पेपर 2 · बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र

सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ में शिक्षार्थी

75 प्रश्न · 4 अध्याय टेस्ट

इस अध्याय के बारे में

यह अध्याय उच्च-प्राथमिक शिक्षार्थी (आयु 11-14) को उसके सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ में रखता है। अध्याय शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के बाद की भारतीय कक्षा की वास्तविकता से शुरू होता है — विभिन्न जातियों, धर्मों, भाषाओं, सामाजिक-आर्थिक वर्गों और योग्यता स्तरों के बच्चे एक ही कक्षा में बैठते हैं। फिर यह छह कारक बताता है जो अधिगम प्रतिफल में विविधता पैदा करते हैं — पारिवारिक संरचना (एकल बनाम संयुक्त), विद्यालय का प्रकार (सरकारी बनाम निजी), भौगोलिक स्थिति (ग्रामीण बनाम महानगरीय), सामाजिक-आर्थिक स्थिति, सांस्कृतिक पृष्ठभूमि (समूहवादी बनाम व्यक्तिवादी) और भाषा (विद्यालय की भाषा बनाम घर की भाषा)। यह अध्याय शिक्षक से 'विद्यार्थी' के स्थान पर 'शिक्षार्थी' (learner) शब्द अपनाने को कहता है — हर बच्चे में सीखने की क्षमता है। फिर अधिगम शैली के आधार पर शिक्षार्थियों को श्रवणिक, दृश्यीय और स्पर्शी/काइनेस्थेटिक तीन वर्गों में बाँटता है। उत्तरार्ध भिन्न रूप से योग्य शिक्षार्थियों पर है — मानसिक मंदता (शिक्षित-योग्य 50-70 बु.लि., प्रशिक्षण-योग्य 20-49, अभिरक्षा 20 से कम), श्रवण-क्षीणता (कम 25-50 dB से गंभीर 91+ dB), दृष्टि-क्षीणता (पी.डब्ल्यू.डी. अधिनियम 1995 के अनुसार अंधापन व कम दृष्टि), और चार विशिष्ट अधिगम अक्षमताएँ — डिसकेलकुलिया (गणित), डिसलेक्सिया (पठन), डिसग्राफिया (लेखन) व डिसप्रेक्सिया (चालन समन्वय)। CTET पेपर 2 इस अध्याय की परीक्षा समावेशी-कक्षा प्रश्न, अधिगम-शैली पहचान, RTE 2009, पी.डब्ल्यू.डी. अधिनियम, IDEA 1992 परिभाषाएँ, मानसिक मंदता का बु.लि. वर्गीकरण, श्रवण-हानि का dB वर्गीकरण व चारों SLDs से लेता है। नीचे दिए चार टेस्ट — अभ्यास 15, क्विज़ 15, कठिन 15, निपुणता 30 — इन सभी क्षेत्रों को CTET स्तर पर जाँचते हैं।

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