पेपर 2 · बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र

समावेशी शिक्षा की अवधारणा

75 प्रश्न · 4 अध्याय टेस्ट

इस अध्याय के बारे में

समावेशी शिक्षा का परिचय भारतीय संविधान द्वारा दी गई 'अवसर की समानता' और निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 (आरटीई) से आरंभ होता है, और फिर समावेशी शिक्षा को 'एक ऐसा उपागम जो उन सभी बच्चों को शिक्षा देता है जो शिक्षा प्रणाली में उपेक्षित होने के जोखिम में हैं' के रूप में परिभाषित करता है। यह मुख्यधारा में लाना (mainstreaming), एकीकरण (integration) और समावेशन (inclusion) में अंतर स्पष्ट करता है — एकीकरण बच्चे को मौजूदा व्यवस्था में 'फिट' करने का प्रयास है, जबकि समावेशन में व्यवस्था स्वयं बच्चे की आवश्यकताओं के अनुसार बदलती है। यह समावेशी शिक्षा को प्रभावित करने वाले पाँच कारक देता है — शिक्षार्थियों में विविधता, शिक्षकों की तैयारी, आधारिक संरचना, संसाधनों की उपलब्धता और कठोर मूल्यांकन प्रणाली। फिर यह उच्च-प्राथमिक शिक्षक को समावेशी कक्षा बनाने का रास्ता दिखाता है — विविध अधिगम सामग्री (दृश्य, स्पर्शनीय, सूचना-प्रौद्योगिकी, कम लागत), भौतिक वातावरण का संशोधन, सरल कक्षा-प्रबंधन तकनीकें (सूरज, प्रिया, अनिल, शुभा, रम्या, संतोष) तथा चार अनुकूलन — रूपांतरण (modification), प्रतिस्थापन (substitution), लोप (omission) और प्रतिकर (compensation) — पर आधारित बच्चे के अनुकूल मूल्यांकन प्रणाली। यह बहिष्करण के जोखिम वाले समूह बताता है — विकलांग बच्चे, वंचित वातावरण से आए बच्चे, बालिकाएँ, प्रतिभाशाली और सृजनात्मक, निम्न-उपलब्धि वाले, अल्पसंख्यक समुदाय एवं भौगोलिक रूप से दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चे। CTET पेपर 2 इस अध्याय की जाँच परिभाषा-स्मरण, एकीकरण-बनाम-समावेशन तुलना, कारक-पहचान, उच्च-प्राथमिक (11–14 वर्ष) कक्षा-प्रबंधन मिनी-केसों, चार मूल्यांकन-अनुकूलनों तथा जोखिम-समूह पहचान से करता है। नीचे दिए चार टेस्ट — अभ्यास 15, क्विज़ 15, कठिन 15, निपुणता 30 — इन छहों विषयों को CTET स्तर की गहराई पर जाँचते हैं।

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