बाल विकास के आयाम
इस अध्याय के बारे में
बाल विकास के आयाम उन पाँच परस्पर जुड़े आयामों का मानचित्र बनाता है जिनसे होकर बच्चा शैशवावस्था से उत्तर किशोरावस्था तक बढ़ता है — शारीरिक, संवेगात्मक, संज्ञानात्मक, नैतिक तथा मनो-सामाजिक। यह अध्याय बाल्यावस्था (3-12 वर्ष) तथा किशोरावस्था (13-18 वर्ष) में शारीरिक व यौनारंभ सम्बन्धी परिवर्तन; बाल्यावस्था में स्वतंत्रता व लज्जा से किशोरावस्था में पहचान-संघर्ष, क्रोध व चाहत तक के संवेग; पियाजे के चार संज्ञानात्मक स्तर — स्कीमा, आत्मसातीकरण, समायोजन, साम्यावस्था; पियाजे की विषमविधिक व स्वायत्त नैतिकता रजत-शिवानी कचौड़ी द्वन्द्व से; कोलबर्ग की छह अवस्थाओं को प्री-कन्वेन्शनल, कन्वेन्शनल व पोस्ट-कन्वेन्शनल स्तरों में हीन्ज द्वन्द्व से समझाया गया है; गिलीगन का देखभाल नैतिकता का तीन-स्तरीय दृष्टिकोण; तथा एरिक्सन की आठ मनो-सामाजिक अवस्थाएँ जिनमें प्राथमिक विद्यालय (6-12 वर्ष) का उद्यमिता बनाम हीनभावना संकट प्रमुख है। अंत में विकास का समग्र उपागम तथा शिक्षक की सुसाधक भूमिका दी गई है। CTET पेपर 1 में पियाजे स्तर, कोलबर्ग, एरिक्सन तथा शिक्षक-सुसाधक के प्रश्न लगभग हर चक्र में आते हैं। चार टेस्ट — अभ्यास 15, क्विज़ 15, कठिन 15, निपुणता 30 — इन छह विषयों को CTET स्तर पर जाँचते हैं।
इस अध्याय के टेस्ट
बुनियाद बनाएँ। एकल अवधारणा का स्मरण और सीधा अनुप्रयोग।
टेस्ट शुरू करें → क्विज़ 15 प्रश्न 15 मिनटसमझ की जाँच। अध्याय भर में मिश्रित अनुप्रयोग।
टेस्ट शुरू करें → कठिन 15 प्रश्न 18 मिनटPYQ-स्तर। कथन-आधारित, अभिकथन–तर्क, दो-चरणीय समस्याएँ।
टेस्ट शुरू करें → निपुणता 30 प्रश्न 30 मिनटपूरे अध्याय का मॉक। मिश्रित कठिनाई, अन्य तीनों से बिना दोहराव।
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