भोजन के स्रोत
सभी भोजन अंततः पादपों और जंतुओं से प्राप्त होते हैं। पादप प्राथमिक उत्पादक हैं क्योंकि वे प्रकाश-संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। सामान्य पादप स्रोतों में अनाज (गेहूँ, चावल, मक्का), दालें, सब्जियाँ, फल, मेवे और बीज, तथा वनस्पति तेल शामिल हैं। जंतु स्रोतों में दूध, दुग्ध उत्पाद, माँस, मछली, अंडे और शहद शामिल हैं।
सोयाबीन प्रोटीन का एक महत्त्वपूर्ण पादप स्रोत है — इसमें प्रति 100 ग्राम में लगभग 36-40 ग्राम प्रोटीन होता है। कस्कुटा (अमरबेल) एक परजीवी पादप है जिसमें हरितलवक नहीं होता; यह पोषण के लिए परपोषी पादप पर निर्भर रहती है — यह CTET का एक सामान्य प्रश्न है।
प्रमुख पोषक समूह
NCERT कक्षा 6 के अनुसार पोषक समूह निम्नलिखित हैं:
- कार्बोहाइड्रेट — ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत। चावल, गेहूँ, आलू, शर्करा में पाया जाता है।
- प्रोटीन — शरीर की वृद्धि और मरम्मत के लिए। दालें, अंडे, मछली, माँस, दूध, सोयाबीन।
- वसा — सांद्रित ऊर्जा स्रोत। मक्खन, घी, तेल, मेवे।
- विटामिन — अत्यंत कम मात्रा में आवश्यक; शरीर की प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
- खनिज — कैल्शियम (हड्डियाँ), आयरन (हीमोग्लोबिन), आयोडीन (थायरॉइड)।
- जल — पोषकों का परिवहन करता है, ताप नियंत्रित करता है।
- रेशे/रफेज — ऊर्जा नहीं देता, परंतु पाचन में सहायक है।
एक संतुलित आहार में उचित मात्रा में सभी पोषक तत्त्व होते हैं। कोई भी एकल खाद्य पदार्थ सभी पोषक नहीं देता।
विटामिन और उनकी भूमिका
विटामिन कार्बनिक यौगिक हैं जो अत्यल्प मात्रा में आवश्यक होते हैं।
| विटामिन | मुख्य स्रोत | कार्य | अभावजन्य रोग |
|---|---|---|---|
| A | गाजर, पपीता, दूध | दृष्टि, त्वचा | रतौंधी, जीरोफ्थेल्मिया |
| B1 | अनपॉलिश चावल, दालें | तंत्रिका कार्य | बेरी-बेरी |
| C | आँवला, नींबू, अमरूद | प्रतिरोध, घाव भरना | स्कर्वी |
| D | सूर्य का प्रकाश, मछली तेल | कैल्शियम अवशोषण | रिकेट्स, ओस्टियोमलेशिया |
विटामिन D विशेष है — यह त्वचा में सूर्य के प्रकाश (UV किरण) के संपर्क से संश्लेषित होता है।
खनिज और उनका महत्त्व
CTET में सबसे अधिक परीक्षित खनिज:
- कैल्शियम — हड्डियों और दाँतों के लिए। कमी से ओस्टियोपोरोसिस और रिकेट्स। स्रोत: दूध, दही, पनीर, हरी सब्जियाँ, रागी।
- आयरन — हीमोग्लोबिन का घटक। कमी से रक्ताल्पता (एनीमिया)। स्रोत: पालक, गुड़, माँस, दालें।
- आयोडीन — थायरॉइड हार्मोन के लिए। कमी से घेंघा (गॉइटर)। स्रोत: आयोडीन युक्त नमक, समुद्री भोजन।
याद रखें: आयरन → रक्ताल्पता, आयोडीन → घेंघा, कैल्शियम → रिकेट्स।
पोषकों के परीक्षण
NCERT कक्षा 6 में सरल रासायनिक परीक्षण बताए गए हैं:
| पोषक | अभिकर्मक | सकारात्मक परिणाम |
|---|---|---|
| मांड (स्टार्च) | आयोडीन विलयन | नीला-काला रंग |
| प्रोटीन | कॉपर सल्फेट + NaOH | बैंगनी रंग |
| वसा | भूरा कागज / सूडान III | चिकना धब्बा / नारंगी-लाल |
| शर्करा (अपचायक) | बेनेडिक्ट विलयन + ताप | ईंट-लाल अवक्षेप |
CTET में मांड के लिए आयोडीन परीक्षण सबसे अधिक पूछा जाता है। आयोडीन विलयन मिलाने पर मांड नीला-काला हो जाता है।
भोजन संरक्षण की विधियाँ
भोजन सूक्ष्मजीवों की वृद्धि के कारण खराब होता है। संरक्षण इसे रोकता है:
- धूप में सुखाना / निर्जलीकरण — नमी हटाता है। मछली, सब्जियों, फलों के लिए।
- नमक डालना — परासरण द्वारा सूक्ष्मजीव जल खोते हैं। अचार, मछली।
- चीनी मिलाना — वही परासरण सिद्धांत। जैम, जेली।
- तेल और सिरका — सिरका pH कम करता है, तेल ऑक्सीजन को रोकता है। अचार।
- पाश्चुरीकरण — दूध को 72°C पर 15 सेकंड गर्म कर तेज़ी से ठंडा करना।
- प्रशीतन और हिमीकरण — कम तापमान सूक्ष्मजीव वृद्धि को धीमा करता है।
- डिब्बाबंदी — वायुरोधी डिब्बों में बंद कर ताप उपचार।
- रासायनिक परिरक्षक — सोडियम बेंज़ोएट आदि।
संतुलित आहार और कुपोषण
संतुलित आहार में आयु, लिंग और शारीरिक गतिविधि के अनुसार सभी पोषक सही अनुपात में होने चाहिए।
कुपोषण के प्रकार:
- अल्पपोषण — कुल कैलोरी की कमी। क्वाशीओरकोर (प्रोटीन की कमी — पेट फूलना, रंगहीन बाल) और मेरेस्मस (गंभीर कमी — शरीर की क्षीणता)।
- अतिपोषण — अधिक कैलोरी से मोटापा, मधुमेह।
- विशिष्ट कमी — विटामिन या खनिज की कमी से होने वाले रोग।
शिक्षाशास्त्र प्रश्नों में: संतुलित आहार की अवधारणा को विद्यार्थियों के घरेलू भोजन और स्थानीय फसलों से जोड़ना — यह संदर्भीकृत दृष्टिकोण NCF द्वारा अनुशंसित है।
भोजन विषय के लिए शिक्षाशास्त्रीय दृष्टिकोण
CTET पेपर 2 विज्ञान में शिक्षाशास्त्र संबंधी प्रश्न (SCI-08, SCI-09) भोजन विषय पर:
- गतिविधि-आधारित अधिगम — विद्यार्थी सामान्य खाद्य पदार्थों पर आयोडीन, बायूरेट, या वसा परीक्षण करते हैं। इससे प्रक्रिया कौशल विकसित होते हैं।
- रचनावादी दृष्टिकोण — घर पर क्या खाते हैं, इस पर परिचर्चा से शुरू करें, फिर वैज्ञानिक अवधारणाओं पर जाएँ।
- सामाजिक-वैज्ञानिक आयाम — खाद्य सुरक्षा, जैविक खेती, GM भोजन जैसे मुद्दे।
- सामान्य भ्रांतियाँ — विद्यार्थी अक्सर मानते हैं कि रफेज ऊर्जा देता है या सभी वसा हानिकारक हैं।
CTET Jan 2024 Q77 में पूछा गया था: अभावजन्य रोग का परिचय कराने की सबसे उपयुक्त रणनीति — डॉक्टर के नुस्खे पर परिचर्चा (संदर्भीकृत दृष्टिकोण) सही उत्तर था।
अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित में से कौन-सा पोषक परीक्षण किसी खाद्य नमूने में मांड (स्टार्च) की उपस्थिति को सही ढंग से पहचानता है?
व्याख्या: आयोडीन विलयन स्टार्च की उपस्थिति में नीला-काला रंग देता है — यह मानक NCERT स्टार्च परीक्षण है। बायूरेट (CuSO4 + NaOH) प्रोटीन की जाँच करता है; सूडान III वसा की; बेनेडिक्ट अपचायक शर्करा की।
स्रोत: निर्मित SCI-01 Q1 (CTET-पैटर्न)
Q2. अभावजन्य रोगों का उस पोषक तत्त्व से मिलान कीजिए जिसकी कमी से वे होते हैं: (i) स्कर्वी — (A) विटामिन D (ii) रिकेट्स — (B) विटामिन C (iii) रतौंधी — (C) विटामिन A (iv) बेरी-बेरी — (D) विटामिन B1
व्याख्या: स्कर्वी = विटामिन C की कमी; रिकेट्स = विटामिन D की कमी; रतौंधी = विटामिन A की कमी; बेरी-बेरी = विटामिन B1 (थायमिन) की कमी।
स्रोत: निर्मित SCI-01 Q2 (CTET-पैटर्न)
Q3. भोजन संरक्षण की निम्नलिखित विधियों में से कौन-सी विधि में नमक, चीनी या तेल का उपयोग किया जाता है?
व्याख्या: नमक, चीनी और तेल प्राकृतिक रासायनिक परिरक्षक हैं जो सूक्ष्मजीवों के लिए प्रतिकूल परिस्थितियाँ बनाते हैं (परासरणिक दबाव या ऑक्सीजन अवरोध)।
स्रोत: निर्मित SCI-01 Q3 (CTET-पैटर्न)
Q4. निम्नलिखित कथन पढ़िए: S1: रेशेदार पदार्थ (आहार रेशा) शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। S2: रेशेदार पदार्थ पाचन तंत्र के उचित कार्य में सहायता करता है। कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: रफेज (सेलुलोस) मनुष्यों द्वारा पचाया नहीं जाता और कोई ऊर्जा नहीं देता। यह पाचन तंत्र में भोजन की गति को सुगम बनाता है। केवल S2 सही है।
स्रोत: निर्मित SCI-01 Q4 (CTET-पैटर्न)
Q5. उच्च प्राथमिक स्तर पर 'अभावजन्य रोग' विषय को प्रस्तुत करने के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी सबसे उपयुक्त रणनीति होगी?
व्याख्या: डॉक्टर के नुस्खे के आधार पर परिचर्चा संदर्भीकृत, अर्थपूर्ण शुरुआत है। यह पूर्व ज्ञान को सक्रिय करती है और जिज्ञासा उत्पन्न करती है — NCF द्वारा अनुशंसित रचनावादी दृष्टिकोण।
स्रोत: CTET Jan 2024 पेपर 2, Q77