पेपर 2 · बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र

विकास के परिप्रेक्ष्य (पियाजे की अमूर्त संक्रिया अवस्था, एरिक्सन की पहचान बनाम भूमिका भ्रम)

75 प्रश्न · 4 अध्याय टेस्ट

इस अध्याय के बारे में

यह अध्याय बाल विकास के पाँच प्रमुख परिप्रेक्ष्यों को क्रम से बताता है — जैव वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य (गेसेल का परिपक्वन दृष्टिकोण और बॉल्बी–एन्सवर्थ का आसक्ति दृष्टिकोण), जीवन विस्तार परिप्रेक्ष्य (बाल्टेस का क्षतिपूर्ति सहित चयनात्मक अभीष्टतमीकरण/SOC माॅडल), जैव पारिस्थितिकी परिप्रेक्ष्य (ब्रॉनफेनब्रेनर का सूक्ष्म–मध्य–बाह्य–समष्टि–काल तंत्र), संज्ञानात्मक परिप्रेक्ष्य (पियाजे की चार अवस्थाएँ जिसमें 11 वर्ष से आगे की अमूर्त संक्रिया (formal-operational) अवस्था आती है, सूचना-प्रसंस्करण उपागम तथा विकासात्मक संज्ञानात्मक तंत्रिका विज्ञान उपागम) और सामाजिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य (वायगोत्स्की का मत कि चिंतन संस्कृति, भाषा और सामाजिक अंतःक्रिया से गढ़ा जाता है)। पेपर 2 के 11–14 वर्ष आयु-वर्ग के अभ्यर्थी के लिए यह CDP का सबसे अधिक पूछा जाने वाला क्षेत्र है — प्रश्न पूछते हैं कि किसी कक्षा-व्यवहार पर कौन सा परिप्रेक्ष्य ठीक बैठता है, उच्च प्राथमिक का बच्चा पियाजे की किस अवस्था में है, कोई घटना ब्रॉनफेनब्रेनर के किस स्तर पर है, कौन सा आसक्ति प्रकार किशोरावस्था में किस परिणाम को जन्म देता है, और हर परिप्रेक्ष्य में शिक्षक की भूमिका कैसे बदलती है। चार टेस्ट — अभ्यास 15, क्विज़ 15, कठिन 15, निपुणता 30 — पाँचों परिप्रेक्ष्यों को CTET स्तर पर जाँचते हैं।

इस अध्याय के टेस्ट