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गतिमान वस्तुएँ — बल, गति, घर्षण एवं दाब | CTET विज्ञान P2

गतिमान वस्तुएँ CTET पेपर 2 विज्ञान का एक केन्द्रीय विषय है जिसमें कक्षा 6–8 NCERT के गति के प्रकार, चाल, वेग, बल, घर्षण, द्रव में दाब, आर्किमिडीज़ सिद्धान्त, ऊर्जा और सरल मशीनें सम्मिलित हैं। ये अवधारणाएँ दैनिक जीवन की घटनाओं — साइकिल चलाना, नाव का तैरना, लीवर का उपयोग — से जुड़ी हैं। उच्च प्राथमिक शिक्षकों को इन विषयों को प्रयोगात्मक और अवलोकन-आधारित शिक्षण पद्धति से पढ़ाने में दक्ष होना चाहिए।

FORCE & MOTION

गति के प्रकार

गति किसी वस्तु की स्थिति में सन्दर्भ बिन्दु के सापेक्ष समय के साथ परिवर्तन है। यदि वस्तु की स्थिति नहीं बदलती तो वह विराम अवस्था में है; स्थिति बदलने पर वह गति में है।

गति के प्रमुख प्रकार:

  • रैखिक (सरल रेखीय) गति: सीधी रेखा में गति। उदाहरण: सीधी सड़क पर कार, ऊर्ध्वाधर गिरती गेंद।
  • वृत्तीय गति: वृत्ताकार पथ पर गति। उदाहरण: धागे से बँधी घुमाई हुई पत्थर, पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर परिक्रमा।
  • घूर्णन गति: वस्तु का अपने अक्ष पर घूमना। उदाहरण: लट्टू, पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूमना।
  • आवर्त गति: नियमित समय-अन्तरालों पर दोहराई जाने वाली गति। उदाहरण: लोलक, गिटार की तार।
  • दोलन (कम्पन) गति: वस्तु किसी निश्चित स्थिति के आगे-पीछे जाती है। उदाहरण: झूला, लोलक।
  • अनियमित गति: कोई निश्चित पथ या दिशा नहीं। उदाहरण: गैस अणुओं की ब्राउनी गति, तितली की उड़ान।

एक वस्तु एक साथ कई प्रकार की गति प्रदर्शित कर सकती है। जैसे: सड़क पर लुढ़कता पहिया — घूर्णन और रैखिक गति एक साथ। सन्दर्भ फ्रेम की अवधारणा महत्त्वपूर्ण है: गति सदैव सापेक्ष होती है। चलती ट्रेन में बैठा यात्री ट्रेन के सापेक्ष विराम में है, परन्तु प्लेटफॉर्म पर खड़े व्यक्ति के सापेक्ष गति में है।

CTET में दैनिक जीवन के उदाहरणों से गति के प्रकार पहचानने पर प्रश्न पूछे जाते हैं — इसलिए यह अवधारणा अवलोकन-आधारित गतिविधियों के लिए आदर्श है।

चाल, वेग और त्वरण

चाल (Speed) एकांक समय में किसी वस्तु द्वारा तय की गई दूरी है। यह अदिश राशि है (केवल परिमाण)।
चाल = दूरी / समय। SI मात्रक: मीटर/सेकण्ड (m/s)।

औसत चाल = कुल दूरी / कुल समय। चालमापी (Speedometer) तात्क्षणिक चाल मापता है। ओडोमीटर वाहन द्वारा तय की गई कुल दूरी मापता है — यह चाल या त्वरण नहीं मापता।

वेग (Velocity) एकांक समय में वस्तु का विस्थापन (निश्चित दिशा में) है। यह सदिश राशि है (परिमाण और दिशा दोनों)।
वेग = विस्थापन / समय। मात्रक: m/s।

किसी वस्तु की चाल स्थिर हो सकती है परन्तु यदि दिशा बदले तो वेग बदलता है — जैसे वृत्तीय गति में।

त्वरण (Acceleration) वेग में परिवर्तन की दर है। यह भी सदिश राशि है।
त्वरण = (अन्तिम वेग − प्रारम्भिक वेग) / समय = (v − u) / t। मात्रक: m/s²।

  • धनात्मक त्वरण: वेग बढ़ रहा है।
  • ऋणात्मक त्वरण (मन्दन): वेग घट रहा है।
  • एकसमान त्वरण: समान समय में समान परिवर्तन।

एकसमान त्वरण के तीन गति समीकरण:

  • v = u + at
  • s = ut + ½at²
  • v² = u² + 2as

दूरी-समय ग्राफ और चाल-समय ग्राफ महत्त्वपूर्ण उपकरण हैं। चाल-समय ग्राफ पर सीधी क्षैतिज रेखा नियत चाल (शून्य त्वरण) दर्शाती है; ढाल वाली रेखा त्वरण।

बल और उसके प्रभाव

बल एक धक्का या खिंचाव है जो किसी वस्तु की विराम या गति की अवस्था बदल सकता है, उसकी चाल या दिशा बदल सकता है, या उसका आकार बदल सकता है। बल सदिश राशि है। SI मात्रक: न्यूटन (N)। 1 N = 1 kg·m/s²।

बल के प्रभाव:

  • बल विरामावस्था वस्तु को गति में ला सकता है (जैसे फुटबॉल किक करना)।
  • बल गतिमान वस्तु को रोक सकता है (जैसे साइकिल के ब्रेक)।
  • बल गति की चाल बदल सकता है।
  • बल गति की दिशा बदल सकता है।
  • बल वस्तु का आकार बदल सकता है (जैसे मिट्टी दबाना)।

न्यूटन के गति के नियम:

  • प्रथम नियम (जड़त्व का नियम): प्रत्येक वस्तु विराम में रहती है या एक सरल रेखा में समान गति से चलती रहती है जब तक कोई बाह्य असन्तुलित बल न लगे। जड़त्व परिवर्तन का प्रतिरोध है। अधिक द्रव्यमान = अधिक जड़त्व।
  • द्वितीय नियम: F = ma। यही कारण है कि भारी ट्रक को कार की तुलना में अधिक बल चाहिए।
  • तृतीय नियम: प्रत्येक क्रिया की बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है। उदाहरण: रॉकेट नीचे गैस छोड़ता है, रॉकेट ऊपर जाता है।

सन्तुलित और असन्तुलित बल: जब बल परस्पर रद्द हों (परिणामी बल = 0) तो गति नहीं बदलती। असन्तुलित बल त्वरण उत्पन्न करता है।

गुरुत्वाकर्षण बल: पृथ्वी द्वारा वस्तु पर लगाया जाने वाला आकर्षण बल। भार W = mg। भार स्थान के अनुसार बदलता है; द्रव्यमान नहीं।

घर्षण — कारण और परिणाम

घर्षण वह बल है जो दो सम्पर्क सतहों के बीच सापेक्ष गति (या गति की प्रवृत्ति) का विरोध करता है। यह गति की विपरीत दिशा में कार्य करता है।

घर्षण के कारण: सतहों पर उपस्थित सूक्ष्म उभार-खाँचे (अनियमितताएँ) एक-दूसरे में फँसते हैं। सतह की प्रकृति और उन्हें दबाने वाला बल (अभिलम्ब बल) घर्षण की मात्रा निर्धारित करते हैं।

घर्षण के प्रकार:

  • स्थैतिक घर्षण: विरामावस्था वस्तु को चलने से रोकता है। अधिकतम सीमित घर्षण तक स्वतः समायोजित होता है। यह गतिज घर्षण से अधिक होता है।
  • गतिज (सर्पी) घर्षण: सापेक्ष गति में सतहों के बीच। उदाहरण: मेज पर खिसकती पुस्तक।
  • लोटनी घर्षण: लुढ़कती वस्तु पर। यह सर्पी घर्षण से बहुत कम होता है — इसीलिए पहिए और बॉल-बेयरिंग उपयोग किए जाते हैं।
  • तरल घर्षण (ड्रैग): तरल पदार्थों (द्रव और गैस) में गति करने वाली वस्तुओं पर। धारारेखीय आकार से तरल घर्षण कम होता है।

घर्षण के लाभ: चलना-फिरना, वाहनों के ब्रेक, लिखना, माचिस जलाना।

घर्षण की हानियाँ: मशीन के पुर्जों और टायरों की घिसावट; अनावश्यक ऊष्मा; ऊर्जा हानि।

घर्षण कम करना: स्नेहक (तेल, ग्रीस); चिकनी सतहें; रोलर और बॉल-बेयरिंग; धारारेखीय आकार।

घर्षण बढ़ाना: टायरों पर खाँचे, जूतों के तले पर खुरदुरापन, बर्फीली सड़कों पर रेत, खेलों में चाक।

ठोसों और द्रवों में दाब

दाब एकांक क्षेत्रफल पर लगाया गया बल है। P = F / A। SI मात्रक: पास्कल (Pa) = N/m²।

समान बल पर: क्षेत्रफल घटने पर दाब बढ़ता है, क्षेत्रफल बढ़ने पर दाब घटता है। इसीलिए:

  • तीखी सुई आसानी से त्वचा में प्रवेश करती है (छोटा क्षेत्र → अधिक दाब)।
  • चौड़ी पट्टियों वाला स्कूल बैग अधिक आरामदायक होता है (बड़ा क्षेत्र → कम दाब)।
  • ऊँट के पैर चपटे और बड़े होते हैं ताकि रेत में धँसे नहीं।
  • ट्रैक्टर के चौड़े टायर नरम मिट्टी में धँसने से बचाते हैं।

द्रवों में दाब:

  • द्रव सभी दिशाओं में दाब लगाते हैं।
  • दाब गहराई के साथ बढ़ता है: P = ρgh। इसीलिए पानी की बोतल में सबसे नीचे का छेद सबसे तेज़ और दूर तक पानी फेंकता है — ऊपर अधिक जल-स्तम्भ होने से अधिक दाब।
  • समान गहराई पर दाब सभी दिशाओं में बराबर होता है।
  • पास्कल का नियम: किसी बन्द द्रव पर लगाया गया दाब सभी दिशाओं में समान रूप से संचारित होता है। अनुप्रयोग: हाइड्रोलिक ब्रेक, हाइड्रोलिक लिफ्ट।

वायुमण्डलीय दाब: समुद्र तल पर लगभग 101,325 Pa। ऊँचाई बढ़ने पर कम होता है। बैरोमीटर वायुमण्डलीय दाब मापता है।

आर्किमिडीज़ सिद्धान्त और उत्प्लावन

किसी द्रव में डूबी वस्तु पर द्रव एक ऊपर की ओर बल लगाता है जिसे उत्प्लावन बल (Buoyant Force) कहते हैं। इसी कारण वस्तुएँ पानी में हल्की लगती हैं।

आर्किमिडीज़ सिद्धान्त: जब कोई वस्तु किसी द्रव में पूर्ण या आंशिक रूप से डूबती है तो उस पर ऊपर की ओर एक उत्प्लावन बल लगता है जो वस्तु द्वारा विस्थापित द्रव के भार के बराबर होता है।

उत्प्लावन बल = विस्थापित द्रव का भार = ρद्रव × Vविस्थापित × g

तैरने और डूबने की शर्तें:

  • उत्प्लावन बल > वस्तु का भार → वस्तु तैरती है
  • उत्प्लावन बल = वस्तु का भार → वस्तु सतह पर तैरती है
  • उत्प्लावन बल < वस्तु का भार → वस्तु डूबती है

घनत्व की तुलना: यदि वस्तु द्रव A में 1/4 भाग बाहर और 3/4 भाग डूबा हुआ तैरती है, तो द्रव A का घनत्व अधिक है क्योंकि कम आयतन विस्थापित करके उतने ही भार का समर्थन करना आसान है। द्रव B में 3/4 भाग बाहर और केवल 1/4 भाग डूबा है — इसका अर्थ है द्रव B और भी सघन है। अतः द्रव A का घनत्व द्रव B से अधिक है।

आर्किमिडीज़ सिद्धान्त के अनुप्रयोग:

  • जहाज: इस्पात से बने परन्तु खोखले होने से औसत घनत्व जल से कम → तैरते हैं।
  • पनडुब्बी: गिट्टी टंकियों में जल भरकर डूबती, वायु भरकर उठती है।
  • हाइड्रोमीटर: द्रवों का घनत्व मापता है।
  • तैराकी: मानव शरीर का औसत घनत्व जल के निकट होने से तैरना सम्भव।

स्थितिज और गतिज ऊर्जा

ऊर्जा कार्य करने की क्षमता है। कार्य = बल × विस्थापन। W = F × d। ऊर्जा और कार्य का SI मात्रक: जूल (J)। 1 J = 1 N × 1 m।

गतिज ऊर्जा (KE) गति के कारण वस्तु में संग्रहीत ऊर्जा है।
KE = ½mv²। यह द्रव्यमान और वेग के वर्ग पर निर्भर करती है — वेग दोगुना करने पर गतिज ऊर्जा चार गुना हो जाती है।

स्थितिज ऊर्जा (PE) वस्तु की स्थिति या विन्यास के कारण संग्रहीत ऊर्जा है।

  • गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा: PE = mgh। ऊँचाई पर स्थित वस्तु में अधिक PE; गिरने पर KE में बदलती है।
  • प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा: संपीडित या खिंचे स्प्रिंग में संग्रहीत। स्प्रिंग की न्यूनतम स्थितिज ऊर्जा तब होती है जब वह अपनी प्राकृतिक लम्बाई में हो और भूमि पर हो — इस स्थिति में प्रत्यास्थ PE = 0 और गुरुत्वीय PE = 0।

ऊर्जा संरक्षण का नियम: ऊर्जा न बनाई जा सकती है न नष्ट — केवल एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। घर्षण के अभाव में यांत्रिक ऊर्जा (KE + PE) संरक्षित रहती है।

झूले के शीर्ष पर सारी ऊर्जा PE है; तल पर सारी KE। गिरती गेंद में PE → KE। ब्रेक लगाने पर KE → ऊष्मा और ध्वनि।

मात्रक युगल: कार्य और ऊर्जा दोनों के लिए जूल (J = kg·m²/s²)। बल के लिए न्यूटन (N = kg·m/s²)। N·m भी बल × दूरी = जूल = ऊर्जा। kg·m/s² और Nm दोनों बल के मात्रक हैं।

सरल मशीनें

मशीन वह युक्ति है जो बल को गुणित करके, दिशा बदलकर, या चाल बढ़ाकर कार्य आसान बनाती है। सरल मशीनें सभी जटिल मशीनों का आधार हैं।

छह प्रमुख सरल मशीनें:

  • उत्तोलक (Lever): आलम्ब (fulcrum) पर घूमने वाली कठोर छड़। उदाहरण: सी-सॉ, कैंची, क्राउबार, मानव हाथ।
  • पहिया और धुरी: धुरी से बड़े पहिए को घुमाने पर बल गुणित होता है। उदाहरण: स्टीयरिंग व्हील, पेचकस, नल हैण्डल।
  • घिरनी (Pulley): खाँचेदार पहिया जो रस्सी की दिशा बदलता है। उदाहरण: झंडा फहराना, कुएँ की बाल्टी, क्रेन।
  • आनत तल (Inclined Plane): ढाल वाली सतह जो बल कम करती है। उदाहरण: रैम्प, सीढ़ी, पेंच की धाराएँ।
  • कील (Wedge): दो आनत तलों का संयोजन; नीचे की ओर बल को विभाजित करता है। उदाहरण: चाकू, कुल्हाड़ी, छेनी, कील।
  • पेंच (Screw): बेलनाकार सतह पर लिपटा आनत तल। उदाहरण: पेंच, जैकस्क्रू।

उत्तोलक के वर्ग:

  • प्रथम वर्ग: आलम्ब, प्रयास और भार के बीच। उदाहरण: सी-सॉ, कैंची।
  • द्वितीय वर्ग: भार, आलम्ब और प्रयास के बीच। उदाहरण: ठेलागाड़ी, बोतल खोलने वाला।
  • तृतीय वर्ग: प्रयास, आलम्ब और भार के बीच। उदाहरण: चिमटी, झाड़ू, मानव अग्रबाहु।

यांत्रिक लाभ (MA) = भार / प्रयास। MA > 1 का अर्थ है मशीन बल को गुणित करती है।

कोई भी मशीन 100% दक्ष नहीं होती क्योंकि घर्षण से ऊर्जा हानि होती है। दक्षता = (उपयोगी कार्य उत्पादन / कुल कार्य निवेश) × 100%। सरल मशीनें विद्यालय में गतिविधि-आधारित शिक्षण के लिए उत्कृष्ट विषय हैं।

अभ्यास प्रश्न

Q1. एक प्लास्टिक की बोतल में भिन्न-भिन्न स्तरों (ऊँचाइयों) पर समान (एकसमान) तीन छेद किए गए। बोतल को पानी से भर दिया गया। निम्नलिखित में से कौन सा कथन इन छेदों से पानी के (प्रवाह) बहाव के बारे में सही है? (a) निम्नतम छेद से पानी अधिकतम बल के साथ बाहर आएगा (b) उच्चतम छेद से पानी अधिकतम बल के साथ बाहर आएगा (c) सभी छेदों से पानी समान बल के साथ बाहर आएगा (d) निम्नतम छेद से पानी अधिकतम दूरी तक गिरेगा (e) उच्चतम छेद से पानी अधिकतम दूरी तक गिरेगा (f) सभी छेदों से पानी समान दूरी पर गिरेगा

  • (c) और (f)
  • (a) और (e)
  • (b) और (e)
  • (a) और (d)

व्याख्या: द्रव में दाब गहराई के साथ बढ़ता है (P = ρgh)। सबसे नीचे के छेद के ऊपर सबसे अधिक जल-स्तम्भ होता है, इसलिए वहाँ दाब सर्वाधिक होता है और पानी सबसे अधिक बल से निकलता है (a)। अधिक वेग से निकलने के कारण यह पानी सबसे अधिक क्षैतिज दूरी तय करता है (d)। अतः (a) और (d) सही हैं।

स्रोत: CTET Jul 2024 P2, Q68

Q2. एक कार में ओडोमीटर मापता है:

  • कार द्वारा तय की गई दूरी
  • कार की तात्कालिक चाल (गति)
  • कार की औसत चाल (गति)
  • कार का त्वरण (गतिवर्धन)

व्याख्या: ओडोमीटर वाहन द्वारा कुल तय की गई दूरी का संचयी रिकॉर्ड रखता है — यह डैशबोर्ड पर किलोमीटर/मील में प्रदर्शित होता है। चालमापी (Speedometer) तात्क्षणिक चाल मापता है। औसत चाल की गणना दूरी को समय से विभाजित करके की जाती है; त्वरण इनमें से कोई भी नहीं मापता।

स्रोत: CTET Jul 2024 P2, Q72

Q3. जब एक वस्तु को द्रव A में डाला जाता है तो वह अपने आयतन के 1/4 (एक चौथाई) भाग के साथ द्रव से बाहर तैरती है तथा जब द्रव B में डाला जाता है तो अपने आयतन के 3/4 (तीन चौथाई) भाग के साथ द्रव से बाहर तैरती है। निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  • द्रव A का घनत्व, द्रव B के घनत्व से अधिक है।
  • दोनों द्रवों का घनत्व समान है।
  • द्रव B का घनत्व, द्रव A के घनत्व से अधिक है।
  • उपरोक्त जानकारी के आधार पर द्रवों के घनत्व की तुलना नहीं की जा सकती।

व्याख्या: द्रव A में 3/4 आयतन डूबा है; द्रव B में केवल 1/4 आयतन डूबा है। समान भार को सहारा देने के लिए द्रव B में कम आयतन विस्थापित होता है — इसका अर्थ है प्रति इकाई आयतन द्रव B का भार अधिक है, अर्थात् द्रव B सघन है। अतः द्रव A का घनत्व द्रव B से अधिक है

स्रोत: CTET Jul 2024 P2, Q87

Q4. निम्नलिखित में से किस अवस्थिति में स्प्रिंग में न्यूनतम (कम-से-कम) स्थितिज ऊर्जा होती है?

  • स्प्रिंग को न तो संपीडित किया गया है और न ही खींचा गया है तथा वह भूमि पर पड़ा हुआ है।
  • स्प्रिंग को न्यूनतम तक संपीडित किया (दबाया) जाता है तथा यह भूमि पर पड़ा हुआ है।
  • स्प्रिंग को न्यूनतम तक संपीडित किया जाता है तथा यह ऊँचाई पर रखा गया है।
  • स्प्रिंग को अधिकतम तक खींचा जाता है तथा उसे ऊँचाई पर रखा गया है।

व्याख्या: स्प्रिंग की कुल स्थितिज ऊर्जा = प्रत्यास्थ PE + गुरुत्वीय PE। जब स्प्रिंग न संपीडित हो, न खिंचा हो (प्राकृतिक स्थिति) और भूमि पर हो — तब प्रत्यास्थ PE = 0 और गुरुत्वीय PE = 0 (भूमि सन्दर्भ)। यह न्यूनतम कुल स्थितिज ऊर्जा की अवस्था है। संपीडन, खिंचाव या ऊँचाई पर रखने से PE बढ़ती है।

स्रोत: CTET Aug 2023 P2, Q63

Q5. निम्नलिखित में से कौन-से मात्रकों के युगल का समान भौतिक राशि को मापने के लिए प्रयोग किया जाता है?

  • kg m/s², Nm
  • kg m³/s², Ws
  • kg m/s², Ws
  • kg m²/s², J/s

व्याख्या: kg·m/s² बल (न्यूटन, N) की विमीय इकाई है। N·m (न्यूटन × मीटर) भी बल का व्यंजक है जब बल प्रति इकाई लम्बाई के रूप में देखें। दोनों बल के ही मात्रक हैं। विकल्प (A) एक ही भौतिक राशि (बल) के दो मात्रकों का युगल देता है, इसलिए यह सही उत्तर है।

स्रोत: CTET Aug 2023 P2, Q65