पेपर 2 · बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र

वृद्धि एवं विकास (किशोरावस्था पर बल)

75 प्रश्न · 4 अध्याय टेस्ट

इस अध्याय के बारे में

वृद्धि एवं विकास वह नींव अध्याय है जिससे CTET पेपर II का अभ्यर्थी कक्षा VI–VIII में बैठे हर विद्यार्थी को समझ पाता है। अध्याय की शुरुआत दो शब्दों को अलग करने से होती है जो रोज़मर्रा की बातचीत में एक से लगते हैं — 'वृद्धि' (ऊँचाई, वज़न, आंतरिक अंगों में मात्रात्मक परिवर्तन) और 'विकास' (व्यवस्थित, संगत, गुणात्मक परिवर्तन जो कार्यात्मक परिपक्वता लाता है)। फिर विकास के नौ सिद्धांत — सततता, व्यक्तिगत भिन्नताएँ, क्रमबद्धता (सेफ़लोकौडल व प्रोक्सीमोडिस्टल), सामान्य से विशिष्टता, परस्पर संबंध, अंतःक्रिया, दर में भिन्नता, एकीकरण और अनुमान योग्यता — और छह चरण: प्रसव पूर्व, शैशवावस्था (जन्म–2 वर्ष), पूर्व बाल्यावस्था (2–6), उत्तर बाल्यावस्था (6–12), किशोरावस्था (13–18) और प्रौढ़ावस्था (18+) समझाए गए हैं। किशोरावस्था पर सबसे अधिक बल है — यौवनारंभ, सहपाठियों का प्रभाव, अमूर्त चिंतन तथा हैविंगहर्स्ट (Havighurst) के नौ विकासात्मक कार्य — और इसे 'तनाव और तूफान' का चरण कहा गया है। अंत में चार बहसें — प्रकृति बनाम पोषण, सततता बनाम असततता, क्रियाशीलता बनाम निष्क्रियता, सार्वभौमिकता बनाम विशिष्ट संदर्भ — तथा विविध उच्च-प्राथमिक कक्षा पर विद्यालय का प्रभाव। CTET पेपर II इस अध्याय से वृद्धि-विकास भेद, सिद्धांत पहचान, चरण-आयु बंध, किशोर तनाव-तूफान और हैविंगहर्स्ट के कार्यों पर शिक्षक की भूमिका पूछता है। चार टेस्ट — अभ्यास 15, क्विज़ 15, कठिन 15, निपुणता 30 — इन छहों समूहों को CTET पेपर II स्तर पर जाँचते हैं।

इस अध्याय के टेस्ट