समावेशी शिक्षा की अवधारणा
इस अध्याय के बारे में
यह इकाई समावेशी शिक्षा को भारतीय विद्यालय व्यवस्था के मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में प्रस्तुत करती है। समावेशी शिक्षा (inclusive education) उन सभी बच्चों को शिक्षित करने का उपागम है जो शिक्षा प्रणाली में उपेक्षित होने के जोखिम में हैं — वे सामान्य कक्षा में, सामान्य शैक्षिक प्रावधानों के ज़रिए, एक साथ सीखते हैं। इकाई बताती है कि क्षेत्र मुख्यधारा में लाने (mainstreaming) से एकीकरण (integration) होते हुए समावेशन (inclusion) तक कैसे पहुँचा, और एकीकृत व समावेशी शिक्षा में मूल अंतर स्पष्ट करती है — एकीकरण में बच्चे को व्यवस्था के अनुरूप ढाला जाता है, जबकि समावेशन में व्यवस्था बच्चे के अनुरूप बदलती है। इसमें समावेशी शिक्षा को प्रभावित करने वाले पाँच कारक (शिक्षार्थियों में विविधता, शिक्षकों की तैयारी, आधारिक संरचना, संसाधनों की उपलब्धता, मूल्यांकन प्रणाली), समावेशी कक्षा बनाने के लिए शिक्षक की चार भूमिकाएँ (विविध अधिगम सामग्री, भौतिक वातावरण का संशोधन, सरल कक्षा-प्रबंधन तकनीकें, संशोधन-प्रतिस्थापन-लोप-क्षतिपूर्ति वाला बाल-मित्र मूल्यांकन), तथा जोखिम वाले समूह (विकलांग बच्चे, वंचित वातावरण के बच्चे, बालिकाएँ, प्रतिभाशाली व सृजनात्मक बच्चे, अल्प-उपलब्धि वाले, अल्पसंख्यक, भौगोलिक बाधाएँ) शामिल हैं। CTET पेपर 1 इस इकाई से परिभाषा, एकीकरण-बनाम-समावेशन का अंतर, RTE 2009 से जुड़ाव और लघु परिस्थिति-आधारित प्रश्न पूछता है। चारों परीक्षण अवधारणा-पुनर्स्मरण, कक्षा अनुप्रयोग, PYQ-स्तर के कथन-आधारित प्रश्न और पूर्ण-इकाई महारत मिश्रण को कवर करते हैं।
इस अध्याय के टेस्ट
बुनियाद बनाएँ। एकल अवधारणा का स्मरण और सीधा अनुप्रयोग।
टेस्ट शुरू करें → क्विज़ 15 प्रश्न 15 मिनटसमझ की जाँच। अध्याय भर में मिश्रित अनुप्रयोग।
टेस्ट शुरू करें → कठिन 15 प्रश्न 18 मिनटPYQ-स्तर। कथन-आधारित, अभिकथन–तर्क, दो-चरणीय समस्याएँ।
टेस्ट शुरू करें → निपुणता 30 प्रश्न 30 मिनटपूरे अध्याय का मॉक। मिश्रित कठिनाई, अन्य तीनों से बिना दोहराव।
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