीय आहार-दिशानिर्देशों के अनुसार बच्चों की दैनिक थाली का सबसे बड़ा भाग अनाज एवं मोटे अनाज — चावल, गेहूँ, बाजरा, ज्वार, रागी — होना चाहिए, क्योंकि ये बल्क ऊर्जा देते हैं। वसा, मिठाई एवं दूध छोटे भाग बनते हैं। NCERT EVS इसी ढाँचे से संतुलित आहार पढ़ाता है।
स्रोत: Practice Question