पेपर 2 · बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र

व्यक्ति के रूप में शिक्षार्थी — II (अभिप्रेरणा, स्व-अवधारणा, संवेग)

75 प्रश्न · 4 अध्याय टेस्ट

इस अध्याय के बारे में

'वैयक्तिक रूप में शिक्षार्थी — II' — पिछली चर्चा को आगे बढ़ाते हुए उन भावात्मक और अभिप्रेरणात्मक (motivational) कारकों की पड़ताल करता है जो उच्च प्राथमिक स्तर के शिक्षार्थी के रोज़मर्रा के कक्षा-व्यवहार को आकार देते हैं। यह अध्याय थॉर्नडाइक के तत्परता के नियम (Law of Readiness) और शिक्षार्थी की तत्परता की धारणा (मोनिका–सुदर्शन वाली घर्षण-कक्षा परिस्थिति) से शुरू होता है, फिर अभिप्रेरणा (मैक्डोनाल्ड 1965 की परिभाषा, मास्लो का पाँच-स्तरीय आवष्यकता श्रेणीक्रम, आवष्यकता–अन्तर्नोद–प्रोत्साहन की त्रयी, आंतरिक/बाह्य भेद, और चार उपागम — व्यवहारात्मक, मानवतावादी, ज्ञानात्मक, सामाजिक) पर आता है। इसके बाद अभिक्षमता (aptitude — ज्ञानात्मक, संवेदी, मनो-गत्यात्मक घटक; बुद्धि व उपलब्धि से इसका अंतर; उच्च व निम्न अभिक्षमता वाले कक्षा VIII के शिक्षार्थियों के लिए अनुकूली अनुदेशन; रोहित/जेनी/अब्राहम का उदाहरण), अभिवृत्ति (attitude — ऑलपोर्ट 1935, श्नीडर 1988, वॉन व हॉग 1995; सकारात्मक/नकारात्मक; किशोरों का अधिकारियों के प्रति विद्रोही रवैया), सृजनात्मकता (अपसारी चिंतन, प्रवाह, लचीलापन, मौलिकता, विस्तारण, पुनर्परिभाषा; टॉरेंस की युक्तियाँ), रुचि (व्यक्तिनिष्ठ व वस्तुनिष्ठ पक्ष; किशोरावस्था में बदलाव) तथा जिज्ञासा (आइंस्टीन का कथन, सात टॉरेंस-शैली युक्तियाँ) पर चर्चा होती है। CTET पेपर 2 इस अध्याय से बहुत प्रश्न पूछता है — मास्लो का पिरामिड, आंतरिक/बाह्य अभिप्रेरणा, अभिक्षमता बनाम बुद्धि, किशोरों की अभिवृत्ति में बदलाव और कक्षा में अभिप्रेरणा की युक्तियाँ बार-बार आते हैं। नीचे दिए चार टेस्ट — अभ्यास 15, क्विज़ 15, कठिन 15, निपुणता 30 — हर उप-धारा को कक्षा VI–VIII के शिक्षक के दृष्टिकोण से CTET स्तर पर परखते हैं।

इस अध्याय के टेस्ट