वंशानुक्रम और वातावरण — दो बल
हर बच्चे के विकास को दो बल आकार देते हैं, और यह विषय उन्हें स्पष्ट रूप से नाम देने से शुरू होता है।
वंशानुक्रम (heredity) वह जैविक विरासत है जो बच्चे को गर्भाधान के क्षण पर माता-पिता से जीन के माध्यम से मिलती है। यह आँखों के रंग जैसी शारीरिक विशेषताएँ, लंबाई और गठन की व्यापक संभावना, स्वभाव के पहलू और कुछ प्रवृत्तियाँ अपने साथ लाती है। वंशानुक्रम बच्चे को निश्चित परिणाम नहीं सौंपता — वह उसे एक संभावना का विस्तार सौंपता है।
वंशानुक्रम वह जैविक विरासत है जो गर्भाधान के समय जीन के माध्यम से माता-पिता से बच्चे तक पहुँचती है। यह संभावना तय करता है — वह विस्तार जिसके भीतर कोई गुण विकसित हो सकता है — तैयार परिणाम नहीं।
वातावरण (environment) वह सब कुछ है जो जीन के बाहर से बच्चे पर क्रिया करता है। यह जन्म से पहले ही आरंभ हो जाता है — गर्भावस्था में माँ का स्वास्थ्य और पोषण — और फिर घर, परिवार और उसकी आय, भोजन और देखभाल, घर की भाषा, मोहल्ले, विद्यालय, सहपाठी समूह, समुदाय, धर्म, संस्कृति और मीडिया तक फैल जाता है।
वातावरण जीन के बाहर से बच्चे पर क्रिया करने वाले प्रभावों का पूरा समूह है — प्रसव-पूर्व की स्थितियाँ, घर, विद्यालय, सहपाठी, भाषा, समुदाय, संस्कृति और सामाजिक-आर्थिक स्थिति।
वातावरण का एक हिस्सा आसानी से नज़र से चूक जाता है: यह जन्म से पहले ही आरंभ हो जाता है। गर्भ स्वयं बच्चे का पहला वातावरण है। गर्भावस्था के दौरान माँ का पोषण, उसका स्वास्थ्य, उसका तनाव-स्तर और हानिकारक पदार्थों का कोई भी संपर्क — ये सब विकसित होते बच्चे पर घर, गली या विद्यालय से बहुत पहले क्रिया करते हैं — इसीलिए प्रसव-पूर्व देखभाल को बच्चे के विकास से अलग नहीं, उसी का हिस्सा माना जाता है।
IGNOU की पाठ्यसामग्री इस संबंध को सीधे बताती है: वंशानुक्रम और वातावरण दोनों बच्चे की वृद्धि और विकास को प्रभावित करते हैं। कोई भी अकेले काम नहीं करता। जीन तय करते हैं कि क्या संभव है; वातावरण तय करता है कि उस संभावना का कितना भाग वास्तव में प्राप्त होता है, और किस दिशा में।
प्रकृति बनाम पोषण की बहस
वंशानुक्रम कितना मायने रखता है और वातावरण कितना — इस प्रश्न को प्रकृति बनाम पोषण (nature–nurture) की बहस कहा जाता है। IGNOU की पाठ्यसामग्री इसे विकास के अध्ययन के कई पुराने 'मुद्दों' में से एक के रूप में रखती है।
इतिहास में विचारकों ने चरम पक्ष लिए। प्रकृति के पक्ष में वे थे जो मानते थे कि वंशानुक्रम निर्णायक है — कि बच्चे की योग्यताएँ काफ़ी हद तक जन्म पर ही तय हो जाती हैं। पोषण के पक्ष में व्यवहारवादी थे; जे. बी. वाटसन का प्रसिद्ध दावा था कि एक दर्जन स्वस्थ शिशु और उनके वातावरण पर पूरा नियंत्रण मिल जाए तो वह उनमें से किसी को भी, उसके वंशानुगत गुणों की परवाह किए बिना, किसी भी प्रकार का विशेषज्ञ बना सकता है।
आज कोई भी चरम पक्ष नहीं टिकता। अंतःक्रियावादी स्थिति — आज की स्थिर सहमति — मानती है कि विकास वंशानुक्रम और वातावरण के साथ-साथ काम करने का परिणाम है। दोनों एक-दूसरे के विरुद्ध तौले जाने वाले प्रतिद्वंद्वी नहीं; वे साझेदार हैं।
CTET के लिए मुख्य बात यही है: जब कोई प्रश्न कोई चरम स्थिति प्रस्तुत करे — वंशानुक्रम सब कुछ तय करता है, या वातावरण सब कुछ तय करता है — तो वह विकल्प ग़लत होता है। अंतःक्रियावादी उत्तर ही वह है जिसे परीक्षा अंक देती है।
पाठ्यसामग्री इस बहस को विकास के कुछ अन्य 'मुद्दों' के साथ रखती है जिन्हें जानना उपयोगी है। क्या विकास सतत है — सहज और क्रमिक — या असतत, अलग-अलग अवस्थाओं में बढ़ता हुआ? क्या बच्चा अपने विकास का सक्रिय रचयिता है या प्रभावों का निष्क्रिय ग्राही? क्या विकास सार्वभौमिक है या विशिष्ट संदर्भों से आकार पाता है? आधुनिक चिंतन इन सब में अंतःक्रिया की ओर झुकता है — विकास क्रमिक भी है और अवस्थाबद्ध भी, बच्चा सक्रिय है, और सार्वभौमिक पैटर्न भी संदर्भ-विशिष्ट ढंग से ही प्रकट होते हैं।
वंशानुक्रम और वातावरण कैसे अंतःक्रिया करते हैं
'दोनों मायने रखते हैं' कहना पर्याप्त नहीं — महत्वपूर्ण शब्द है अंतःक्रिया। वंशानुक्रम और वातावरण केवल अग़ल-बग़ल जुड़ नहीं जाते; वे अंतःक्रिया करते हैं, हर एक यह आकार देता है कि दूसरा कैसे प्रभाव डाले।
इसे समझने का एक उपयोगी ढंग है अनुक्रिया का विस्तार (range of reaction)। वंशानुक्रम एक अकेला परिणाम तय नहीं करता; वह किसी गुण के लिए संभावित परिणामों का एक विस्तार तय करता है। उस विस्तार के भीतर कोई विशेष बच्चा वास्तव में कहाँ पहुँचता है, यह वातावरण तय करता है। बच्चे को लंबाइयों के एक बड़े विस्तार की संभावना वंशानुक्रम में मिल सकती है — अच्छा पोषण वृद्धि को उस विस्तार के ऊपरी सिरे की ओर धकेलता है, दीर्घकालिक कुपोषण निचले सिरे की ओर। जीन ने सीमाएँ खींचीं; वातावरण ने उनके भीतर का बिंदु चुना।
जुड़वाँ-अध्ययन इस अंतःक्रिया को स्पष्ट दिखाते हैं। एक-जैसे जुड़वाँ बच्चों के जीन समान होते हैं। जब ऐसे जुड़वाँ अलग-अलग घरों में पाले जाते हैं, तब भी उनकी मापी गई बुद्धि में मज़बूत सहसंबंध रहता है — यह प्रमाण कि वंशानुक्रम बहुत मायने रखता है। फिर भी जुड़वाँ योग्यता में एक-जैसे नहीं होते; उनके बीच का अंतर उनके भिन्न वातावरण से जुड़ता है। वही अध्ययन, ईमानदारी से पढ़ा जाए, तो एक साथ दोनों बलों को काम करते हुए दिखाता है।
एक सरल कक्षा-चित्र मदद करता है। दो बच्चों को गणित की मिलती-जुलती संभावना वंशानुक्रम में मिल सकती है। जिसे धैर्यपूर्ण शिक्षण, वास्तविक सामग्री और निरंतर प्रोत्साहन मिलता है वह उस संभावना के ऊपरी सिरे की ओर बढ़ता है; जिसे भय, रटंत अभ्यास और एक सूनी कक्षा मिलती है वह निचले सिरे की ओर। समान वंशानुगत विस्तार, भिन्न वातावरण, स्पष्ट रूप से भिन्न परिणाम।
यही कारण है कि इस विषय में CTET के उत्तर लगभग हमेशा 'जटिल अंतःक्रिया' शब्द का प्रयोग करते हैं। प्रतिभाशालिता का कारण, व्यक्तिगत भिन्नता का प्राथमिक कारण, व्यक्तिगत भिन्नताओं का स्रोत — इनमें से हर एक के लिए सही विकल्प वंशानुक्रम और वातावरण की अंतःक्रिया है, कभी कोई एक बल अकेला नहीं।
ब्रोनफेनब्रेनर की पारिस्थितिकी प्रणालियाँ
यदि वातावरण इतना मायने रखता है, तो वातावरण आख़िर है क्या? वह कोई एक चीज़ नहीं। मनोवैज्ञानिक यूरी ब्रोनफेनब्रेनर (Urie Bronfenbrenner, 1917–2005) ने इसका उत्तर अपने जैव पारिस्थितिकी मॉडल से दिया। उन्होंने वातावरण को एक-दूसरे के भीतर बसी परतों के समूह के रूप में देखा, जिसके केंद्र में बच्चा है, और बताया कि हर परत बच्चे को कैसे आकार देती है और बच्चा बदले में उस पर कैसे क्रिया करता है।
| प्रणाली | यह क्या है |
|---|---|
| सूक्ष्म प्रणाली (microsystem) | वह तत्काल परिवेश जिसका बच्चा हिस्सा है और जिससे वह सीधे अंतःक्रिया करता है — परिवार, कक्षा, घनिष्ठ मित्र। |
| मध्य प्रणाली (mesosystem) | सूक्ष्म प्रणालियों के बीच के संबंध — जैसे बच्चे के माता-पिता और शिक्षक के बीच संपर्क। |
| वाह्य प्रणाली (exosystem) | वे परिवेश जिनमें बच्चा नहीं होता, पर जो उसे परोक्ष रूप से प्रभावित करते हैं — माता-पिता का कार्यस्थल, सरकारी नीति, मीडिया। |
| वृहद् प्रणाली (macrosystem) | सबको घेरने वाली व्यापक संस्कृति — विश्वास, रीति-रिवाज, मूल्य, और आर्थिक एवं सामाजिक व्यवस्था। |
| काल प्रणाली (chronosystem) | समय का आयाम — बच्चे के अपने जीवन में आने वाले परिवर्तन, और वह ऐतिहासिक युग जिसमें वह बड़ा होता है। |
परतों को काम करते देखने के लिए एक अकेले बच्चे को लीजिए। उसका परिवार और कक्षा उसकी सूक्ष्म प्रणाली हैं। उसके माता-पिता और शिक्षक के बीच का अच्छा संबंध उसकी मध्य प्रणाली है। उसकी माँ की रात की पाली वाली नौकरी — जिसे वह कभी नहीं देखती, पर जो तय करती है कि शाम को घर कौन है — उसकी वाह्य प्रणाली है। लड़कियों को पढ़ाने के प्रति समुदाय का रवैया उसकी वृहद् प्रणाली है। और घर में स्मार्टफ़ोन के साथ बड़ा होना, जैसा पहले की किसी पीढ़ी ने नहीं किया, उसकी काल प्रणाली है।
यह मॉडल ख़ूब परखा जाता है। यह पूछने वाला प्रश्न कि परिवार कहाँ आता है, सूक्ष्म प्रणाली की ओर इशारा करता है; सरकारी नीति या सांस्कृतिक विश्वासों पर पूछने वाला प्रश्न वृहद् प्रणाली की ओर। शिक्षक और कक्षा सूक्ष्म प्रणाली का हिस्सा हैं; माता-पिता–शिक्षक संपर्क मध्य प्रणाली है। इन मिलानों को पक्का कर लें और ब्रोनफेनब्रेनर के प्रश्न तेज़ अंक बन जाते हैं।
समान जीन, भिन्न वातावरण
ब्रोनफेनब्रेनर का मॉडल एक तथ्य को अटल बना देता है: बहुत मिलते-जुलते वंशानुक्रम वाले दो बच्चे केवल इसलिए बहुत भिन्न ढंग से विकसित हो सकते हैं क्योंकि उनके वातावरण भिन्न हैं।
मिलती-जुलती वंशानुगत संभावना वाले दो बच्चों पर विचार कीजिए — एक किसी दूरस्थ गाँव में बड़ा हो रहा है और संसाधन-विहीन सरकारी विद्यालय जाता है, दूसरा किसी शहर में जहाँ सुसज्जित विद्यालय है, घर में किताबें हैं और पढ़े-लिखे माता-पिता पढ़ाई में मदद कर सकते हैं। उनकी सूक्ष्म प्रणालियाँ भिन्न हैं, वाह्य प्रणालियाँ भिन्न हैं, वृहद् प्रणालियाँ भी भिन्न हो सकती हैं। वर्षों में, वातावरण का यह अंतर इस बात में वास्तविक अंतर पैदा करता है कि हर बच्चा क्या प्राप्त करता है — इसलिए नहीं कि कोई बच्चा 'बेहतर पैदा हुआ', बल्कि इसलिए कि चारों ओर की प्रणालियों ने उन्हें भिन्न चीज़ें दीं।
IGNOU की पाठ्यसामग्री कठिन परिस्थितियों में होने वाले विकास पर ध्यान देती है — गंदी बस्तियों में, जनजातीय समुदायों में, और संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में बड़े होते बच्चे। हर मामले में सीख एक ही है: कठोर वातावरण बच्चे की वंशानुगत संभावना को नहीं बदलता, पर वह तेज़ी से सीमित कर सकता है कि उस संभावना का कितना भाग वास्तव में प्राप्त हो।
इसका उल्टा भी उतना ही सच और कहीं अधिक आशादायक है: बच्चे के वातावरण को समृद्ध करना उसकी उपलब्धि को ऊपर उठाता है। गाँव में एक पुस्तकालय, एक शिक्षक जो बात करता और सुनता है, एक मध्याह्न भोजन जो भूख मिटा देता है — इनमें से हर एक एक वातावरणीय परिवर्तन है, और हर एक बच्चे को उसके वंशानुगत विस्तार में और ऊपर ले जा सकता है।
यह एक आम कक्षा-भूल के विरुद्ध भी चेतावनी है — किसी बच्चे की धीमी प्रगति को स्थिर, जन्मजात कमज़ोरी मान लेना, जबकि उसका असली कारण एक विपन्न वातावरण में हो सकता है जिसे वास्तव में बदला जा सकता है।
वंशानुक्रम और वातावरण अलग-अलग क्या तय करते हैं
यह बात स्पष्ट रखना उपयोगी है कि हर बल क्या तय कर सकता है और क्या नहीं।
वंशानुक्रम जैविक लिंग को पूरी तरह तय करता है — बच्चा नर पैदा होगा या मादा, यह गुणसूत्रों से तय होता है। वंशानुक्रम लंबाई और गठन जैसी शारीरिक विशेषताओं के लिए संभावना का विस्तार भी तय करता है, और स्वभाव तथा कुछ प्रवृत्तियों में योगदान देता है।
परंतु वंशानुक्रम, अकेले अपने दम पर, अधिकांश उन बातों को तय नहीं करता जिनकी शिक्षक को परवाह होती है। जेंडर — लड़का या लड़की होने से जुड़ी भूमिकाएँ, व्यवहार और अपेक्षाएँ — सामाजिक रूप से सीखा जाता है, वंशानुक्रम में नहीं मिलता। शैक्षणिक सफलता जीन की तुलना में शिक्षण, प्रयास, अभिप्रेरणा और अवसर पर कहीं अधिक निर्भर करती है। अधिगम शैली अनुभव से आकार पाती है। यह पूछने वाला CTET प्रश्न कि वंशानुक्रम क्या 'पूरी तरह' तय करता है, ठीक इसी रेखा को परखता है: सुरक्षित उत्तर है जैविक लिंग, और इससे अधिक कुछ नहीं।
यह क्यों मायने रखता है, इसका व्यावहारिक कारण स्पष्ट है। जो शिक्षक बच्चे की असफलता का दोष 'कमज़ोर वंशानुक्रम' पर मढ़ देता है वह चुपचाप प्रयास करना छोड़ देता है, क्योंकि जीन के बारे में कुछ नहीं किया जा सकता। जो शिक्षक शैक्षणिक कठिनाई को वातावरण और अनुभव से आकार पाई हुई मानता है वह यह खोजता रहता है कि क्या बदला जाए — शिक्षण, सामग्री, प्रोत्साहन, घर से संपर्क। पहली मान्यता दरवाज़े बंद कर देती है; दूसरी उन्हें खुला रखती है।
और जिन गुणों का श्रेय लोग सबसे अधिक 'अच्छे जीन' को देते हैं — प्रतिभाशालिता, उच्च योग्यता, बच्चों के बीच की व्यक्तिगत भिन्नताएँ — वे प्रमाण के आधार पर वंशानुक्रम और वातावरण की अंतःक्रिया का परिणाम हैं। कोई भी सार्थक मानवीय गुण न पूरी तरह वंशानुगत है, न पूरी तरह गढ़ा हुआ; हर गुण वहीं उगता है जहाँ विरासत और अनुभव मिलते हैं।
कक्षा-कक्ष में निहितार्थ
इस सबका कक्षा के सामने खड़े शिक्षक के लिए क्या अर्थ है? चार व्यावहारिक बातें निकलती हैं।
वातावरण आपका उत्तोलक है; वंशानुक्रम नहीं। शिक्षक बच्चे के जीन नहीं बदल सकता — पर कक्षा बच्चे की सूक्ष्म प्रणाली का एक शक्तिशाली हिस्सा है, और उसे शिक्षक सीधे आकार देता है। समृद्ध बातचीत, प्रोत्साहन, अच्छी सामग्री और ऊँची अपेक्षाएँ ऐसे वातावरणीय निवेश हैं जो विकास को सचमुच आगे बढ़ाते हैं।
केवल कक्षा नहीं, संबंधों को भी मज़बूत करें। चूँकि मध्य प्रणाली मायने रखती है, माता-पिता से वास्तविक संपर्क बनाना — ताकि घर और विद्यालय एक ही दिशा में खींचें — अच्छे शिक्षण के प्रभाव को कई गुना कर देता है।
किसी बच्चे को 'जन्म से कमज़ोर' मानकर कभी न छोड़ें। धीमी प्रगति कमज़ोर वंशानुक्रम की तुलना में विपन्न वातावरण का संकेत कहीं अधिक बार होती है, और विपन्न वातावरण को समृद्ध किया जा सकता है। योग्यता को जन्म पर तय मान लेना चुपचाप एक स्व-पूर्ति भविष्यवाणी बन जाता है।
घर जो नहीं दे सकता, उसकी भरपाई जान-बूझकर करें। जिस प्रथम पीढ़ी के शिक्षार्थी के घर में न किताबें हैं न शांत पढ़ने की जगह, उसके लिए विद्यालय अनेक प्रभावों में से केवल एक नहीं — वह वातावरण को चौड़ा करने का मुख्य अवसर है। जो शिक्षक यह समझता है, वह अधिक उद्देश्य के साथ पढ़ाता है।
CTET परीक्षा फ़ोकस
यह विषय लगभग हर CTET पेपर में आता है, और इसके पैटर्न बहुत स्थिर हैं।
पैटर्न 1 — अंतःक्रिया ही उत्तर है। जब भी प्रश्न प्रतिभाशालिता के कारण, व्यक्तिगत भिन्नता के प्राथमिक कारण, या व्यक्तिगत भिन्नताओं के स्रोत पर पूछे, सही विकल्प वंशानुक्रम और वातावरण की जटिल अंतःक्रिया होता है — कभी केवल वंशानुक्रम, कभी केवल वातावरण, कभी कोई नहीं — नहीं।
पैटर्न 2 — ब्रोनफेनब्रेनर की प्रणालियाँ नाम से। परिवार और कक्षा को सूक्ष्म प्रणाली से, माता-पिता–शिक्षक संपर्क को मध्य प्रणाली से, माता-पिता के कार्यस्थल और सरकारी नीति को वाह्य प्रणाली से, और संस्कृति एवं रीति-रिवाजों को वृहद् प्रणाली से मिलाएँ। काल प्रणाली समय का आयाम है।
पैटर्न 3 — वंशानुक्रम क्या तय करता है। यह पूछने वाला प्रश्न कि वंशानुक्रम क्या 'पूरी तरह' तय करता है, जैविक लिंग खोज रहा होता है — जेंडर नहीं, शैक्षणिक सफलता नहीं, अधिगम शैली नहीं।
पैटर्न 4 — प्रकृति बनाम पोषण। अंतःक्रियावादी स्थिति को सही, आधुनिक दृष्टि के रूप में पहचानने और दोनों चरम पक्षों को अस्वीकार करने की अपेक्षा रखें।
बचने योग्य जाल है कोई भी निरपेक्ष विकल्प — 'केवल वंशानुक्रम', 'पूरी तरह वातावरण से गढ़ा हुआ', 'कोई भी विकास को प्रभावित नहीं करता'। विकास लगभग कभी निरपेक्षताओं में काम नहीं करता।
अभ्यास प्रश्न
Q1. बच्चों में प्रतिभाशालिता _____ के कारण हो सकती है।
व्याख्या: प्रतिभाशालिता, हर महत्वपूर्ण मानवीय योग्यता की तरह, वंशानुक्रम और वातावरण की अंतःक्रिया से उभरती है — वंशानुगत संभावना को एक समृद्ध, सहायक वातावरण विकसित करता है। अकेला संसाधन-समृद्ध वातावरण, सफल माता-पिता या दिनचर्या इसका कारण नहीं हो सकते।
स्रोत: CTET दिसंबर 2018 पेपर 1, प्र.16
Q2. वैयक्तिक विभिन्नताओं का प्राथमिक कारण क्या है ?
व्याख्या: व्यक्तिगत भिन्नता न केवल जीन से होती है, न केवल वातावरण से। इसका प्राथमिक कारण वंशानुक्रम और वातावरण के बीच की जटिल अंतःक्रिया है — दोनों बल लगातार यह आकार देते हैं कि एक-दूसरे का प्रभाव कैसे पड़े।
स्रोत: CTET दिसंबर 2019 पेपर 1, प्र.29
Q3. बच्चों के विकास की व्यक्तिगत विभिन्नताओं को किस पर प्रतिरोपित किया जा सकता है ?
व्याख्या: बच्चों के बीच की भिन्नताएँ वंशानुक्रम और वातावरण के साथ-साथ काम करने से उभरती हैं। कोई एक बल अकेला — और निश्चित ही दोनों की अनुपस्थिति — व्यक्तिगत भिन्नताओं की व्याख्या नहीं कर सकती।
स्रोत: CTET जनवरी 2021 पेपर 1, प्र.30
Q4. आनुवंशिकता पूरी तरह से एक व्यक्ति के / की _____ को निर्धारित करती है । (i) सेक्स (ii) जेंडर (iii) शैक्षिक सफलता (iv) सीखने की शैली
व्याख्या: वंशानुक्रम पूरी तरह केवल जैविक लिंग को तय करता है। जेंडर सामाजिक रूप से निर्मित होता है, जबकि शैक्षणिक सफलता और अधिगम शैली काफ़ी हद तक वातावरण और अनुभव से आकार पाती हैं — इसलिए केवल कथन (i) सही है।
स्रोत: CTET जुलाई 2024 पेपर 1, प्र.16
Q5. मानव विकास के संदर्भ में आनुवंशिकता तथा पर्यावरण की भूमिका के बारे में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा सही है?
व्याख्या: वंशानुक्रम और वातावरण दोनों मानव विकास को प्रभावित करते हैं, एक जटिल अंतःक्रिया में साथ काम करते हुए। विकास का श्रेय केवल वंशानुक्रम को, या केवल वातावरण को देने वाले, या दोनों को नकारने वाले कथन — सभी ग़लत हैं।
स्रोत: CTET दिसंबर 2019 पेपर 2, प्र.10