लोकतंत्र के प्रमुख तत्व
लोकतंत्र का अर्थ है ऐसी सरकार जिसमें जनता स्वयं शासन करती है। NCERT लोकतंत्र के चार प्रमुख तत्व बताती है: वयस्क मताधिकार, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव, विधि का शासन और मौलिक अधिकारों का सम्मान। वयस्क मताधिकार 18 वर्ष से ऊपर के हर नागरिक को मतदान का अधिकार देता है — चाहे उसकी जाति, धर्म, लिंग, संपत्ति या शिक्षा कुछ भी हो। यही एक सिद्धांत लोकतंत्र को उन पुरानी व्यवस्थाओं से अलग करता है जहाँ केवल जमींदार, पुरुष या ऊँची जाति के लोग ही शासक तय करते थे।
स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के लिए ज़रूरी है कि मतदाताओं को अनेक उम्मीदवारों में से बिना डर के चुनाव करने की छूट हो, मतदान गुप्त हो और गिनती ईमानदारी से हो। भारत का निर्वाचन आयोग — एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था — यह कार्य देखता है। विधि का शासन का अर्थ है कि कानून सब पर समान रूप से लागू हो; कोई भी मंत्री या अधिकारी कानून से ऊपर नहीं है। एक गरीब ग्रामीण और एक शक्तिशाली नेता पर एक ही अपराध में एक ही अदालत में मुकदमा चलेगा।
अंत में लोकतंत्र नागरिकों को मौलिक अधिकार देता है — समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता, शोषण से सुरक्षा एवं संवैधानिक उपचार। ये अधिकार राज्य की शक्ति के दुरुपयोग से नागरिकों की रक्षा करते हैं। NCERT यह भी कहती है कि लोकतंत्र केवल संस्थाओं का नाम नहीं — यह एक जीवन-शैली है जो विविधता का आदर करती है, संवाद को बढ़ावा देती है और असहमति को स्वीकार करती है। सच्चा लोकतंत्र मतभेदों को बल के बजाय बातचीत से सुलझाता है। उच्च-प्राथमिक कक्षा के लिए ये चार तत्व एक ऐसा ढाँचा देते हैं जिससे किसी भी देश, विद्यालय परिषद् या यहाँ तक कि कक्षा-नियम का भी मूल्यांकन किया जा सकता है।
राज्य सरकार — विधान सभा
भारत एक संघीय देश है जिसमें शासन के तीन स्तर हैं — केंद्र, राज्य और स्थानीय। राज्य सरकार हर राज्य के स्तर पर काम करती है और यह NCERT कक्षा 7 के अध्याय राज्य सरकार का मुख्य विषय है। राज्य के विधानमंडल को विधान सभा कहते हैं। इसके चुने हुए सदस्य विधायक (MLA) कहलाते हैं। हर राज्य निर्वाचन-क्षेत्रों में बँटा होता है; हर निर्वाचन-क्षेत्र के मतदाता पाँच वर्ष के लिए एक विधायक चुनते हैं।
विधान सभा के चुनाव हर पाँच वर्ष में होते हैं (यदि सभा पहले भंग न हो)। जो राजनीतिक दल बहुमत प्राप्त करता है, वही सरकार बनाता है। उस दल का नेता मुख्यमंत्री बनता है। यदि किसी एक दल को बहुमत न मिले तो दो या अधिक दल मिलकर गठबंधन सरकार बनाते हैं। दूसरी सबसे बड़ी संख्या वाला दल या गठबंधन विपक्ष कहलाता है, जिसका कार्य सरकार से प्रश्न करना और विकल्प सुझाना है।
विधान सभा राज्य की कानून-निर्माता संस्था है। विधायक सड़कों, पेयजल, बिजली, अस्पतालों, विद्यालयों एवं कानून-व्यवस्था पर प्रश्न उठाते हैं, नए कानूनों पर बहस करते हैं और उन पर मतदान करते हैं। प्रश्नकाल और शून्यकाल के द्वारा वे सरकार को जवाबदेह बनाते हैं। संविधान राज्य सरकार को राज्य सूची के विषयों — पुलिस, स्वास्थ्य, कृषि, स्थानीय शासन — पर अधिकार देता है। NCERT में एक उदाहरण है: एक विधायक जलभराव से पीड़ित गाँव में जाता है — इससे यह दिखाया गया है कि नागरिकों की शिकायतें कैसे विधान सभा तक पहुँचती हैं और सार्वजनिक बहस का विषय बनती हैं। कक्षा-शिक्षण का सबक: लोकतंत्र तभी काम करता है जब विधायक मतदाताओं की समस्याओं को अपना मुख्य कार्य मानें, न कि कभी-कभार किया जाने वाला अहसान।
राज्य सरकार एवं मुख्यमंत्री का कार्य
विधान सभा चुनाव में बहुमत मिलने पर राज्यपाल — जो राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त होता है — बहुमत दल के नेता को मुख्यमंत्री बनने के लिए आमंत्रित करता है। मुख्यमंत्री फिर अन्य विधायकों को मंत्री चुनता है और राज्यपाल उन्हें पद की शपथ दिलाता है। ये सब मिलकर मंत्रिपरिषद् बनाते हैं, जो राज्य सरकार की कार्यपालिका है। यह मंत्रिपरिषद् विधान सभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है — यदि सभा अविश्वास प्रस्ताव पारित करे तो सरकार को त्यागपत्र देना पड़ता है।
मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद् ही सभी बड़े निर्णय लेते हैं: बजट बनाना, नई योजनाएँ चलाना, बड़े अधिकारियों के तबादले करना और कानूनों को लागू करना। हर मंत्री किसी एक विभाग का प्रभारी होता है — स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, लोक-निर्माण, गृह आदि। प्रशासनिक सेवाओं (IAS एवं राज्य कैडर) के अधिकारी मंत्रियों के निर्देशन में इन विभागों का दैनिक कार्य चलाते हैं।
NCERT इसका एक सजीव उदाहरण देती है — डेंगू के प्रकोप का: नागरिकों ने विधायक से शिकायत की, विधायक ने विधान सभा के शून्यकाल में मुद्दा उठाया, स्वास्थ्य मंत्री से प्रश्न किया गया और सरकार को सफाई अभियान एवं अस्पतालों की व्यवस्था की घोषणा करनी पड़ी। यह शृंखला — नागरिक → विधायक → सभा → मंत्री → प्रशासन — दिखाती है कि राज्य सरकार जनता की चिंता को कैसे जन-कार्य में बदलती है। राज्यपाल की भूमिका मुख्यतः औपचारिक है: सभा को संबोधित करना, विधेयकों पर हस्ताक्षर करना और केंद्र से संवैधानिक कड़ी का कार्य। शिक्षण में यह शृंखला बोर्ड पर बनाकर बच्चों को दिखाने से समझ में आता है कि लोकतंत्र तभी काम करता है जब हर कड़ी ईमानदारी से अपना कार्य करे।
मीडिया को समझना — प्रिंट, टीवी, डिजिटल
मीडिया शब्द लैटिन के मीडियम से बना है, जिसका अर्थ है ‘ले जाने वाला माध्यम’। मीडिया वे साधन हैं जिनसे सूचना एक से कई लोगों तक पहुँचती है। NCERT कक्षा 7 के अध्याय मीडिया को समझना में चार प्रमुख प्रकार बताए गए हैं। प्रिंट मीडिया — समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ, पुस्तकें एवं पर्चे — लिखित शब्द पर आधारित होती है और यह जनसंचार का सबसे पुराना रूप है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया — रेडियो एवं टेलीविजन — ध्वनि और दृश्य प्रसारण के माध्यम से करोड़ों लोगों तक तुरंत पहुँचती है। डिजिटल या नया मीडिया — वेबसाइट, ऐप, सोशल मीडिया — इंटरनेट पर आधारित है और दो-तरफा संवाद की सुविधा देता है; पाठक स्वयं उत्तर दे सकते हैं, साझा कर सकते हैं और स्वयं सामग्री बना सकते हैं।
एक चौथा रूप है वैकल्पिक मीडिया — सामुदायिक रेडियो, छोटी पत्रिकाएँ, नुक्कड़ नाटक और नागरिक ब्लॉग — जो उन समूहों की आवाज़ बनती है जिन्हें मुख्य-धारा का मीडिया नहीं उठाता। हर रूप की अपनी ताकत और सीमा है। प्रिंट गहराई और स्थायी अभिलेख देता है। टीवी तत्काल और दृश्य-शक्ति देता है। सोशल मीडिया सबसे तेज और भागीदारी-पूर्ण है किंतु अफवाहों के लिए सबसे संवेदनशील भी।
जनसंचार-माध्यम तीन चीज़ों पर निर्भर हैं: तकनीक (छापाखाना, कैमरा, उपग्रह, स्मार्टफोन), पैसा (निर्माण-व्यय, विज्ञापन) और बड़ा दर्शक वर्ग। चूँकि मीडिया कंपनियों को पैसा चाहिए, अधिकांश विज्ञापन पर बहुत अधिक निर्भर रहती हैं। यह निर्भरता यह तय करती है कि कौन सी खबरें छपेंगी — जो खबरें बड़ा दर्शक खींचें और विज्ञापनदाता को अच्छी लगें वे प्रमुख होती हैं; गरीबी, हाशिए के समुदायों या ग्रामीण भारत की खबरों को कम जगह मिलती है। NCERT बच्चों को हर खबर पर तीन प्रश्न पूछने को कहती है: रिपोर्ट कौन कर रहा है? क्या छोड़ा जा रहा है? किसकी आवाज़ सुनाई दे रही है? ये आलोचनात्मक देखने की आदतें ही उच्च-प्राथमिक स्तर पर मीडिया साक्षरता का केंद्र हैं।
मीडिया एवं लोकतंत्र
लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि बिना सूचना के नागरिक सोच-समझकर निर्णय नहीं ले सकते। NCERT मीडिया की तीन लोकतांत्रिक भूमिकाएँ बताती है: सूचना देना — नीतियों और घटनाओं की जानकारी; मुद्दे तय करना — जिन समस्याओं पर बहस होनी चाहिए उन्हें सामने लाना; और निगरानी रखना — सरकार, व्यापार और समाज में होने वाली गड़बड़ियों को उजागर करना। जब मीडिया किसी भ्रष्टाचार या डॉक्टर-विहीन अस्पताल की खबर छापती है तो वह नागरिकों को वे तथ्य देती है जिनसे वे अपने प्रतिनिधियों को जवाबदेह बना सकें।
परंतु मीडिया स्वयं भी लोकतंत्र को असफल कर सकती है। पेड न्यूज़ — जब नेता या कंपनियाँ पैसा देकर अपने पक्ष में खबर छपवाती हैं और उसे सामान्य समाचार जैसा दिखाया जाता है — जनमत को विकृत करती है। फेक न्यूज़ — झूठी खबरें जो सच की तरह फैलाई जाती हैं, विशेषकर वॉट्सऐप जैसे माध्यमों पर — हिंसा या आतंक तक भड़का सकती हैं। सनसनीखेजी — केवल चटखारेदार खबरों के पीछे भागना — कृषि, शिक्षा एवं ग्रामीण स्वास्थ्य जैसे गंभीर विषयों को हाशिए पर डाल देती है। मीडिया-स्वामित्व का गिने-चुने व्यापारिक घरानों में केंद्रित होना भी विचारों की विविधता को कम करता है।
NCERT किसान-आंदोलन, दंगा-पीड़ितों एवं लापता बच्चों की रिपोर्टिंग के उदाहरण देती है यह दिखाने के लिए कि सावधान रिपोर्टिंग नीति को बदल सकती है, जबकि लापरवाह रिपोर्टिंग जिंदगियाँ बिगाड़ सकती है। इसलिए नागरिकों को मीडिया आलोचनात्मक दृष्टि से देखनी चाहिए: स्रोत जाँचें, दूसरे पक्ष की भी सुनें, साझा करने से पहले पुष्टि करें। उच्च-प्राथमिक कक्षा के लिए एक उपयोगी गतिविधि है — एक ही घटना पर दो अलग समाचार-पत्रों की उसी दिन की रिपोर्टिंग की तुलना करना। शीर्षक, चित्र और शब्दों का चयन देखकर बच्चे जल्द ही समझ जाते हैं कि मीडिया वास्तविकता का केवल वर्णन नहीं करती — वह वास्तविकता को देखने का हमारा ढंग भी बनाती है।
विज्ञापन एवं उपभोक्ता जागरूकता
विज्ञापन शब्दों, चित्रों, गीतों एवं हस्तियों के द्वारा लोगों को कोई वस्तु खरीदने के लिए प्रेरित करते हैं। NCERT कक्षा 7 के अध्याय विज्ञापन की दुनिया में दो प्रकार बताए गए हैं: उत्पाद-विज्ञापन (साबुन, बिस्किट, गाड़ी आदि बेचना) एवं सामाजिक विज्ञापन (पोलियो ड्रॉप्स, पानी बचाओ, यातायात-सुरक्षा)। अधिकांश उत्पाद-विज्ञापन तीन तरीकों का सहारा लेते हैं: उत्पाद को आकर्षक जीवन-शैली से जोड़ना (गाड़ी के विज्ञापन में सुखी परिवार), डर या असुरक्षा फैलाना (फेयरनेस क्रीम का विज्ञापन जो दिखाए कि साँवली त्वचा एक समस्या है), या प्रसिद्ध हस्तियों की ख्याति को ब्रांड पर हस्तांतरित करना।
विज्ञापन तटस्थ नहीं होते। ये ब्रांडेड वस्तुओं को बिना-ब्रांड वाली वस्तुओं पर तरजीह देते हैं, भले ही बिना-ब्रांड वाला उत्पाद उतना ही अच्छा और सस्ता क्यों न हो। ये बच्चों को निशाना बनाते हैं, जो अक्सर कार्यक्रम और विज्ञापन में अंतर नहीं कर पाते। ये लैंगिक रूढ़ियों को मज़बूत कर सकते हैं — महिलाएँ रसोई में, पुरुष गाड़ी चलाते हुए। NCERT बच्चों को तीन प्रश्न पूछने को कहती है: इस विज्ञापन का खर्च कौन उठा रहा है? यह वास्तव में क्या बेच रहा है — उत्पाद या भावना? यह किसके मूल्य फैला रहा है?
उपभोक्ता जागरूकता का अर्थ है वस्तुओं और सेवाओं को सोच-समझकर खरीदना। नागरिकों का अधिकार है कि लेबल पर सामग्री, समाप्ति तिथि, अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP), वज़न एवं निर्माता का पता लिखा हो — कानून यह अनिवार्य करता है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम ख़राब वस्तुओं पर मुआवज़े का अधिकार देता है। ISI (औद्योगिक उत्पाद), एगमार्क (कृषि उत्पाद) एवं FSSAI (खाद्य) जैसे चिह्न गुणवत्ता प्रमाणित करते हैं। कक्षा के लिए एक अच्छी गतिविधि है — बच्चे घर से कोई खाली पैकेट लेकर आएँ और समूह में लेबल का अर्थ निकालें। ऐसी गतिविधियाँ निष्क्रिय उपभोक्ता को सूचित नागरिक में बदलती हैं — यही उच्च-प्राथमिक स्तर पर सामाजिक अध्ययन का उद्देश्य भी है।
हमारे आसपास के बाजार
NCERT कक्षा 7 के अध्याय हमारे आसपास के बाजार में कई प्रकार के बाजारों की चर्चा है। साप्ताहिक बाजार (हाट) सप्ताह में एक दिन लगते हैं; व्यापारी अस्थायी दुकानें लगाते हैं, सस्ती वस्तुएँ बेचते हैं और चले जाते हैं। ये टिके इसलिए हैं कि इनकी लागत कम है और दाम गरीब एवं श्रमिक वर्ग की क्षमता के अनुसार हैं। मोहल्ले की दुकानें रोज़ाना घर के पास खुली रहती हैं, रोज़ की वस्तुएँ बेचती हैं, परिचित ग्राहकों को उधार देती हैं और हर ज़रूरत की चीज़ रखती हैं।
शॉपिंग कॉम्प्लेक्स एवं मॉल बड़े, वातानुकूलित भवन हैं जिनमें अनेक ब्रांडेड दुकानें, फूड कोर्ट एवं मनोरंजन होते हैं। वस्तुएँ महँगी होती हैं; अनुभव भी क़ीमत का हिस्सा है। थोक बाजार वे हैं जहाँ दुकानदार बड़े व्यापारियों से बड़ी मात्रा में सामान खरीदते हैं — जैसे शहर की सब्ज़ी मंडी में भोर में सब्ज़ी की बिक्री, जिसके बाद वह मोहल्ले के सब्ज़ी-वालों तक पहुँचती है। खेत से ग्राहक तक की शृंखला आमतौर पर इस तरह होती है: किसान → थोक व्यापारी → खुदरा विक्रेता → उपभोक्ता।
बाजार दूर के उत्पादकों और स्थानीय उपभोक्ताओं को जोड़ते हैं, परंतु सबको समान रूप से नहीं। मंडी में प्याज बेचने वाले छोटे किसान को अंतिम ग्राहक द्वारा चुकाई गई कीमत का बहुत छोटा हिस्सा ही मिलता है; बड़ा हिस्सा बिचौलिए ले जाते हैं। मॉल में जाने वाला धनी ग्राहक पार्किंग, पैकेजिंग और क्रेडिट कार्ड का सुख पाता है; गरीब ग्राहक के लिए साप्ताहिक हाट और मोलभाव ही सहारा हैं। NCERT ऑनलाइन बाजार एवं क्रेडिट कार्ड की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करती है, जो नए विकल्प तो देते हैं किंतु क़र्ज़ और निजी सूचना के दुरुपयोग का नया जोखिम भी। कक्षा के लिए एक अच्छी गतिविधि है — बाजार-मानचित्रण: बच्चे अपने मोहल्ले का नक्शा बनाकर वहाँ के बाजारों के प्रकार चिन्हित करें। यह अमूर्त अर्थशास्त्र को जीवंत भूगोल में बदलकर ‘विनिमय में न्याय’ पर चर्चा का सूत्र देता है।
भूमिका अभिनय से लोकतंत्र पढ़ाना
‘लोकतंत्र’, ‘विधायक’, ‘मंत्रिपरिषद्’ एवं ‘सभा’ जैसे अमूर्त शब्द उच्च-प्राथमिक कक्षा में तभी जीवित होते हैं जब उन्हें भूमिका अभिनय, सिमुलेशन एवं केस-अध्ययन द्वारा पढ़ाया जाए। NCF 2005 एवं NCERT की सामाजिक विज्ञान पुस्तकें बार-बार कहती हैं कि शिक्षक अपनी कक्षा को एक छोटी विधान सभा में बदल दे। बच्चों को भूमिकाएँ बाँटी जा सकती हैं — मुख्यमंत्री, विपक्ष-नेता, मंत्री, विधायक, अध्यक्ष, और शिकायत उठाने वाले नागरिक — और उन्हें किसी वास्तविक स्थानीय समस्या पर बहस करने को कहा जाए — प्रदूषित नदी, असुरक्षित बस-स्टॉप, या बिजली कटौती। शिक्षक अध्यक्ष की भूमिका में सबको बोलने का अवसर देता है।
अन्य प्रभावी तकनीकें: मॉक चुनाव — बच्चे दल बनाते हैं, घोषणा-पत्र लिखते हैं, प्रचार और मतदान करते हैं; समाचार-पत्र विश्लेषण — हर सोमवार बच्चे एक स्थानीय अख़बार लाएँ और राज्य सरकार से जुड़ी एक खबर पर चर्चा करें; ‘अपने विधायक को पत्र लिखो’ — किसी असली कक्षा या गाँव की समस्या पर असली पत्र; मीडिया-डायरी — बच्चे एक सप्ताह की डायरी रखें कि वे किस तरह की खबरें किस माध्यम से देखते हैं।
इन गतिविधियों में शिक्षक की भूमिका ‘सही उत्तर’ देना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक बहस के नियम सुनिश्चित करना है — सबको बोलने का अवसर मिले, किसी का उपहास न हो, साक्ष्य महत्त्वपूर्ण हों, असहमति स्वीकार्य हो किंतु व्यक्तिगत आक्षेप अस्वीकार्य। इन तरीकों का छिपा पाठ्यक्रम पुस्तकीय सामग्री से कहीं अधिक शक्तिशाली है: बहस, सुनने और मतदान का अभ्यास करते हुए बच्चे वे लोकतांत्रिक मूल्य आत्मसात करते हैं जो संविधान को रटने से कभी नहीं आते। CTET के लिए याद रखें: यहाँ अनुशंसित शिक्षण-विधि है भागीदारी-मूलक, मूल्य-केंद्रित एवं समसामयिक मुद्दों से जुड़ी हुई — व्याख्यान या तथ्य-रटने पर आधारित नहीं।
अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर ध्यान दें और लोकतंत्र में संचार माध्यम की सही भूमिका का चयन करें: A. इसे समाचार के माध्यम से नागरिकों को सूचना पहुँचानी चाहिए। B. इसे विज्ञापन के दृष्टिकोण को समाचार कार्यक्रमों के माध्यम से देनी चाहिए। C. इसे हर दृष्टिकोण की चर्चा करनी चाहिए।
व्याख्या: लोकतंत्र में मीडिया का कार्य है नागरिकों को सूचना देना (A) और सभी वर्गों के विचार रखना (C)। कथन B पेड-न्यूज़ का वर्णन है, जो मीडिया का दुरुपयोग है — विज्ञापनदाता के विचार समाचार के रूप में परोसना उचित नहीं। अतः केवल A और C ही सच्ची लोकतांत्रिक भूमिका हैं।
स्रोत: CTET Jan 2021 P2, Q56
Q2. पुलिस थाने के प्रभारी का पदनाम क्या है?
व्याख्या: थाने का प्रभारी अधिकारी ‘स्टेशन हाउस अफसर (SHO)’ कहलाता है। पुलिस अधीक्षक जिला-स्तर का प्रमुख होता है, थाने का नहीं। NCERT कक्षा 7 ‘पुलिस की भूमिका’ इस शब्द का प्रयोग FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया समझाते समय करती है।
स्रोत: CTET Jan 2021 P2, Q62
Q3. मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों को कौन नियुक्त करता है?
व्याख्या: राज्य का राज्यपाल विधान सभा में बहुमत दल के नेता को मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त करता है और मुख्यमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्रियों को भी। राष्ट्रपति केवल केंद्र-स्तर पर प्रधानमंत्री और संघीय मंत्रियों की नियुक्ति करता है।
स्रोत: CTET Dec 2022 P2 (28 Dec), Q60
Q4. एक शिक्षिका कक्षा 7 के बच्चों को समझाना चाहती है कि कोई स्थानीय समस्या विधान सभा में बहस का विषय कैसे बनती है। सर्वाधिक उपयुक्त गतिविधि क्या होगी?
व्याख्या: NCF 2005 एवं NCERT सामाजिक विज्ञान में भागीदारी-मूलक एवं भूमिका-आधारित विधियों की अनुशंसा करते हैं। मॉक विधान सभा बच्चों को यह अनुभव कराती है कि विधायक मुद्दे कैसे उठाते हैं, अध्यक्ष बहस कैसे चलाते हैं और मंत्री कैसे उत्तर देते हैं — जिससे अमूर्त विषय मूल्य-सहित ठोस बनता है। व्याख्यान या वृत्तचित्र यह कार्य नहीं कर सकते।
स्रोत: अभ्यास प्रश्न
Q5. लोकतंत्र में मीडिया की ‘निगरानी (वॉचडॉग) भूमिका’ का सर्वोत्तम उदाहरण कौन सा है?
व्याख्या: वॉचडॉग भूमिका का अर्थ है सरकार एवं शक्तिशाली पक्षों को जवाबदेह बनाना। किसी सार्वजनिक योजना में हुए घोटाले की जाँच करके उसे उजागर करना इसका आदर्श उदाहरण है। विज्ञापन, गपशप एवं असत्यापित फॉरवर्ड कोई जवाबदेही नहीं लाते — विकल्प B ही सच्ची वॉचडॉग गतिविधि है।
स्रोत: अभ्यास प्रश्न