पेपर 2 · बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र

किशोरों के अध्ययन की विधियाँ

75 प्रश्न · 4 अध्याय टेस्ट

इस अध्याय के बारे में

किशोरों के अध्ययन की विधियाँ वह बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र (CDP) अध्याय है जो पेपर II के अध्यापक को सिखाता है कि अपने उच्च प्राथमिक (कक्षा 6-8, आयु 11-14) किशोर विद्यार्थियों के साथ वस्तुतः क्या घटित हो रहा है — उसका पता कैसे लगाया जाए। अध्याय कक्षा-केसों से प्रारम्भ होता है — रश्मि कक्षा VIII में नवीन की उदासीनता से जूझती हुई, और राधा कक्षा VIII C में चंचल धाज पर केस स्टडी करती हुई — ताकि स्पष्ट हो कि किशोर-अध्यापक केवल अनुमान पर कार्य नहीं कर सकता। आगे यह कक्षाकक्ष अनुसंधान (classroom research) को विद्यार्थी-केन्द्रित, अध्यापक-निर्देशित, संदर्भ-विशिष्ट खोज के रूप में परिभाषित करता है; क्रियात्मक अनुसंधान (Action Research, कर्ट लेविन 1946) के आठ चरणों को केस स्टडी (in-depth) से पृथक करता है; और सात उपकरण — अवलोकन (नियंत्रित, प्राकृतिक, प्रतिभागी), स्व-रिपोर्ट (प्रश्नावली व संरचित/अर्ध-संरचित/असंरचित साक्षात्कार), बच्चों के साथ अन्तःक्रिया, बच्चों की डायरी, संचयी रिकार्ड कार्ड, उपाख्यानात्मक रिकार्ड तथा चिंतनशील पत्रिकाएँ — विस्तार से बताता है। अन्तिम भाग किशोरावस्था की सामान्य समस्याओं — शारीरिक-यौन परिपक्वन, करियर मार्गदर्शन का अभाव, किशोर भ्रम, अवधान की कमी, सहपाठी आक्रामकता — को अध्यापकीय प्रतिक्रिया से जोड़ता है। CTET पेपर II इस अध्याय की परीक्षा परिभाषा-स्मरण, विधि-मिलान, उपकरण-चयन के परिदृश्यों तथा किशोर कक्षा-व्यवहार से जुड़े शिक्षाशास्त्र (pedagogy) प्रश्नों के माध्यम से लेता है। नीचे दिए चार टेस्ट — अभ्यास 15, क्विज़ 15, कठिन 15, निपुणता 30 — इन छहों विषय-क्षेत्रों को CTET स्तर की गहराई और कठिनाई पर जाँचते हैं।

इस अध्याय के टेस्ट