शिक्षा में लैंगिक मुद्दे
इस अध्याय के बारे में
शिक्षा में लैंगिक मुद्दे वह अध्याय है जिससे CTET पेपर I में CDP के समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) भाग में जब-जब लैंगिकता पर प्रश्न आता है — और यह 2019 के बाद लगभग हर चक्र में आता है — स्रोत बनता है। यह अध्याय चार बड़े विचारों पर चलता है। पहला, 'लिंग' (sex — जैविक, स्थिर, अस्तरीय, प्रकृति-प्रदत्त — XX/XY गुणसूत्र, गर्भाशय, प्रोस्टेट) और 'जेन्डर/लैंगिक' (सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना, परिवर्तनीय, स्तरीय, समाज-निर्मित) के बीच भेद। दूसरा, लैंगिक भेदभाव का अर्थ — प्रत्यक्ष (कक्षा-नेता के लिए सिर्फ़ इसलिए लड़के को चुनना क्योंकि वह लड़का है) और अप्रत्यक्ष (पाठ्यपुस्तकों में केवल पुरुष वैज्ञानिकों का दिखाया जाना), जिसके स्रोत परिवार, विद्यालय, सरकारी नीतियाँ, धर्म और पाठ्यचर्या में हैं। तीसरा, लैंगिक के स्थिति-संकेतक — लिंग अनुपात (2011 जनगणना में 940, बाल लिंग अनुपात 914), स्त्री-साक्षरता, शिशु मृत्यु दर, विवाह की न्यूनतम वैधानिक आयु (18 वर्ष), कार्यदल में भागीदारी और स्त्रियों के विरुद्ध अपराध। चौथा, जेन्डर-निष्पक्ष कक्षा बनाने में अध्यापक की भूमिका — तटस्थ भाषा, मिश्रित बैठक, समान अपेक्षाएँ, लैंगिक आधार पर कार्य-विभाजन का त्याग और पाठ्यपुस्तक में पूर्वग्रह का सक्रिय सुधार। CTET इस अध्याय की परीक्षा लिंग-बनाम-जेन्डर वर्गीकरण, प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष भेदभाव के उदाहरण, स्थिति-संकेतकों के आँकड़ों और 'अध्यापक को क्या करना/नहीं करना चाहिए' की शिक्षाशास्त्रीय वस्तुओं से लेता है। नीचे दिए चार टेस्ट — अभ्यास 15, क्विज़ 15, कठिन 15, निपुणता 30 — इन चारों विचारों को CTET स्तर की गहराई पर जाँचते हैं।
इस अध्याय के टेस्ट
बुनियाद बनाएँ। एकल अवधारणा का स्मरण और सीधा अनुप्रयोग।
टेस्ट शुरू करें → क्विज़ 15 प्रश्न 15 मिनटसमझ की जाँच। अध्याय भर में मिश्रित अनुप्रयोग।
टेस्ट शुरू करें → कठिन 15 प्रश्न 18 मिनटPYQ-स्तर। कथन-आधारित, अभिकथन–तर्क, दो-चरणीय समस्याएँ।
टेस्ट शुरू करें → निपुणता 30 प्रश्न 30 मिनटपूरे अध्याय का मॉक। मिश्रित कठिनाई, अन्य तीनों से बिना दोहराव।
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