पेपर 2 · बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र

कक्षा-कक्ष अध्यापन-अधिगम का प्रबंधन

75 प्रश्न · 4 अध्याय टेस्ट

इस अध्याय के बारे में

यह अध्याय उच्च-प्राथमिक शिक्षक (आयु 11-14) को शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का प्रबंधक मानता है। अध्याय कक्षाकक्ष प्रबंधन (प्रभावी शिक्षण-अधिगम के लिए व्यापक अवधारणा) और कक्षाकक्ष अनुशासन (केवल शिक्षार्थी के दुर्व्यवहार के समय प्रयुक्त संकीर्ण अवधारणा) में अंतर स्पष्ट करते हुए प्रारंभ होता है। फिर क्रिश्चियन (1991) के आधार पर कक्षाकक्ष प्रबंधन के सात सिद्धान्त बताता है — विषयवस्तु में स्पष्टता तथा सिद्ध-हस्त होने का सिद्धान्त, सहभागिता, प्रजातांत्रिक व्यवहार, शिक्षक के व्यवहार, स्वनियंत्रण, नम्यता (लचीलापन) तथा व्यक्तिगत गुणों का सिद्धान्त। यह अध्याय कक्षाकक्ष प्रबंधन को प्रभावित करने वाले पाँच कारक (प्रभावी अनुदेश, नियमों का निर्धारण व क्रियान्वयन, हस्तक्षेप का प्रबंधन, उचित व्यवहार का पृष्ठपोषण, कक्षाकक्ष वातावरण) तथा चार तकनीकें (व्यवहार सुधार तकनीक, शिक्षार्थी की जिम्मेदारी, सामूहिक गतिविधियाँ, ध्यान केन्द्रित करने का कौशल) समझाता है। फिर शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अंतर्गत समावेशी कक्षाकक्ष और अधिगम की सार्वभौमिक संरचना (UDL), तथा व्यवहार सम्बन्धी समस्याओं हेतु त्रिस्तरीय युक्ति (निवारक, अनुपोषक/सहयोगात्मक, सुधारात्मक उपाय — सकारात्मक व्यवहार सहयोग PBS, विलोपन व पुनःनिर्देशन, द्वंद्व प्रबंधन, पाठ्यचर्या अनुकूलन सहित) प्रस्तुत करता है। अंतिम भाग कक्षाकक्ष समय को छह वर्गों — उपलब्ध समय, आबंटित समय, संलग्न समय, शैक्षणिक अधिगम समय (ALT), पाठ-गति, अवस्थांतर समय — में बाँटता है। CTET पेपर 2 इस अध्याय की परीक्षा सिद्धान्तों पर परिस्थिति-आधारित प्रश्न, कारक, त्रिस्तरीय व्यवहार युक्ति, ALT बनाम आबंटित समय, अवस्थांतर प्रबंधन से लेता है। नीचे दिए चार टेस्ट — अभ्यास 15, क्विज़ 15, कठिन 15, निपुणता 30 — इन सभी क्षेत्रों को CTET स्तर पर जाँचते हैं।

इस अध्याय के टेस्ट