वृद्धि एवं विकास की समझ
इस अध्याय के बारे में
यह अध्याय हर CTET पेपर 1 अभ्यर्थी के लिए CDP की सबसे पहली और सबसे ज़रूरी आधार-इकाई है। यह वृद्धि (शरीर के अनुपात, ऊँचाई, वज़न, आंतरिक अंगों में मात्रात्मक परिवर्तन) और विकास (व्यवस्थित, क्रमिक और गुणात्मक परिवर्तन जो कार्यात्मक परिपक्वता लाते हैं) में स्पष्ट अंतर करता है। मानव विकास के नौ सिद्धांत समझाए गए हैं — सततता, व्यक्तिगत भिन्नताएँ, क्रमबद्धता (सेफ़लोकौडल व प्रोक्सीमोडिस्टल प्रवृत्तियों सहित), सामान्य से विशिष्टता, परस्पर संबंध, अंतःक्रिया, दर में भिन्नता, एकीकरण और अनुमान योग्यता। इसके बाद विकास के छह चरण (प्रसव पूर्व, शैशवावस्था, पूर्व बाल्यावस्था, उत्तर बाल्यावस्था, किशोरावस्था, प्रौढ़ावस्था) उनके लक्षणों के साथ दिए गए हैं। विकास के चार शास्त्रीय मुद्दे — प्रकृति बनाम पोषण, सततता बनाम असततता, क्रियाशीलता बनाम निष्क्रियता, सार्वभौमिकता बनाम विशिष्ट संदर्भ — भी अध्याय में हैं। अंत में हैविंगहर्स्ट के किशोरावस्था के विकासात्मक कार्य और विकास पर विद्यालय के प्रभाव की चर्चा है। CTET इससे सीधे प्रश्न पूछता है। चार टेस्ट क्रमशः परिभाषा-स्मरण, अवधारणा-अनुप्रयोग, PYQ-स्तरीय कथन/अभिकथन-कारण और 30-प्रश्नों के मिश्रित मास्टरी टेस्ट तक ले जाते हैं।
इस अध्याय के टेस्ट
बुनियाद बनाएँ। एकल अवधारणा का स्मरण और सीधा अनुप्रयोग।
टेस्ट शुरू करें → क्विज़ 15 प्रश्न 15 मिनटसमझ की जाँच। अध्याय भर में मिश्रित अनुप्रयोग।
टेस्ट शुरू करें → कठिन 15 प्रश्न 18 मिनटPYQ-स्तर। कथन-आधारित, अभिकथन–तर्क, दो-चरणीय समस्याएँ।
टेस्ट शुरू करें → निपुणता 30 प्रश्न 30 मिनटपूरे अध्याय का मॉक। मिश्रित कठिनाई, अन्य तीनों से बिना दोहराव।
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