विकास के आयाम
इस अध्याय के बारे में
विकास के आयाम — यह अध्याय इस विचार को खोलता है कि मानव विकास बहुआयामी है — शारीरिक, संवेगात्मक, संज्ञानात्मक, नैतिक और मनोसामाजिक परिवर्तन एक ही समय में होते हैं। 11-14 आयु वर्ग (कक्षा 6-8) को पढ़ाने वाले उच्च प्राथमिक अध्यापक के लिए यह अध्याय पश्च बाल्यावस्था (7-12) तथा किशोरावस्था (13-18) में प्रत्येक आयाम का स्वरूप स्पष्ट करता है — वृद्धि का उछाल और यौनारंभ, पहचान का संघर्ष तथा भाव-उतार-चढ़ाव, मूर्त संक्रियात्मक से औपचारिक संक्रियात्मक चिंतन की ओर बढ़त, विषमविधिक नैतिकता से स्वायत्त नैतिकता की ओर बदलाव, तथा एरिकसन की श्रम बनाम हीन भावना (6-12) व पहचान बनाम भूमिका असमंजसता (किशोरावस्था) की मनोसामाजिक समस्याएँ। पियाजे के चार स्तर — स्कीमा, आत्मसातीकरण, समायोजन, संतुलन; कोलबर्ग के तीन स्तर व छह अवस्थाएँ तथा हिन्ज द्वन्द्व; गिलीगन की देखभाल की नैतिकता; तथा यह समग्र दृष्टि कि सभी पाँच आयाम परस्पर सम्बद्ध हैं — ये सभी CTET पेपर 2 के पसंदीदा बिंदु हैं। नीचे दिए चार टेस्ट — अभ्यास 15, क्विज़ 15, कठिन 15, निपुणता 30 — प्रत्येक सिद्धान्तकार, प्रत्येक आयु-वर्ग और कक्षा-कक्षीय अनुप्रयोग को CTET स्तर की गहराई पर जाँचते हैं।
इस अध्याय के टेस्ट
बुनियाद बनाएँ। एकल अवधारणा का स्मरण और सीधा अनुप्रयोग।
टेस्ट शुरू करें → क्विज़ 15 प्रश्न 15 मिनटसमझ की जाँच। अध्याय भर में मिश्रित अनुप्रयोग।
टेस्ट शुरू करें → कठिन 15 प्रश्न 18 मिनटPYQ-स्तर। कथन-आधारित, अभिकथन–तर्क, दो-चरणीय समस्याएँ।
टेस्ट शुरू करें → निपुणता 30 प्रश्न 30 मिनटपूरे अध्याय का मॉक। मिश्रित कठिनाई, अन्य तीनों से बिना दोहराव।
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