विभाजन एवं उसके बाद
3 जून 1947 की माउंटबेटन योजना ने भारत का साम्प्रदायिक विभाजन निश्चित किया। 14 अगस्त को पाकिस्तान, 15 अगस्त को भारत — दोनों डोमिनियन स्वतंत्र हुए। लॉर्ड माउंटबेटन स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल बने (बाद में सी. राजगोपालाचारी जून 1948 से)।
विभाजन की कीमत अत्यंत भारी थी:
- लगभग 1.5 करोड़ लोग सीमा-पार विस्थापित — मानव इतिहास का सबसे बड़ा सामूहिक प्रवास।
- 10 लाख से अधिक मौतें साम्प्रदायिक हिंसा में।
- पंजाब एवं बंगाल के दो टुकड़े — स्थायी सीमा-विवाद।
- स्त्रियों एवं बच्चों पर अनगिनत अत्याचार; अपहरण-पुनर्वास के लिए ‘अबडक्टेड पर्सन्स (रिकवरी एण्ड रिस्टोरेशन) ऐक्ट 1949’।
30 जनवरी 1948 — नाथूराम गोडसे ने दिल्ली के बिड़ला-भवन में महात्मा गांधी की हत्या की। ‘बापू तेरी क़ुर्बानी’ राष्ट्रीय शोक का प्रतीक बना।
1947 के अक्टूबर में जम्मू-कश्मीर के राजा हरि सिंह ने पाकिस्तानी कबाइली आक्रमण के बीच विलय-पत्र (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर किए; प्रथम भारत-पाकिस्तान युद्ध (1947–48) के बाद 1 जनवरी 1949 को संयुक्त राष्ट्र-मध्यस्थता से युद्ध-विराम। 1948 में हैदराबाद-निज़ाम के विरुद्ध ‘ऑपरेशन पोलो’।
रियासतों का एकीकरण — सरदार पटेल
स्वतंत्रता के समय भारत में 562 देशी रियासतें थीं — कुछ बड़ी (हैदराबाद, मैसूर, कश्मीर), कुछ अत्यंत छोटी (केवल कुछ गाँव)। ब्रिटिश ‘पैरामाउंटसी’ (सर्वोच्च-शक्ति) के अंत के साथ ये रियासतें स्वतंत्र, भारत में मिलने, या पाकिस्तान में मिलने का विकल्प रखती थीं।
सरदार वल्लभभाई पटेल (‘लौह-पुरुष’) — गृह एवं राज्य-मंत्रालय; उनके सचिव वी.पी. मेनन। पटेल ने कूटनीति, दबाव एवं समय-निष्ठा से 562 में से 559 रियासतों के साथ विलय-पत्र पर हस्ताक्षर करवाए। प्रत्येक राजा को ‘प्रिवी-पर्स’ (निजी-वार्षिकी) एवं पदवी-संरक्षण का आश्वासन दिया गया।
तीन कठिन मामले:
- जूनागढ़ — सौराष्ट्र का हिन्दू-बहुल राज्य; नवाब ने पाकिस्तान-विलय घोषित किया। फरवरी 1948 में जनमत-संग्रह — 99% मतों से भारत में मिला।
- हैदराबाद — निज़ाम मीर उस्मान अली ने स्वतंत्रता का दावा किया। 13–18 सितंबर 1948 — ऑपरेशन पोलो (पुलिस-कार्यवाही); भारतीय सेना ने हैदराबाद को भारत में मिलाया।
- जम्मू-कश्मीर — पहले ‘रुक-कर देखो’ (stand-still); पाकिस्तानी कबाइली हमले के बीच 26 अक्टूबर 1947 को विलय-पत्र; अनुच्छेद 370 के अंतर्गत विशेष दर्जा (2019 में संशोधन)।
1971 में राष्ट्रपति वी. वी. गिरि के 26वें संशोधन से प्रिवी-पर्स समाप्त हुए।
संविधान का निर्माण
संविधान-निर्माण का कार्य संविधान-सभा ने किया, जिसका गठन कैबिनेट-मिशन योजना (1946) के अंतर्गत हुआ था। प्रारंभिक 389 सदस्य; विभाजन के बाद 299। प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946, अध्यक्षता डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा (अस्थायी)। स्थायी अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद।
प्रमुख समितियाँ:
- प्रारूप समिति (Drafting Committee) — अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अंबेडकर; 7 सदस्य।
- संघ-शक्ति समिति — जवाहरलाल नेहरू।
- प्रांत-संविधान समिति — सरदार पटेल।
- मूल-अधिकार उप-समिति — जे.बी. कृपलानी।
- अल्पसंख्यक उप-समिति — एच.सी. मुखर्जी।
संविधान 26 नवंबर 1949 को स्वीकृत हुआ (‘संविधान दिवस’) और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ (‘गणतंत्र दिवस’; 1930 के पूर्ण-स्वराज्य संकल्प की 20वीं वर्षगाँठ)। कुल समय — 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन; कुल 11 सत्र; 165 दिनों की बैठकें।
हस्तलिखित मूल प्रति प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने सुलेखित की; चित्र नंदलाल बोस एवं उनकी शांतिनिकेतन-टीम ने बनाए। यह संसार का सबसे बड़ा लिखित संविधान है।
संविधान के प्रमुख प्रावधान
संविधान का उद्देशिका (Preamble) घोषित करता है — भारत एक ‘सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य’ है (‘समाजवादी’ एवं ‘पंथनिरपेक्ष’ 42वें संशोधन 1976 से जुड़े)।
मूल अधिकार (भाग III, अनुच्छेद 12–35) — मूलतः सात, अब छह:
- समानता का अधिकार (14–18)
- स्वतंत्रता का अधिकार (19–22)
- शोषण के विरुद्ध अधिकार (23–24)
- धार्मिक स्वतंत्रता (25–28)
- सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकार (29–30)
- संवैधानिक उपचार (32) — डॉ. अंबेडकर ने इसे ‘संविधान की आत्मा’ कहा।
(मूल 1950 में संपत्ति-अधिकार था जो 44वें संशोधन 1978 से अनुच्छेद 300A में स्थानांतरित।)
नीति-निर्देशक तत्व (भाग IV, अनुच्छेद 36–51) — कल्याणकारी राज्य के लक्ष्य; न्यायालय में लागू नहीं। आयरिश संविधान से लिया।
मूल कर्तव्य (भाग IV-A, अनुच्छेद 51A) — 42वें संशोधन 1976 से जोड़े गए; 10 (बाद में 11) कर्तव्य; स्वर्ण सिंह समिति की अनुशंसा।
संसदीय शासन-प्रणाली (ब्रिटेन-शैली) + संघीय ढाँचा (कनाडा-प्रेरित) + न्यायपालिका का स्वतंत्र दर्जा (USA-प्रेरित)।
पंचवर्षीय योजनाएँ एवं नियोजित अर्थव्यवस्था
स्वतंत्रता के समय भारत मूलतः कृषि-प्रधान, अति-निर्धन, कम-साक्षर अर्थव्यवस्था था। नेतृत्व ने नियोजित अर्थव्यवस्था का निर्णय लिया। योजना आयोग की स्थापना 15 मार्च 1950 को कैबिनेट-संकल्प से (संवैधानिक नहीं); अध्यक्ष — प्रधानमंत्री।
प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951–56) — हैरॉड-डोमर मॉडल; प्राथमिकता — कृषि, सिंचाई, ऊर्जा (भाखड़ा-नांगल, हीराकुड)। लक्ष्य 2.1%; प्राप्त 3.6%। सर्वाधिक सफल योजना।
द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956–61) — पी.सी. महलनोबिस मॉडल; प्राथमिकता — भारी एवं आधारभूत उद्योग (दुर्गापुर, भिलाई, राउरकेला इस्पात-संयंत्र)। आयात-प्रतिस्थापन। ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ — नेहरू।
तृतीय (1961–66) — 1962 चीन-युद्ध, 1965 पाक-युद्ध से बाधित; तीन ‘योजना-अवकाश’ वर्ष।
चौथी (1969–74) — बैंक-राष्ट्रीयकरण (19 जुलाई 1969 — 14 बैंक), हरित-क्रांति (एम.एस. स्वामीनाथन)।
पाँचवीं (1974–79) — ‘गरीबी हटाओ’ (इंदिरा गांधी)। आपातकाल के दौरान।
(2015 में योजना आयोग समाप्त; ‘NITI आयोग’ ने स्थान लिया — 12वीं पंचवर्षीय योजना 2017 में अंतिम।)
राज्यों का भाषाई पुनर्गठन
स्वतंत्रता के बाद भारत में राज्य ब्रिटिश-कालीन प्रशासनिक प्रांतों — मद्रास, बम्बई, पंजाब, बंगाल, संयुक्त-प्रांत आदि — पर आधारित थे। 1953 में आंध्र के तेलुगु-भाषी क्षेत्र की माँग के लिए पोट्टी श्रीरामुलु ने 58 दिनों के आमरण-अनशन से 16 दिसंबर 1952 को प्राण-त्याग दिए। प्रबल जन-दबाव में 1 अक्टूबर 1953 को आंध्र प्रदेश मद्रास से अलग होकर पहला भाषाई राज्य बना।
राज्य पुनर्गठन आयोग (SRC) — दिसंबर 1953 गठित; अध्यक्ष न्यायमूर्ति फ़ज़ल अली, सदस्य के.एम. पणिक्कर एवं हृदय नाथ कुंज़रू। 1955 में रिपोर्ट; 14 राज्य + 6 केंद्र-शासित प्रदेशों की अनुशंसा।
इसके आधार पर राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 पारित। 1 नवंबर 1956 से लागू — मद्रास से केरल, बम्बई से कर्नाटक, हैदराबाद का अधिकांश आंध्र में मिला।
पश्चातवर्ती राज्य-निर्माण:
- 1960 — महाराष्ट्र एवं गुजरात (बम्बई से)
- 1963 — नागालैंड
- 1966 — पंजाब, हरियाणा, हिमाचल (पंजाब पुनर्गठन)
- 1972 — मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा (पूर्ण-राज्य दर्जा)
- 1987 — अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिज़ोरम
- 2000 — छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड
- 2014 — तेलंगाना (आंध्र से)
विदेश-नीति एवं गुटनिरपेक्षता
शीत-युद्ध के युग (1945–91) में अमेरिकी एवं सोवियत गुटों के मध्य कई नवस्वतंत्र देशों के लिए ‘किसी एक खेमे में जाना’ बड़ी चुनौती थी। प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ‘गुटनिरपेक्षता’ (Non-Alignment) की नीति विकसित की — किसी सैन्य-गुट में शामिल हुए बिना अपने राष्ट्रीय हित एवं विश्व-शांति के लिए स्वतंत्र निर्णय।
पंचशील — पाँच सिद्धांत: 29 अप्रैल 1954 के तिब्बत-समझौते (नेहरू–चाउ एनलाई) में पहली बार:
- एक-दूसरे की प्रादेशिक अखंडता एवं प्रभुसत्ता का सम्मान।
- अनाक्रमण।
- एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना।
- समानता एवं पारस्परिक लाभ।
- शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व।
बांडुंग सम्मेलन (अप्रैल 1955, इंडोनेशिया) — 29 अफ़्रो-एशियाई देशों ने ‘बांडुंग के 10 सिद्धांत’ पारित किए।
NAM की औपचारिक स्थापना — 1961 बेलग्रेड (नेहरू, टीटो, नासिर, सुकर्णो, नक्रूमा संस्थापक नेता)। आज 120 सदस्य।
1962 में चीन-युद्ध, 1965 एवं 1971 में पाकिस्तान-युद्ध (1971 → बांग्लादेश-निर्माण) ने विदेश-नीति को नियमित नई कसौटियों पर रखा। 1971 की इंदिरा-कोसिगिन शांति, मैत्री एवं सहयोग संधि ने सोवियत-झुकाव दिया।
स्वतंत्र भारत का इतिहास पढ़ाना
NCERT कक्षा 8 ‘हमारे अतीत — III’ का अंतिम अध्याय (12) ‘स्वतंत्रता के बाद भारत’ बहुपरतीय है — विभाजन, संविधान, योजनाएँ, राज्य-पुनर्गठन — सब को 12-वर्षीय बच्चे को बोधगम्य बनाना चुनौती है।
शिक्षण-संकेत (NCF 2005 + NIOS 509):
- परिवार-इतिहास — विद्यार्थी से अपने दादा/नाना से 1947 की कहानी सुनने को कहें। यह संग्रहालय से अधिक सशक्त।
- स्थानीय मुद्रा-नोट, सिक्के, डाक-टिकट — स्वतंत्रता-कालीन ‘1 रुपये की प्रमिसरी’ का प्रदर्शन।
- संविधान-सभा का प्रसिद्ध फ़ोटो ‘तीन सौ सदस्यों के साथ’ — दिखाकर ‘कौन-कौन हैं?’ पूछें।
- संविधान-उद्देशिका के हिन्दी पाठ का सामूहिक पठन।
- भारत का राजनीतिक मानचित्र 1947, 1956, 1972, 2000, 2014 — समय-रेखा के साथ बदलते देखें।
विभाजन-शिक्षण पर विशेष सावधानी: कक्षा 8 में विभाजन की हिंसा का विवरण सावधानी से दें — संख्या, स्थान, घटनाओं तक सीमित; सांप्रदायिक भाषा से दूर। NCERT पाठ्यपुस्तक का दृष्टिकोण ‘प्रत्येक समुदाय पीड़ित एवं अपराधी दोनों था’ का तटस्थ है।
अभ्यास प्रश्न
Q1. तेलंगाना राज्य पहले भारत के किस राज्य का हिस्सा था?
व्याख्या: तेलंगाना 1947 से ही हैदराबाद रियासत का भाग था; 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम के बाद यह आंध्र प्रदेश में मिला। 2 जून 2014 को आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2014 से अलग होकर तेलंगाना 29वाँ राज्य बना। अतः तेलंगाना आंध्र प्रदेश का हिस्सा था — विकल्प (4)।
स्रोत: CTET Jan 2021 P2, Q55
Q2. भारतीय लोकतंत्र के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?
व्याख्या: भारतीय लोकतंत्र पर सही कथन याद रखें — 26 जनवरी 1950 से गणतंत्र; संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित; ‘समाजवादी एवं पंथनिरपेक्ष’ 1976 में जोड़ा; ‘मूल कर्तव्य’ भी 42वें संशोधन से। संविधान की प्रस्तावना केशवानंद-भारती निर्णय (1973) से ‘मूल ढाँचा’ का हिस्सा घोषित हुई। PYQ-स्तर पर सही उत्तर पहचानें।
स्रोत: CTET Jan 2021 P2, Q90
Q3. 1948 में हैदराबाद को भारत में मिलाने के लिए चलाए गए सैन्य अभियान का क्या नाम था?
व्याख्या: 13–18 सितंबर 1948 का ‘ऑपरेशन पोलो’ सरदार पटेल के नेतृत्व में हैदराबाद-निज़ाम मीर उस्मान अली के विरुद्ध 5-दिवसीय पुलिस-कार्यवाही थी। ‘ऑपरेशन विजय’ 1961 में गोवा-मुक्ति का अभियान था; ‘ऑपरेशन ब्लू-स्टार’ 1984 का स्वर्ण-मंदिर अभियान; ‘ऑपरेशन मेघदूत’ 1984 का सियाचिन अभियान। उत्तर (2)।
स्रोत: Practice Question (NCERT कक्षा 8 अध्याय 12)
Q4. भारतीय संविधान की प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष कौन थे?
व्याख्या: डॉ. बी.आर. अंबेडकर 29 अगस्त 1947 को गठित प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान-सभा के अध्यक्ष; नेहरू संघ-शक्ति समिति के; पटेल प्रांत-संविधान समिति के। उत्तर (3)।
स्रोत: Practice Question (NCERT कक्षा 8)
Q5. ‘पंचशील’ (1954) के पाँच सिद्धांतों में कौन सम्मिलित नहीं है?
व्याख्या: पंचशील के पाँच सिद्धांत — प्रादेशिक अखंडता का सम्मान, अनाक्रमण, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना, समानता एवं पारस्परिक लाभ, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व। ‘सैन्य-संधियाँ साझा करना’ इसके विपरीत है — पंचशील ‘गुटनिरपेक्षता’ की भावना पर है। उत्तर (4)।
स्रोत: Practice Question (NCERT कक्षा 8)