संसाधनों के प्रकार — प्राकृतिक, मानव, नवीकरणीय एवं अनवीकरणीय
संसाधनों का वर्गीकरण कई स्तरों पर होता है (NCERT कक्षा 8 अध्याय 1):
उत्पत्ति के आधार पर:
- प्राकृतिक संसाधन — प्रकृति से प्राप्त (भूमि, जल, खनिज, वन, मिट्टी, वायु, सौर-ऊर्जा)।
- मानव-निर्मित संसाधन — पुल, सड़कें, मशीनें, इमारतें।
- मानव-संसाधन — मनुष्य स्वयं अपनी बुद्धि, कौशल, स्वास्थ्य एवं शिक्षा से।
उपभोग एवं पुनःपूर्ति के आधार पर:
| प्रकार | विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|
| नवीकरणीय (Renewable) | प्राकृतिक चक्र से शीघ्र पुनःपूर्ति | सूर्य, वायु, जल, वन, मछली, मृदा |
| अनवीकरणीय (Non-Renewable) | लाखों वर्ष में बनते, मानव-काल में पुनःपूर्ति नहीं | कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, धात्विक खनिज |
विकास-स्तर के आधार पर:
- संभाव्य (Potential) — मौजूद, परंतु अभी उपयोग में नहीं (राजस्थान-गुजरात की पवन-ऊर्जा 1980 तक)।
- विकसित (Developed) — गुणवत्ता एवं मात्रा सर्वेक्षित, उपयोग में।
- आरक्षित (Reserve) — विकसित परंतु तकनीकी कमी से अभी उपयोग नहीं।
- भंडार (Stock) — विद्यमान परंतु तकनीक-अभाव में उपयोग नहीं (समुद्र-जल का हाइड्रोजन)।
संरक्षण (NCF 2005): ‘उपयोग करें, परंतु भविष्य की पीढ़ी के अधिकार को मत भूलें’ — सतत-विकास (Sustainable Development) की मूल भावना।
भूमि एवं मृदा संसाधन
भूमि मनुष्य का सबसे आधारभूत संसाधन है। पृथ्वी की कुल सतह का केवल 29% स्थल है। भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र (32.8 लाख वर्ग किमी) में:
- कृषि-भूमि — 43%
- वन — 23% (NFP लक्ष्य 33%)
- चारागाह — 4%
- बंजर एवं गैर-कृषि — शेष
भू-उपयोग कई कारकों पर निर्भर — स्थलाकृति, मिट्टी, जलवायु, खनिज, जल, जनसंख्या, तकनीक, संस्कृति।
मृदा (Soil) — पृथ्वी की ऊपरी सतह जिसमें खनिज-कण, कार्बनिक पदार्थ, हवा, पानी एवं जीवाणु होते हैं। मृदा-निर्माण एक सहस्र-वर्षीय प्रक्रिया है।
भारत की प्रमुख मृदाएँ (NCERT कक्षा 9–10 भूगोल):
- जलोढ़ मृदा — गंगा-यमुना मैदान; गन्ना, चावल, गेहूँ; भारत में सर्वाधिक 40%।
- काली मृदा (रेगुर) — दक्कन-ट्रैप, महाराष्ट्र, गुजरात; कपास की मित्र।
- लाल एवं पीली — दक्षिणी प्रायद्वीप; लोहयुक्त।
- लैटेराइट — पश्चिमी घाट, असम; चाय-काजू-रबर।
- शुष्क/मरुस्थलीय — राजस्थान; बाजरा-सिंचाई।
- पर्वतीय एवं वनीय — हिमालय; जैविक पदार्थ-समृद्ध।
मृदा-अपरदन के मुख्य कारण — वन-कटाई, अति-चराई, गलत कृषि-पद्धतियाँ। संरक्षण उपाय — समोच्च जुताई, चबूतरा-कृषि (terracing), ‘शेल्टर-बेल्ट’ (राजस्थान), वृक्षारोपण।
जल संसाधन एवं संरक्षण
पृथ्वी पर 71% जल है, परंतु पीने-योग्य ताज़ा जल केवल 2.7% — और उसमें भी अधिकांश ध्रुवीय बर्फ़ में। ‘नीला ग्रह’ पर असली जल-संकट है।
भारत की जल-राशियाँ:
- हिमालयी नदियाँ — गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, सिंधु (बारहमासी, हिम-जलित)।
- प्रायद्वीपीय नदियाँ — गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, नर्मदा, ताप्ती (मौसमी, वर्षा-जलित)।
- भूजल — पंजाब, हरियाणा, पश्चिम-UP में अति-दोहन; ‘नीली क्रांति’।
- झीलें एवं तालाब — मानसून-काल का जल-संग्रह।
बहुउद्देशीय परियोजनाएँ (NCERT कक्षा 10 अध्याय 3 ‘जल संसाधन’):
- भाखड़ा-नांगल — सतलुज पर; पंजाब, हरियाणा, राजस्थान को सिंचाई एवं विद्युत।
- हीराकुड बाँध — महानदी, ओडिशा; विश्व का सबसे लंबा।
- नागार्जुन सागर — कृष्णा; आंध्र प्रदेश।
- तवा बाँध — नर्मदा-सहायक; मध्य प्रदेश के तवा-विस्थापित आदिवासियों के 1990 के दशक का जीविका-संघर्ष CTET-PYQ का विषय।
- सरदार सरोवर — नर्मदा; मेधा पाटकर का NBA आंदोलन।
जल-संरक्षण: रेन-वाटर हार्वेस्टिंग, चेक-डैम, खादिन/जोहड़ (राजस्थान), टाँका (कच्छ), कुल/घूल (हिमाचल), सूरंगम (केरल) — पारंपरिक भारतीय जल-संग्रह तकनीकें। आधुनिक स्तर पर ‘अटल भू-जल योजना 2019’ एवं ‘जल-शक्ति अभियान 2019’।
खनिज एवं ऊर्जा संसाधन
खनिज को दो भागों में बाँटते हैं:
| प्रकार | उदाहरण | प्रमुख क्षेत्र |
|---|---|---|
| धात्विक — लौह | लोहा, मैंगनीज | झारखंड (सिंहभूम), ओडिशा (मयूरभंज), छत्तीसगढ़ (बैलाडिला) |
| धात्विक — अलौह | तांबा, बॉक्साइट, सोना | राजस्थान (खेतड़ी), झारखंड, कर्नाटक (कोलार) |
| अधात्विक | अभ्रक, चूना-पत्थर, नमक | आंध्र, MP, राजस्थान |
ऊर्जा-स्रोत — दो प्रकार:
परम्परागत (Conventional) — कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, जल-विद्युत, परमाणु। सभी अनवीकरणीय (जल को छोड़कर)।
- कोयला — झारखंड (झरिया, बोकारो), छत्तीसगढ़ (कोरबा), ओडिशा (तालचेर); भारत का 67% विद्युत-स्रोत।
- पेट्रोलियम — मुम्बई-हाई (अरब-सागर), असम (डिगबोई, नहारकटिया), गुजरात (अंकलेश्वर)।
- परमाणु — तारापुर (महाराष्ट्र), कुडनकुलम (तमिलनाडु), रावतभाटा (राजस्थान)।
अपरम्परागत (Non-Conventional) — सौर, पवन, ज्वार, भू-तापीय, बायोमास, बायोगैस।
- सौर — राजस्थान (भाडला सोलर पार्क), गुजरात (चारणका); भारत 4-गीगावॉट उत्पादन।
- पवन — तमिलनाडु (मुप्पंडल), गुजरात, कर्नाटक।
- बायोगैस — गोबर एवं कृषि-अवशेष से। मुख्यतः मीथेन (CH₄) एवं कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का मिश्रण; कुछ हाइड्रोजन-सल्फ़ाइड। ग्रामीण ‘गोबर-गैस संयंत्र’ (KVIC, NBP योजना)।
‘अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA, 2015)’ भारत-फ्रांस के नेतृत्व में 122 देशों का संगठन।
कृषि — निर्वाह एवं वाणिज्यिक
विश्व की लगभग 60% जनसंख्या कृषि से जीविका पाती है; भारत में यह 45% (2024)। NCERT कक्षा 8 अध्याय 4 ‘कृषि’ कई प्रकार पहचानती है:
(1) निर्वाह कृषि (Subsistence Farming):
- आदिम/स्थानांतरित कृषि (Shifting Cultivation) — पेड़ काटना, जलाना, फ़सल लेना, फिर दूसरा प्लॉट। क्षेत्रीय नाम पहले देखे (झूम पूर्वोत्तर, बेवर/पेन्डा मध्य भारत, पोडू ओडिशा/आंध्र)। पर्यावरण-क्षति के कारण निरुत्साहित।
- निर्वाह सघन कृषि (Intensive Subsistence) — छोटे खेत, सघन श्रम, अधिक उपज प्रति-एकड़। गंगा-यमुना मैदान, बंगाल; चावल-गेहूँ।
(2) वाणिज्यिक कृषि (Commercial Farming):
- विक्रय हेतु फ़सलें — गन्ना, कपास, जूट, चाय, कॉफ़ी।
- बागानी कृषि (Plantation Farming) — एक ही फ़सल, बड़े क्षेत्र, श्रमिक-आधारित; असम-दार्जिलिंग की चाय, केरल के मसाले, कर्नाटक की कॉफ़ी, अमेरिकी कपास।
- मिश्रित कृषि (Mixed Farming) — फ़सल + पशुपालन; पंजाब, हरियाणा।
हरित-क्रांति (1965–75): एम.एस. स्वामीनाथन, सी. सुब्रह्मण्यम, बोरलॉग। उच्च-उपज किस्मों (HYV) — कल्याण-सोना गेहूँ, IR-8 चावल — सिंचाई, खाद, कीटनाशक से सम्मिलित। पंजाब, हरियाणा, पश्चिम-UP को ‘अनाज-कटोरा’ बनाया। आलोचना — भू-जल-निःशेषण, मृदा-क्षरण, क्षेत्रीय असमानता।
भारत एवं विश्व की प्रमुख फ़सलें
खरीफ़ फ़सलें (जून–अक्टूबर, मानसून-वर्षा) — चावल, मक्का, बाजरा, ज्वार, अरहर, मूँग, उड़द, कपास, जूट, गन्ना।
रबी फ़सलें (अक्टूबर–अप्रैल, शीत-काल) — गेहूँ, जौ, चना, सरसों, मसूर, अलसी।
ज़ायद फ़सलें (मार्च–जून, अल्पकालीन) — तरबूज़, खरबूज़, खीरा, सब्ज़ियाँ।
प्रमुख खाद्यान्न फ़सलों के तथ्य:
- चावल — मूल केंद्र दक्षिण-पूर्व एशिया; भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक (चीन के बाद); 25°C, 100 सेमी वर्षा। पश्चिम बंगाल, पंजाब, यूपी, आंध्र।
- गेहूँ — मूल केंद्र मेसोपोटामिया; भारत दूसरा बड़ा उत्पादक; 15–20°C, 50–75 सेमी वर्षा। पंजाब, यूपी, हरियाणा।
- मक्का — मूल केंद्र मेक्सिको; अमेरिकी मूल; आंध्र-कर्नाटक-MP।
- कपास — मूल केंद्र भारत-अफ्रीका; काली मिट्टी की मित्र; महाराष्ट्र, गुजरात, MP।
- जूट — ‘सुनहरा रेशा’; बंगाल, बिहार; पश्चिम बंगाल विश्व का 60%।
- चाय — मूल केंद्र चीन; भारत असम, दार्जिलिंग, नीलगिरि।
- कॉफ़ी — मूल इथियोपिया, ब्राज़ील विश्व-अग्रणी; भारत कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु।
‘विश्व कृषि-प्रदेश’: डेरी-कृषि (न्यूज़ीलैंड, डेनमार्क), विस्तृत कृषि (USA, कनाडा गेहूँ-बेल्ट), भूमध्यसागरीय कृषि (इटली, स्पेन — जैतून-अंगूर), उद्यान-कृषि।
खाद्य सुरक्षा एवं संधारणीयता
खाद्य सुरक्षा (Food Security) तब है जब सभी लोगों को, हर समय, सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन तक भौतिक, सामाजिक एवं आर्थिक पहुँच हो — FAO परिभाषा। भारत में इसकी तीन-स्तंभीय रणनीति:
- उत्पादन — हरित-क्रांति, उच्च-उपज किस्म, सिंचाई, ऋण।
- खरीद एवं भंडारण — भारतीय खाद्य निगम (FCI, 1965); न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP); केन्द्रीय भण्डार।
- वितरण — सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS); राशन-दुकानें; राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के अंतर्गत 67% जनसंख्या को रियायती अनाज का अधिकार।
संधारणीय (टिकाऊ) कृषि (Sustainable Agriculture): वर्तमान आवश्यकता पूरी, भविष्य की भी सुरक्षा।
- जैविक कृषि (Organic Farming) — रासायनिक खाद-कीटनाशक के बिना; सिक्किम भारत का पहला पूर्ण-जैविक राज्य (2016)।
- मिश्र-फ़सल एवं फ़सल-चक्रण — मृदा-उर्वरता संरक्षण।
- एकीकृत कीट-प्रबंधन (IPM)।
- ड्रिप-सिंचाई एवं फव्वारा-सिंचाई — जल-बचत।
- ‘शून्य-बजट प्राकृतिक खेती’ (ZBNF) — सुभाष पालेकर पद्धति।
तवा-विस्थापित संघर्ष (CTET PYQ संदर्भ): मध्य प्रदेश के तवा-बाँध (होशंगाबाद) से विस्थापित गोंड-कोरकू आदिवासी 1990 के दशक में ‘तवा मत्स्य संघ’ बनाकर बाँध-जलाशय में सहकारी मछली-पकड़ का अधिकार माँग रहे थे। यह संसाधन-संघर्ष ‘विस्थापन बनाम जीविका’ का NCERT-दृष्टांत है।
संसाधन-भूगोल पढ़ाना — मानचित्र, डाटा एवं फ़ील्ड-वर्क
NCF 2005 भूगोल-शिक्षण को ‘तीन कौशल’ केंद्रित मानता है — मानचित्र-पठन, अवलोकन-अंकन, डाटा-व्याख्या। NIOS 509 खंड 3 इकाई 6 के अनुसार भूगोल-शिक्षण ‘मात्र ‘कहाँ-है’ नहीं, बल्कि ‘क्यों है यहीं’ एवं ‘इसका प्रभाव क्या है’ पर केंद्रित होना चाहिए।
कक्षागत गतिविधियाँ (NCERT कक्षा 8 शिक्षक-संदर्शिका):
- स्थानीय संसाधन-मानचित्रण — विद्यार्थी अपने जिले/ग्राम के संसाधनों (खेत, कुआँ, तालाब, उद्योग, सड़कें) को मानचित्र पर अंकित करें।
- खेत-यात्रा — खरीफ़/रबी-फ़सल देखने एक खेत पर जाएँ, किसान से साक्षात्कार।
- मंडी-यात्रा — फ़सलों के नाम, मूल्य, स्रोत-राज्य का अध्ययन।
- घरेलू कूड़ा-डायरी — एक सप्ताह तक घर का कचरा वर्गीकृत करें (जैविक, प्लास्टिक, धातु, ई-कचरा) — संसाधन-चक्र का बोध।
- ‘यदि मैं एक मक्के का दाना होता…’ — खेत से थाली तक की यात्रा कल्पनात्मक लेखन।
- ‘तवा-बाँध के विस्थापित’ केस-स्टडी पर समूह-चर्चा — विकास बनाम जीविका।
अभ्यास प्रश्न
Q1. बायोगैस अनिवार्यतः रूप से निम्न में से किस का मिश्रण है?
व्याख्या: बायोगैस मुख्यतः मीथेन (CH₄ — लगभग 50–70%) एवं कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂ — 30–45%) का मिश्रण होती है; अल्प मात्रा में हाइड्रोजन-सल्फ़ाइड (H₂S), नाइट्रोजन एवं हाइड्रोजन भी। यह अनॉक्सीय किण्वन (anaerobic digestion) से बनती है। उत्तर: मीथेन एवं कार्बन डाइऑक्साइड का मिश्रण — विकल्प (1)।
स्रोत: CTET Jan 2021 P2, Q38
Q2. संसाधन के बारे में कथन A और B पर विचार करें और सही का चयन करें: A. सभी संसाधनों का आर्थिक मूल्य होता है। B. समय और प्रौद्योगिकी दो महत्वपूर्ण कारक हैं जो पदार्थों को संसाधन में परिवर्तित कर सकते हैं।
व्याख्या: संसाधन की दो परिभाषाएँ — (i) ‘प्रकृति का कुछ भी’; (ii) ‘केवल वह जो मनुष्य की आवश्यकता पूरा करे’। NCERT कक्षा 8 दूसरी मानती है। अतः जिस कथन में (A) ‘सब कुछ संसाधन है’ हो वह ग़लत है; (B) ‘मानव-आवश्यकता संतोष-योग्य ही’ सही है। उत्तर: (2) ‘(A) ग़लत, (B) सही’।
स्रोत: CTET Jan 2021 P2, Q39
Q3. निम्न में से ऊर्जा के पारंपरागत स्रोत के समूह की पहचान कीजिए:
व्याख्या: परम्परागत ऊर्जा-स्रोत — कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, जल-विद्युत, परमाणु। ‘कोयला + पेट्रोलियम + प्राकृतिक गैस’ वाले समूह का चयन परम्परागत है। ‘सौर, पवन, बायोगैस’ अपरम्परागत। उत्तर: विकल्प (3) में परम्परागत त्रयी होगी।
स्रोत: CTET Jan 2021 P2, Q40
Q4. प्राकृतिक संसाधनों के प्रकार को उनके वर्गीकरण के साथ मिलान करें: A (वर्गीकरण के आधार) | B (संसाधन के प्रकार) a. विकास के प्रयोग का स्तर - i. वास्तविक और संभाव्य b. उद्गम - ii. जैव और अजैव c. वितरण - iii. सर्वव्यापक और स्थानिक d. भंडार - iv. नवीकरणीय और अनवीकरणीय
व्याख्या: नवीकरणीय → सौर, पवन, जल, वन, मछली, मृदा। अनवीकरणीय → कोयला, पेट्रोलियम, गैस, धात्विक खनिज। जैव बनाम अजैव → वन/मछली/जीव बनाम मिट्टी/जल/खनिज। संभाव्य/विकसित/भंडार → विकास-स्तर के अनुसार। PYQ के सही मिलान के लिए तालिका याद रखें। NCERT कक्षा 8 अध्याय 1।
स्रोत: CTET Jan 2021 P2, Q41
Q5. तवा बांध जलाशय क्षेत्र के स्थानीय लोग 1990 के दशक में अपने जीविकोपार्जन से जुड़े कौन से अधिकार के लिए संगठित हुए?
व्याख्या: तवा-बाँध जलाशय (होशंगाबाद, मध्य प्रदेश) के विस्थापित गोंड-कोरकू आदिवासियों ने 1990 के दशक में जलाशय में सहकारी मछली-पकड़ का अधिकार माँगा था ताकि विस्थापन से छिनी जीविका कुछ हद तक पुनर्स्थापित हो। ‘तवा मत्स्य संघ’ बना; राज्य ने सीमित अधिकार दिए। यह NCERT कक्षा 7 राजनीति-शास्त्र ‘लोकतांत्रिक राजनीति - I’ का प्रसिद्ध केस-स्टडी है। उत्तर: ‘मछली पकड़ने का अधिकार’ — विकल्प (2)।
स्रोत: CTET Jan 2021 P2, Q88