बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र · CTET नोट्स

बुद्धि — आलोचनात्मक दृष्टिकोण एवं बहु-बुद्धि

वह बच्चा जो पढ़ने में संघर्ष करता है, कक्षा की पहेली सबसे पहले सुलझा सकता है; जो हर विषय में कम अंक लाता है, वही मोहल्ले में सबसे अच्छा नेतृत्व करता है। एक सदी से अधिक समय से शिक्षा ने बुद्धि को एक संख्या — IQ — से पहचाना और बच्चों को उसी के आधार पर श्रेणीबद्ध किया। शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों ने इस दृष्टिकोण पर गहरे सवाल उठाए हैं: बुद्धि (intelligence) एक ही नहीं है, वह स्थिर नहीं है, और एक परीक्षण उसे नहीं समेट सकता। CTET में CDP-09 इसी आलोचनात्मक समझ की परीक्षा करता है। इस नोट में बुद्धि-परीक्षण का इतिहास, प्रमुख वैकल्पिक सिद्धांत और कक्षा में बच्चों को बहु-प्रतिभाशाली देखने के निहितार्थ — सब विस्तार से हैं।

परंपरागत दृष्टिकोण: बिने, IQ और सामान्य बुद्धि

बुद्धि को मापने का विचार बच्चों को श्रेणीबद्ध करने के लिए नहीं, एक कल्याणकारी उद्देश्य से शुरू हुआ। अल्फ्रेड बिने (Alfred Binet) (1857–1911) फ्रांसीसी मनोवैज्ञानिक थे जिन्हें 1905 में फ्रांसीसी सरकार ने ऐसा परीक्षण बनाने का काम सौंपा जो उन बच्चों की पहचान करे जिन्हें विद्यालय में अतिरिक्त सहायता चाहिए।

बिने की मुख्य अवधारणा थी मानसिक आयु (mental age): जो बच्चा दस वर्षीय बच्चों के स्तर पर कार्य करे, उसकी मानसिक आयु 10 है — चाहे उसकी वास्तविक आयु कुछ भी हो। IGNOU BES-121 ब्लॉक 2 के अनुसार, संज्ञानात्मक विकास को मापने की यह पहली व्यवस्थित कोशिश थी।

विलियम स्टर्न (William Stern) (1912) ने मानसिक आयु को एक संख्या में बदला — बुद्धि-लब्धि (IQ): IQ = (मानसिक आयु ÷ वास्तविक आयु) × 100। IQ 100 का अर्थ है मानसिक आयु और वास्तविक आयु बराबर — यही सांख्यिकीय औसत है।

चार्ल्स स्पीयरमैन (Charles Spearman) (1904) ने एक अलग कोण से देखा: सांख्यिकीय विश्लेषण से उन्होंने तर्क दिया कि सभी संज्ञानात्मक कार्यों में एक साझी सामान्य क्षमता होती है जिसे उन्होंने g (सामान्य बुद्धि) कहा। इसके साथ विशिष्ट क्षमताएँ (s) भी होती हैं। स्पीयरमैन का दृष्टिकोण 'सामान्यतः बुद्धिमान' की अवधारणा को समर्थन देता है।

बुद्धि-लब्धि (IQ)

IQ = (मानसिक आयु ÷ वास्तविक आयु) × 100। विलियम स्टर्न (1912) ने यह सूत्र दिया, जो अल्फ्रेड बिने की मानसिक आयु की अवधारणा पर आधारित था। IQ 100 उस आयु-समूह का सांख्यिकीय औसत है।

भारतीय संदर्भ में बुद्धि-लब्धि का उपयोग विद्यालयी प्रवेश, विशेष कक्षाओं में नामांकन और व्यावसायिक मार्गदर्शन में होता रहा है। परंतु शोध स्पष्ट करता है कि IQ अंक पर्यावरण, पोषण और शिक्षा की गुणवत्ता से प्रभावित होता है — यह जन्मजात और अपरिवर्तनीय क्षमता का माप नहीं।

IQ परीक्षणों पर आलोचनात्मक दृष्टिकोण

बीसवीं सदी के मध्य तक IQ स्कोर एक बच्चे के जीवन में सबसे प्रभावशाली संख्या बन गया था — विद्यालय में प्रवेश, शैक्षिक वर्गीकरण और जीवन-संभावनाएँ तय करता था। शोध-साहित्य और NCERT/IGNOU स्रोतों में चार प्रमुख आपत्तियाँ सामने आती हैं:

  • संकीर्ण दायरा। IQ परीक्षण मुख्यतः भाषाई, तार्किक और गणितीय कौशलों को मापते हैं और इसे 'बुद्धि' कहते हैं। संगीत, स्थानिक चिंतन, सामाजिक कौशल, शारीरिक समन्वय और व्यावहारिक समस्या-समाधान — सब छूट जाते हैं।
  • सांस्कृतिक पक्षपात। मानक बुद्धि-परीक्षण पश्चिमी, मध्यवर्गीय संदर्भों में बने थे। जो आदिवासी बच्चा जंगल में दिशा-ज्ञान रखता हो, औषधीय पौधे पहचानता हो और जटिल कुल-परंपराएँ याद रखता हो — वह कागज़-परीक्षण में कम अंक ला सकता है; इसका अर्थ यह नहीं कि वह बुद्धिमान नहीं।
  • स्थायी लेबल की समस्या। जब IQ को जन्मजात और स्थिर माना जाए, तो कम अंक एक स्थायी छत बन जाते हैं। शोध बताता है कि IQ समृद्ध शैक्षिक अवसर, पोषण और तनाव-मुक्त वातावरण से बदल सकता है।
  • IQ नियति नहीं है। IQ और शैक्षिक प्रदर्शन का सहसंबंध इसलिए है क्योंकि दोनों एक ही संकीर्ण कौशल-समूह को मापते हैं। सृजनशीलता, नेतृत्व और व्यावहारिक ज्ञान में IQ कमज़ोर भविष्यवक्ता है।

CTET में मानकीकृत परीक्षणों की आलोचना पर प्रश्न आते हैं — सही उत्तर प्रायः सांस्कृतिक पक्षपात या संकीर्ण दायरा होता है।

इन आलोचनाओं का शैक्षिक महत्त्व यह है कि अध्यापक किसी बच्चे को केवल परीक्षण-अंक के आधार पर न तो स्थायी रूप से वर्गीकृत करें और न ही उसकी क्षमता की सीमा तय करें। NCF 2005 भी यही कहती है: बच्चों की विफलता का कारण प्रायः व्यवस्था में है, बच्चे में नहीं। CTET में मानकीकृत परीक्षणों की सही आलोचना प्रायः सांस्कृतिक पक्षपात या संकीर्ण दायरा होती है।

गार्डनर का बहु-बुद्धि सिद्धांत

1983 में अमेरिकी मनोवैज्ञानिक हावर्ड गार्डनर (Howard Gardner) ने Frames of Mind प्रकाशित की, जिसमें उन्होंने तर्क दिया कि मानव बुद्धि एक सामान्य क्षमता नहीं — आठ अपेक्षाकृत स्वतंत्र योग्यताओं का परिवार है। उनकी बहु-बुद्धि सिद्धांत (Multiple Intelligences / MI) ने g-कारक और IQ परंपरा को सीधी चुनौती दी।

गार्डनर ने कहा कि प्रत्येक बुद्धि की अपनी विकास-यात्रा, अपनी मस्तिष्क-संरचनाएँ और अपनी सांस्कृतिक अभिव्यक्ति होती है। आठ बुद्धियाँ:

बुद्धिकक्षा में पहचान
भाषाई (Linguistic)पढ़ना, लिखना, कहानी सुनाना पसंद है
तार्किक-गणितीय (Logical-Mathematical)पहेलियाँ, पैटर्न, संख्याएँ पसंद हैं
स्थानिक (Spatial)चित्र, नक्शे, त्रि-आयामी कल्पना पसंद है
शारीरिक-गतिज (Bodily-Kinesthetic)खेल, नृत्य, हस्तकला में निपुण
संगीतमय (Musical)लय, सुर, धुन के प्रति संवेदनशील
अंतर्वैयक्तिक (Interpersonal)दूसरों को समझता है, नेतृत्व करता है
अंत:वैयक्तिक (Intrapersonal)आत्म-जागरूक, चिंतनशील
प्रकृतिवादी (Naturalist)पौधों-जानवरों को पहचानता है, प्रकृति में रुचि
CTET पैटर्न: बुद्धियों की संख्या = 8। 'प्रकृतिवादी' बाद में जोड़ी गई — सबसे अधिक भूली जाती है। 'एक दार्शनिक में ___ बुद्धि और एक मूर्तिकार में ___ बुद्धि होती है' → भाषाई/अस्तित्ववादी और स्थानिक/शारीरिक-गतिज।

गार्डनर का सबसे महत्त्वपूर्ण कथन कक्षा-व्यवहार के लिए: बुद्धि एक प्रकार की नहीं होती। जो बच्चा भाषाई और गणितीय क्षेत्र में कमज़ोर हो, वह स्थानिक या अंतर्वैयक्तिक बुद्धि में प्रबल हो सकता है।

कक्षा के लिए व्यावहारिक निहितार्थ: यदि पाठ में विभिन्न बुद्धियों को शामिल किया जाए — स्पष्टीकरण (भाषाई), चित्र (स्थानिक), प्रत्यक्ष क्रिया (शारीरिक-गतिज), लय (संगीतमय), और प्रकृति-अवलोकन (प्रकृतिवादी) — तो अधिक विद्यार्थी सीखेंगे। एकल परीक्षण-विधि कभी पूरी कक्षा तक नहीं पहुँच सकती।

स्टर्नबर्ग का त्रिआयामी सिद्धांत

रॉबर्ट स्टर्नबर्ग (Robert Sternberg) ने 1985 में त्रिआयामी बुद्धि सिद्धांत (Triarchic Theory of Intelligence) प्रस्तुत किया — तर्क देते हुए कि बुद्धि के तीन भिन्न घटक हैं, और विद्यालय केवल एक को महत्त्व देता है।

  • विश्लेषणात्मक बुद्धि (Analytical Intelligence) — वही जो IQ परीक्षणों में मापी जाती है और विद्यालय में सराही जाती है। समस्याओं को भागों में तोड़ना, तार्किक संबंध खोजना, तर्कों का मूल्यांकन करना।
  • सृजनात्मक बुद्धि (Creative Intelligence) — नए विचार उत्पन्न करना, अप्रत्याशित संबंध देखना, कुछ मौलिक बनाना। जो बच्चा किसी परिचित समस्या का मूल समाधान खोजता है, वह सृजनात्मक बुद्धि दिखा रहा है।
  • व्यावहारिक बुद्धि (Practical Intelligence) — 'सांसारिक बुद्धि'। सामाजिक परिस्थितियाँ पढ़ना, नए वातावरण में ढलना, अलिखित नियम जानना। जो बच्चा बाज़ार में मोलभाव करता है या कक्षा को सफलतापूर्वक संगठित करता है — वह व्यावहारिक बुद्धि प्रदर्शित करता है।

स्टर्नबर्ग का मूल बिंदु: विद्यालय केवल विश्लेषणात्मक बुद्धि को पहचानता और पुरस्कृत करता है — और फिर उसे 'बुद्धि' कह देता है। जो बच्चा विश्लेषण में औसत पर सृजन और व्यवहार में प्रतिभाशाली है, उसे बताया जाता है कि वह बहुत बुद्धिमान नहीं।

मूल्यांकन के लिए व्यावहारिक निहितार्थ: ऐसे कार्य दें जिनमें तीनों घटक शामिल हों। जो विद्यार्थी लिखित परीक्षण में औसत दिखे पर किसी सामुदायिक समस्या का मौलिक समाधान निकाले और उसे प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करे — वह एक ऐसा बुद्धि-प्रोफ़ाइल दिखा रहा है जिसे परंपरागत परीक्षण कभी नहीं पकड़ पाता।

गोलमैन की संवेगात्मक बुद्धि

1995 में डेनियल गोलमैन (Daniel Goleman) ने Emotional Intelligence प्रकाशित की। उन्होंने तर्क दिया कि अपनी और दूसरों की संवेगों (भावनाओं) को समझने और प्रबंधित करने की क्षमता अपने आप में एक प्रकार की बुद्धि है — और यह IQ से अधिक विश्वसनीयता से जीवन-परिणामों की भविष्यवाणी कर सकती है।

संवेगात्मक बुद्धि (Emotional Intelligence / EI)

गोलमैन के पाँच आयाम: आत्म-जागरूकता (अपनी भावनाएँ जानना), आत्म-नियमन (उन्हें प्रबंधित करना), अभिप्रेरणा (भावनाओं को लक्ष्य की ओर निर्देशित करना), सहानुभूति / समानुभूति (दूसरों की भावनाएँ पहचानना), और सामाजिक कौशल (संबंध प्रबंधन)।

CTET में गोलमैन के पाँच आयाम CDP-09 और CDP-22 दोनों में परखे जाते हैं। मुख्य बिंदु:

  • संवेगात्मक बुद्धि सीखी जा सकती है — IQ के विपरीत यह स्थिर नहीं।
  • उच्च संवेगात्मक बुद्धि वाले बच्चे तनाव बेहतर संभालते हैं, व्यवहार-समस्याएँ कम दिखाते हैं और सहपाठियों के साथ अधिक उत्पादकता से सहयोग करते हैं।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) में सामाजिक-संवेगात्मक अधिगम (Social-Emotional Learning / SEL) को आधारभूत स्तर से ही पाठ्यक्रम में स्थान दिया गया है।

जो विद्यालय बच्चों को अपनी भावनाओं का नाम देना, प्रतिक्रिया देने से पहले रुकना और सहपाठी का दृष्टिकोण समझना सिखाता है — वह संवेगात्मक बुद्धि को साक्षरता और संख्या-ज्ञान के साथ एक पाठ्यक्रम-लक्ष्य बना रहा है।

कक्षा में संवेगात्मक बुद्धि विकसित करने के व्यावहारिक तरीके: नियमित कक्षा-बैठकें जिनमें बच्चे अपनी भावनाएँ साझा करें, नाम दें; संरचित सहपाठी-चिंतन; परिप्रेक्ष्य-बोध अभ्यास (किसी और की स्थिति से देखना); और अध्यापक का स्वयं का संवेगात्मक खुलापन। ये सब संवेगात्मक बुद्धि को साक्षरता और संख्या-ज्ञान के साथ एक विद्यालय-लक्ष्य बनाते हैं।

बुद्धि, संस्कृति और संदर्भ

बुद्धि-शोध से सबसे तीखी अंतर्दृष्टि यह है कि 'बुद्धिमान' कहलाना संस्कृति तय करती है — और जो संस्कृति महत्त्व देती है, वही मापा और पुरस्कृत जाता है।

पश्चिमी मध्यवर्गीय विद्यालय संदर्भ में भाषाई और तार्किक-गणितीय क्षमताएँ 'सोने का मानक' हैं। वह आदिवासी बच्चा जो किलोमीटर लंबे जंगल में पर्यावरणीय संकेतों से रास्ता पहचाने, औषधीय पौधे जाने और मौखिक इतिहास याद रखे — वह परिष्कृत संज्ञानात्मक क्षमता दिखा रहा है। पर यह कागज़-परीक्षण पर नहीं दिखती।

इसी तरह, प्रथम पीढ़ी के शिक्षार्थी (first generation learner) — जो घर चलाते हैं, बाज़ार में बेचते हैं, वयस्कों के लिए अनुवाद करते हैं — व्यावहारिक बुद्धि की अच्छी-खासी मात्रा दिखाते हैं, जिसे कक्षा न देखती है न सराहती है। NCF 2005 कहती है: बच्चे अपने घरों और समुदायों से समृद्ध ज्ञान और कौशल लाते हैं।

CTET के लिए निहितार्थ: जब कोई प्रश्न ऐसे बच्चे का वर्णन करे जो परीक्षण में कमज़ोर हो पर नेतृत्व, सामाजिक समझ या व्यावहारिक समस्या-समाधान में मज़बूत हो — सही उत्तर उसे 'कम बुद्धिमान' या 'अधिगम-अक्षम' नहीं कहना, बल्कि बहु-बुद्धि के दृष्टिकोण से देखना है।

यह समझना महत्त्वपूर्ण है कि जब कोई बच्चा किसी परीक्षण में कम अंक लाता है तो इसका यह अर्थ नहीं कि वह कम बुद्धिमान है — यह हो सकता है कि परीक्षण उसके संदर्भ के लिए उपयुक्त नहीं था। अध्यापक को बच्चे की विभिन्न परिस्थितियों में क्षमता को देखना चाहिए, न कि केवल कागज़-परीक्षण पर निर्भर रहना।

कक्षा-कक्ष में निहितार्थ

बहु-बुद्धि दृष्टिकोण से कक्षा में व्यावहारिक परिणाम निकलते हैं।

अनेक बुद्धियों के लिए पढ़ाएँ। जल-चक्र का पाठ जिसमें स्पष्टीकरण (भाषाई), चित्र (स्थानिक), व्यावहारिक प्रदर्शन (शारीरिक-गतिज), एक लय या गीत (संगीतमय) और क्षेत्र-अवलोकन (प्रकृतिवादी) शामिल हो — वह केवल पाठ्यपुस्तक के अनुच्छेद से कहीं अधिक शिक्षार्थियों तक पहुँचेगा।

अनेक तरीकों से मूल्यांकन करें। लिखित परीक्षण भाषाई और तार्किक-गणितीय बुद्धि को प्राथमिकता देती है। पोर्टफ़ोलियो, परियोजना, प्रस्तुति, प्रदर्शन और स्व-मूल्यांकन विभिन्न बुद्धि-प्रोफ़ाइल वाले बच्चों को यह दिखाने का अवसर देते हैं कि वे क्या जानते और कर सकते हैं।

स्थायी नामांकन से बचें। किसी बच्चे को 'धीमा', 'कमज़ोर' या 'अकादमिक नहीं' कहना — केवल परीक्षा-प्रदर्शन के आधार पर — विकास की संभावना बंद कर देता है।

शक्तियों पर निर्मित करें। जो बच्चा लिखित कार्य में संघर्ष करता है पर शारीरिक-गतिज बुद्धि में प्रबल है, वह हाथों से करने वाली गतिविधि से अधिक सीखेगा। NCF 2005 और NEP 2020 दोनों सामाजिक-संवेगात्मक विकास को विद्यालय के एक लक्ष्य के रूप में स्पष्ट रूप से शामिल करते हैं।

समूह-कार्य में बुद्धि-विविधता का उपयोग करें। अंतर्वैयक्तिक बुद्धि में प्रबल बच्चा समूह का समन्वय करे; स्थानिक बुद्धि वाला चित्र और मॉडल बनाए; भाषाई बुद्धि वाला प्रस्तुति दे। इस तरह प्रत्येक बच्चा अपनी शक्ति से योगदान देता है और सबकी भागीदारी सार्थक होती है।

CTET परीक्षा में मुख्य पैटर्न

CDP-09 के प्रश्न विश्वसनीय समूहों में आते हैं। पाँच पैटर्न बार-बार मिलते हैं।

पैटर्न 1 — गार्डनर की बुद्धियों की गिनती। 'गार्डनर ने कितने प्रकार की बुद्धियाँ प्रस्तावित कीं?' → 8। 'प्रकृतिवादी' सबसे अधिक भूली जाती है — इसे विशेष रूप से याद रखें।

पैटर्न 2 — MI सिद्धांत का दावा। 'बहु-बुद्धि सिद्धांत इस बात पर बल देता है कि...' → बुद्धि बहुआयामी है; प्रत्येक बच्चे का अनूठा बुद्धि-प्रोफ़ाइल होता है; परंपरागत विद्यालय भाषाई और गणितीय बुद्धि को अत्यधिक महत्त्व देता है। वह विकल्प जो कहता है 'MI सिद्धांत सिद्ध करता है कि सब बच्चे समान रूप से बुद्धिमान हैं' — गलत है; सिद्धांत कहता है सबका प्रोफ़ाइल भिन्न है।

पैटर्न 3 — IQ का इतिहास। 'IQ की अवधारणा किसने विकसित की?' → विलियम स्टर्न (सूत्र)। बिने ने मानसिक आयु और पहला परीक्षण बनाया; स्पीयरमैन ने g प्रस्तावित किया। इन्हें अलग रखें।

पैटर्न 4 — परीक्षणों की आलोचना। 'मानकीकृत परीक्षणों की एक आलोचना है...' → सांस्कृतिक पक्षपात; संकीर्ण दायरा। गलत विकल्प IQ परीक्षणों को व्यापक और संस्कृति-मुक्त बताते हैं।

पैटर्न 5 — सिद्धांतकार मिलान। त्रिआयामी सिद्धांत = स्टर्नबर्ग। संवेगात्मक बुद्धि = गोलमैन (पाँच आयाम)। बहु-बुद्धि = गार्डनर (आठ प्रकार)। मानसिक आयु = बिने। IQ सूत्र = स्टर्न। ये पाँच जोड़े परीक्षा के सबसे पसंदीदा मिलान हैं।

एक महत्त्वपूर्ण भ्रम: गार्डनर का सिद्धांत यह नहीं कहता कि सब बच्चे समान रूप से बुद्धिमान हैं — वह कहता है कि प्रत्येक का बुद्धि-प्रोफ़ाइल अलग होता है। स्टर्नबर्ग और गोलमैन के नाम-सिद्धांत जोड़े याद रखें: त्रिआयामी = स्टर्नबर्ग, संवेगात्मक = गोलमैन, बहु-बुद्धि = गार्डनर। ये CTET के सबसे पसंदीदा मिलान हैं।

अभ्यास प्रश्न

Q1. एकाधिक बुद्धियों का सिद्धांत कहता है कि—

  • बुद्धि तेज़ी से बढ़ायी जा सकती है
  • बुद्धि कई प्रकार की हो सकती है
  • पेपर-पेंसिल टेस्ट कोई मदद नहीं करते
  • प्रभावी अध्यापन के द्वारा बुद्धि को बढ़ाया जा सकता है

व्याख्या: बहु-बुद्धि सिद्धांत यह कहता है कि बुद्धि एक एकल IQ स्कोर में नहीं समेटी जा सकती — प्रत्येक व्यक्ति का कई अपेक्षाकृत स्वतंत्र बुद्धियों में अनूठा प्रोफ़ाइल होता है। सिद्धांत यह नहीं कहता कि सब बच्चे समान रूप से बुद्धिमान हैं।

स्रोत: CTET दिसंबर 2018 पेपर 1, प्र. 13

Q2. निम्नलिखित कथनों में से कौन सा बुद्धि के बारे में सही है ?

  • बुद्धि एक निश्चित योग्यता है जो जन्म के समय ही निर्धारित होती है ।
  • बुद्धि को मानकीकृत परीक्षणों के प्रयोग से सटीक रूप से मापा एवं निर्धारित किया जा सकता है ।
  • बुद्धि एक एकात्मक कारक तथा एक एकाकी विशेषक है ।
  • बुद्धि बहु-आयामी है तथा जटिल योग्यताओं का एक समूह है ।

व्याख्या: बुद्धि वंशानुक्रम और वातावरण दोनों से प्रभावित होती है, जन्म से स्थिर नहीं है, और एक मानकीकृत अंक में नहीं समेटी जा सकती। सही कथन बुद्धि की बहुआयामी और परिवर्तनशील प्रकृति को स्वीकार करता है।

स्रोत: CTET दिसंबर 2019 पेपर 1, प्र. 11

Q3. बहु-बुद्धि का सिद्धांत ज़ोर देता है कि —

  • बुद्धि-लब्धि केवल वस्तुनिष्ठ परीक्षणों द्वारा ही मापी जा सकती है ।
  • एक आयाम में बुद्धिमता, अन्य सभी आयामों में बुद्धिमता निश्चित करती है ।
  • बुद्धिमता की विभिन्न दिशाएँ हैं ।
  • बुद्धिमता में कोई व्यक्तिक विभिन्नताएँ नहीं होती हैं ।

व्याख्या: गार्डनर का MI सिद्धांत इस बात पर बल देता है कि बुद्धि बहुआयामी है — कई अपेक्षाकृत स्वतंत्र बुद्धियाँ हैं, एक सामान्य क्षमता नहीं। विद्यालय को भाषाई और तार्किक-गणितीय के अलावा अन्य छह बुद्धियों को भी महत्त्व देना चाहिए।

स्रोत: CTET जनवरी 2021 पेपर 1, प्र. 5

Q4. हावर्ड गार्डनर के अनुसार, एक दर्शनशास्त्री के पास ____ प्रकार की बुद्धि और मूर्तिकार के पास अधिक ____ प्रकार की बुद्धि की मात्रा अधिक होती है ।

  • भाषिक; अंतर्वैयक्तिक
  • स्थानिक; अंत:व्यक्तिक
  • अंत:व्यक्तिक; स्थानिक
  • अंतर्वैयक्तिक; भाषिक

व्याख्या: गार्डनर के अनुसार, एक दार्शनिक मुख्यतः भाषाई (और संभवतः अस्तित्ववादी) बुद्धि का उपयोग करता है, जबकि एक मूर्तिकार मुख्यतः स्थानिक और शारीरिक-गतिज बुद्धि का। प्रत्येक बुद्धि-प्रकार क्षेत्र-विशिष्ट होता है।

स्रोत: CTET अगस्त 2023 पेपर 1, प्र. 15

Q5. बुद्धिमत्ता या आइ. क्यू. की अवधारणा दी गई थी—

  • गैल्टन के द्वारा
  • बिने के द्वारा
  • स्टर्न के द्वारा
  • टर्मन के द्वारा

व्याख्या: बुद्धि-लब्धि (IQ) का सूत्र — मानसिक आयु ÷ वास्तविक आयु × 100 — विलियम स्टर्न ने 1912 में दिया। अल्फ्रेड बिने ने 1905 में मानसिक आयु की अवधारणा और पहला व्यावहारिक बुद्धि-परीक्षण बनाया; IQ का अनुपात-सूत्र स्टर्न का योगदान है।

स्रोत: CTET दिसंबर 2018 पेपर 2, प्र. 7