पेपर 2 · बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र

स्व का विकास (किशोरावस्था)

75 प्रश्न · 4 अध्याय टेस्ट

इस अध्याय के बारे में

स्व का विकास वह अध्याय है जो CTET पेपर 2 के समावेशी-शिक्षा (inclusive education) के अभ्यर्थी को यह समझाता है कि बच्चे का आंतरिक संसार बचपन से किशोरावस्था तक कैसे आकार लेता है। कक्षा 6–8 (आयु 11–14) पढ़ाने वाले शिक्षक के लिए यह अध्याय पाँच परस्पर-जुड़ी धाराएँ बनाता है — स्वयं-अवधारणा (self-concept) का निर्माण और उसे अनुकूल या प्रतिकूल बनाने वाले कारक; मूल्यों का विकास और तीन अनुशासन शैलियाँ (सत्तावादी, अनुमोदक, लोकतांत्रिक); अभिवृत्ति (attitude) का अर्थ, उसके तीन अवयव और विकास, साथ ही पाँच प्रभावी शिक्षक-अभिवृत्तियाँ; अनुभूति (perception) तथा उसके विकास में खेल की भूमिका — पियाजे और वाइगोत्स्की के समीपस्थ विकास क्षेत्र (zone of proximal development) सहित; और अभिप्रेरणा (motivation) — आंतरिक बनाम बाहरी रूप, तथा हठ, चुनौती का चुनाव, निर्भरता व भावना नामक चार संकेतक। CTET पेपर 2 इस अध्याय की परीक्षा स्वयं-अवधारणा की परिभाषा, किशोर में आत्म-सम्मान घटाने वाले कारकों, इनाम-दंड से मूल्य विकास, तीन अनुशासन शैलियों, अभिवृत्ति के तीन अवयवों (संज्ञानात्मक, भावनात्मक, व्यवहार) और उच्च-प्राथमिक कक्षा में आंतरिक अभिप्रेरणा की रणनीतियों से लेता है। नीचे दिए चार टेस्ट — अभ्यास 15, क्विज़ 15, कठिन 15, निपुणता 30 — इन पाँचों धाराओं को CTET स्तर की गहराई पर जाँचते हैं।

इस अध्याय के टेस्ट