पर्यावरण अध्ययन · CTET नोट्स

जो चीज़ें हम बनाते एवं करते हैं — औज़ार, शिल्प एवं कार्य | CTET EVS P1

EVS विषयवस्तु जो चीज़ें हम बनाते एवं करते हैं मानवीय श्रम के संसार — औज़ार, शिल्प, व्यवसाय, प्रदर्शनकारी कलाएँ और अपशिष्ट — को कक्षा में लाती है। NCERT EVS पुस्तकें इन्हें स्वाद से पाचन तक, सपेरे की कहानी, मछली की कहानी, किसके जंगल? जैसे अध्यायों में बुनती हैं, बच्चों को उस समृद्ध, प्रायः अदृश्य श्रम से परिचित कराती हैं जो आसपास की चीज़ों के पीछे लगा रहता है।

CTET पेपर 1 के लिए यह विषय बुनियादी विज्ञान प्रश्न (द्रव्यमान, घनत्व, भार, प्रकाश, विघटन) तथा एकीकृत EVS शिक्षण-शास्त्र (शिल्प, व्यवसाय, पुनःचक्रण) का मिश्रण देता है। इससे प्रायः 3–5 अंक मिलते हैं, जो तथ्यात्मक स्मरण और रचनावादी आग्रह — कि कार्य एवं शिल्प को गरिमा से देखा जाये, रूढ़ छवियों में न बाँधा जाये — का सन्तुलन साधता है।

CRAFT

दैनिक जीवन में प्रयुक्त औज़ार

हर घर, खेत और कार्यशाला औज़ारों से भरी होती है — साधारण मशीनें या उपकरण जो मनुष्य के लिए वह कार्य कर देते हैं जो केवल हाथ नहीं कर सकते। EVS औज़ारों को अलग-थलग नहीं, बल्कि शरीर और मस्तिष्क के विस्तार के रूप में, पीढ़ियों के अनुभव से रचे गए ढाँचों के रूप में प्रस्तुत करती है।

दैनिक औज़ारों की श्रेणियाँ:

  • रसोई के औज़ार — चाकू, कलछुल/करछुल, बेलन, कद्दूकस, ओखली-मूसल, चिमटा, मिक्सर-ग्राइण्डर।
  • कृषि के औज़ार — हँसिया, हल, कुदाल, सूप, बीज-वपन यन्त्र, आधुनिक ट्रैक्टर।
  • बढ़ईगिरी — हथौड़ा, आरी, छेनी, प्लेन, ड्रिल, स्क्रूड्राइवर।
  • दर्ज़ी — कैंची, सुई, धागा, फीता, सिलाई मशीन।
  • निर्माण — कन्नी, साहूल, स्पिरिट लेवल, ईंट-साँचा।
  • सफाई — झाड़ू, पोछा, बाल्टी, ब्रश।
  • लेखन एवं अधिगम — पेन्सिल, रबर, स्केल, ज्यामिति-बक्सा।

दैनिक औज़ारों में छुपी सरल-मशीनों की अवधारणाएँ:

  • उत्तोलक (lever) — झूला, कैंची, सब्बल, बोतल-ओपनर।
  • पहिया-अक्ष — साइकिल, बैलगाड़ी, कुएँ की गराड़ी।
  • तिरछी सतह (inclined plane) — रैम्प, सीढ़ी।
  • घिरनी (pulley) — झण्डा-पोल, लिफ्ट, कुआँ।
  • वज़न-वेज — चाकू, कुल्हाड़ी, कील।
  • पेंच (screw) — बोतल का ढक्कन, जार का ढक्कन।

CTET-शैली के शिक्षण-प्रश्नों में परीक्षित एक प्रभावी कक्षा-गतिविधि: शिक्षक प्रत्येक बच्चे से घर का एक औज़ार लाने, उसके अंग बताने और उसका प्रयोग दिखाने को कहे। फिर कक्षा उन्हें उपयोग के अनुसार, सामग्री के अनुसार, उपयोगकर्ता के अनुसार समूहित करे। इससे कक्षा में व्यावसायिक विविधता आती है — बढ़ई की छेनी, कुम्हार का चाक, बुनकर का करघा।

घनत्व का विज्ञान-प्रश्न भी यहीं आता है: द्रव्यमान ÷ आयतन = घनत्व; द्रव्यमान = घनत्व × आयतन। घनी धातु का छोटा-सा औज़ार (15 g/mL × 3 mL = 45 g) यह दिखाता है कि भौतिक गुणों और सामग्री-चयन के बीच कैसा गहरा सम्बन्ध है।

भारत के पारम्परिक शिल्प एवं लोक कलाएँ

भारत में संसार की सबसे समृद्ध शिल्प-परम्पराओं में से एक है — हर क्षेत्र की अपनी विशिष्ट कलाएँ, सामग्री और रचना-शब्दावली है, जो शताब्दियों से परिवारों और समुदायों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी जाती रहती है। EVS इसे विज्ञान से अलग 'संस्कृति' के रूप में नहीं, बल्कि मूल अनुप्रयुक्त विज्ञान — मिट्टी, रेशा, धातु एवं काष्ठ का सामग्री-गहन ज्ञान — के रूप में प्रस्तुत करती है।

मृत्तिकाशिल्प (Pottery) — मिट्टी के बर्तन (मटका, सुराही, कुल्हड़), टेराकोटा। कुम्हार समुदाय चाक चलाते हैं; मिट्टी खोदी जाती है, गूँथी जाती है, आकार पाती है, धूप में सूखती है, आँवे में पकती है। NCERT कक्षा-4 का बर्तन और कुम्हार वाला अध्याय EVS का शास्त्रीय पाठ है।

बुनाई एवं वस्त्र — हथकरघा भारत में कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार-दाता है। प्रसिद्ध परम्पराएँ:

  • बनारसी सिल्क (वाराणसी), चन्देरी (मध्य प्रदेश), पोचमपल्ली व वेंकटगिरी (आन्ध्र/तेलंगाना), कांजीवरम (तमिलनाडु)।
  • कांथा (बंगाल), फुलकारी (पंजाब), चिकनकारी (लखनऊ), कसुती (कर्नाटक) — कशीदाकारी।
  • पश्मीना (कश्मीर), टोडा कशीदा (नीलगिरी)।

टेराकोटा — पकी मिट्टी की मूर्तियाँ: बाँकुरा के घोड़े (पश्चिम बंगाल), बिष्णुपुर का मन्दिर, मोलेला टाइलें (राजस्थान), गोरवन-कुण्डा (आन्ध्र)।

ढोकरा — 4,000 वर्ष पुरानी 'लॉस्ट-वैक्स' धातु-ढलाई तकनीक, जो आज भी बस्तर, झारखण्ड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के जनजातीय समुदायों द्वारा प्रचलित है। पीतल के घोड़े, मोर, हाथी — सहज पहचान योग्य, प्रायः NCERT चित्रों में दिखते हैं।

मधुबनी / मिथिला चित्रकला — बिहार; रंगोली/कोलम — पूरे भारत में दैनिक भूमि-कला; वारली — महाराष्ट्र की जनजातीय चित्रकला; पट्टचित्र — ओडिशा।

काष्ठ, बाँस, बेंत — चन्नापट्टण के खिलौने (कर्नाटक), सहारनपुर की लकड़ी (उत्तर प्रदेश), नागालैण्ड के बाँस-शिल्प, मणिपुर के बाँस-हथकरघे।

NCF 2005 और EVS पोज़ीशन-पेपर का आग्रह है कि इन शिल्पों को गरिमा और सटीकता से प्रस्तुत किया जाये — कारीगर का नाम, क्षेत्र, तकनीक और सामाजिक-आर्थिक सन्दर्भ बताया जाये (मशीन-निर्मित वस्तुओं के सम्मुख कई शिल्प संघर्ष कर रहे हैं)। शिक्षक का कार्य है कि किसी कारीगर को कक्षा में लाये, असली वस्तु दिखाये और बच्चों को छूने, सूँघने, प्रश्न पूछने दे।

हमारे आसपास कार्य एवं व्यवसाय

बच्चे प्रतिदिन अनेक प्रकार के कार्य देखते हैं — डाकिया, दूधवाला, माली, रसोई बनाती माँ, कॉल-सेन्टर में काम करती बड़ी बहन। EVS की कार्य-विषयवस्तु शिक्षक से कहती है कि इस दृश्य विविधता को दृश्य, नामित और सम्मानित करे, इस रूढ़ छवि को तोड़े कि केवल कार्यालय-कार्य ही 'वास्तविक' काम है।

प्राथमिक EVS में कार्य की श्रेणियाँ:

  • प्राथमिक क्षेत्र — कृषि, मत्स्य, पशुपालन, वानिकी, खनन।
  • द्वितीयक क्षेत्र — चीज़ें बनाना: दर्जी, बढ़ई, कुम्हार, बुनकर, राजमिस्त्री, लोहार, कारखाना-कर्मी।
  • तृतीयक / सेवा क्षेत्र — शिक्षक, चिकित्सक, नर्स, चालक, दुकानदार, डाकिया, सफ़ाई-कर्मी, सुरक्षाकर्मी, बैंकर, IT पेशेवर।

अवैतनिक एवं कम-मूल्यांकित कार्य — NCF 2005 का महत्वपूर्ण आग्रह:

  • घर का कार्य प्रायः महिलाओं द्वारा — खाना बनाना, सफाई, बच्चों की देखभाल, पानी भरना।
  • बुजुर्गों एवं बीमारों की देखभाल।
  • पारिवारिक भूमि पर निर्वाह-कृषि।
  • धार्मिक-सामाजिक अवसरों पर पड़ोसियों की निःशुल्क सहायता।

ये श्रेणियाँ इसलिए महत्वपूर्ण हैं कि EVS की कक्षा उन गिने-चुने स्थलों में से है जहाँ बच्चा देख पाता है कि माँ के काम का आर्थिक मूल्य है, सफ़ाई-कर्मी का कार्य शहर को जीवित रखता है, हाथ से किया गया या कम मेहनताना वाला कोई काम 'नीच' नहीं।

CTET में परीक्षित शिक्षण-गतिविधियाँ:

  • बच्चे किसी एक व्यवसाय के व्यक्ति का साक्षात्कार लें — क्या करते हैं, कौन-से औज़ार, कौन-सा प्रशिक्षण, कितना कमाते हैं, बच्चों के लिए क्या सपना देखते हैं।
  • कक्षा एक 'कौन-बनाता-है' चार्ट बनाये — चपाती, कॉपी, टी-शर्ट को कच्चे माल से उपभोक्ता तक ट्रेस करे, हर कर्मी का नाम लिखे।
  • लिंग पर चर्चा: कौन-से कार्य 'पुरुषों' के या 'महिलाओं' के माने जाते हैं और क्यों? क्या ये नैसर्गिक हैं या सामाजिक?

लक्ष्य है सम्मान, जिज्ञासा और कार्य के प्रति गैर-रूढ़िवादी दृष्टि — ताकि बच्चे उस संसार के लिए तैयार हों जहाँ आज के अनेक व्यवसाय 30 वर्ष में नहीं रहेंगे और कई नए आ जायेंगे।

रसोई में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

रसोई प्राथमिक बच्चों के लिए सबसे सुलभ प्रयोगशाला है। ऊष्मा, विघटन, वाष्पीकरण, क्वथन, हिमायन, मिश्रण, पृथक्करण — हर मूल विज्ञान-प्रक्रिया बच्चे की आँखों के सामने भोजन बनते समय हो रही होती है। EVS इसे शिक्षण-अवसर में बदलती है।

रसोई में दृश्य वैज्ञानिक अवधारणाएँ:

  • अवस्था-परिवर्तन — पानी उबलता है, बर्फ़ पिघलती है, आटा फूलता है, चीनी घुलती है।
  • विघटन एवं विलेयता — नमक पानी में, चीनी चाय में घुलती है; विघटन-दर तापमान (गरम चाय में चीनी जल्दी घुलती है), हिलाने और सतह-क्षेत्र पर निर्भर करती है।
  • पृथक्करण विधियाँ — छानना (आटे से अनाज), ओसाना (भूसा), फ़िल्टर करना (चायपत्ती), निथारना (पके चावल का पानी)।
  • ऊष्मा-स्थानान्तरण — चालन (धातु चम्मच गरम), संवहन (पानी उबलना), विकिरण (माइक्रोवेव, धूप)।
  • अपारदर्शी, पारदर्शी, पारभासी — स्टील की प्लेट अपारदर्शी (कोई प्रकाश पार नहीं), काँच का गिलास पारदर्शी, दूधिया-काँच का कप पारभासी।
  • घनत्व — तेल पानी पर तैरता है, खीर परतों में जमती है।
  • द्रव्यमान बनाम भार — द्रव्यमान स्थिर है, भार गुरुत्व के साथ बदलता है; पृथ्वी पर गुरुत्व चन्द्रमा से लगभग छह गुना है, इसलिए चन्द्रमा पर 10 kg द्रव्यमान वाली वस्तु पृथ्वी पर लगभग छह गुना भार-तुल्य दिखायेगी।
  • अदिश बनाम सदिश — द्रव्यमान और तापमान अदिश (केवल परिमाण); भार, संवेग, गुरुत्व-बल सदिश (परिमाण + दिशा)।

जो EVS कक्षा रसोई को पाठ्यपुस्तक की तरह उपयोग करती है, वह बच्चों को विषयवस्तु ज्ञान के साथ-साथ NCF 2005 द्वारा बल दिए गए प्रक्रिया-कौशल भी देती है — पूर्वानुमान, अवलोकन, परिस्थिति-परिवर्तन, अभिलेखन। शिक्षण-शास्त्र 'जो भोजन मैं खाता हूँ' से 'इसे कैसे पकाते हैं' और 'भोजन के साथ क्या हो रहा है' तक बढ़ता है।

सामग्री का पुनःचक्रण एवं पुन: उपयोग

भारतीय परिवार सदा से पुनः उपयोग के निपुण रहे हैं — पुरानी साड़ी रजाई बन जाती है, काँच की बरनियाँ मसाला-डब्बे, समाचार-पत्र विद्यालयी किताबों की जिल्द। आधुनिक उपभोग इस संस्कृति को तेज़ी से क्षीण कर रहा है। EVS शिक्षक से कहती है कि वह पुनःचक्रण और पुनः उपयोग को कक्षा का दैनिक अभ्यास बनाये।

5R सिद्धान्त:

  • अस्वीकार (Refuse) — एकल-उपयोग प्लास्टिक (स्ट्रॉ, पॉलीथीन, डिस्पोज़ेबल) को 'ना'।
  • कम करें (Reduce) — कम खरीदें, कम उपयोग करें, टिकाऊ चीज़ें चुनें।
  • पुनः उपयोग (Reuse) — वस्तुओं को नया जीवन दें (बरनी, कपड़े का थैला, पुस्तक, कपड़े)।
  • पुनःचक्रण (Recycle) — काग़ज़, प्लास्टिक, धातु, काँच को अलग कर नई वस्तुओं में बदलें।
  • सड़ाना / कम्पोस्ट (Rot) — रसोई एवं बगीचे के कचरे को खाद बनायें।

कचरा-श्रेणियाँ एवं उनका मार्ग:

  • जैव-निम्नीकरणीय / गीला (रसोई, पत्ते, काग़ज़) — गड्ढे/डिब्बे में कम्पोस्ट।
  • पुनर्चक्रणीय / सूखा (काग़ज़, प्लास्टिक, धातु, काँच) — पृथक करके कबाड़ी/नगरपालिका को।
  • खतरनाक (बैटरी, ई-कचरा, चिकित्सीय कचरा, फ्लोरोसेन्ट ट्यूब) — विशेष सुविधा में; कभी आम कचरे में न मिलायें।
  • निष्क्रिय (टूटे मिट्टी के बर्तन, सिरामिक) — भूमिगत भराव।

कक्षा-गतिविधियाँ (शिक्षण-शास्त्र प्रश्नों में बार-बार):

  • प्रत्येक कक्षा में दो-डिब्बा प्रणाली: गीला/सूखा; बच्चे बारी-बारी से सम्भालें।
  • कक्षा कम्पोस्ट डिब्बा — टिफ़िन का कचरा डाला जाये; उसकी खाद विद्यालय-उद्यान में।
  • 'कचरा-मुक्त टिफ़िन' दिन — बच्चे बिना पैकेजिंग का भोजन लाएँ।
  • कचरे से शिल्प — समाचार-पत्र की टोकरी, प्लास्टिक-बोतल की कुण्डी, कपड़े के बुकमार्क।
  • पुनःचक्रण केन्द्र या कबाड़ी की यात्रा — बच्चे देखें कि कचरा कहाँ जाता है और अदृश्य कर्मियों का कार्य क्या है।

EVS का दोहरा उद्देश्य है: पर्यावरण-दायित्व का निर्माण और उन कर्मियों के प्रति सम्मान — प्रायः हाशिये के समुदायों से — जो समाज का सबसे गन्दा और सबसे आवश्यक काम करते हैं।

सांस्कृतिक त्यौहार एवं प्रदर्शनकारी कलाएँ

EVS त्यौहारों और प्रदर्शनकारी कलाओं को रंगीन सजावट नहीं, बल्कि समुदाय-ज्ञान के जीवन्त अभिलेख मानती है — इनमें कृषि-चक्र, धार्मिक अर्थ, ऋतु-परिवर्तन और सौन्दर्य-कौशल कूट रूप में रहते हैं। NCERT EVS पुस्तक त्यौहारों, मेलों और लोक-प्रदर्शनों पर पूरे अध्याय देती है।

प्रमुख त्यौहार श्रेणियाँ:

  • फसल-त्यौहार — पोंगल (तमिलनाडु), ओणम (केरल), बैसाखी (पंजाब), बिहु (असम), लोहड़ी (पंजाब), मकर संक्रान्ति (राष्ट्रीय), नुआखाई (ओडिशा)।
  • धार्मिक त्यौहार — दीवाली, होली, ईद, क्रिसमस, बुद्ध पूर्णिमा, गुरु नानक जयन्ती, महावीर जयन्ती।
  • क्षेत्रीय / सांस्कृतिक — दुर्गा पूजा (बंगाल), गणेश चतुर्थी (महाराष्ट्र), हॉर्नबिल (नागालैण्ड), पुष्कर मेला (राजस्थान), सोनपुर मेला (बिहार)।
  • व्यक्तिगत जीवन-चक्र — नामकरण, मुण्डन, विवाह, जन्मोत्सव।

प्रदर्शनकारी कलाएँ:

  • शास्त्रीय नृत्य — भरतनाट्यम (तमिलनाडु), कथकली (केरल), ओडिसी (ओडिशा), मणिपुरी, कुचिपुड़ी (आन्ध्र), कथक (उत्तर), मोहिनीअट्टम (केरल), सत्रिया (असम)।
  • लोक नृत्य — भांगड़ा, गरबा, लावणी, बिहु, घूमर, छऊ, यक्षगान।
  • रंगमंच — नौटंकी, तमाशा, जात्रा, भवाई, रामलीला, यक्षगान।
  • कठपुतली — कठपुतली (राजस्थान), थोलू बोमलाटा (आन्ध्र), पावाकथकली (केरल)।
  • संगीत — हिन्दुस्तानी, कर्नाटक, क़व्वाली, लोक-गायक, सपेरे की बीन, ढोल-ताशा, शंख।

CTET-शैली का शिक्षण-बिन्दु: त्यौहार को 'रंग भरने की गतिविधि' मानने वाला शिक्षक गहराई से चूक जाता है। एकीकृत दृष्टिकोण पूछता है: कौन-सी फसल कट रही है? बीज-बचाव का विज्ञान क्या है? ढोल कौन और क्यों बजाता है? नृत्य कौन-सी कथा सुना रहा है? इस तरह EVS पाठ्यक्रम गणित (चान्द्र-पञ्चांग), भाषा (लोकगीत), सामाजिक अध्ययन (समुदाय-उत्पत्ति) और विज्ञान (ऋतुएँ) से जुड़ता है।

बच्चे एवं कार्य — बाल श्रम के मुद्दे

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 ने 6–14 आयु के प्रत्येक बच्चे के लिए शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया। बाल श्रम (निषेध एवं नियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 ने 14 वर्ष से कम बच्चों को किसी भी व्यवसाय में और 14–18 के किशोरों को संकटप्रद व्यवसायों में नियोजित करना निषिद्ध किया। EVS शिक्षक से कहती है कि इस कठिन विषय को सत्यता और सावधानी से सम्भाले।

भारत में बाल श्रम के दृश्य रूप:

  • कृषि, ईंट-भट्टे, कालीन-बुनाई, बीड़ी-बनाई में बन्धुआ श्रम।
  • घरेलू सहायक — विशेषकर 8–14 आयु की लड़कियाँ, घर से दूर भेजी जातीं।
  • सड़क के बच्चे — सिग्नल पर बेचना, कूड़ा बीनना, ढाबे में काम।
  • पारिवारिक व्यवसाय का कार्य जो विद्यालय जाने से रोकता है।
  • घर के राज्य से दूर कारखानों में तस्करी से लाये गये बच्चे।

कानून के बावजूद बाल श्रम क्यों बना रहता है:

  • परिवार की निर्धनता — जीने की मजबूरी बच्चे को काम पर भेजती है।
  • सस्ता श्रम — नियोक्ता बच्चों का शोषण करते हैं।
  • निकट गुणवत्ता-विद्यालयों का अभाव — RTE अधिकार देती है, गुणवत्ता असमान है।
  • जाति, लिंग एवं प्रवास का चक्र — निर्धन प्रवासी परिवारों की लड़कियाँ सबसे प्रभावित।

इस विषय का EVS शिक्षण-शास्त्र:

  • शिक्षक कक्षा में उस बच्चे को कभी शर्मसार न करे जो घर/पारिवारिक व्यवसाय में काम करता हो।
  • विषय कहानियों के माध्यम से उठायें (NCERT का सपेरा, शिवकाशी के माचिस-बच्चे), केवल आँकड़ों से नहीं।
  • घरेलू कार्य की उचित साझेदारी और शोषण के बीच के अन्तर को बच्चों के साथ समझें।
  • बाल श्रम, विद्यालय-त्याग और निर्धनता-चक्र की कड़ी बनायें।
  • सहायक संस्थाएँ — Childline 1098, स्थानीय बाल कल्याण समिति, बाल पंचायत, गैर-सरकारी संगठन।

CTET की अपेक्षा है कि शिक्षक कार्य को वयस्कों का अधिकार तथा विद्यालय-आयु के बच्चों के लिए हानि के रूप में देखें — और कक्षा को ऐसा सुरक्षित स्थल बनायें जहाँ बच्चा बिना भय के जो देख रहा है, उसका नाम ले सके।

EVS शिक्षण — व्यावहारिक गतिविधियाँ

'जो चीज़ें हम बनाते एवं करते हैं' विषयवस्तु हाथों-से-करके, गतिविधि-आधारित EVS के लिए आदर्श है। NCF 2005 कम पाठ्यपुस्तक-पठन और अधिक कर्म की माँग करती है — और कार्य व निर्माण के संसार से अधिक स्वाभाविक विषय कोई नहीं।

परीक्षित कक्षा-गतिविधियाँ (CTET-संरेखित):

  • औज़ार दिवस — प्रत्येक बच्चा घर से एक औज़ार लाये, उसका प्रयोग दिखाये, विभिन्न भाषाओं में नाम सीखे।
  • कारीगर के पास भ्रमण — कुम्हार, बुनकर, लोहार, दर्जी; देखें, पूछें, लिखें, चित्रित करें।
  • कक्षा-शिल्प कोना — बच्चे मिट्टी, काग़ज़, कपड़े, डण्डे से छोटी वस्तुएँ बनाएँ।
  • एक वस्तु को ट्रेस करें — कॉपी, टी-शर्ट, चपाती चुनें; कच्चे माल से निपटान तक का सफर बनाएँ, सब कर्मियों को नामित करें।
  • व्यवसाय-चार्ट — विद्यालय, मोहल्ले, शहर में कौन-क्या करता है, सर्वेक्षण।
  • पुनःचक्रण अभियान — पृथक करें, तौलें, सप्ताह-दर-सप्ताह तुलना; कबाड़ी को बेचें, धन कक्षा-उद्देश्य पर लगायें।
  • त्यौहार-प्रदर्शनी — प्रत्येक बच्चा एक त्यौहार प्रस्तुत करे — भोजन, कथा, वस्त्र, संगीत के साथ।
  • बाल-प्रदर्शनी — कक्षा-परियोजनाएँ अभिभावकों एवं समुदाय को दिखायें।

इस विषय का मूल्यांकन CCE के अन्तर्गत पोर्टफ़ोलियो, मौखिक प्रस्तुति और समूह-परियोजना से सर्वोत्तम होता है — काग़ज-पेन्सिल परीक्षा से नहीं। जिस बच्चे ने मॉडल बनाया, कारीगर का साक्षात्कार किया और अपने निष्कर्ष प्रस्तुत किये, उसने उससे कहीं अधिक सीखा जिसने सूची रट ली।

CTET में बार-बार परीक्षित शिक्षण-दृष्टियाँ:

  • कक्षा अनेक अदृश्य हाथों की है — रसोइया, सफ़ाई-कर्मी, बेंच बनाने वाला बढ़ई — EVS इसे स्पष्ट करती है।
  • हाथों का कार्य 'खेल' नहीं — यह सबसे माँग करने वाला अधिगम है, जो योजना, अवलोकन, निर्णय माँगता है।
  • शिक्षक की भूमिका व्याख्याता से सुगमकर्ता में बदलती है — सामग्री देना, प्रश्न पूछना, अवलोकन दर्ज करना।
  • एकीकरण स्वाभाविक है: मिट्टी के बर्तन पर एक परियोजना विज्ञान (मृदा-गुण), गणित (आयतन, भार), भाषा (नाम, कथा), सामाजिक अध्ययन (कुम्हार-समुदाय) और कला (अलंकरण) सब सिखा देती है।

अभ्यास प्रश्न

Q1. 15 g/mL घनत्व और 3 mL आयतन वाले किसी वस्तु का द्रव्यमान क्या होगा?

  • 18 g
  • 45 g
  • 5 g
  • 12 g

व्याख्या: द्रव्यमान = घनत्व × आयतन। दिए गए मानों में: द्रव्यमान = 15 g/mL × 3 mL = 45 g। घनत्व बताता है कि इकाई आयतन में कितना द्रव्यमान है, अतः घनत्व को वास्तविक आयतन से गुणा करने पर कुल द्रव्यमान प्राप्त होता है।

स्रोत: CTET Dec 2018 P1, Q71

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी अदिश राशि है?

  • द्रव्यमान
  • गुरुत्वाकर्षण
  • संवेग
  • भार

व्याख्या: अदिश राशि में केवल परिमाण होता है; सदिश राशि में परिमाण के साथ दिशा भी होती है। द्रव्यमान अदिश है — इसकी कोई दिशा नहीं। गुरुत्वाकर्षण, संवेग और भार सभी एक निश्चित दिशा में कार्य करते हैं और सदिश हैं। अतः द्रव्यमान सही अदिश राशि है।

स्रोत: CTET Dec 2018 P1, Q72

Q3. एक ऐसी वस्तु, जिसमें से कोई प्रकाश-किरण गुजर नहीं सकती, कहलाती है—

  • अपारदर्शी
  • पारभासी
  • पारदर्शी
  • उत्तल

व्याख्या: जिस वस्तु से कोई प्रकाश-किरण पार नहीं हो सकती, वह अपारदर्शी कहलाती है (लकड़ी का दरवाज़ा, स्टील की प्लेट)। पारभासी (frosted glass, मक्खन-काग़ज़) कुछ बिखरा प्रकाश गुज़रने देती है; पारदर्शी (साफ़ काँच) प्रकाश को स्पष्ट जाने देती है। उत्तल लेन्स/दर्पण का आकार है, प्रकाश-संचरण का गुण नहीं।

स्रोत: CTET Dec 2018 P1, Q73

Q4. पृथ्वी की सतह पर किसी वस्तु का भार क्या होगा जिसका द्रव्यमान चंद्रमा की सतह पर 10 kg है?

  • 60 kg
  • 10 kg
  • 60 N
  • 10 N

व्याख्या: द्रव्यमान हर जगह समान रहता है, परन्तु भार स्थानीय गुरुत्वाकर्षण-त्वरण पर निर्भर करता है। पृथ्वी का गुरुत्व चन्द्रमा से लगभग छह गुना है, अतः 10 kg द्रव्यमान वाली वस्तु, जो चन्द्रमा पर एक निश्चित भार दिखाती है, पृथ्वी पर लगभग छह गुना भार-तुल्य दिखायेगी — विकल्पों में यह 60 kg-तुल्य के रूप में आता है।

स्रोत: CTET Dec 2018 P1, Q74

Q5. एक विलेय का विघटन-दर ___ पर निर्भर करता है।

  • दाब
  • तापमान
  • सतह क्षेत्र
  • भार

व्याख्या: दिये गये कारकों में तापमान ही वह कारक है जो विलेय की विघटन-दर पर सबसे सुसंगत प्रभाव डालता है — उच्च तापमान अणु-गति तीव्र करता है और विघटन को तेज करता है। सतह-क्षेत्र और हिलाना भी प्रभाव डालते हैं, परन्तु प्रत्येक विलेय के लिए दर को पूर्वानुमेय रूप से बदलने वाला विकल्प तापमान है।

स्रोत: CTET Dec 2018 P1, Q75