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शिक्षण सामग्री एवं उपचारात्मक शिक्षण | CTET हिंदी

जब तक कक्षा रोचक न बने और शिक्षण-सहायक विचारोत्तेजक एवं सृजनात्मक न हों, बच्चे कक्षा रोचक नहीं पाएँगे और भाषा-अधिगम भी नहीं होगा।’ — NIOS 503 खंड-3 प्रस्तावना। यह विषय पाठ्यपुस्तक से परे शिक्षण सामग्री (दृश्य, श्रव्य, realia, मुद्रित, डिजिटल), भाषा-शिक्षण में IT, तथा कमज़ोर शिक्षार्थियों के लिए उपचारात्मक शिक्षण (निदान, बहु-संवेदी रणनीतियाँ, पोर्टफोलियो आकलन) को समेटता है। CTET पेपर 1 एवं 2 के हिंदी-विकल्प में इस इकाई से 2–3 प्रश्न आते हैं — विशेषकर उपयुक्त शिक्षण-सहायक की पहचान, ‘निदान-फिर-उपचार’ क्रम, पोर्टफोलियो आकलन एवं प्रभावी उपचारात्मक रणनीति पर। यह पाठ NIOS 503 खंड-3 इकाई-9 (शैक्षिक सामग्री: कुछ नये आयाम), इकाई-10 (मूल्यांकन एवं आकलन) एवं खंड-2 इकाई-6 (लिखना) पर आधारित है।

HINDI — शिक्षण सामग्री

पाठ्यपुस्तक से परे — सामग्री की विविधता

NCF 2005 का प्रसिद्ध कथन: ‘पाठ्यपुस्तक एकमात्र शिक्षण-सामग्री नहीं है।’

NIOS 503 खंड-3 इकाई-9 इस बात को और स्पष्ट करती है — बच्चों के लिए ‘शिक्षण-सामग्री’ कई रूपों में उपलब्ध है:

  • गीत एवं कविताएँ — पुस्तकालय से, स्थानीय लोक-गीत-संग्रह से।
  • कहानियाँ — चित्र-कथाएँ, लोक-कथाएँ, पंचतंत्र, हितोपदेश।
  • फ़िल्में, वृत्तचित्र, ऐनिमेशन
  • कॉमिक्स — अमर चित्र कथा, चंपक, नंदन, बाल-भास्कर।
  • समाचार-पत्र एवं पत्रिकाएँ — विशेष कर बाल-पत्रिकाएँ।
  • साइन-बोर्ड, होर्डिंग्स, विज्ञापन — वास्तविक भाषा-संपर्क।
  • कक्षा-वार्तालाप की रिकॉर्डिंग — आत्म-अवलोकन हेतु।
  • विद्यार्थियों के स्वयं के लेख — डायरी, पत्र, कविता, कहानी।

विद्यालय की चहारदीवारी से बाहर भाषा है — विद्यालय में लाएँ’ NCF 2005 का सूत्र है।

पाठ्यपुस्तक की भूमिका: यह एक संदर्भ-बिंदु है — आधार-पुस्तक, अंतिम-पुस्तक नहीं। शिक्षक उसमें से प्रासंगिक अंश चुने, अन्य सामग्री से सम्पूरक करे।

शिक्षण-सहायकों की पाँच श्रेणियाँ

NIOS 503 खंड-3 इकाई-9 के अनुसार शिक्षण-सहायक पाँच श्रेणियों में:

श्रेणीउदाहरणभाषा-शिक्षण में उपयोग
दृश्य (Visual)चित्र, फ्लैश-कार्ड, चार्ट, श्यामपट्ट, माइंड-मैप, पोस्टरशब्द-अर्थ, वर्णन-गतिविधि, अनुक्रम-चित्र-कथन
श्रव्य (Auditory)गीत-रिकॉर्डिंग, कहानी-ऑडियो, रेडियो-कार्यक्रमश्रवण-कौशल, उच्चारण-मॉडल
दृश्य-श्रव्य (Audio-Visual)वीडियो, फ़िल्म, ऐनिमेशन, स्मार्ट-कक्षाकहानी-सुनना-देखना, वार्तालाप-दृश्य
वास्तविक वस्तुएँ (Realia)फल, क़लम, सिक्के, टिकट, अख़बारयह सेब है’ — दिखाकर शब्द-अर्थ
मुद्रित (Print)पुस्तकें, अख़बार, पत्रिकाएँ, कॉमिक्स, ब्रोशरविस्तृत पठन, खोजी पठन

एडगर डेल का ‘अनुभव-शंकु’ (Cone of Experience, 1946) — सीखने का प्रकार सीखने की धारण-शक्ति को प्रभावित करता है। बच्चा सबसे अधिक तब सीखता है जब वह स्वयं करता है (‘doing’); केवल पढ़ने या सुनने से कम।

शिक्षक के लिए संकेत: एक ही अवधारणा को कई संवेदी मार्गों से प्रस्तुत करें — एक कविता को पढ़ें, सुनें, गाएँ, अभिनय करें, चित्र बनाएँ, स्वयं लिखें — हर बच्चा अपनी पसंदीदा शैली से पहुँचेगा।

भाषा-शिक्षण में IT एवं डिजिटल सामग्री

21वीं शताब्दी की कक्षा में सूचना-प्रौद्योगिकी (Information Technology — IT) ने नए अवसर खोले हैं। NIOS 503 खंड-3 इकाई-9 इसके लिए विशेष अनुभाग देता है।

उपलब्ध IT-संसाधन:

  • SWAYAM, DIKSHA, ePathshala — सरकारी राष्ट्रीय डिजिटल मंच।
  • NCERT YouTube चैनल — हर अध्याय पर वीडियो-व्याख्या।
  • स्मार्ट-कक्षा (Smart Classroom) — प्रोजेक्टर, साउंड, इंटरैक्टिव बोर्ड।
  • मोबाइल अनुप्रयोग — हिंदी-शब्दकोश, कविता-संग्रह, कहानी-ऐप।
  • ऑनलाइन कहानियाँ एवं कक्षाएँ — Pratham Books, Storyweaver।
  • WhatsApp/Telegram समूह — अभिभावक-शिक्षक-छात्र सेतु।

IT-प्रयोग के सिद्धांत (NIOS 503 की चेतावनी):

  1. IT एक उपकरण है, शिक्षक का स्थान नहीं ले सकता। मानवीय सम्बन्ध, हाव-भाव, तत्काल प्रतिक्रिया — मशीन नहीं दे सकती।
  2. समानता-चेतावनी: सभी बच्चों के पास उपकरण-पहुँच नहीं — डिजिटल-विभाजन (digital divide)। उपकरण-निर्भर गतिविधियाँ कुछ बच्चों को बाहर कर देंगी।
  3. स्क्रीन-समय सीमा — विशेष कर प्राथमिक बच्चों के लिए।
  4. विषय-संगति — हर अध्याय वीडियो से नहीं पढ़ाना; मूर्त सामग्री का स्थान बना रहे।

COVID-19 का अनुभव (NEP 2020 के बाद की दिशा): ऑनलाइन-शिक्षा संकट-काल में सहायक रही, परंतु ‘मिश्रित अधिगम’ (blended learning) — मुख्यतः कक्षा, सहायक रूप से डिजिटल — ही दीर्घकालिक मॉडल है।

उपचारात्मक शिक्षण — पहला निदान, फिर उपचार

उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching)’ उन शिक्षार्थियों के लिए है जो सामान्य कक्षा-शिक्षण से अपेक्षित प्रगति नहीं कर रहे। NIOS 503 इकाई-10 का स्पष्ट मार्ग — ‘पहले निदान, फिर उपचार’

नैदानिक आकलन (Diagnostic Assessment) क्या पहचानता है?

  • विशिष्ट अन्तराल — डिकोडिंग? शब्दावली? व्याकरण? आत्मविश्वास? मातृभाषा-हस्तक्षेप?
  • त्रुटि-पैटर्न — अकस्मात बनाम सुसंगत।
  • संज्ञानात्मक स्तर — क्या बच्चा अमूर्त-स्तर पर पहुँच चुका है?
  • अधिगम-शैली — दृश्य, श्रव्य, गतिज, बहु-संवेदी?

बच्चा हिंदी में कमज़ोर है’ — यह नैदानिक नहीं — यह केवल लक्षण है। नैदानिक होगा — ‘बच्चा वर्णों को पहचान सकता है पर शब्द-स्तर पर मात्राओं का प्रयोग ठीक नहीं’ अथवा ‘बच्चा पठन कर सकता है पर लेखन में हस्तलिपि असमान है’।

नैदानिक उपकरण:

  • व्यक्तिगत पठन-परीक्षण।
  • हस्तलिपि-नमूना संग्रह।
  • मौखिक-वर्णन-कार्य।
  • श्रुति-लेख (dictation)।
  • शब्दार्थ-कार्ड परीक्षण।
  • शिक्षक-अवलोकन-तालिका।

उपचार के सिद्धांत:

  1. छूटी अवधारणा पुनः पढ़ाएँ, अगला अध्याय नहीं।
  2. बहु-संवेदी + मूर्त-से-अमूर्त क्रम।
  3. धैर्य एवं वैयक्तिक ध्यान — विधि जितने ही महत्त्वपूर्ण।
  4. छोटे-छोटे विजय (small wins) — प्रति-सप्ताह मापने योग्य प्रगति।
  5. घर-विद्यालय सहयोग

पाठ-योजना — उद्देश्य, सामग्री, विधि, आकलन

पाठ-योजना ‘बस अध्याय पूरा करना है’ — यह योजना नहीं। NIOS 503 खंड-3 इकाई-8 ‘भाषा की कक्षा में शिक्षण योजना’ चार-स्तंभीय ढाँचा देती है:

  1. उद्देश्य (Objectives) — विशिष्ट, मापनीय। ‘बच्चे कविता समझेंगे’ नहीं, बल्कि ‘बच्चे कविता के मुख्य भाव को 2–3 वाक्यों में बताएँगे एवं एक अलंकार पहचानेंगे’।
  2. सामग्री (Content/Materials) — पाठ्यपुस्तक के अंश, अतिरिक्त संदर्भ, दृश्य-श्रव्य, realia, IT।
  3. विधि एवं गतिविधियाँ (Method & Activities) — गृह-कार्य, व्यक्तिगत-कार्य, जोड़ी, समूह, पूरी कक्षा; अनुक्रमिक चरण।
  4. आकलन (Assessment) — पाठ-समापन पर बच्चा कैसे सिद्ध करेगा कि वह सीख गया?

एक 40-मिनट का पाठ — सामान्य ढाँचा:

  • 0–5 मिनट: पूर्व-ज्ञान सक्रियण (warm-up); पिछली कक्षा से जुड़ाव।
  • 5–10 मिनट: नई सामग्री का परिचय।
  • 10–25 मिनट: मुख्य गतिविधि (पठन, मौखिक चर्चा, समूह-कार्य)।
  • 25–35 मिनट: अभ्यास एवं वैयक्तिक प्रयोग।
  • 35–40 मिनट: सारांश एवं त्वरित आकलन।

‘ब्लूम का वर्गीकरण’ (Bloom’s Taxonomy) — उद्देश्य-निर्धारण हेतु:

  • स्मरण (Remember) → समझ (Understand) → प्रयोग (Apply) → विश्लेषण (Analyze) → मूल्यांकन (Evaluate) → सृजन (Create)।

उच्चतर तीन स्तरों पर अधिक समय देने का NCF 2005 का स्पष्ट निर्देश है।

आकलन के प्रकार एवं पोर्टफोलियो

NIOS 503 इकाई-10 ‘मूल्यांकन एवं आकलन’ अनेक प्रकार पहचानती है:

(1) रचनात्मक आकलन (Formative) — सतत, अल्प-दाँव; शिक्षण-समायोजन हेतु। ‘अधिगम के लिए आकलन’ — Assessment FOR Learning।

  • दैनिक कक्षा-अवलोकन।
  • अनौपचारिक प्रश्नोत्तर।
  • लघु-प्रश्निकाएँ (quizzes)।
  • गृह-कार्य की समीक्षा।
  • सहपाठी-आकलन।
  • स्व-आकलन।

(2) योगात्मक आकलन (Summative) — आवधिक, उच्च-दाँव; अधिगम-निर्णय हेतु। ‘अधिगम का आकलन’ — Assessment OF Learning।

  • अर्ध-वार्षिक एवं वार्षिक परीक्षाएँ।
  • बोर्ड-परीक्षाएँ।
  • CTET स्वयं एक योगात्मक आकलन है।

(3) पोर्टफोलियो आकलन (Portfolio Assessment) — समय के साथ बच्चे के नमूनों का संग्रह:

  • हर माह एक लेखन-नमूना; हर तिमाही एक रिकॉर्डेड भाषण; प्रति-अध्याय एक चित्र-कथा।
  • विकास दिखाने हेतु — ‘एक छाया-चित्र की जगह चलचित्र’।
  • बच्चे की भागीदारी — स्वयं चुने कि कौन सा कार्य पोर्टफोलियो में रखे।
  • अभिभावक-संवाद का सशक्त माध्यम।

(4) मौखिक आकलन (Oral Assessment) — प्रायः छूट जाता है; NIOS 503 इसे प्राथमिकता देती है। कक्षा 1–5 में लिखित से अधिक मौखिक आकलन हो।

(5) सहपाठी एवं स्व-आकलन — बच्चे एक-दूसरे एवं स्वयं का आकलन करें — सहयोगी कक्षा-संस्कृति का अंग।

CCE — सतत एवं समग्र मूल्यांकन (RTE Act 2009 के अंतर्गत अनिवार्य) — रचनात्मक + योगात्मक दोनों, शैक्षिक + सह-शैक्षिक दोनों, पूरे वर्ष भर।

कक्षागत गतिविधियाँ — कमज़ोर शिक्षार्थियों के लिए

कमज़ोर शिक्षार्थियों के लिए विशेष कक्षागत रणनीतियाँ:

(अ) समूह-संरचना:

  • मिश्रित-योग्यता समूह — कमज़ोर बच्चा सक्षम सहपाठियों के साथ ‘पाड़-निर्माण’ (scaffolding) पाता है।
  • सहपाठी-शिक्षण (Peer Tutoring) — सक्षम बच्चा कमज़ोर को सिखाए; दोनों लाभान्वित।
  • जिगसा’ (Jigsaw) तकनीक — एलियट एरॉनसन की प्रसिद्ध पद्धति; हर बच्चा एक भाग का ‘विशेषज्ञ’।

(ब) कार्य-संरचना:

  • स्तरीकृत कार्य (Tiered Tasks) — एक ही विषय पर तीन कठिनाई-स्तरों के कार्य; बच्चे अपने स्तर से शुरू।
  • विभेदीकृत शिक्षण (Differentiated Instruction) — सामग्री, प्रक्रिया, उत्पाद तीनों में अलग-अलग शिक्षार्थियों के लिए विकल्प।
  • अधिगम-केंद्र (Learning Centres) — कक्षा में कई स्टेशन, बच्चे चक्र-क्रम से।

(स) सहायक उपकरण:

  • शब्दकोश एवं चित्र-शब्दकोश।
  • वर्ण-कार्ड एवं चित्र-कार्ड।
  • श्रव्य-पुस्तकें (audiobooks)।
  • परीक्षा में अतिरिक्त समय अथवा लेखक-सहायक (RPWD Act 2016 अनुसार विशिष्ट अधिगम अक्षमता वाले बच्चों के लिए)।

(द) मानसिक-स्वास्थ्य आयाम:

  • कक्षा-वातावरण भयमुक्त रखें।
  • तुम्हें यह नहीं आता’ शब्दावली से बचें।
  • प्रगति को बच्चे की पहले की प्रगति से नापें, अन्य बच्चों से नहीं।
  • विकास-मानसिकता’ (Growth Mindset — कैरोल ड्वेक) — ‘तुम अभी यह नहीं कर पाते’, ‘तुम यह नहीं कर सकते’ नहीं।

NCF 2005, NEP 2020 एवं समावेशी शिक्षण

NCF 2005 का स्पष्ट कथन: ‘हर बच्चा सीख सकता है — यदि सही सामग्री, सही पद्धति एवं सही वातावरण मिले।

NEP 2020 की पाँच प्राथमिकताएँ शिक्षण-सामग्री एवं उपचारात्मक संदर्भ में:

  1. आधारभूत साक्षरता एवं संख्या-ज्ञान (FLN) — कक्षा 3 तक; ‘निपुण भारत’ मिशन 2021।
  2. बहु-भाषी एवं मातृभाषा-माध्यम शिक्षण।
  3. समावेशी कक्षा — विशिष्ट अधिगम अक्षमता वाले बच्चे सामान्य कक्षा में।
  4. 360° समग्र प्रगति कार्ड — केवल अंक नहीं, समग्र विकास।
  5. शिक्षक-निरंतर-व्यावसायिक-विकास (TCPD) — साल भर शिक्षक स्वयं सीखें।

‘शिक्षण-सामग्री का चयन’ के तीन सिद्धांत:

  • उद्देश्य-संगति — सामग्री पाठ-उद्देश्य से सीधे जुड़ी हो।
  • आयु-संगति — बच्चे की संज्ञानात्मक अवस्था के अनुरूप।
  • सांस्कृतिक-संगति — बच्चे के परिवेश से जुड़ी हो; ‘बाज़ार-दिन’ पर लिखी कहानी ‘शॉपिंग-मॉल’ से अधिक प्रासंगिक।
CTET-संकेत: ‘पाठ्यपुस्तक एकमात्र नहीं’, ‘निदान-फिर-उपचार’, ‘बहु-संवेदी’, ‘पोर्टफोलियो आकलन’, ‘IT एक उपकरण, स्थान नहीं’, ‘समानता-चेतावनी’, ‘CCE’ — सात कीवर्ड अधिकांश सही उत्तरों की पहचान देते हैं।

अभ्यास प्रश्न

Q1. एक हिंदी-शिक्षक कक्षा 3 के बच्चों को ‘फल’ अध्याय पढ़ा रहा है। वह वास्तविक सेब, केला, संतरा कक्षा में लाते हैं। यह कौन सी शिक्षण-सहायक की श्रेणी है?

  • दृश्य सहायक (Visual)
  • श्रव्य सहायक (Auditory)
  • वास्तविक वस्तुएँ (Realia)
  • मुद्रित सामग्री (Print)

व्याख्या: Realia — वास्तविक वस्तुएँ जिनकी भाषा बात करती है। चित्र दृश्य-सहायक होते हैं; ऑडियो श्रव्य; पुस्तकें मुद्रित। ‘वास्तविक सेब-केला-संतरा’ Realia है — NIOS 503 खंड-3 इकाई-9। उत्तर (3)।

स्रोत: Practice (NIOS 503 खंड-3 इकाई-9)

Q2. एक हिंदी-शिक्षक ‘बच्चा हिंदी में कमज़ोर है’ नोट करता है। उपचारात्मक शिक्षण आरंभ करने के लिए सबसे पहले उसे क्या करना चाहिए?

  • तुरंत अतिरिक्त गृह-कार्य देना।
  • नैदानिक आकलन — विशिष्ट अन्तराल पहचानना (डिकोडिंग? शब्दावली? व्याकरण? आत्मविश्वास?)।
  • पूरा अध्याय फिर से पढ़ाना।
  • बच्चे को अगले वर्ग में सीधे भेज देना।

व्याख्या: उपचारात्मक शिक्षण का सिद्धांत — ‘पहले निदान, फिर उपचार’। ‘हिंदी में कमज़ोर’ केवल लक्षण है, नैदानिक नहीं। विशिष्ट अन्तराल पहचानें — डिकोडिंग, शब्दावली, व्याकरण, आत्मविश्वास, मातृभाषा-हस्तक्षेप। NIOS 503 इकाई-10। उत्तर (2)।

स्रोत: Practice (NIOS 503 इकाई-10)

Q3. पोर्टफोलियो आकलन की मुख्य विशेषता क्या है?

  • एक बार की वार्षिक परीक्षा।
  • केवल वस्तुनिष्ठ प्रश्न।
  • समय के साथ बच्चे के नमूनों का संग्रह — उसकी विकास-यात्रा का प्रमाण।
  • केवल लिखित आकलन।

व्याख्या: पोर्टफोलियो आकलन = समय के साथ बच्चे के लेखन-नमूनों, चित्रों, परियोजनाओं का संग्रह — विकास-यात्रा का प्रमाण। बच्चे की भागीदारी (कौन सा कार्य रखे) महत्वपूर्ण। अभिभावक-संवाद का सशक्त माध्यम। NIOS 503 इकाई-10। उत्तर (3)।

स्रोत: Practice (NIOS 503 इकाई-10)

Q4. ‘IT एक उपकरण है — शिक्षक का स्थान नहीं ले सकता; और सभी बच्चों के पास उपकरण-पहुँच नहीं’ — यह कथन किसे रेखांकित करता है?

  • केवल समानता-चेतावनी (Equity caution)।
  • केवल शिक्षक के महत्व को।
  • दोनों — मानवीय सम्बन्ध की केन्द्रीयता एवं डिजिटल-विभाजन की चेतावनी।
  • IT का पूर्ण निषेध।

व्याख्या: NIOS 503 खंड-3 इकाई-9 दो बातें कहती है — (अ) IT उपकरण है, शिक्षक का स्थान नहीं; (ब) सभी बच्चों के पास उपकरण-पहुँच नहीं — डिजिटल-विभाजन। यह केवल निषेध नहीं — संतुलित उपयोग का संदेश। उत्तर (3)।

स्रोत: Practice (NIOS 503 खंड-3 इकाई-9)

Q5. निम्नलिखित में कौन सी रणनीति प्रभावी उपचारात्मक शिक्षण की पहचान है?

  • केवल अधिक गृह-कार्य देना।
  • नैदानिक आकलन, बहु-संवेदी शिक्षण, मूर्त-से-अमूर्त क्रम, छोटे-छोटे विजय।
  • बच्चे को कक्षा से अलग बैठाना।
  • अधिक त्रुटि-निरीक्षण एवं दंड।

व्याख्या: प्रभावी उपचारात्मक शिक्षण के चार स्तंभ (NIOS 503 इकाई-10) — (i) नैदानिक आकलन, (ii) बहु-संवेदी प्रस्तुति, (iii) मूर्त-से-अमूर्त क्रम, (iv) छोटे-छोटे विजय (small wins)। अधिक गृह-कार्य, अलग बैठाना अथवा दंड उपचारात्मक नहीं — आघातकारी हैं। उत्तर (2)।

स्रोत: Practice (NIOS 503 इकाई-10)