मौसम और जलवायु
मौसम किसी स्थान पर किसी विशेष दिन वायुमंडल की दशा को कहते हैं — जिसमें तापमान, आर्द्रता, वर्षा, वायु गति और बादलों की स्थिति शामिल होती है। जलवायु किसी क्षेत्र के दीर्घकालिक (सामान्यतः 25 वर्ष से अधिक) औसत मौसम का प्रतिरूप है।
मौसम के मुख्य तत्त्व हैं: तापमान (थर्मामीटर से मापा जाता है), आर्द्रता (हाइग्रोमीटर से), वर्षा (वर्षामापी से), वायु गति (वायुवेगमापी/एनीमोमीटर से) और वायु दिशा (वायु फलक से)।
अधिकतम-न्यूनतम थर्मामीटर किसी दिन का अधिकतम और न्यूनतम तापमान दर्ज करता है। इन दोनों के अंतर को दैनिक तापांतर कहते हैं।
भारत में छह ऋतुएँ होती हैं — ग्रीष्म, वर्षा, शरद्, हेमंत, शीत और वसंत। ऋतु-परिवर्तन पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर परिक्रमा और उसकी अक्ष की झुकाव (23.5°) के कारण होता है।
- उष्णकटिबंधीय जलवायु: वर्षभर उच्च तापमान, ग्रीष्म में भारी वर्षा।
- ध्रुवीय जलवायु: अत्यधिक ठंड, हिमपात।
- शीतोष्ण जलवायु: मध्यम तापमान और वर्षा।
मानसून भारतीय जलवायु को सर्वाधिक प्रभावित करता है। दक्षिण-पश्चिम मानसून जून से सितंबर तक अधिकांश भारत में वर्षा लाता है।
वायु और वर्षा का निर्माण
वायु का प्रवाह उच्च वायुदाब क्षेत्र से निम्न वायुदाब क्षेत्र की ओर होता है। वायु उत्पन्न होने का मुख्य कारण पृथ्वी की सतह का असमान ताप है। भूमि जल की तुलना में तेजी से गर्म और ठंडी होती है।
दिन में भूमि समुद्र से अधिक गर्म हो जाती है। भूमि के ऊपर की गर्म वायु ऊपर उठती है और निम्न वायुदाब का क्षेत्र बनता है। समुद्र से ठंडी वायु भूमि की ओर आती है — इसे समुद्री समीर (Sea Breeze) कहते हैं। रात में विपरीत प्रक्रिया होती है — इसे स्थलीय समीर (Land Breeze) कहते हैं।
जल चक्र और वर्षा निर्माण:
- वाष्पीकरण: सौर ऊष्मा से जल वाष्प बनकर ऊपर उठती है।
- संघनन: ऊँचाई पर ठंड से जल वाष्प का संघनन होता है और बादल बनते हैं।
- अवक्षेपण: बादलों से वर्षा, ओले या हिम के रूप में जल गिरता है।
- संग्रह: जल नदियों और महासागरों में वापस आ जाता है।
भारत में मानसून वर्षा भारतीय उपमहाद्वीप और हिंद महासागर के असमान ताप के कारण होती है। ITCZ (अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र) गर्मियों में उत्तर की ओर खिसकता है, जिससे आर्द्र पवनें अंदर खिंचती हैं और वर्षा होती है। आर्द्रता वायु में जलवाष्प की मात्रा को कहते हैं।
तड़ित झंझा और चक्रवात
तड़ित झंझा (Thunderstorm) तब उत्पन्न होता है जब नम, गर्म वायु तेजी से ऊपर उठती है और कपासी वर्षा मेघ (Cumulonimbus) बनते हैं। बादल के भीतर बर्फ के कणों और जल की बूँदों की टक्कर से विद्युत आवेश का पृथक्करण होता है — बादल का ऊपरी भाग धनात्मक और निचला भाग ऋणात्मक आवेशित हो जाता है। इस विशाल विभवांतर के अचानक निर्वहन से बिजली (Lightning) कड़कती है और तेज ध्वनि-विस्तार से गर्जन (Thunder) होती है।
बिजली सदैव सबसे ऊँचे और नुकीले बिन्दु पर गिरती है। तड़ित चालक (Lightning Conductor) — बेंजामिन फ्रैंकलिन द्वारा आविष्कृत — इमारतों पर लगी धातु की छड़ है जो विद्युत को सुरक्षित रूप से भूमि में पहुँचाती है।
चक्रवात गर्म उष्णकटिबंधीय महासागरों के ऊपर बनने वाली घूर्णनशील वायु प्रणाली है। अटलांटिक में इसे हरिकेन और प्रशांत में टाइफून कहते हैं। संरचना:
- नेत्र (Eye): चक्रवात का शांत केन्द्र, निम्न वायुदाब।
- नेत्र-भित्ति (Eye Wall): सबसे तीव्र तूफान की पट्टी।
- सर्पिल वर्षा बैंड: बाहर की ओर घूमते बादलों की पट्टियाँ।
भारत में चक्रवात अधिकतर बंगाल की खाड़ी के पूर्वी तट पर आते हैं। डॉप्लर रडार और उपग्रह चित्रों से चक्रवात की भविष्यवाणी और निगरानी की जाती है।
भूकम्प — कारण और मापन
भूकम्प पृथ्वी की सतह का अचानक काँपना है जो विवर्तनिक प्लेटों (Tectonic Plates) की गति के कारण होता है। पृथ्वी का बाहरी खोल (स्थलमण्डल) लगभग 12 प्रमुख प्लेटों में विभाजित है जो अर्ध-पिघले आवरण (Asthenosphere) पर तैरती हैं।
पृथ्वी के भीतर जहाँ भूकम्प उत्पन्न होता है उसे उद्गम केन्द्र (Focus / Hypocentre) कहते हैं। इसके ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर जो बिन्दु होता है उसे अभिकेन्द्र (Epicentre) कहते हैं — यहाँ कम्पन सबसे तीव्र होता है।
भूकम्पीय तरंगों के प्रकार:
- P-तरंगें (प्राथमिक): सबसे तेज; ठोस, द्रव और गैस से गुजरती हैं।
- S-तरंगें (द्वितीयक): धीमी; केवल ठोस माध्यम में।
- L-तरंगें (सतही): सबसे धीमी लेकिन सर्वाधिक विनाशकारी।
भूकम्पीय तरंगों को सिस्मोग्राफ से अभिलेखित किया जाता है। रिक्टर मापनी भूकम्प की तीव्रता (परिमाण) मापती है — यह लघुगणकीय मापनी (0–9+) है। मर्कैली मापनी किसी स्थान पर प्रभाव मापती है। भारत के भूकम्प प्रवण क्षेत्रों में हिमालय क्षेत्र, कच्छ (गुजरात) और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं। समुद्र के नीचे भूकम्प से सुनामी उत्पन्न होती है।
रात्रि आकाश — तारे और नक्षत्र
तारे विशाल प्रकाशमान गैस के पिण्ड हैं जो नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) द्वारा ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। सूर्य पृथ्वी के सबसे निकट का तारा है (लगभग 15 करोड़ किमी)। अगला निकटतम तारा प्रॉक्सिमा सेंटॉरी है — लगभग 4.2 प्रकाश-वर्ष दूर।
पृथ्वी के अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व घूमने के कारण सभी तारे आकाश में पूर्व से पश्चिम की ओर चलते प्रतीत होते हैं। ध्रुव तारा (Polaris) लगभग स्थिर दिखता है क्योंकि यह पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव के ठीक ऊपर स्थित है; यह दिशा-ज्ञान के लिए उपयोगी है।
तारों के पहचाने जाने वाले समूहों को तारामंडल (Constellations) कहते हैं। आधिकारिक तौर पर 88 तारामंडल मान्यता प्राप्त हैं।
- सप्तर्षि (Ursa Major): सात चमकीले तारों से बनी आकृति; ध्रुव तारे की पहचान में सहायक।
- कालपुरुष (Orion): शीतकाल में दिखता है; बेटेलग्यूज और राइजेल इसके प्रमुख तारे हैं।
- कैसिओपिया: W-आकार का तारामंडल।
- सिंह (Leo): वसंत ऋतु में दिखता है।
आकाशगंगा (Milky Way) हमारी घरेलू आकाशगंगा है — एक वर्जित सर्पिल आकाशगंगा जिसमें 200 अरब से अधिक तारे हैं। तारों के रंग उनके तापमान पर निर्भर करते हैं: नीले-सफेद तारे सबसे गर्म और लाल तारे सबसे ठंडे होते हैं।
सौरमंडल
सौरमंडल में सूर्य तथा उससे गुरुत्वाकर्षण द्वारा बँधे सभी खगोलीय पिण्ड शामिल हैं — आठ ग्रह, उनके चंद्रमा, बौने ग्रह, क्षुद्रग्रह, धूमकेतु और उल्का। सूर्य में सौरमंडल के कुल द्रव्यमान का लगभग 99.86% होता है।
सूर्य से दूरी के क्रम में आठ ग्रह: बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण।
- बुध: सबसे छोटा ग्रह; कोई वायुमंडल नहीं।
- शुक्र: सबसे गर्म ग्रह (~465°C); पूर्व से पश्चिम घूमता है (प्रतिगामी)।
- पृथ्वी: एकमात्र जीवन वाला ग्रह; एक प्राकृतिक उपग्रह (चंद्रमा)।
- मंगल: लाल ग्रह; ओलम्पस मॉन्स (सबसे बड़ा ज्वालामुखी) यहाँ है।
- बृहस्पति: सबसे बड़ा ग्रह; ग्रेट रेड स्पॉट एक विशाल तूफान है।
- शनि: बर्फ और चट्टान से बनी प्रमुख वलय प्रणाली है।
- अरुण: अपनी कक्षा में करवट लेकर घूमता है (अक्षीय झुकाव ~98°)।
- वरुण: सबसे दूर का ग्रह; सबसे तेज हवाएँ।
2006 में प्लूटो को बौने ग्रह की श्रेणी में रखा गया। क्षुद्रग्रह मंगल और बृहस्पति के बीच क्षुद्रग्रह पट्टी में हैं। धूमकेतु बर्फीले पिण्ड हैं जिनकी पूँछ सूर्य के पास आने पर दिखती है (जैसे हैली का धूमकेतु, ~76 वर्ष में एक बार)।
अम्ल वर्षा और पर्यावरणीय प्रभाव
अम्ल वर्षा वह वर्षा (या हिम, कोहरा) है जिसका pH 5.6 से कम हो। सामान्य वर्षा का pH लगभग 5.6 होता है क्योंकि CO₂ जल में घुलकर कार्बोनिक अम्ल बनाती है। जब वायु प्रदूषण से सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ) वायुमंडल में मिलते हैं तो वे जलवाष्प से क्रिया करके सल्फ्यूरिक अम्ल और नाइट्रिक अम्ल बनाते हैं।
SO₂ और NOₓ के मुख्य स्रोत:
- कोयला और तेल जलाने वाले बिजलीघर व कारखाने।
- वाहनों से निकलने वाला धुआँ।
- धातु गलाने की औद्योगिक प्रक्रियाएँ।
- ज्वालामुखी विस्फोट (प्राकृतिक स्रोत)।
अम्ल वर्षा के प्रभाव:
- जलीय पारिस्थितिकी तंत्र: झीलों और नदियों का pH घटने से मछलियाँ मर जाती हैं।
- वन: मृदा से कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्त्व बह जाते हैं; पेड़ कमजोर होते हैं।
- स्मारक और इमारतें: संगमरमर और चूना-पत्थर गल जाते हैं — ताजमहल को पास के कारखानों से निकलने वाली अम्ल वर्षा से क्षति हो रही है।
- मानव स्वास्थ्य: अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी साँस की बीमारियाँ बढ़ती हैं।
समाधान: वाहनों में उत्प्रेरक परिवर्तक (Catalytic Converter), कारखाने की चिमनियों में स्क्रबर, और नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग।
प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सुरक्षा
प्राकृतिक आपदाओं के दौरान उचित सावधानियाँ जीवन बचा सकती हैं।
तड़ित झंझा / बिजली के दौरान:
- घर के भीतर या कार में रहें (धातु का ढाँचा फैराडे पिंजरे का काम करता है)।
- ऊँचे या अकेले खड़े पेड़ के नीचे न खड़े हों — बिजली सबसे ऊँचे बिन्दु पर गिरती है।
- खुले मैदान, पहाड़ियों और जल निकायों से दूर रहें।
- बिजली के उपकरण, नल और टेलीफोन से दूर रहें।
चक्रवात के दौरान:
- मौसम सूचनाओं पर ध्यान दें और निकासी आदेश का पालन करें।
- तूफान से पहले चक्रवात आश्रय या मजबूत इमारत में जाएँ।
- पर्याप्त भोजन, पेयजल और दवाइयाँ रखें।
- चक्रवात के 'नेत्र' के दौरान बाहर न जाएँ — शांति अस्थायी होती है।
भूकम्प के दौरान:
- घर के भीतर हों — झुकें, ढकें (मजबूत मेज के नीचे) और थामे रहें।
- खिड़कियों, भारी फर्नीचर और बाहरी दीवारों से दूर रहें।
- लिफ्ट का उपयोग न करें; काँपना रुकने के बाद सीढ़ियों से निकलें।
- बाहर हों तो इमारतों, पेड़ों और बिजली के खम्भों से दूर जाएँ।
भारत की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और राज्य एजेंसियाँ मॉक ड्रिल, दिशानिर्देश और राहत कार्य समन्वित करती हैं। भूकम्परोधी भवन निर्माण (आधार विलगक, कतरनी दीवारें) एक दीर्घकालिक उपाय है।
अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक पृथ्वी पर वायु के उत्पन्न होने और उसके बहाव के लिए उत्तरदायी हैं? (a) पृथ्वी का असमान ताप (परिवर्तनशील) तापन (b) महासागरों का असमान (परिवर्तनशील) ताप तापन (c) पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी (d) पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण बल
व्याख्या: वायु पृथ्वी की सतह के असमान तापन (भूमि तथा महासागर दोनों) से उत्पन्न होती है। इससे वायुदाब का अंतर बनता है। गुरुत्वाकर्षण बल और पृथ्वी-सूर्य दूरी वायु प्रवाह के सीधे कारण नहीं हैं।
स्रोत: CTET Jul 2024 P2, Q84
Q2. निम्नलिखित कथनों को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा सही विकल्प का चयन कीजिए। अभिकथन (A): रात्रि आकाश में तारे पूर्व से पश्चिम की ओर जाते प्रतीत होते हैं। तर्क (R): पृथ्वी पश्चिम से पूर्व दिशा में पूर्ण चक्कर करती है।
व्याख्या: पृथ्वी पश्चिम से पूर्व घूमती है, इसीलिए तारे पूर्व से पश्चिम की ओर चलते प्रतीत होते हैं। अभिकथन और तर्क दोनों सही हैं और तर्क, अभिकथन की सही व्याख्या है।
स्रोत: CTET Jan 2024 P2, Q63
Q3. निम्नलिखित में से कौन-सी गैसें अम्ल वर्षा के लिए उत्तरदायी हैं? (a) नाइट्रोजन (b) ऑक्सीजन (c) ओजोन (d) सल्फर डाइऑक्साइड (e) नाइट्रिक ऑक्साइड
व्याख्या: अम्ल वर्षा के लिए सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और नाइट्रिक ऑक्साइड (NOₓ) उत्तरदायी हैं। ये जलवाष्प से क्रिया करके सल्फ्यूरिक और नाइट्रिक अम्ल बनाते हैं। नाइट्रोजन, ऑक्सीजन और ओजोन सीधे अम्ल वर्षा नहीं कराते।
स्रोत: CTET Jan 2024 P2, Q68
Q4. भूकम्प के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (a) भूकम्प विवर्तनिक प्लेटों की गति से उत्पन्न होते हैं। (b) फोकस (अधिकेन्द्र) पृथ्वी की सतह पर वह बिन्दु है जो अभिकेन्द्र के ठीक ऊपर होता है। (c) भूकम्पीय तरंगों को सिस्मोग्राफ से मापा जाता है। (d) रिक्टर मापक किसी विशेष स्थान पर भूकम्प की तीव्रता मापता है।
व्याख्या: विवर्तनिक प्लेटों की गति से भूकम्प आते हैं (a — सही)। भूकम्पीय तरंगें सिस्मोग्राफ से दर्ज की जाती हैं (c — सही)। (b) गलत है: फोकस पृथ्वी के भीतर होता है, अभिकेन्द्र सतह पर। (d) गलत है: रिक्टर मापनी परिमाण (ऊर्जा) मापती है, न कि किसी स्थान पर तीव्रता।
स्रोत: Practice Question
Q5. तड़ित झंझा (गरज के साथ तूफान) के दौरान निम्नलिखित में से कौन-सी सावधानी सुरक्षित नहीं है?
व्याख्या: ऊँचे पेड़ के नीचे खड़ा होना अत्यंत खतरनाक है क्योंकि बिजली सबसे ऊँचे बिन्दु पर गिरती है और पेड़ के तने से होकर नीचे खड़े व्यक्ति तक पहुँच सकती है। बाकी सभी विकल्प सुरक्षित उपाय हैं।
स्रोत: Practice Question