विज्ञान · CTET नोट्स

प्राकृतिक संसाधन — मृदा, जल, वायु, वन और अपशिष्ट | CTET विज्ञान P2

प्राकृतिक संसाधन CTET पेपर 2 में महत्त्वपूर्ण इकाई है जो NCERT कक्षा 6–8 के मृदा, जल, वायु, वन और अपशिष्ट प्रबंधन के अध्यायों पर आधारित है। नाइट्रोजन चक्र, मृदा के प्रकार, वर्षाजल संग्रह, जैव-निम्नीकरणीय अपशिष्ट तथा 3R से प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

NATURAL RESOURCES

नाइट्रोजन चक्र

वायुमंडल में लगभग 78% नाइट्रोजन (N₂) होती है, परंतु अधिकांश जीव इसे सीधे उपयोग नहीं कर सकते। नाइट्रोजन चक्र वह जैव-भू-रासायनिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा नाइट्रोजन वायुमंडल, मृदा और जीवों के बीच परिवर्तित होती रहती है।

नाइट्रोजन चक्र की प्रमुख प्रक्रियाएँ:

  • नाइट्रोजन स्थिरीकरण: वायुमंडलीय N₂ का अमोनिया या नाइट्रेट में परिवर्तन। यह एजोटोबैक्टर (स्वतंत्रजीवी जीवाणु), राइजोबियम (फलीदार पौधों की जड़ ग्रंथियों में सहजीवी जीवाणु), और बिजली द्वारा होता है।
  • नाइट्रीकरण: अमोनिया का नाइट्राइट (Nitrosomonas द्वारा) फिर नाइट्रेट (Nitrobacter द्वारा) में परिवर्तन। पौधे मृदा से नाइट्रेट सीधे अवशोषित करते हैं।
  • स्वांगीकरण: पौधे नाइट्रेट अवशोषित कर अमीनो अम्ल और प्रोटीन बनाते हैं।
  • अमोनीकरण: मृत कार्बनिक पदार्थ का जीवाणुओं द्वारा अपघटन कर अमोनिया को मृदा में वापस छोड़ना।
  • विनाइट्रीकरण: अवायवीय जीवाणुओं द्वारा नाइट्रेट का पुनः वायुमंडलीय N₂ में परिवर्तन।

अत्यधिक उर्वरकों के उपयोग से सुपोषण (Eutrophication) — जलाशयों में अतिरिक्त नाइट्रेट से शैवाल की अत्यधिक वृद्धि — और जैव आवर्धन (Biomagnification) होती है। नाइट्रीकरण स्वयं एक प्राकृतिक मृदा प्रक्रिया है — यह उर्वरक दुष्प्रभाव नहीं है।

मृदा के प्रकार और उनके गुण

मृदा पृथ्वी की ऊपरी परत है जो हजारों वर्षों में चट्टानों के अपक्षय से बनती है। मृदा की संरचना: खनिज कण (~45%), जैव पदार्थ/ह्यूमस (~5%), जल (~25%) और वायु (~25%)।

मृदा परिच्छेदिका (Soil Profile) — मृदा का ऊर्ध्वाधर काट-खंड विभिन्न परतें (क्षितिज) दर्शाता है:

  • क्षितिज A (ऊपरी मृदा): सर्वाधिक ह्यूमस और पोषक तत्त्व; पौधों की जड़ें यहाँ होती हैं।
  • क्षितिज B (अवमृदा): कम ह्यूमस; खनिजों का संचय।
  • क्षितिज C (जनक चट्टान): आंशिक रूप से अपक्षयित चट्टान।
  • क्षितिज D (आधार शैल): अपक्षयरहित ठोस चट्टान।

मृदा के प्रकार:

  • बलुई मृदा: बड़े कण; अधिक वायुसंचार; कम जलधारण; कम उर्वर।
  • चिकनी मृदा: बहुत महीन कण; अधिक जलधारण; कम वायुसंचार — दोमट से कम वायुयुक्त। (CTET महत्त्वपूर्ण)
  • दोमट मृदा: बालू, चिकनी मिट्टी और गाद का आदर्श मिश्रण; कृषि के लिए सर्वोत्तम।
  • गादी मृदा: चिकनी बनावट; मध्यम उर्वरता; नदियों के किनारे मिलती है।

ह्यूमस मृदा की उर्वरता, जलधारण और संरचना में सुधार करता है। मृदा अपरदन वनों की कटाई और अत्यधिक चराई से बढ़ता है। मृदा संरक्षण के उपाय: वनारोपण, समोच्च कृषि, सीढ़ीदार खेती।

जल — स्रोत, संरक्षण और वर्षाजल संग्रह

पृथ्वी की सतह का लगभग 71% भाग जल से ढका है, परंतु केवल 2.5% ताजा जल है और उसका भी अधिकांश भाग हिमनद और बर्फ में जमा है। नदियों, झीलों और भूजल में उपलब्ध ताजा जल कुल जल का मात्र 0.3% है।

जल के स्रोत:

  • धरातलीय जल: नदियाँ, झीलें, तालाब, जलाशय।
  • भूजल: भूमिगत जलभृतों में; कुएँ और बोरवेल से प्राप्त।
  • वर्षाजल: भूमि पर सभी ताजे जल का अंतिम स्रोत।

वर्षाजल संग्रह (Rainwater Harvesting) वर्षाजल को भविष्य के उपयोग के लिए एकत्र करने की प्रक्रिया है।

  • भूजल का संरक्षण और पुनर्भरण करता है।
  • सतही बहाव कम करके स्थानीय बाढ़ घटाता है।
  • फसलों की सिंचाई में उपयोग किया जा सकता है।
  • जल निकासी समस्या उत्पन्न नहीं करता — यह गलत धारणा है।

भारत में पारंपरिक जल संरक्षण: कुंड, जोहड़, बावड़ी, ईरी टैंक, बाँस की बूँद-बूँद सिंचाई (मेघालय)। जल स्तर वर्षाजल संग्रह से ऊँचा होता है और अत्यधिक बोरवेल से नीचा।

वायु — संरचना और प्रदूषण

वायु गैसों का मिश्रण है। इसकी संरचना: नाइट्रोजन 78%, ऑक्सीजन 21%, आर्गन 0.93%, कार्बन डाइऑक्साइड 0.04%, और अल्प मात्रा में अन्य गैसें।

वायुमंडलीय परतें:

  • क्षोभमंडल: पृथ्वी के सबसे निकट; मौसम यहाँ होता है।
  • समतापमंडल: ओजोन परत यहाँ है जो पराबैंगनी विकिरण सोखती है।
  • मध्यमंडल: उल्काओं को जला देता है।
  • आयनमंडल: रेडियो तरंगें परावर्तित करता है।

प्रमुख वायु प्रदूषक:

  • कार्बन मोनोऑक्साइड: अधूरे दहन से; हीमोग्लोबिन से बँधती है।
  • SO₂: कोयला जलाने से; अम्ल वर्षा कराती है।
  • NOₓ: वाहन और उद्योग; धुंध और अम्ल वर्षा।
  • PM2.5/PM10: सूक्ष्म कण; फेफड़ों को नुकसान।
  • CFCs: ओजोन परत नष्ट करती हैं।

नियंत्रण: उत्प्रेरक परिवर्तक, CNG, स्वच्छ कोयला तकनीक, धुआँरहित चूल्हे, वनारोपण। ग्रीनहाउस प्रभाव प्राकृतिक प्रक्रिया है; अत्यधिक CO₂ से वैश्विक ऊष्मायन बढ़ता है।

वन — महत्त्व और संरक्षण

वन पृथ्वी के भूभाग का लगभग 31% ढकते हैं और असंख्य पारिस्थितिक, आर्थिक एवं सामाजिक सेवाएँ प्रदान करते हैं।

पारिस्थितिक महत्त्व:

  • ऑक्सीजन उत्पन्न करना और CO₂ अवशोषित करना।
  • जल चक्र नियमित करना; भूजल पुनर्भरण।
  • मृदा अपरदन रोकना।
  • जैव विविधता का आवास।
  • स्थानीय और वैश्विक जलवायु नियमन।

आर्थिक महत्त्व: इमारती लकड़ी, जलाऊ लकड़ी, औषधीय पौधे, गैर-इमारती वन उत्पाद (शहद, बाँस, गोंद)।

संरक्षण उपाय:

  • वनारोपण: बंजर भूमि पर पेड़ लगाना।
  • पुनर्वनीकरण: कटे वन क्षेत्रों में नए पेड़।
  • सामाजिक वानिकी: समुदाय की भागीदारी।
  • संरक्षित क्षेत्र: राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभ्यारण्य, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र।
  • संयुक्त वन प्रबंधन (JFM): सरकार और स्थानीय समुदाय का सहयोग।

चिपको आंदोलन (1970 का दशक, उत्तराखंड) — ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं, ने पेड़ों से चिपककर उन्हें काटने से बचाया। यह समुदाय-आधारित वन संरक्षण का एक महत्त्वपूर्ण उदाहरण है।

जैव-निम्नीकरणीय और अजैव-निम्नीकरणीय अपशिष्ट

अपशिष्ट को दो वर्गों में बाँटा जाता है:

जैव-निम्नीकरणीय अपशिष्ट वह है जिसे सूक्ष्मजीव (जीवाणु, कवक) प्राकृतिक रूप से अपघटित कर सकते हैं। उदाहरण: भोजन के अवशेष, सब्जियों के छिलके, पत्तियाँ, कागज, सूती कपड़ा, लकड़ी, गोबर।

अजैव-निम्नीकरणीय अपशिष्ट प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा नष्ट नहीं होता और वर्षों-शताब्दियों तक पर्यावरण में बना रहता है। उदाहरण: प्लास्टिक थैले, सिंथेटिक रेशे, काँच, धातुएँ, DDT जैसे कीटनाशक।

अनुमानित अपघटन समय (CTET महत्त्वपूर्ण):

  • केले का छिलका: 10–30 दिन
  • सूती कमीज: 1–2 सप्ताह
  • रेशमी रूमाल: 2–5 माह
  • कागज: 4 वर्ष
  • प्लास्टिक की बोतल: अनेक वर्ष (सैकड़ों वर्ष)

जैव आवर्धन — हानिकारक पदार्थ (जैसे DDT, पारा) खाद्य श्रृंखला में ऊपर जाते-जाते अधिक सांद्रित होते जाते हैं। उच्च पोषण स्तर के जीवों में (जैसे मछली खाने वाले पक्षी) इनकी मात्रा सर्वाधिक होती है।

जैव-निम्नीकरणीय और अजैव-निम्नीकरणीय का अंतर स्रोत पर अपशिष्ट पृथक्करण का आधार है — भारत के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 में इसकी अनुशंसा की गई है।

अपशिष्ट प्रबंधन और 3R

प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन प्रदूषण कम करने, संसाधनों के संरक्षण और मानव स्वास्थ्य की रक्षा के लिए आवश्यक है। 3R ढाँचा — घटाएँ (Reduce), पुनः उपयोग करें (Reuse), पुनः चक्रण करें (Recycle) — अपशिष्ट प्रबंधन की श्रेणीबद्ध रणनीति है।

  • घटाएँ (Reduce): सबसे प्रभावशाली उपाय — स्रोत पर ही अपशिष्ट उत्पन्न होने से रोकें। एकल-उपयोग प्लास्टिक से बचें।
  • पुनः उपयोग (Reuse): वस्तुओं को फेंकने से पहले बार-बार उपयोग करें। कपड़े के थैले, रिफिलेबल बोतलें।
  • पुनः चक्रण (Recycle): अपशिष्ट को नए उत्पादों में परिवर्तित करें। कागज, काँच, धातु और कुछ प्लास्टिक का पुनः चक्रण।

खाद बनाना (Composting): रसोई और बगीचे के जैव-निम्नीकरणीय अपशिष्ट का नियंत्रित अपघटन करके पोषण-युक्त कम्पोस्ट बनाना। केंचुओं से वर्मीकम्पोस्टिंग और भी तेज होती है।

स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य शहरी और ग्रामीण भारत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सुधारना है। ई-अपशिष्ट में सीसा, पारा और कैडमियम जैसे विषाक्त पदार्थ होते हैं — इन्हें अलग से संग्रहित और निपटाया जाना चाहिए।

प्राकृतिक संसाधनों का धारणीय उपयोग

सतत विकास का अर्थ है: वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताएँ पूरी करना, बिना भावी पीढ़ियों की आवश्यकताएँ पूरी करने की क्षमता को नुकसान पहुँचाए (ब्रुंटलैंड आयोग, 1987)।

धारणीय उपयोग की रणनीतियाँ:

  • नवीकरणीय ऊर्जा: सौर, पवन, जल और भूतापीय ऊर्जा का उपयोग।
  • जैविक खेती: रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करना।
  • एकीकृत कीट प्रबंधन: जैविक नियंत्रण और न्यूनतम रसायनों का उपयोग।
  • जल संरक्षण: बूँद-बूँद सिंचाई, वर्षाजल संग्रह।
  • जैव विविधता संरक्षण: पारिस्थितिक तंत्र की सेवाएँ बनाए रखना।

प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय ढाँचे:

  • पृथ्वी सम्मेलन, रियो (1992): जैव विविधता सम्मेलन और UNFCCC।
  • क्योटो प्रोटोकॉल (1997): विकसित देशों के लिए उत्सर्जन में बाध्यकारी कमी।
  • पेरिस समझौता (2015): वैश्विक तापमान वृद्धि 1.5–2°C तक सीमित करने का लक्ष्य।
  • सतत विकास लक्ष्य (SDGs): संयुक्त राष्ट्र के 17 लक्ष्य, 2030 तक प्राप्त करने का लक्ष्य।

कक्षा में सतत विकास: विद्यालय बागवानी, ऊर्जा लेखापरीक्षण, और अपशिष्ट पृथक्करण जैसी गतिविधियाँ पर्यावरण-चेतना और जिम्मेदार नागरिकता विकसित करती हैं।

अभ्यास प्रश्न

Q1. उर्वरकों एवं कीटनाशकों का अति प्रयोग के कारण निम्नलिखित में से कौन-सा होता नहीं है?

  • मृदा अपरदन
  • नाइट्रीकरण
  • सुपोषण
  • जैव आवर्धन

व्याख्या: नाइट्रीकरण एक प्राकृतिक मृदा प्रक्रिया है (अमोनिया का नाइट्रेट में परिवर्तन) जो उर्वरक प्रयोग से स्वतंत्र रूप से होती है। मृदा अपरदन, सुपोषण और जैव आवर्धन — ये सभी अत्यधिक उर्वरक और कीटनाशक उपयोग के हानिकारक प्रभाव हैं।

स्रोत: CTET Jul 2024 P2, Q71

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन वर्षा जल संग्रह के बारे में सही है/हैं? (a) यह भू-जल का संरक्षण करता है। (b) यह स्थानीय बाढ़ को कम करता है। (c) यह जल निकासी संबंधी समस्याएँ उत्पन्न करता है। (d) इसका उपयोग फसलों की सिंचाई के लिए किया जा सकता है।

  • (a), (b), (c)
  • (a), (c), (d)
  • (a), (b), (d)
  • (b), (c), (d)

व्याख्या: वर्षाजल संग्रह भूजल का संरक्षण करता है (a सही), स्थानीय बाढ़ कम करता है (b सही), और सिंचाई में काम आता है (d सही)। (c) गलत है — वर्षाजल संग्रह जल निकासी समस्या उत्पन्न नहीं करता, बल्कि सतही बहाव कम करता है।

स्रोत: CTET Jul 2024 P2, Q77

Q3. 'नाइट्रोजन स्थिरीकरण' शब्द का क्या अर्थ है?

  • नाइट्रोजन यौगिकों का गैसीय नाइट्रोजन में रूपांतरण
  • मृदा में उपस्थित (विद्यमान) जीवाणुओं द्वारा अमोनिया को नाइट्रेट में बदलना
  • मृत जैव पदार्थ में उपस्थित (विद्यमान) नाइट्रोजन का वापस मृदा में अभिमुक्त करना (वापस छोड़ना)
  • जीवित प्राणियों के लिए अधिक प्रयोगयोग्य (प्रयोगीय) रूप हेतु वायुमंडलीय नाइट्रोजन का रूपांतरण

व्याख्या: नाइट्रोजन स्थिरीकरण का अर्थ है वायुमंडलीय N₂ (निष्क्रिय गैस) को अमोनिया या नाइट्रेट जैसे उपयोगी रूपों में बदलना। विकल्प (a) विनाइट्रीकरण है, (b) नाइट्रीकरण है, और (c) अमोनीकरण है।

स्रोत: CTET Aug 2023 P2, Q62

Q4. उस समुच्चय का चयन कीजिए जो कि कॉलम A में दिए गए अपशिष्ट (कूड़े) के प्रकार का कॉलम B में दिए गए इसके द्वारा अपघटन में लगने वाले समय के साथ सही प्रकार से सुमेलित हो: कॉलम A: a. प्लास्टिक की बोतल, b. रेशमी रूमाल (स्कार्फ), c. सूती कमीज़ (शर्ट), d. केले का छिलका, e. कागज कॉलम B: i. 2-5 माह, ii. 1-2 सप्ताह, iii. 10-30 दिन, iv. 4 वर्ष, v. अनेक वर्ष

  • a-iv, b-v, c-ii, d-ii, e-iii
  • a-v, b-iv, c-d-ii, e-iii
  • a-iv, b-iv, c-ii, d-i, e-iii
  • a-v, b-i, c-ii, d-iii, e-iv

व्याख्या: प्लास्टिक अनेक वर्ष (a-v), रेशमी रूमाल 2–5 माह (b-i), सूती कमीज 1–2 सप्ताह (c-ii), केले का छिलका 10–30 दिन (d-iii), और रासायनिक उपचार के कारण कागज लगभग 4 वर्ष (e-iv) में अपघटित होता है।

स्रोत: CTET Aug 2023 P2, Q73

Q5. गलत कथन की पहचान कीजिए:

  • दोमट मृदा की तुलना में चिकनी मृदा अधिक सुवातित होती है।
  • दोमट मृदा की तुलना में चिकनी मृदा अधिक उर्वर होती है।
  • दोमट की अपेक्षा चिकनी मृदा की जल धारण क्षमता बेहतर होती है।
  • चिकनी मृदा के कणों का आमाप दोमट मृदा के कणों के आमाप से अपेक्षाकृत बहुत छोटा (सूक्ष्म) होता है।

व्याख्या: चिकनी मृदा के महीन कण आपस में कसकर भरे होते हैं जिससे वायु के लिए बहुत कम रिक्त स्थान बचता है — अतः चिकनी मृदा दोमट मृदा से कम वायुयुक्त होती है। (c) और (d) सही हैं। (b) भी तकनीकी रूप से सही है क्योंकि चिकनी मृदा पोषक तत्त्वों से भरपूर हो सकती है।

स्रोत: CTET Aug 2023 P2, Q77